881 मुक्ति

दिल में  जब प्रेम जागता है

आँखों से प्रेम ही बरसता है, 

सृष्टि प्रेम सभर हो जाती है,  

वोही प्रेम आँखों से सब के 

दिल में उतर जाता है और

दिल में सोये प्रेम को जगता है ।

ईसी तरह यह सिलसिला चलेतो 

ईश्र्वर कृपा से सभी के जीवन में 

प्रेम का मौसम छा जाएगा ।

धरती पर स्वर्ग उतर आए ।

स्वर्ग का निर्माता है प्रेम ।

प्रेम करो,प्रेम बरसाओ और

सब को प्रेमसे भीगोदो, 

तो नफरत, द्रेष, क्रोध और

ईर्षा से मिलेगी मुक्ति ।

विनोद आनंद                                13/08/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

848 सब के प्रिय बनोगे कैसे ? 

सब के  प्रिय बनोगे कैसे ? 

जीवन का उद्देश और लक्ष्य  रखो ।

फिर उस पर चिंतन करो तो

अवश्य सब के प्रिय बनोगे ।

आपके लिए कुछ महत्वपूर्ण टीप्स ।

जब भी मिलो मुस्करा के मिलो ।ञ

किसीसे वादा करो तो निभाओ ।

वचनबध्धता और विश्वास पेदा करो ।

किस का दिया हुआ काम करो ।

तो बनोगे सब के प्रिय ।

किसी कि रुचि अनुसार और

उने फायदा कि बात करो ।

किसी की बात ध्यान से सुनो 

अगर हो शके तो योग्य सुझाव दो

तो बनोगे सब के प्रिय ।

सही व्यवाहार करो तो कोई 

गेर समझ पेदा न हो ।

अगर हो जाए तो दूर करो ।

भूल हो जाए तो माफि माग लेना ।

दूसरों कि भूल को माफ कर देना ।

तो बनोगे सब के प्रिय ।

सब से प्रेम करो न किसी से

नफरत न कोई द्वेष न दुश्मनी 

न निंदा चुगली, न बदले कि चेष्ठा

दलील करवा टेव छोडो

जतु करवा नी टेव पाडो

सहन करवा नी टेव पाडो 
तो बनोगे सब के प्रिय ।

विनोद आनंद                                15/07/2017    

फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

846 💐 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-36

💖 व्यक्तित्व और सद् गुण

जैसे फूलो में  खूशबु है 

फलों में  मीठास है ।

एसे व्यक्ति में व्यक्तित्व हो

तो उस कि खूशबु  फैलती है ।

उसके सद् गुणो कि मीठास से

सब का जीवन बनता है मीठा ।

🍁 वाणी व्यवहार और वर्तन

वाणी हो मधुर, 

व्यवहार हो अच्छा

और वर्तन हो सही

तीनों का हो त्रिवेणी संगम 

तो जीवन बने तीर्थ ।

💞 त्रिवेणी संगम 

मन हो संयमी और पवित्र, 

बुध्धि हो विवेकि और शुध्ध, 

आत्मा हो जागृत और संस्कारी, 

तीनों का हो त्रिवेणी संगम 

तो मानव जन्म हो जाए सफल

जीवन बने महान ने यादगार ।

💟 ठूठते है 

हम ठूठते  है, 

सुख में दु:ख, 

दु:ख में ठूठो सुख ।

हम ठूठते  है, 

गैरों में अपनो को, 

अपनो कों भूल कर ।

हम ठूठते  है, 

मान में अपमान को, 

अपमान में ठूठो मान को ।

विनोद आनंद                                12/07/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

842 कैसे जिंदा रहोगे मरने के बाद

कैसे रहोगे जिंदा मरने के बाद ?

सवाल है क्या हम चाहते है 

मरने के बाद जिंदा रहेना ? 

चाह है तो राह है, मंझ़िल है ।

लक्ष्य है तो मंझ़िल मिलेगी जरुर ।

खूद के साथ,दूसरो के लिए भी जीया तो, 

सब को अपना समजकर जीया तो, 

अच्छा कर्म करके यादगार जिवन जीए तो, 

मन में द्दढता,दिल मे है विश्र्वास तो, 

जिंदा रह शकते है मरने के बाद भी ।

एक आदर्श व्यक्ति बनके जीवन जीए तो, 

सरल,सहज, सात्विक जीवन जीए तो, 

सेवा समर्पण से जीवन जीओ तो, 

मन में द्दढता, दिल मे है विश्र्वास तो, 

जिंदगी का यही उद्देश्य है तो, 

जिंदा रह शकते है मरने के बाद भी ।

विनोद आनंद                                08/07/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

 

816 बहेतरीन तरीका जीने का 

जीने का  बहेतरीन तरीका कौनसा ? 

जीओ और जीने दो, 

हसो और हसाओ

खुस रहो खुस रखो, 

है बहेतरीन तरीका जीने का ।

जीने का  बहेतरीन तरीका कौनसा ? 

न फसो न फसाओ, 

न रोओ न रूलाओ, 

न दु:खी हो न दुःखी करो, 

माफ करो दो, माफि मागीलो, 

प्रेम करो, प्रेम पामो, 

है बहेतरीन तरीका जीने का ।

जीने का  बहेतरीन तरीका कौनसा ? 

मैं ओ.के. तुम भी ओ.के, 

मैं जीतु तुम भी जीतो, 

मैं स्वीकार करू तुम्हे, 

तुम भी स्वीकार करो मुझे ।

मैं सहन करू तुम्हे, 

तुम भी सहन करो मुझे ।

है बहेतरीन तरीका जीने का ।

जीने का  बहेतरीन तरीका कौनसा ? 

मैं न रूठू  तुम्हे से

तुम भी न रूठो मुझसे ।

मैं खुस रखु तुम्हे, 

तुम भी खुस रखो मुझे ।

मैं न शिकायत करू  तुम्हे, 

तुम भी न करो शिकायत मुझे ।   

विनोद आनंद                                20/06/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

768 जीने का शलीका नही आया

ओ जीने वाले तुझे जीन का

सही शलीका नही आया ।

जीवन एक उपवन है तुने

कांटो का बन बना दिया ।

जीवन खूबसूरत है तुने

बदसूरत बना दिया ।

जीवन अनमोल है तुने

किंमत लगाली,बोली लगाली ।

जीवन का सफर आत्म

कल्याण के लिए है तुने 

काया कल्याण में लगा दिया ।

हे मानव ! तुझे जीन का 

सही शलीका नही आया ।

जीवन सेवा समर्पण के लिए

तुने खुद कि मावजत में  लगा दिया ।

जीवन, पुण्य आशीर्वाद और 

कृपा कमाने के लिए तुने पाप

और पैसा कमाने लगा दिया ।

जीवन ईश्र्वर मिलन के लिए तु

ईश्र्वर के वियोग में जीने लगा ।

हे मानव ! तुझे जीन का 

सही शलीका नही आया । 

जीवन सिर्फ जीना नही

जीवन को जीतना भी है ।

विनोद आनंद                               07/05/2017

फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

763 जीवन साधना

जीवन साधना और

शरीर साधन,

साधना के लिए, 

नहीं है उपभोग के लिए ।

भोगी नही योगी बनो

तो साधना के लिए शरीर

रहेगा स्वस्थ वरना

भोगी जो रोगी है वो 

कैसे करेगा साधना ।

जीवन का उदेश्य साधना

आत्मकल्याण  करना, 

सत्कर्म निष्टा से करना, 

चरित्र का निर्माण करना, 

इश्र्वर से जूडना, 

परोपकार करना, 

सुख शांति से जीना

और जीने देना, 

कृत्ज्ञन बनना, वगैरह 

साधना करना है ।h

जीवन की सफलता और

सार्थकता साधना से है ।

साघक बनो बघक नहीं ।

विनोद आनंद                               03/05/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड