943 जागो और जगाओ

जगाने के लिए पहले

खूद जागना जरूरी है

ईसलिए जागो और 

दूसरों को जगाओ ।

पहेले आत्मको जगाना है

मतलब आत्मको जानना है  

और समजना है कि हम

शरीर नहीं आत्मा है ।

फिर उस कि शक्ति को

जानना है,  समजना है और 

आत्मविश्र्वास जगाना है ।

बाद में आत्मा के गुणों को

जानना है समजना है और

जगा के आत्मसाद करना है ।

फिर हमें कम, क्रोध, लोभ, मोह, 

मद और मत्सर को भगाना है ।

मोज शोख और एसो आराम

कि गहेरी निंद से जागना है ।

लक्ष्यहीन जिंदगी को जगाना है

और सद् विचारो को जगाना है ।

जीवन में सतत जागृत रहेना है

और दूसरों को भी जगाना है ।

जीवन को महान, अमर और

अदभूत बनाना है ईसलिए

जागो और दूसरों को जगाओ ।

विनोद आनंद                               06/10/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

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911 निस्वार्थ,निर्भय,निश्चित जीवन

निस्वार्थ, निर्भय और निश्चित 

जीवन हि उत्तम आदर्श जीवन ।

निस्वार्थ में  नहीं कोई अपेक्षा

सिर्फ अपनी जिम्मेदारी,फर्ज

और कर्म निष्ठा से करना ।

निर्भय जीवनमें अच्छें कर्म

अच्छा स्वभाव,अच्छी आदतें 

अच्छी भावनए,ईश्र्वर में श्रध्धा,

विश्र्वास और आराधना हो ।

निस्वार्थ, निर्भय  जीवन 

निश्चित जीवन कि नींव और 

फिर लक्ष्य और आयोजन

युक्त जीवन बने निश्चिंत ।

सब के प्रति प्रेम,दया,अपनापन 

मदद करने कि भावना और 

न हो बदले कि भावना ।

एसे जीवन से बनता है 

निस्वार्थ,निर्भय,निश्चित जीवन ।

विनोद आनंद                                10/09/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

893 शिष्य बने रहो

गुरू बीना ज्ञान कहाँ 

ज्ञान बीना जीवन कहाँ 

प्रथम सद् गुरू परमात्मा

दूसरा मात पिता, फिर 

शिक्षक बाद में प्रकृति के सभी 

जड या जीवीत है गुरू क्यूंकि 

सभी के पास कुछ न कुछ

तो अच्छा शीखने का होता है ।

जिस से कुछ शीखे वो गुरू ।

जीवन में  हमेसां शिष्य बने रहो

सब से कुछ न कुछ शीखे रहो ।

जीवन में  दिक्षा गुरू हो एक हो

और शिक्षा गुरू हो अनेक ।

गुरू कि अवगणा,निंदा न करो, 

गुरू का मान सन्मान करो और

उपदेश को जीवन में अपनाओ ।

तुम्हारा जीवन सँवर जाएगा ।                               

विनोद आनंद                                 21/08/2017   फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

881 मुक्ति

दिल में  जब प्रेम जागता है

आँखों से प्रेम ही बरसता है, 

सृष्टि प्रेम सभर हो जाती है,  

वोही प्रेम आँखों से सब के 

दिल में उतर जाता है और

दिल में सोये प्रेम को जगता है ।

ईसी तरह यह सिलसिला चलेतो 

ईश्र्वर कृपा से सभी के जीवन में 

प्रेम का मौसम छा जाएगा ।

धरती पर स्वर्ग उतर आए ।

स्वर्ग का निर्माता है प्रेम ।

प्रेम करो,प्रेम बरसाओ और

सब को प्रेमसे भीगोदो, 

तो नफरत, द्रेष, क्रोध और

ईर्षा से मिलेगी मुक्ति ।

विनोद आनंद                                13/08/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

848 सब के प्रिय बनोगे कैसे ? 

सब के  प्रिय बनोगे कैसे ? 

जीवन का उद्देश और लक्ष्य  रखो ।

फिर उस पर चिंतन करो तो

अवश्य सब के प्रिय बनोगे ।

आपके लिए कुछ महत्वपूर्ण टीप्स ।

जब भी मिलो मुस्करा के मिलो ।ञ

किसीसे वादा करो तो निभाओ ।

वचनबध्धता और विश्वास पेदा करो ।

किस का दिया हुआ काम करो ।

तो बनोगे सब के प्रिय ।

किसी कि रुचि अनुसार और

उने फायदा कि बात करो ।

किसी की बात ध्यान से सुनो 

अगर हो शके तो योग्य सुझाव दो

तो बनोगे सब के प्रिय ।

सही व्यवाहार करो तो कोई 

गेर समझ पेदा न हो ।

अगर हो जाए तो दूर करो ।

भूल हो जाए तो माफि माग लेना ।

दूसरों कि भूल को माफ कर देना ।

तो बनोगे सब के प्रिय ।

सब से प्रेम करो न किसी से

नफरत न कोई द्वेष न दुश्मनी 

न निंदा चुगली, न बदले कि चेष्ठा

दलील करवा टेव छोडो

जतु करवा नी टेव पाडो

सहन करवा नी टेव पाडो 
तो बनोगे सब के प्रिय ।

विनोद आनंद                                15/07/2017    

फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

846 💐 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-36

💖 व्यक्तित्व और सद् गुण

जैसे फूलो में  खूशबु है 

फलों में  मीठास है ।

एसे व्यक्ति में व्यक्तित्व हो

तो उस कि खूशबु  फैलती है ।

उसके सद् गुणो कि मीठास से

सब का जीवन बनता है मीठा ।

🍁 वाणी व्यवहार और वर्तन

वाणी हो मधुर, 

व्यवहार हो अच्छा

और वर्तन हो सही

तीनों का हो त्रिवेणी संगम 

तो जीवन बने तीर्थ ।

💞 त्रिवेणी संगम 

मन हो संयमी और पवित्र, 

बुध्धि हो विवेकि और शुध्ध, 

आत्मा हो जागृत और संस्कारी, 

तीनों का हो त्रिवेणी संगम 

तो मानव जन्म हो जाए सफल

जीवन बने महान ने यादगार ।

💟 ठूठते है 

हम ठूठते  है, 

सुख में दु:ख, 

दु:ख में ठूठो सुख ।

हम ठूठते  है, 

गैरों में अपनो को, 

अपनो कों भूल कर ।

हम ठूठते  है, 

मान में अपमान को, 

अपमान में ठूठो मान को ।

विनोद आनंद                                12/07/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

842 कैसे जिंदा रहोगे मरने के बाद

कैसे रहोगे जिंदा मरने के बाद ?

सवाल है क्या हम चाहते है 

मरने के बाद जिंदा रहेना ? 

चाह है तो राह है, मंझ़िल है ।

लक्ष्य है तो मंझ़िल मिलेगी जरुर ।

खूद के साथ,दूसरो के लिए भी जीया तो, 

सब को अपना समजकर जीया तो, 

अच्छा कर्म करके यादगार जिवन जीए तो, 

मन में द्दढता,दिल मे है विश्र्वास तो, 

जिंदा रह शकते है मरने के बाद भी ।

एक आदर्श व्यक्ति बनके जीवन जीए तो, 

सरल,सहज, सात्विक जीवन जीए तो, 

सेवा समर्पण से जीवन जीओ तो, 

मन में द्दढता, दिल मे है विश्र्वास तो, 

जिंदगी का यही उद्देश्य है तो, 

जिंदा रह शकते है मरने के बाद भी ।

विनोद आनंद                                08/07/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड