775 जो भी करो….. 

जो भी करो सोच समज के, 

और एकाग्रता से करो ।

जो भी करो अयोजन से, 

समयसर और नियमीत करो ।

जो भी करो मन बुध्धि और

दिल कि सहमति से करो ।

जो भी करो आत्म विश्वास 

और होस में  करो ।

जो भी करो सब कि भलाई

और हीत के लिए करो ।

जो भी करो सफलता और

सार्थकता के लिए करो ।

जो भी करो लगन, मगन

और अगन से करो ।

जो भी करो सब कि खुशी

और शांति के लिए करो ।

जो भी करो किस के विरुध्ध

या बदले कि भावना से न करो ।

जो भी करो प्रसन्न चित और

आनंदित होकर करो ।

जो भी करो अच्छा करो

और शुभ करो ।

जो भी करो ईमानदारी

और निष्ठा से करो ।                                 

जो भी करो आन बान

और शान बढे एसा करो ।

विनोद आनंद                               14/05/2017 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

692 पहेरा

दिल से निकली 

हर बात दुआ है, 

दुआ शुभ मंगल है ।

मन से निकली 

हर बात विचार है, 

सद विचार सत्कर्म है ।

दिल भावना का ठीकाना

जज़बात कि जननी ।

शुभ मंगल भावनाएँ तो

जीवन से शुभ मंगल हो ।

मन कि हर बात न मानो

वो ईन्द्रियों से प्रेरीत है ।

बुध्धि से प्रेरीत नही है ।

मन कि वो बात मानो

जो  बुध्धि से प्रेरीत हो ।

वरना मन बेकाबु हो जाएगा ।

इन्द्रियों विषयों से प्रेरीत है

विषयों ईच्छाओ से प्रेरीत है

विषयों का नशा विष है

मन और बुध्धि का पहेरा न हो

तो इन्द्रियों बेकाबु हो जाएगी ।

आत्म परमात्मा का अंश

शक्ति का सोत्र 

संस्कारी आत्मा 

शक्ति का सही उपयोग, 

वरना गलत उपयोग ।

विनोद आनंद                             09/03/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

  

669 जागो और जगाओ

खुदको जगाओ और 

दूसरों को भी जगाओ ।

जागना है निंद से समयसर

वरना देरी हो, जाएगी बैरी, 

ईसलिए जागो और जगाओ

जागना है मन को 

जो है भोग विलास में 

वरना जिंदगी बीत जाएगी

न कुछ कर शकोगे ।

ईसलिए जागो और जगाओ

जगाना है भावनाओ को

दिल में वरना भावनाहीन

जीवन है जानवर समान ।

ईसलिए जागो और जगाओ

जगाना है अच्छे विचारों को

वरना नही  रोक पाओगे

बुराईओ को ईसलिए 

जागो और जगाओ ।

जगाओ आत्मा को

आत्मशक्ति को वरना

होगी आत्मगानी ।

ईसलिए जागो और जगाओ ।

विनोद आनंद                          16/02/2016      फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

सोच समज़ कर वरना,,,,, 

​किस से क्या शीखे ? 

कोई किसी से शीखना 

नही चाहता ।

किसी को क्या सुझाव दे

कोई कुछ सुनना 

नही चाहता ।

किसी से क्या संवाद करे

सभी वाद विवाद करते है ।

कोई संवाद करना नही चाहते ।

किस से  दिल कि बात कहे

कोई दिल बात समजना नही चाहता ।

किस से अपनी परेशानी कहे

किसी को दूसरों कि फिक्र ही नही ।

किस से अपनी समस्या का 

समिधान पूछे ।

कोई समाधान नही चाहता ।

किस से अपनी खुशी सेर करे ।

किसी को दूसरों कि खुशी 

बरदास्त नही होती ।

किस से क्या प्रेम जताए

कोई प्रेम को समज नही चाहता ।

क्या करे, क्या न कर, कैसे करे ? 

जो करे वो सोच समज करे, 

वरना होगा धोखा और पस्तावा ।

विनोद आनंद                              31/12/2016     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

सोना चांदी जैसा जीवन

​दिल खुस तो सोना

दिल खुस कैसे रहे ? 

दिल में छल कपट, 

द्वेष और ईर्षा न हो तो ।

वो कैसे हो ? 

दिल में प्रेम,दया 

जगाने से ।

मन प्रसन्न तो चांदी

मन प्रसन्न कैसे रहे ? 

मन प्रवित्र,संयमी हो और

मन में सदभाव,समभाव हो तो

वो कैसे हो ? 

अभ्यास से मनको संयमी

और संस्कारी बनाने से।

तन स्वस्थ तो सुंदर जीवन ।

तन स्वस्थ कैसे रहे ? 

नियमीत, प्रमासर, 

पौष्टिक आहार और

कसरत,प्राणायाम से

तन स्वस्थ रहेगा ।

तन,मन स्वस्थ और

सुंदर जीवन तो सफल 

सार्थक और समृध्ध ।

विनोद आनंद                           28/10/2016       फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

मिलो तो एसे जैसे

​मिलो तो एसे मिलो जैसे 

बरसों के बाद मिले हो ।

ईतनी खुसी जताओ कि

रेगीस्तान मे फूल खिल जाए ।

मिलो तो एसे मुस्करा के मिलो कि 
चहरे से हसी कि बारिस हो और 

बिछडने के बाद तुम्हारी याद सताए ।

मिलो तो एसे मिलो जैसे 
कोई अपने को मिले हो ।

मिल के पहले नमस्कार, 

फिर   हालचाल,और कहो

मैं तुम्हे लिए क्या कर शकता हूँ  ।

बिछडो तो एसे जैसे पूरा
दिन उनके दिल दिमाग 

पे छाए रहो और फिर 

मिल ने कि चेष्ठा करे ।

विनोद आनंद                        05/10/2016           फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

सिर्फ एक बार 

​सिर्फ एक बार दिल से 

चहेर पर मुस्कान लाकर देखो 

मुस्कराना शीख जाओगे ।

सिर्फ एक बार खुद से 
बात करके तो देखो, 

कैसा शकून मिलता है और

अकेलापन दूर हो जाता है ।

सिर्फ एक बार मन कि
मोनोपोली तोड के देखो, 

मन तुम्हारी हर बात मानेगा ।

सिर्फ एक बार अपनी जिद्द 
के चक्रव्यु से बहार आके देखो, 

सब कुछ सही होता जाएगा ।

सिर्फ एक बार दूसरों
को खुस करके देखो, 

सुखी का ठीकाना मिल जाएगा ।

सिर्फ एक बार दूसरों का
दु:ख दूर करके देखो, 

तुम्हार दु:ख कम हो जाएगा ।

सिर्फ एक बार खुद कि 
गलती स्वीकार करके देखो, 

गलती सुधारना आजाएगा ।

सिर्फ एक बार गलती कि
माफ़ी माग कर तो देखो, 

मन हलका हो जाएगा ।

सिर्फ एक बार गलत आदत से
छूटकारा पाके तो देखो, 

थोडी परेशानी कम हो जाएगी ।

 सिर्फ एक बार वाणी में

मीठास लाके तो देखो, 

कडवाहट पीघल जाएगी ।

एसा सिर्फ एक बार एसा करोगे
तो बार बार करना आजाएगा और

सुखद परिवर्तन आएगा जीवन में ।

विनोद आनंद                            04/10/2016       फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड