1682 शराब को छोडो

शराब है खराब, ज़हर,स्वास्थ
का दुश्मन, जिंदगी कि बरबादी ।
लोग पीते है दुःख दर्द में और अब
तो खुशी के माहोल में भी पीते है ।
किसी को देख के पीते है, किसी ने
पीने कि आदत पाल रखी है, कोई
शौख से पीते और दोलत मंद तो
शराब स्टेटस के लिए पीते है ।
मतलब है कि ईन्सान हर हाल में
शराब पीता है, पसंद भी करता है।
चाहे शराब पे प्रतिबंध हो या न हो ।
कई राज्यों में प्रतिबंध है तो कई में
नहिं है लेकिन पीने बालों को क्या ?
प्रतिबंध है तो छूप छूप के ज्यादा
पैसे देकर पीते है और जहाँ नहि है
वहाँ खूले आम पीते है और जिंदगी
का मज़ा उडाके बेहोशी में जीते है ।
शराब ईन्सान को शैतान,बेरह और
बेजिम्मेदार बनाता है और परिवार
के लिए मुशीबत या बोज बन जाते है ।
पैसे वाले तो के परिवार को पैसे कि
तकलिफ नहि होती लेकिन गरीब
शराब पीने लगे तो उस कि आधी से
ज्यादा कमाई शराब में जाती है तो
परिवार क्या हाल होग ? जरा सोचो ।
बुध्धिशाली, समजदार जिंदगी में सुख
शांति से रहने वाले कभी शराब को
छूएगें नहि और गलती से या किसी के
कहने से पीते हो, तो वो छोड देते है ।
हर हालमें ईन्सानको शराब नहि पीना ।
प्रतिबंध है और पोलीस का पहेरा है तो
भी शराब कि तस्करी कैसे होती है ?
दौलत कमाने के लिए कई तरीके है तो
शराब बनाकर या बेचकर लोगों के
स्वास्थ और जिंदगी को बरबाद करके
पाप कि कमाई,कमाके कई परिवारो कि
आह श्राप क्यूँ खरीदते हो ? उसे किसी
का भी भला नहि होता बुरा हि होता है ।
शराबी कि कोई ईज्जत, मान सन्मान
नहि करता बलकी नफरत करते है ।
जो जिंदगी में बहुत तकलीफें, मुशीबतें
बिमारी और नफरत दे उसे तो छोडना
हि अकलमंदी और समजदारी है ।
विनोद आनंद 01/08/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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1669 परवरिश

बच्चों कि परवरिश मात पिता
कि जिम्मेदारी है और निभानी है ।
बच्चे को छोटेसे बडा करना, ना
समज से समजदार करना और
पढा लिखा के अपने पैरों पे खडा
रह शके ईतना काबिल बनाने
को हि परवरिश कहेते है ।
परवरिश में मात पिता कि दूसरी
जिम्मेदारी है आदर्श व्यक्ति का
निर्माण करने कि ।
मात पिता के कंधो पे परवरिश कि
बहुत बडी जिम्मेदारी है और यही
उन कि जिंदगी का प्रथम लक्ष्य हो ।
अच्छि परवरिश से बच्चों के और
देशके भविष्यका निर्माण होता है ।
आदर्श व्यक्ति हि आदर्श मात पिता
बन शकते है जिस कि परवरिश से
एक अच्छा बेटा, अच्छा व्यक्ति और
अच्छा नागरिक बन शकता है ।
आदर्श पति – आदर्श पत्नि हि बच्चों
कि अच्छि परवरिश कर शकते है ।
मात पिता हि बच्चों के और देश के
भविष्य के निर्माता है ।
गृहस्थ जीवन या लग्न से पहेले यह
जिम्मेदारी कैसे निभा शके उसका
प्रशिक्षण देना अत्यंत आवश्य है ।
विनोद आनंद 19/07/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1666 विद्यार्थी, वाली और परीक्षा

परीक्षा के वक्त विद्यार्थी, वाली
तनाव में आ जाते है,उस का
असर विद्यार्थी पे होता है तो
कम माकर्स आते है या नापस
होता है और फिर तनाव ओर
बढ जाता है, तनाव कैसे दूर करे ।
असरकारक-आवश्यक सुचानाएँ,
प्रयोग करने से परीक्षा के वक्त
घर में आनंद का माहोल हो जिसे
विद्यार्थी परीक्षामें उत्तीर्ण हो शके ।
जिस कि जिम्मेदारी वालीयों कि है ।
1) बच्चे के लिए परीक्षा है, परीक्षा
के लिए बच्चा नहि है एसा माईन्ड
सेट करे और मान्यता बनानी है ।
विद्यार्थी को परीक्षा का तनाव दे ।
2) पढना और बोल जाने से परीक्षा
नहि दि जाती । पढने, बोलने के बाद
लिखने कि प्रेक्टिस करनी है तब
परीक्षा में अच्छी तरह लिख शकेगें ।
3) परीक्षा कि तैयारी सिर्फ परीक्षा
के एक महिने पहेले नहि करनी है
परीक्षा कि तैयारी स्कूल के पहेले
दिन से हि करनी है ।
4) परीक्षा के
ण परिणाम पे नहि बच्चे
के प्रयत्न पे ध्यान दे और प्रेरित करे ।
5 ) बच्चो कि शारिरीक, मानसिक
स्वास्थता पे ध्यान दे ।अच्छा खोकार
दे और मनःपरिस्थिति शांत-प्रसन्न रखे ।
6-) जो विषय और टोपीक आसान है
उस पर ज्यादा ध्यान दे, पक्का करे ।
7) विद्यार्थी के मन पसंद गेम या शोख
के लिए भी थोडा समय दे ।
8) बच्चे को सहि तरीके से अभ्यास
करने कि सलाह दे जिसे याद रहे
और आराम से परीक्षा दे शके ।
विनोद आनंद 15/07/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1643 जल बचाओ

जल जीवन, जल बचाओ
जीवन बचाओ जरूरत से
ज्यादा जल का ईस्तमाल
जल का बीगाड है ।
बीगाड कम, बचत ज्यादा ।
जब जल जरूरत से अधिक
मात्रा में उपल्भत होता है तब
उस किंमत समझ नहि आती ।
समझ तब आती है जब एक दिन
जल न मिलने से परेशानी हो ।
ईसलिए हमेंशा करकसर से जल
का ईस्तमाल करना है और पैसे
कि तरह बचाके या भरके रखे ।
हमेशा माप तोल से उपयोग करे
प्यास है ईतना पानी लेना है,
क्यूँकि जूठ्ठा पानी कोई नहि
पीता, ईसलिए बीगाड होता है ।
जल बचत का अभियान चलाओ ।
घर के कामकाज में कम जल का
ईस्तमाल करे जैसे, वाहन कम
जलसे साफ करे । एक बालदी
जल खर्च होता है तो आधा बालदी
से साफ करे । बेजिम्मेदारी से
जल का ज्यादा उपयोग न करे ।
स्नान करते वक्त सावर धीमा
रखे तो कम जल में स्नान हो
और बीगाड कम होगा ।
कभी नल बंध करना भूल जाते है
तो ध्यान से नल बंध करे तो जल
का बीगड न हो और बचत हो ।
जिस के घर में बोर है वो लोग
बेजिम्मेदारी से जल का ईस्तमाल
ज्यादा करके बीगाड भी करते है ।
सावधान जल का ईस्तमाल कम
करे वरना बीन जल रहेना है मुश्किल ।
विनोद आनंद 27/06/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1601 रिश्तें टूटते क्यूँ ?

जो टूट जाए वो रिश्ते नहि,जो
रिश्ते तोडे वो ईन्सान नहि ।
रिश्ते ईन्सान बनाता है अगर
वो हि रिश्ते तोडात है तो उसे
रिश्तों कि हेमीयत या रिश्तों
कि ताकात नहि पता है ।
वो रिश्तें का सिर्फ ईस्तमाल,
करता है निभाना नहि है ।
रिश्तें निभाने से टूटते नहि ।
रिश्तें में जिम्मेदारी होती है
न निभाने से रिश्ते टूटते है ।
रिश्तों में प्रेम होना जरूरी है,
प्रेम बीना रिश्तें टूटने लगते है ।
रिश्ते समर्पण से सँवरते है
स्वार्थ से रिश्तें टूटते है ।
मान सन्मान और मर्यादा
के अभाव से रिश्तें टूटते है ।
समझ से और सहन करने से
रिश्तें टिकटे है वरना टूटते है ।
क्रोध,लोभ,मद और ईर्षा रिश्तें
के जानी दुश्मन टोडते है रिश्ते ।
रिश्तें जीवन कि जडीबुट्टी बने
जीवन स्वस्थ,सफल सार्थक ।
रिश्तों को अग्रता देने से, हेमीयत
देने से, निभाने से और सँवारने से
रिश्तें टूटते नहि, मजबूत होते है ।
हम अपने हक पर ध्यान देते,
अपनी जिम्मेदारी पर ध्यान नहि
देते ईसलिए रिश्ते टूटते है ।
विनोद आनंद 18/05/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1570 स्वप्ने और अपने

स्वप्ने देखना, है जन्म सिद्ध हक ।
स्वप्ने साकार करना हि जिंदगी है ।
खुद के स्वप्न होते और अपनों के
स्वप्ने होते, उमीदें होती है तुम पर ।
लेकिन हम अपने स्वप्न के नसे में
हमे उन के स्वप्ने नज़र नहि आते
और हम अपने स्वप्न के पिछे दौडते है ।
हमे उनके स्वप्ने-उमीदों कि परवाह नहिं ।
अपने तो अपने स्वप्ने कि चिता
जलाकर तुम्हारे स्वप्नों को साकार
करने को लगे है, लेकिन हम नहि
सोचते, लगे रहते है खुदके स्वप्ने
साकर करने में । हम नहि सोच ते कि
स्वप्ने साकार होंगे, लेकिन क्या
खोया या क्या पाया ?
अपनोंका साथ सेवा,आशीर्वाद
नहि पा शके तो सब कुछ है बेकार ।
खुद के स्वप्ने के साथ अपनों के
स्वप्न कि जिम्मेदारी हमारी है ।
खुद के स्वप्ने के साथ उनका साथ
सेवा और आशीर्वाद भी लेना है, तब
तुम्हारे स्वप्ने सच में साकर होते है ।
उतना हि नहि तुम्हारी जिंदगी सफल
सार्थक और यादगार बन शकती है ।
अपनें और -स्वप्न के बीच समत्व,
समतुलन रखना है और क्या पाओगे,
क्या खोओगे ?उसका हिसाब करना है ।
विनोद आनंद 18/04/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1495 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-81

🌹 मोहताज
ईन्सान हमेंशा खुस नही
रह शकता और तरक्की
नही कर शकता जब तब
वो किसी व्यक्ति पर
निर्भर या आधारित है ।
अपनी खुशी या तरक्की
अपनी जिम्मेदारी है उसे किसी
व्यक्ति कि मोहताज न बनाओ ।
🌺 क्षमा
क्षमा वो फूलो के समान है
जो कुचल जाने के बाद भी
खुसबू बिखेरता है ।
🌻 नींव है
भरोशा टूट जाए तो
समजलो आगे बढने का
द्वार बंध हो जाता है ।
रिश्ते चाहे गहेरा हो न हो
भरोशा गहेरा होना चाहिए ।
भरोशा नींव है रिश्तों कि
🍀खामोश
शब्दों का भी एक अहेसास
होता है खुद अहेसास करले
अच्छा लगे तो दूसरों को कहेंगेे
वरना शब्दों को खोमोश करदे ।
🍁शिकायतों से
रिश्ते अंकूरित होते है
प्रेम से, बने रहते है संवाद से
और महेसूस होते है संवेदनाओ
से,जीए जाते है दिल से और
मुरझा जाते है शिकायतों से ।
विनोद आनंद 15/02/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड