1723 रिश्तों को कैसे निभाओगे ?

रिश्तों को कैसे निभाओगे ?
रिश्तें बनते है और बिगते है
क्यूँ कि हम निभाते नहि, हम
रिश्तों कि कद्र नहि करते,
रिश्तों कि हेमीयत नहि जानते,
रिश्तों का ईस्तमाल करते है ।
रश्तें में अधिकार मागते है,
अपना कर्तव्य नहि करते ।
हम रिस्तों में शुकरियाँ नहि,
करते मगर शिकायत करते है,
और रिश्तें निभाना नहि पाते ।
उम्र गुजर जाती है,मगर रिश्तें
कमजोर रहते है क्यूँ कि हमे
रिश्तें निभाना नहि शकते ।
रिश्तों में शुकरियाँ करे और
कर्तव्य करो और रिश्ते को
मजबूत बनाओ । रिश्तें को
समर्पण,प्रेम से निभाना है ।
रिश्तों को निभाना है तो सहन
और समज शक्ति कि जरूरी है
रिश्तें निभाना आ गया तो
समजो जीना आ गया ।
जीवन कल्प वृक्ष है और
रिश्तें उस कि जडे है उसे
मजबूत बनाओगे तो उस
पर सुख, शांति, समृद्धि के
मीठे फल आएगे और जो
ईच्छा करोगे पूर्ण होगी ।
विनोद आनंद 10/09/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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1698 गुस्सा का विज्ञान-2

गुस्सा खुद को, दूसरे को
सुधारने के लिए, अन्याय के
खिलाफ, किसी के कल्याण
कि खातिर करना चाहिए ।
यह गुस्से का सकारात्मक
पहेलु है । एक ओर पहेलू
है कि अगर कोई आपका
किसी कारण से अपमान
करे तो उस के बदले में
तुरंत गुस्सा नहि करके वो
गुस्से को जिंदा रखके जिस
वज़ह से अपमान किया है
उस वज़ह को हि दूर कर
के मुह तोड जवाब देना है ।
गुस्से का नकारात्मक ढंग
से बढावा नहि देना है, जो
किसी के लिए अच्छा नहि ।
कोई गुस्सा करे तो आप
खुद पे नियंत्रण करके चुप
रहे और उस के प्रति क्षमा
का भाव प्रगट करे तो उस
का गुस्सा शांत हो जाएगा ।
किसी भी वज़ह से अगर
गुस्सा करना है तो होश
में रह कर गुस्सा करो,
लेकिन उस का रेगुलेटर
आप के पास रखो और
बात बढने से पहेले गुस्से
को शांत करना जरूरी है ।
गुस्से तन और मन पर भी
बहुत बुरा अशर होता है ।
संबंध बिगते है और संबंध
बिगडने से जीवन बिगडता है ।
गुस्सा वो ज्वालामूखी है,जो
सब कुछ जला के राख कर
देता है जिंदा रहते है मगर
जिंदगी छिन लेता है । अगर
आप उस के शिकार है तो
आप शिकारी बन के उस
का शिकार करके जीवन
को सुख शांति से भर दो ।
विनोद आनंद 16/08/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1683 तीन सुवर्ण सूत्रों

किस से नज़रे चुराना या
किस से नज़र मिलाना आ
गया तो, नज़रे अच्छि बनेगी
वरना बिगडेगी । ईसलिए
किस से नज़रे चुराना है
और किसे नज़रे मिलाना है
जानना चाहिए जरूरी है ।
बुरी चीज़ोसे नज़रे चुराना है,
अच्छि चीजों से मिलाना है ।
किस कि बात सुननी है,
किस कि नहि, आ गया तो
ठीक होगा, न क्लेश होगा ।
किसे बात करना है, कैसे
बात करना है आ गया तो
बातों बातों में बात बनेगी ।
अच्छि चीजों से नजर
मिलाओ, अपनो कि बातें
सुनो और सहि व्यक्ति के
साथ सही तरीके से बात
करोगे तो सफल और प्रिय
व्यक्ति बनोगे जरूर ।
खराब मत देखो, खराब
मत बोलो खराब मत सुनो
राष्ट्रपिता गांधीजी के तीन
बंदरो का प्रतिक है, जीवन
जीने का सुवर्ण सूत्र ।
विनोद आनंद 02/08/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1670 प्रेम, प्रेमी और प्रेमिका

प्रेम,प्रेमी और प्रेमिका
का मिलन एक सुखद
संयोग जब प्रेम है सच्चा ।
प्रेम, प्रेमी और प्रेमिका का
मिलन एक दुःखद संयोग,
जब प्रेम में भेळसेळ हो,
आकर्षण,स्वार्थ, मोह हो ।
प्रेमी और प्रेमिका आज
काल के जवान लडका
लडकि का खेल-प्रपंच है ।
जवानी के नसे में आज
के माहोल में एसे किस्से
बनते है,बिगडते है क्यूँकि
जो भी होता है वो जोस में
नशे में, बेहोशी में होता है ।
यह उम्र केरियर-चरित्र के
घडतर कि होती है प्रेम के
चक्कर में पड के जीवन का
किंमती सयम बरबाद करने
के लिए नहि है ।
जीवन साथी ढूँढने कि
जिम्मेदारी मा बाप कि है ।
उन का हक मत छिनना,
और अनुमती के बीना कोई
गलत कदम न उठाना क्यूँकि
वो दोनों के जीवनको दुःख
और अशांति के सिवाय
कुछ नहि दे शकता ।
बाद में पस्ताने से क्या
फायदा ईसलिए जो भी करो
सोच समज कर होश में करो ।
विनोद आनंद 19/07/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1660 जीने का सहि तरीका

जीवन में कोई भी कमी
होगी तो चलेगा लेकिन
थोडी सी कमी प्रेम कि
सहन नहि कर शकेगें ।
जीवन कोई भी चीज़ टूटे
मन को समझा शकते है
लेकिन अगर दिल टूटे तो
मन को नहि समझा शकेगें ।
जीवन में कुछ खो जाए तो
ढूँढ लेगे लेकिन मन खो जाए
तो मन को नहि ढूँढ शकेगें ।
जीवन मे कोई भी रूढ जाए
तो मना शकेगे मगर अपनों
को नहि मना शकेगें।
जीवन में एक दिन खाना नहि
मिले तो चलेगा लेकिन पानी
बीना एक दिन भी नहि चले ।
जीवन में जो गौण है उसे के
बीना जी शकते है लेकिन
जो जरूरी है और आवश्य है
उसे बीना जीना मुश्किल है ।
जीवन में जरूरी-आवश्य और
बीन जरूरी- बीन आवश्य कि
समझ आए तो समझलो कि
जीने का सहि तरीका आगया ।
विनोद आनंद 10/07/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1656 विश्र्वसनीय बनो

विश्र्वसनीय बनोगे तो सब
भरोशा करेगा वरना कोई
विश्र्वास नहि करेगा ।
परिवार और समाज में एक
दूसरे पर भरोशा जरूरी है ।
भरोशा है पंख, रिश्तों कि ।
जैसे बीन पंख, पंखी उड न
शके, एसै बीन भरोशे मानवी
जीवन जी न शके और रिश्तें
टीक न शके ।
परिवार और समाज में एसा
व्यवहार मत करो, जैसे कि
झूठ बोलना, बहाने बना, सीधी
बात न करना, कहे वो न करना,
वचन न निभाना, कोई काम ढंसे
न करना और पैसे उघार ले के
न लौटाना ईत्यादि, जिसे कोई
आप का विश्वास न करे । आप
के साथ रिश्ता न रखे, कोई भी
आप कि मदद न करे ।
परिवार-समाज में रहेते हुए, आप
अकेले न हो जाओ । जीवन का
उदेश्य हि हो विश्र्वसनीय बनना तो
जीवन सफल, सार्थक समृध्ध बने ।
लोगों का विश्र्वास जीतना है तो
समजलो जग जीत लिया क्यूँकि जग
में विश्वास का हि सिक्का चलता है
अविश्वास का नहि ।
विनोद आनंद 07/07/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1654 सुंदरता किस में है ?

सुंदरता किस में है ?
सुंदरता सुगंधीत फूलों में है ।
सुंदरता प्रकृति में और
दुनिया बनाने वाले में है ।
सुंदरता मानवता में है ।
सुंदरता मुस्कान में है ।
सुंदरता आबरू और
प्रभाव में है ।
सुदरता सद् गुणों में
और सद् आचरण में है ।
सद् गुणों से और सद्
आचरण से खुद को सुंदर
बनाओ ।
सुंदरता हर सुंदर चीजों
में छूपी नज़र आती है ।
कहेवत है कि सुंदरता पाने
से पहेले सुंदर बनना पडेगा ।
हर एक सुंदर चीज़, सुंदर
चीज़ को आकर्षित करती है ।
सुंदर बन के सुंदरता से रिश्ता
जोडो तो जीवन बने सुंदर ।
सुंदर जीवन सफल जीवन ।
तन कि और मन कि सुंदरता
हि है जीवन कि सुंदरता ।
विनोद आनंद 06/07/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड