2126 सहि परवरिश

बच्चे कि बातें सुनो, वो तुम्हारी
बाते सुनेगा, तुम एक बात सुनोगे,
तो वो तुम्हारी दो बातें सुनेगा ।
बच्चे कि बात मानो वो तुम्हारी
बात मानेगा, तुम एक मानोगे,
तो वो तुम्हारी दो बातें मानेगा ।
बच्चों कि सब बातें दिल से सुनो
वो भी तुम्हारी बातें दिल से सुनेगा ।
बच्चों कि सहि बात माननी है
जो सहि नहि वो समजाकर नहि
माननी मगर प्यार से गुस्से नहि ।
बच्चे का मान सन्मान करो तो वो
भी करेंगे तुम्हारा आदर सत्कार ।
तुम उन कि पसंद का ख्याल रखो
वो तुम्हारी पसंद का ख्याल रखेंगे ।
ना पसंद हो उस का जीक्र न करो ।
बच्चों कि अच्छाई, काबिलियत का
जीक्र करो और प्रशंसा करो ।
जो खामी और कमीयाँ है उस का
बार बार जीक्र न करो,समजा के
दूर कर ने लिए प्रोत्साहित करो ।
वो तुम्हारी जिम्मेदारी है उसे अच्छी
तरह से निभाना हि है सहि तरिका है
उन कि परवरिश का ।
पहेले अपनी खामी कमीयाँ को दूर
करके उन के लिए रोल मोडल बनो ।
बहुत खास बात है कि खुद पे काबू
होना जरूरी है और धीरज, सहन
करने क्षमता आवश्यक होनी है ।
मात पिता को बच्चों से मित्र कि
भाँति व्यवहार करना है तो वो
अपनी हर परेशानी तुम्हे बताए ।
बच्चो कि तुलना दूसरे बच्चो से
करके उस को नीचा मत दिखाओ ।
यहि सहि तरिका है परवरिश का ।
सहि परवरिश कर के सफल मात
पिता बन पाओगे ।
विनोद आनंद 01/08/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1875 एसी जिंदगी न जीओ

जिंदगी एसी न जीओ के
जिंदगी बोज लगने लगे ।
जिम्मेदारी उठा ओगे तो
जिंदगी बोज नहि लगेगी ।
जिंदगी एसी न जीओ के
जिंदगी में तनाव आए ।
आयोजन युक्त और शिस्त
बध्ध जीओगे तो जिदगी में
तनाव हि नहि आएगा ।
जिंदगी एसी न जीओ कि
जिंदगी अशांत लगेने लगे ।
साथ, सहकार और प्रेम से
जीओ तो अशांत नहि लगगी ।
जिंदगी एसी न जीओ कि
जिंदगी कठीन लगने लगे ।
जो व्यवहार तुम्हे पसंद नहि
वो व्यवहार दूसरों से न करो,
तो जिंदगी कठीन नहि लगेगी ।
जिंदगी एसी न जीओ के
जिंदगी में झगडे होते रहे ।
समजदारी से सहन करना
शीख लो तो जिंदगी में कभी
नहि होंगे झगडे ।
जिंदगी एसी न जीओ कि
जिने कि ख्वाईश न रहे ।
नई उमीदें और आशाओं से
जिंदगी जीओ कि जीने कि
ख्वाईस दुगनी हो जाए ।
जिंदगी एसी न जीओ कि
जिंदगी भर रोना पडे ।
सब को हसते हसाते जीना
शीखलो, रोना नहि पडेगा ।
जिंदगी जीना आप के हाथ में है
तो एसे जीओ कि जिदगी सफल
सार्थक और समृध्ध बन जाए ।
विनोद आनंद 29/01/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1682 शराब को छोडो

शराब है खराब, ज़हर,स्वास्थ
का दुश्मन, जिंदगी कि बरबादी ।
लोग पीते है दुःख दर्द में और अब
तो खुशी के माहोल में भी पीते है ।
किसी को देख के पीते है, किसी ने
पीने कि आदत पाल रखी है, कोई
शौख से पीते और दोलत मंद तो
शराब स्टेटस के लिए पीते है ।
मतलब है कि ईन्सान हर हाल में
शराब पीता है, पसंद भी करता है।
चाहे शराब पे प्रतिबंध हो या न हो ।
कई राज्यों में प्रतिबंध है तो कई में
नहिं है लेकिन पीने बालों को क्या ?
प्रतिबंध है तो छूप छूप के ज्यादा
पैसे देकर पीते है और जहाँ नहि है
वहाँ खूले आम पीते है और जिंदगी
का मज़ा उडाके बेहोशी में जीते है ।
शराब ईन्सान को शैतान,बेरह और
बेजिम्मेदार बनाता है और परिवार
के लिए मुशीबत या बोज बन जाते है ।
पैसे वाले तो के परिवार को पैसे कि
तकलिफ नहि होती लेकिन गरीब
शराब पीने लगे तो उस कि आधी से
ज्यादा कमाई शराब में जाती है तो
परिवार क्या हाल होग ? जरा सोचो ।
बुध्धिशाली, समजदार जिंदगी में सुख
शांति से रहने वाले कभी शराब को
छूएगें नहि और गलती से या किसी के
कहने से पीते हो, तो वो छोड देते है ।
हर हालमें ईन्सानको शराब नहि पीना ।
प्रतिबंध है और पोलीस का पहेरा है तो
भी शराब कि तस्करी कैसे होती है ?
दौलत कमाने के लिए कई तरीके है तो
शराब बनाकर या बेचकर लोगों के
स्वास्थ और जिंदगी को बरबाद करके
पाप कि कमाई,कमाके कई परिवारो कि
आह श्राप क्यूँ खरीदते हो ? उसे किसी
का भी भला नहि होता बुरा हि होता है ।
शराबी कि कोई ईज्जत, मान सन्मान
नहि करता बलकी नफरत करते है ।
जो जिंदगी में बहुत तकलीफें, मुशीबतें
बिमारी और नफरत दे उसे तो छोडना
हि अकलमंदी और समजदारी है ।
विनोद आनंद 01/08/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1669 परवरिश

बच्चों कि परवरिश मात पिता
कि जिम्मेदारी है और निभानी है ।
बच्चे को छोटेसे बडा करना, ना
समज से समजदार करना और
पढा लिखा के अपने पैरों पे खडा
रह शके ईतना काबिल बनाने
को हि परवरिश कहेते है ।
परवरिश में मात पिता कि दूसरी
जिम्मेदारी है आदर्श व्यक्ति का
निर्माण करने कि ।
मात पिता के कंधो पे परवरिश कि
बहुत बडी जिम्मेदारी है और यही
उन कि जिंदगी का प्रथम लक्ष्य हो ।
अच्छि परवरिश से बच्चों के और
देशके भविष्यका निर्माण होता है ।
आदर्श व्यक्ति हि आदर्श मात पिता
बन शकते है जिस कि परवरिश से
एक अच्छा बेटा, अच्छा व्यक्ति और
अच्छा नागरिक बन शकता है ।
आदर्श पति – आदर्श पत्नि हि बच्चों
कि अच्छि परवरिश कर शकते है ।
मात पिता हि बच्चों के और देश के
भविष्य के निर्माता है ।
गृहस्थ जीवन या लग्न से पहेले यह
जिम्मेदारी कैसे निभा शके उसका
प्रशिक्षण देना अत्यंत आवश्य है ।
विनोद आनंद 19/07/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड