1666 विद्यार्थी, वाली और परीक्षा

परीक्षा के वक्त विद्यार्थी, वाली
तनाव में आ जाते है,उस का
असर विद्यार्थी पे होता है तो
कम माकर्स आते है या नापस
होता है और फिर तनाव ओर
बढ जाता है, तनाव कैसे दूर करे ।
असरकारक-आवश्यक सुचानाएँ,
प्रयोग करने से परीक्षा के वक्त
घर में आनंद का माहोल हो जिसे
विद्यार्थी परीक्षामें उत्तीर्ण हो शके ।
जिस कि जिम्मेदारी वालीयों कि है ।
1) बच्चे के लिए परीक्षा है, परीक्षा
के लिए बच्चा नहि है एसा माईन्ड
सेट करे और मान्यता बनानी है ।
विद्यार्थी को परीक्षा का तनाव दे ।
2) पढना और बोल जाने से परीक्षा
नहि दि जाती । पढने, बोलने के बाद
लिखने कि प्रेक्टिस करनी है तब
परीक्षा में अच्छी तरह लिख शकेगें ।
3) परीक्षा कि तैयारी सिर्फ परीक्षा
के एक महिने पहेले नहि करनी है
परीक्षा कि तैयारी स्कूल के पहेले
दिन से हि करनी है ।
4) परीक्षा के
ण परिणाम पे नहि बच्चे
के प्रयत्न पे ध्यान दे और प्रेरित करे ।
5 ) बच्चो कि शारिरीक, मानसिक
स्वास्थता पे ध्यान दे ।अच्छा खोकार
दे और मनःपरिस्थिति शांत-प्रसन्न रखे ।
6-) जो विषय और टोपीक आसान है
उस पर ज्यादा ध्यान दे, पक्का करे ।
7) विद्यार्थी के मन पसंद गेम या शोख
के लिए भी थोडा समय दे ।
8) बच्चे को सहि तरीके से अभ्यास
करने कि सलाह दे जिसे याद रहे
और आराम से परीक्षा दे शके ।
विनोद आनंद 15/07/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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1643 जल बचाओ

जल जीवन, जल बचाओ
जीवन बचाओ जरूरत से
ज्यादा जल का ईस्तमाल
जल का बीगाड है ।
बीगाड कम, बचत ज्यादा ।
जब जल जरूरत से अधिक
मात्रा में उपल्भत होता है तब
उस किंमत समझ नहि आती ।
समझ तब आती है जब एक दिन
जल न मिलने से परेशानी हो ।
ईसलिए हमेंशा करकसर से जल
का ईस्तमाल करना है और पैसे
कि तरह बचाके या भरके रखे ।
हमेशा माप तोल से उपयोग करे
प्यास है ईतना पानी लेना है,
क्यूँकि जूठ्ठा पानी कोई नहि
पीता, ईसलिए बीगाड होता है ।
जल बचत का अभियान चलाओ ।
घर के कामकाज में कम जल का
ईस्तमाल करे जैसे, वाहन कम
जलसे साफ करे । एक बालदी
जल खर्च होता है तो आधा बालदी
से साफ करे । बेजिम्मेदारी से
जल का ज्यादा उपयोग न करे ।
स्नान करते वक्त सावर धीमा
रखे तो कम जल में स्नान हो
और बीगाड कम होगा ।
कभी नल बंध करना भूल जाते है
तो ध्यान से नल बंध करे तो जल
का बीगड न हो और बचत हो ।
जिस के घर में बोर है वो लोग
बेजिम्मेदारी से जल का ईस्तमाल
ज्यादा करके बीगाड भी करते है ।
सावधान जल का ईस्तमाल कम
करे वरना बीन जल रहेना है मुश्किल ।
विनोद आनंद 27/06/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1601 रिश्तें टूटते क्यूँ ?

जो टूट जाए वो रिश्ते नहि,जो
रिश्ते तोडे वो ईन्सान नहि ।
रिश्ते ईन्सान बनाता है अगर
वो हि रिश्ते तोडात है तो उसे
रिश्तों कि हेमीयत या रिश्तों
कि ताकात नहि पता है ।
वो रिश्तें का सिर्फ ईस्तमाल,
करता है निभाना नहि है ।
रिश्तें निभाने से टूटते नहि ।
रिश्तें में जिम्मेदारी होती है
न निभाने से रिश्ते टूटते है ।
रिश्तों में प्रेम होना जरूरी है,
प्रेम बीना रिश्तें टूटने लगते है ।
रिश्ते समर्पण से सँवरते है
स्वार्थ से रिश्तें टूटते है ।
मान सन्मान और मर्यादा
के अभाव से रिश्तें टूटते है ।
समझ से और सहन करने से
रिश्तें टिकटे है वरना टूटते है ।
क्रोध,लोभ,मद और ईर्षा रिश्तें
के जानी दुश्मन टोडते है रिश्ते ।
रिश्तें जीवन कि जडीबुट्टी बने
जीवन स्वस्थ,सफल सार्थक ।
रिश्तों को अग्रता देने से, हेमीयत
देने से, निभाने से और सँवारने से
रिश्तें टूटते नहि, मजबूत होते है ।
हम अपने हक पर ध्यान देते,
अपनी जिम्मेदारी पर ध्यान नहि
देते ईसलिए रिश्ते टूटते है ।
विनोद आनंद 18/05/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1570 स्वप्ने और अपने

स्वप्ने देखना, है जन्म सिद्ध हक ।
स्वप्ने साकार करना हि जिंदगी है ।
खुद के स्वप्न होते और अपनों के
स्वप्ने होते, उमीदें होती है तुम पर ।
लेकिन हम अपने स्वप्न के नसे में
हमे उन के स्वप्ने नज़र नहि आते
और हम अपने स्वप्न के पिछे दौडते है ।
हमे उनके स्वप्ने-उमीदों कि परवाह नहिं ।
अपने तो अपने स्वप्ने कि चिता
जलाकर तुम्हारे स्वप्नों को साकार
करने को लगे है, लेकिन हम नहि
सोचते, लगे रहते है खुदके स्वप्ने
साकर करने में । हम नहि सोच ते कि
स्वप्ने साकार होंगे, लेकिन क्या
खोया या क्या पाया ?
अपनोंका साथ सेवा,आशीर्वाद
नहि पा शके तो सब कुछ है बेकार ।
खुद के स्वप्ने के साथ अपनों के
स्वप्न कि जिम्मेदारी हमारी है ।
खुद के स्वप्ने के साथ उनका साथ
सेवा और आशीर्वाद भी लेना है, तब
तुम्हारे स्वप्ने सच में साकर होते है ।
उतना हि नहि तुम्हारी जिंदगी सफल
सार्थक और यादगार बन शकती है ।
अपनें और -स्वप्न के बीच समत्व,
समतुलन रखना है और क्या पाओगे,
क्या खोओगे ?उसका हिसाब करना है ।
विनोद आनंद 18/04/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1495 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-81

🌹 मोहताज
ईन्सान हमेंशा खुस नही
रह शकता और तरक्की
नही कर शकता जब तब
वो किसी व्यक्ति पर
निर्भर या आधारित है ।
अपनी खुशी या तरक्की
अपनी जिम्मेदारी है उसे किसी
व्यक्ति कि मोहताज न बनाओ ।
🌺 क्षमा
क्षमा वो फूलो के समान है
जो कुचल जाने के बाद भी
खुसबू बिखेरता है ।
🌻 नींव है
भरोशा टूट जाए तो
समजलो आगे बढने का
द्वार बंध हो जाता है ।
रिश्ते चाहे गहेरा हो न हो
भरोशा गहेरा होना चाहिए ।
भरोशा नींव है रिश्तों कि
🍀खामोश
शब्दों का भी एक अहेसास
होता है खुद अहेसास करले
अच्छा लगे तो दूसरों को कहेंगेे
वरना शब्दों को खोमोश करदे ।
🍁शिकायतों से
रिश्ते अंकूरित होते है
प्रेम से, बने रहते है संवाद से
और महेसूस होते है संवेदनाओ
से,जीए जाते है दिल से और
मुरझा जाते है शिकायतों से ।
विनोद आनंद 15/02/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1416 गुस्से से छूटकारा कैसा ?

पहेले गुस्सा तुम्हे पकडता है
न छोडा तो, जकड के रखता है ।
फिर कैसे पीछा छूडाए उस पर
ध्यान दो, उपाय सोचो, छोडो ।
गुस्सा अब स्वभाव बन गया है ।
स्वभाव शांत हो जाए तो गुस्सा
वाला स्वभाव बदल शकते है ।
उस के लिए हमारी एक मान्यता है
कि दूसरा मुझे गुस्सा दिलाता है,
उसने मेरा अपमान किया और
गुस्सा करने को मजबूर किया ।
गुस्सा करना के न करना वो तो
हमारी है पसंद, हमे यह मान्यता
बदले कि, अपने गुस्से का सिर्फ
हम हि जिम्मेदार है, क्यू कि वो
हमारी पसंद है वो बदल कर
कुछ सही तरीके से प्रति क्रिया
करे, गुस्से से नहि, सोचो और
प्रयास करो तो गुस्से पर काबू
पा शकते हो ।
गुस्सा कब करना है और कब
नही करना, किस पे करना है
या किस पे नही करना है उस
पर सोच कर बेवजह गुस्सा
करना छोड शकते है ।
थोडी जागृतता,मन-ईन्द्रियो
पर संयम रखना जरूरी है,
प्रयास द्दढता और अभ्यास से
गुस्से से छूटकारा पा शकते हो ।
विनोद आनंद 06/12/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1402 हम यह भूलें करते है-3

कहेते है कि मनुष्य मात्र भूल के
पात्र लेकिन भूल बार बार करना
मुनासीत नही है फिर भी हम भूलें
करते है क्यूँकि आदत से मजबूर ।
* हम जिंदगी को मोज मस्ती, एसो
आराम का अवसर समज ने कि
भूल करके जिंदगी को बहेतरीन
बनाने का अवसर गवा देते है ।
* हम परिवार में 100% जिम्मेदारी
नही निभाने कि भूल करके संबंध
कमजोर बनाने कि भूल करते है ।
हम बेकार कि बातों में, कामो में
जिंदगी का किमती समय गवा ने
कि भूल करते है,कुछ नही करपाते ।
* हम अपना काम समयसर नही
करने कि और नियमीत नही बनने
कि भूल करते है, बहाने बनाते है ।
* हम नकारात्मकता को अपना ने कि,
सकारात्मक नही बनने भूल करते है ।
* हम हमारी सुख शांति के लिए दूसरों
को जिम्मेदार समजने कि भूल करते है ।
* हमे जो करना है वो नही करने कि,
नही करना है वो करने कि भूल करते है ।
* हम छोटी बात को बढा के बडी बनाने
कि भूल करके जिंदगी में दुःखी होते है ।
हमे भूल कि दुनिया को छोड कर एक
अच्छे ईन्सान कि भाँति जीना है ।
भूलें सुधार ले तो जिंदगी सुधार जाएगी ।
विनोद आनंद 26/11/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड