1184 एकता

रेशे, रेशे से बनती है मजबूत रस्सी ।
एक एक काठी से बनती है गठरी ।
तीनके तीनके से बनता है खोंसला ।
आसमान से बुंदे बरसती है और
बुंदे बुंदे से सागर बनता है ।
छोटी खुशीयाँ से बनती है बडी खुशी ।
एक एक व्यक्ति से बनता है संगठन ।
रस्सी, गठरी, संगठन कि एकता से
बनती है ताकात और ताकात से
कुछ भी काम कर शकते हो ।
ईसलिए सब के संग मिलजुलकर,
साथ सहकार से रहेने से हर
मुशीबत या परेशानी का हल
आसानीसे निकाल शकते हो ।
जूडे रहने से कोई तोड नही
शकेगा और न परेशान कर
शकेगा और जीवन मे सुख
शांति और सफलता मिलेगी ।
परिवार में,समाज में एकता से
जीवन सफल,सार्थक बनेगा ।
विनोद आनंद 22/05/2018
फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

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1179 दुःखो से छूटकारा कैसे ?

दुःख कि कोई परिभाषा नही ।
जो प्रतिकूल है वो दुःख लगता है ।
जो अनुकूल है वो सुख लगता है ।
जीवन में सुख-दुःख का सिलसिला
चलता रहेगा उसे साथ हि जीना है ।
दुःख का कारण होता है तो उस का
निवारण भी हो शकता है लेकिन
हम उस के निवारण पे नही सिर्फ
दुःख पर ज्यादा ध्यान देते है ।
दुःखो को सहन नही करना है
दुःखो को समजना है और उस के
निवारण पे ध्यान देना है, अगर
निवारण न हो तो उसे भूलकर,
नई तरीके से जीवन जीना है ।
दुःख तो पीडा देगा लेकिन हमे
परेशान होना न होना वो अपनी
पसंदगी या समजदारी है ।
हम दुखों को बेवज़ह सीनमें
दबाकर याद किया करते है ।
दुःखो से छुटकारा पाने का अक्शीर
उपाय है कि हमे जीवन में वस्तु या
व्यक्ति का स्वभाव जानकर उस के
अनुशार उसे व्यवहार करना है और
हमे दूसरों का जैसा व्यवहार अच्छा
नही लगता एसा व्यवहार दूसरो के
साथ नहीं करना है और दुःख के
निवारण पर ध्यान दे और खुस रहो ।
विनोद आनंद 18/05/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1111 सही सोच

सोच है सोना चांदी
सोच हि है जीवन
सोच से हि बने कर्म
कर्म से बने किस्मत
सोच हि भाग्य विधाता ।
जैसी सोच एसी समझ
बोलने से या कर्म से
पहेले सोचो, सही है
या गलत और सही बोलो
और सही कर्म करो
यही शान है सोच कि ।
सोच से बदलता है जीवन ।
बढीया सोच जीवन बढीया ।
घटीया सोच जीवन घटीया ।
सकारात्मक सोच है दोस्त
और नकारात्मक सोच है
दुश्मन ईन्सान का ।
सकारात्मक सोच सफलता,
नकारात्मक सोच निष्फलता ।
निष्फलता के बाद भी
सोच सकारात्मक हो तो
सफलता मिल शकती है ।
स्थिर और शांत मन ही
सही सोच शकता है ।
सही सोच है सोना चांदी
उसे कर्म के गहने बनाकर
जिंदगी को सँवारो ।
विनोद आनंद 11/03/2018
फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड

1100 मेरा स्वभाव-3

मेरा स्वभाव मेरा सच्चा
साथी और जिगर दोस्त ।
मैं न निंदा, न चुगली और
न आलोचना करता हूँ किसी कि ।
कबूल करता हूँ अपनी गलती
माग कर माफी, और करता
हूँ माफ दूसरों कि गलतियाँ ।
मेरा स्वभाव मेरा जीवन
मेरी पहेचान, मेरे संस्कार ।
मैने दूसरों के गुण देखना,
खुद के दोष देखना शीखा है ।
स्वभाव में नकारात्मक द्रष्टि
नही हकारात्मक द्रष्टि रखना
शीखा है मैं ने ।
मेरा स्वभाव मेरी खुशी,
मेरी शांति और दौलत है ।
मेरे स्वभावने हि मुझे वक्ता,
और लेखक बनाकर दोस्त,
फिलोसोफर,गाईड बनाया ।
आभार शुकरीयाँ और धन्यवाद
ईश्र्वर का,श्रोताओ का और मेरे
विचारोंको पढने और पसंद करने वालो का ।
विनोद आनंद 01/03/2018
फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड

1087 मुस्कान का मूल्य

प्राणीओं में सिर्फ मनुष्य
हि मुस्कारा शकता है ।
मुस्कान अनमोल बक्षिस ।
जिस चहरे पे मुस्कान नही वो
चहेरा ईन्सान का नही लगता ।
मुस्कान चहरे कि सुंदरता है,
मन कि खुशी,दिल कि महेबूबा
और जीवन का आनंद है ।
मुस्कान गम भूलाए, खुशी
शांति और क्षमा दिलाए ।
चहरे पे मुस्कान,खिला गुलाब
प्रेम कि खुशबू और रिश्तों कि शान ।
हर पल मुस्कान को चहरे पे
खिलने दो तो दूसरा चहेरा भी
गुलाब बनके प्रेम कि खुशबू
फैलाएगा ओर चहेरों के लिए ।
जब सभी चहेरे मुस्कराने लगेंगे
तब धरती धरती नही प्रेम नगर
बनेगी और दुनिया स्वर्ग बनेजी ।
यही मूल्य है मुस्कान का ।
यही शक्ति है मुस्कान कि ।
विनोद आनंद 20/02/2018
फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड

1052 जीवन है दुल्हन

ये जीवन दुल्हन दुल्हन
है साडी, तुम्हारा सद् गुण ।
है बिंदीयाँ, कर्म तुम्हारा ।
है गले का हार,प्यार तुम्हारा ।
ये जीवन दुल्हन दुल्हन
है कुंडल, तुम्हारा स्नेह ।
है पायल, बाणी तुम्हारी
है श्रींगार,सत्कर्म तुम्हारा
ये जीवन दुल्हन दुल्हन
है हसी चहेरे कि, भक्ति तुम्हारी
है संस्कार,जीवन शैली तुम्हारी ।
है खुबसुरती, अच्छि भावनाएँ तुम्हारी ।
है श्रींगार, सुंदर,सफल,समृध्ध जीवन तुम्हारा ।
ये जीवन दुल्हन दुल्हन,
भेजना है ससुराल-परमधाम
एसे न फिर परत आए पियर में ।
मोक्ष-मुक्ति के हकदार हो जीवन तुम्हारा ।
विनोद आनंद 26/01/2018
फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड

1038 दर्पण

दर्पण जूठ्ठ न बोले

सच्चाई का प्रतिक 

सँवार ने का साधन ।

जो जैसे हो एसा दिखाए

वो दर्पण कहेलाए ।

दर्पण पे धूल है तो चहेरा

धूंधला दिखता है । 

धूल को साफ करो तो

चहेरा साफ नज़र आए ।

मन भी एक दर्पण है जिस 

पर बूरे विचारों कि धूल से

अच्छे विचारो कि तस्वीर 

मन के दर्पण में नही दिखती ।

दिल भी एक दर्पण है जिस 

पर बूरी भावनाओं कि धूल से

अच्छी भावनाओं कि तस्वीर 

दिल के दर्पण में नही दिखती ।

जीवन भी एक दर्पण है जिस 

पर खराब कर्मो कि धूल से

अच्छे कर्मो कि तस्वीर 

जीवन के दर्पण में नही दिखती ।

दर्पण को साफ रखोगे तो 

सभी तस्वीरें अच्छी दिखेगी ।

विनोद आनंद                             15/01/2018        फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड