2134 भ्रम में जीना

भ्रम में जीन भी क्या जीना है
यारो, टूटेगा तो चोट लगेगी ।
भ्रम को हमने अपनी मान्यता
और धारणएँ बना लेते है ।
हम भ्रम पालके जिंदगी को नहि
पा शकते या न जी शकते ।
जब मान्यता और धारणाओं के
मुताबीत नहि होता तब हम दु:खी
हो जाते है, खुश नहि रह शकते ।
अगर भ्रम हमे दु:ख देते है, तो हमे
भ्रम को तोड देना है, छोडना है ।
लोग एसे जीते है कि मरेगें नहि ।
हमें भ्रम है कि मैं हि सच हूँ और
सभी झूठे है । हमें भ्रम है कि मैं
दूसरों कि वजह से में दु:खी हूँ ।
हमें भ्रम है कि मैं हि बुध्धिशाली हूँ ।
हमें भ्रम होता है कि में वजह से घर
चलता है मैं नहि तो फिर अंधेरी रात ।
ईसलिए हमे अपनी हर मान्याता
या धारणाओं का निरीक्षण करना है
कि कौनसी सही है, कौनसी गलत ?
गलत धारणा, मान्यताको बदलना है ।
भ्रममें जीना मतलब बेहोशीमें जीना ।
हर वक्त जागृत हो कर, होशमें जीना
हि सहि तरिका है जीने का ।
भ्रम वास्तविकता से दूर कर देता है ।
विनोद आनंद 06/08/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

2117 कौन धन्य है ?

जिस देश में गंगा है
वो देश धन्य है ।
जो स्री प्रतिव्रता है
वो स्री धन्य है ।
जो राजा न्याय प्रिय
वो राजा धन्य है ।
जो ब्राम्हण स्वधर्म पालन
करे वो राजा धन्य है ।
वो धन धन्य जो ईमानदारी
से कमाया है और दान में
दिया जाता है वो धन्य है ।
वो बुध्धि धन्य है जो बुध्धि
विवेकी और परिपक्व है ।
वो कूल धन्य, जहाँ महा
पुरूष जन्म लेते है ।
वो जन्म धन्य, जिस में
सत्संग और भक्ति हो ।
वो पुरूष धन्य जो मात पिता
और गुरू का सन्मान करे ।
वो मात पिता धन्य जो बच्चे
को अच्छे संस्कार दे ।
वो पुत्र धन्य जो मात पिता
नी सेवा करे ।
वो जीवन धन्य है जिस में
परमात्मा के दर्शन हो ।
जीवन जीओ तो एसा कि
जीवन, जन्म धन्य बने और
जीते जी मुक्ति पाप्त हो ।
विनोद आनंद 27/07/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

2094 तुम दिव्य हो दिव्य बनो

तुम दिव्य हो क्यूँकि सभी
दिव्य परमात्मा के संतान है
ईसलिए तुम्हारा जीवन दिव्य
होना चाहिए, दिव्य बनो ।
दिव्यता के गुण प्रगट करो ।
सोच विचारों में दिव्य बनो ।
जो काम करो उस में शत
प्रतिशत दिव्याता लाओ ।
जहाँ भी जाओ वहाँ दिव्यता
प्रकाशित करो तो दूसरों को
दिव्य बनने कि प्रेरणा मीलेगी ।
दिव्यता से अलग होने का कभी
सोचना हि नहि वरना जीवन में
तकलीफें परेशानीयाँ बढेगी ।
दिव्यता स्वर्ग कि नीवं अगर
नींव कमजोर है तो नर्क का हि
निर्माण अवश्य होगा ।
दिव्यता चहेरे का तेज है जीवन
कि शान और महानता है ।
दिव्य जीवन कि कल्पना करो
स्वप्न देखो और साकार करो ।
दिव्य जीवन हि जिंदगी का लक्ष्य
होना चाहिए और लक्ष्य प्राप्त होने
से हि जीवन सफल, सार्थक,
प्रेरणादाई बनता है ।
विनोद आनंद 11/07/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

2087 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-98

🌹 महेनत कि मोमबत्ती
जीवन के अंधेरों को
मत कोसते रहीए यारों,
महेनत कि मोमबत्ती कि
जलेने कि देर है जीवन
के अंधेरे मीट जाएगे ।
🍁 बहानों से
बहानों से अपनी कमजोरी
मत छूपाओ बाहुओं के बल
पे अपनी कमजोरी को मीट
कर, नई उमीदों से स्वप्नो
को जगओ और साकर करो ।
🌻 किस्मत के ताले कि चाबी
किस्मत कर्मो से बनती है
कर्म महेनत से होता है ।
महेनत कि चाबी से, कर्मो
कि ताकात से खूलता है
किस्मत का ताला ।
किस्मत माता है तो
महेनत पिता है ।
🌹 बहेतर
समय, सहेद और संबंध
कि किंमत का लेबल नहि
होता । वास्तव में हाथ से
निकल जाने के बाद उस
कि किंमत समज आती है
बहेरत है कि उस के जाने
से पहेले किंमत समजले ।
जीवन धन्य बन जाएगा ।
विनोद आनंद 04/07/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड