999 💐 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-49

🌷शब्द

शब्दों में ताकात होनी चाहीए

शब्दों में आवाज़ नही ।

फूल बारीश से खिलते है

बाढ से नही खिलते । 

🌻 जीवन क्या है ?

जन्म मरण के 

बीच का समय है ।

वर्तमान और भविष्यका

समय पास है तुमहारे ।

भूतकाल कि याद में

भविष्य कि चिंता में

समय न बीगाडना ।

लक्ष्यहीन, बीना आयोजन 

जीवन जी के, समय का 

बीगाडा न करो ।

समय का बीगाडना जीवन

को बीगाडना,समय किंमत 

समझो और समय का 

सदोपयोग करो ।

🌹 मुनकिन है

मुनकिन है, पाने को जो चाहो

पता नही तुम को क्या चाहिए ?

पहेले निश्चिय करो जो चाहिए

फिर पाने का रास्ता बनाओ 

चल पडो मंझिल कि ओर 

रुकना नहि, मंझिल मिलने तक

तो,मुनकिन है जो पाना चाहो ।

विनोद आनंद                              10/12/2017       फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

Advertisements

997 💐 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-48

🍁 चमक

आँखों कि चमक रोशनी

चहरे कि चमक मुश्कान

शरीर कि चमक स्फूर्ति

मन कि चमक बुध्धि 

दिल कि चमक प्यार 

व्यक्ति कि चमक व्यक्तित्व 

जिंदगी कि चमक जिंदादिली 

आत्मा कि चमक परमात्मा

खुद को चमका ओगे तो 

जीवन बनेगा महान ।

🌺 परछाई

खुश रहेना है 

खुशी को बुलाना है 

चहरे पे हसी लाना है ।

हसी खुशी दोनों  है 

सहेलीयाँ साथ निभाती है ।

जभी हसी आती है

खुसी पिछे हि खडी होती है ।

खुसी है हसी कि परछाई ।

🌻 संगम

जीवन में सही 

तरीके से जीना है

तो जीना शीखना है

शीखना तो पढना है

पढना है तो समझना है ।

समझना है तो मन,बुध्धि 

आत्मानो त्रिवेणी संगम 

में स्नान करना है ।

विनोद आनंद                              09/12/2017      फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

965 जीवन है साधना

मानव जीवन है साधना 

साधन नही भोग का ।

जानवर जीवन भोग योनी है

मानव जीवन नहीं ।

मानव शरीर और जीवन 

टीकाने के लिए कर्म 

करना  ही साधना है ।

साधना बीना सिध्धि कहाँ ।

जीवन में कुछ प्राप्त करना 

परिश्रम  यानी साधना है ।

जीवन में साधना कैसे करोगे ?

जीवन में लक्ष्य रख के संकल्प

करना है और आयोजन युक्त

प्राप्त करने कि कर्म यानी 

साधना करनी है । 

जीवन में सुख शांति और

समृध्धि पानेका जीवन में

प्रयास ही एक साधना है ।

विनोद आनंद                               11/11/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

943 जागो और जगाओ

जगाने के लिए पहले

खूद जागना जरूरी है

ईसलिए जागो और 

दूसरों को जगाओ ।

पहेले आत्मको जगाना है

मतलब आत्मको जानना है  

और समजना है कि हम

शरीर नहीं आत्मा है ।

फिर उस कि शक्ति को

जानना है,  समजना है और 

आत्मविश्र्वास जगाना है ।

बाद में आत्मा के गुणों को

जानना है समजना है और

जगा के आत्मसाद करना है ।

फिर हमें कम, क्रोध, लोभ, मोह, 

मद और मत्सर को भगाना है ।

मोज शोख और एसो आराम

कि गहेरी निंद से जागना है ।

लक्ष्यहीन जिंदगी को जगाना है

और सद् विचारो को जगाना है ।

जीवन में सतत जागृत रहेना है

और दूसरों को भी जगाना है ।

जीवन को महान, अमर और

अदभूत बनाना है ईसलिए

जागो और दूसरों को जगाओ ।

विनोद आनंद                               06/10/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

911 निस्वार्थ,निर्भय,निश्चित जीवन

निस्वार्थ, निर्भय और निश्चित 

जीवन हि उत्तम आदर्श जीवन ।

निस्वार्थ में  नहीं कोई अपेक्षा

सिर्फ अपनी जिम्मेदारी,फर्ज

और कर्म निष्ठा से करना ।

निर्भय जीवनमें अच्छें कर्म

अच्छा स्वभाव,अच्छी आदतें 

अच्छी भावनए,ईश्र्वर में श्रध्धा,

विश्र्वास और आराधना हो ।

निस्वार्थ, निर्भय  जीवन 

निश्चित जीवन कि नींव और 

फिर लक्ष्य और आयोजन

युक्त जीवन बने निश्चिंत ।

सब के प्रति प्रेम,दया,अपनापन 

मदद करने कि भावना और 

न हो बदले कि भावना ।

एसे जीवन से बनता है 

निस्वार्थ,निर्भय,निश्चित जीवन ।

विनोद आनंद                                10/09/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

893 शिष्य बने रहो

गुरू बीना ज्ञान कहाँ 

ज्ञान बीना जीवन कहाँ 

प्रथम सद् गुरू परमात्मा

दूसरा मात पिता, फिर 

शिक्षक बाद में प्रकृति के सभी 

जड या जीवीत है गुरू क्यूंकि 

सभी के पास कुछ न कुछ

तो अच्छा शीखने का होता है ।

जिस से कुछ शीखे वो गुरू ।

जीवन में  हमेसां शिष्य बने रहो

सब से कुछ न कुछ शीखे रहो ।

जीवन में  दिक्षा गुरू हो एक हो

और शिक्षा गुरू हो अनेक ।

गुरू कि अवगणा,निंदा न करो, 

गुरू का मान सन्मान करो और

उपदेश को जीवन में अपनाओ ।

तुम्हारा जीवन सँवर जाएगा ।                               

विनोद आनंद                                 21/08/2017   फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

881 मुक्ति

दिल में  जब प्रेम जागता है

आँखों से प्रेम ही बरसता है, 

सृष्टि प्रेम सभर हो जाती है,  

वोही प्रेम आँखों से सब के 

दिल में उतर जाता है और

दिल में सोये प्रेम को जगता है ।

ईसी तरह यह सिलसिला चलेतो 

ईश्र्वर कृपा से सभी के जीवन में 

प्रेम का मौसम छा जाएगा ।

धरती पर स्वर्ग उतर आए ।

स्वर्ग का निर्माता है प्रेम ।

प्रेम करो,प्रेम बरसाओ और

सब को प्रेमसे भीगोदो, 

तो नफरत, द्रेष, क्रोध और

ईर्षा से मिलेगी मुक्ति ।

विनोद आनंद                                13/08/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड