1692 कही सुनी बातें

* अच्छे वक्त के लिए बूरे वक्त
का सामना करना पडता है ।
बुरे वक्त में शांत रहे और
अच्छे वक्त में समतुलीत रहे ।
* जिंदगी में कभी किसी को
बेकार मत समजना क्यूँ कि
बंध घडी भी दिन में दो बार
सहि समय बताती है ।
* दो बाते ईन्सान को अपनों से
दूर कर देती है एक तो उस
का अहंम और दूसरा वहेम ।
* परेशानी हालात से नहि गलत
खयालों से पैदा होती है एक शौख
बेमीशाल रखा करो हर हालत मे
होंठो पे मुस्कान हमेंशा रखा करो ।
* कभी हम गलत नहि होते
लेकिन वो शब्दें नहि होते
जिस से हम खुद को सहि
साबित कर शके ।
* अगर आप गलतियों से सबक
शिख लेते हो तो वो आप के
लिए सफलता कि सीडी है ।
* दुनाया नतीजा को पुरस्कार
देती है कोशिश को नहि ।
* कर्म के पास न कागज़ है न
किताब है लेकिन उस के पास
सारी दुनिया का हिसाब है ।
* ईन्सान अपनी गलतियों से
जीतना शिख जाय तो उसे
बहार कोई हरा नहि शकता ।
* दिल के सच्चे लोग भले अकेले
रह जाय लेकिन उस का साथ
कुदरत देती है ।
* जो मन कि बात नहि बता पाता उस
को हि क्रोध सब से अधिक आता है ।
* किसी के साथ टाईम पास करने के
लिए रिश्ता न रखे, रिश्ते को टाईम दे ।
* साफ साफ बोलने वाला कडवा जरूर
लगता है मगर धोखेबाज नहि होता ।
विनोद आनंद 11/08/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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1678 वरना पडेगा अकाल

बहोत बाग लगाए और फूलों
कि खूसबु से महेकाया माहोल ।
बहुत उगाए फूल गमलों में,
घर कि शोभा बढाने के लिए ।
भूल गए सद् गुण के फूल
खिलाके मन कि बंजर ज़मी
पे, घर को महेकाने के लिए
ईसलिए मन कि ज़मी पे
दुर्गुणो के कांटे उग जाते है ।
कांटें बीना महेनत उग जाते ।
भूल गए है अच्छि भावनाओं
के फूल खिलाना दिल के गमले
में, जीवन को सजाने के लिए ।
ईसलिए दिल के गमले में बुरी
भावनाओं के कांटे उग जाते है ।
कांटें बीना महेनत उग जाते है ।
हमे किसान कि तरह अनाज
उगाने से पहेले काटों को तोड
के फेकना हि पडेगा और सद्
गुणों और अच्छि भावनाओं
कि खेती करनी हि पडेगी तब
सुख शांति और सफलता कि
फसल उगेगी जीवन में, वरना
जिवन में सद् गुणों और अच्छि
भावनाओं का पडेगा अकाल ।
विनोद आनंद 28/07/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड^

1660 जीने का सहि तरीका

जीवन में कोई भी कमी
होगी तो चलेगा लेकिन
थोडी सी कमी प्रेम कि
सहन नहि कर शकेगें ।
जीवन कोई भी चीज़ टूटे
मन को समझा शकते है
लेकिन अगर दिल टूटे तो
मन को नहि समझा शकेगें ।
जीवन में कुछ खो जाए तो
ढूँढ लेगे लेकिन मन खो जाए
तो मन को नहि ढूँढ शकेगें ।
जीवन मे कोई भी रूढ जाए
तो मना शकेगे मगर अपनों
को नहि मना शकेगें।
जीवन में एक दिन खाना नहि
मिले तो चलेगा लेकिन पानी
बीना एक दिन भी नहि चले ।
जीवन में जो गौण है उसे के
बीना जी शकते है लेकिन
जो जरूरी है और आवश्य है
उसे बीना जीना मुश्किल है ।
जीवन में जरूरी-आवश्य और
बीन जरूरी- बीन आवश्य कि
समझ आए तो समझलो कि
जीने का सहि तरीका आगया ।
विनोद आनंद 10/07/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1647 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-90

🌻 गलती
आँख बंध करके चलोगे
तो गीर जाओगे, गीरना
गलती नहि है, आँख बंध
करके चलना और गीर
कर फिर न उठना ।
🌹 विश्र्वास
विश्र्वास करना बूरा नहि,
किसी कि मीठी मीठी
बातों से प्रभावीत होकर
बीना सोचे विश्र्वास
करना सही नहि है ।
सोच समजकर विश्र्वास
करना मगर आँख बंध
करके नहि ।
🌺 बातों से जीवन
कुछ बातें सुनाता हूँ मैं
जो जरूरी है तुम्हारे लिए,
ध्यान से सुनना, मन से
दिमाग में और दिल से रोम
रोम में उतारना फिर देखना,
कितन किंमती है मेरी बातें ।
बातों से बात बनती है, बात
बनने से काम बनता है और
काम से जीवन बनता है ।
विनोद आनंद 30/06/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1565 जिंदगी कि जीत

दिल है कि मानता हि नहि
मन है कि सुनता हि नहि
ईन्द्रिया है कि छोडती हि नहि
न जाने ज्ञान कहा छूप गया है
और बुध्धि कहाँ चलती गई ।
करे तो क्या करे जिवन सहि
चलता हि नहि ?
बस सहि सोच कि जरूरी है ।
ज्ञान को जगा के बुध्धि से
आत्मविश्र्वास से दिल-दिमाग
ईन्द्रयों को वश में करना है ।
नहि है यह ईतना आसान
फिर भी थान लो तो नहि है
ईतना मुश्केल, अभ्यास से ।
दिल-दिमाग, ईन्द्रयों पर संयम
से सहि जीवन जी शकते हो ।
प्रयास करलो, कोशिश करलो
कोशिश करने वाले हारते नहि ।
दिल मान जाएगा, मन तुम्हारी
बाते मानेगा, ईन्द्रियों से दाम
छूडा पाओगे, आत्म जागेगा ।
यहि श्रेष्ठ जीत है जिंदगी कि ।
विनोद आनंद 12/04/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1532 समझोता -1

समझोता करना शीख लिया
जिसने जिना आगया समझो ।
समझोता कर लिए जिसने
समझो सफल हो गया ।
समझोता है बडा बडप्न
और बडी बुध्धिमत्ता ।
समझोता सँवार शके जीवन ।
समझोता करावे समाधान
करे दूर समस्याओ के पहाड ।
समझोता नहि तो पराशानीयाँ
ठोकरें और दुःख का हो सीलसीला ।
समझोता से परिवार में,समजा में
देश परदेश में हो शांति का निर्माण ।
समझोता गमों से, किस्मत से,
खूद से,जरूरीयात से अपनों से,
दुश्मन से, परिस्थिति से करलो ।
जिंदगी कभी नहि सताएगी और
जिंदगी आसान और महान बनेगी ।
जिंदगीमें समझोता वोहि करेगा जो
सरळ ,सहज, सात्विक, नम्र और
हकारात्म द्रष्टि रखता हो ।
समझतो वो हि कर शकेगा जो
त्याग करे, कुछ भूल जाए, माझ
कर दे, बडा मन, उदार दिल हो ।
समझोता में हि है सुख शांति ।
विनोद आनंद 15/03/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1531 आरंभ में शूरा फिर न जोस

कोई भी काम में आरंभ में
शूरा और फिर बाद में न
जोश, न होस एसा क्यूँ ?
शरूआत तेजी से होती है
फिर समय के साथ गति
कम होने लगती एसा क्यूँ ?
हम अपना साहस और
जोस और काम कि लगन
बरकरार नहि रख शकते तो,
जोस और गति कम होती है ।
हमे काम किसी के प्रभाव
और दबाव में आकर करने
का आरंभ किया हो तो,
जोस और गति कम होती है ।
दिल में भावनाए, मन में
विचारों और आत्मा जो
अच्छे बूरा का प्रतिक है, ईन
तीनों मे समतुलत नही है तो,
जोस और गति कम होती है ।
निर्णय सहि न हो या उस कि
संकल्पना (visualization)
नहि करते या नकारात्मकता हो,
तो जोस और गति कम होती है ।
अपनी बात परिविर को या मित्रो
को नही बताते या किसे मदद
और सलाह नहि ले शकते तो,
जोस और गति कम होती है ।
खुद का आत्म विश्र्वास कि
कमी और असफलता का डर,और
काम करने कि ईच्छा का अभाव,
तो जोस और गति कम होती है ।
यह सब कमीयाँ दूर होगी तो
आरंभ से अंत तक शूरा,और
जोस में रह शकोगे तो सफल होंगे ।
विनोद आनंद 14/03/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड