1750 एक जान, सो दुश्मन

एक जान और सो दुश्मन
हमारे दोस्त कम है और
दुश्मन ज्यादा तो क्या करे ?
दुश्मन कौन, जरा जाने और
कम करके दोस्त बनाए ।
पहेला दुश्मन तुम खुद हो ।
दूसरा दुश्मन है तुम्हारा मन ।
तुम्हार मन ईन्द्रियो का गुलाम
और आप मन के गुलाम ।
ओर कई दुश्मन आप के मन
में पनाह लिए हुए बैठे है ।
वो षढ दुश्मन है काम, क्रोध
लोभ, मोह, मद और ईर्षा ।
यह सब भीतर के दुश्मन है
न जाने बहार के कितने होंगे ।
आप के दुर्गुणें,बूरी आदतें और
दुर्भावनाए, दुश्मन से कभ नहि ।
दुश्मन बहार के या भीतर के
उसे बचना या दुश्मनी खत्म
करो या समाधान करो ।
दुश्मननो के साथ जीना भी
क्या जीना है जिसे तकलीफें,
मुश्किलें और परेशान और
दु:खी होकर जीना पडता है ।
कम दुश्मन और अच्छे दोस्त
और परिवार के साथ हसी
खुशी और शांति से जीना हि
सही तरीका है जीनेका ।
ओर छूपे दुश्मन है सोसीयल
मीडीया और टेलीवीशन जो
आप के जीवन के महत्त्वपूर्ण
समय बरबाद करते है और आप
कि एकाग्रता कम करते है ।
सावधान एसे दुश्मनो से उसे
छुटका पाने का सोचो ।
एक जान और सो दुश्मन तो
कैसे चैन और सुख शांति कि
जिंदगी जी पाओगे जरा सोचो ।
विनोद आनंद 08/10/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1630 एसा हि बनो

मर्यादा महानता और
अमर्यादा नीचता है,
मर्यादित जीवन जीओ ।
उदारता उत्तमता और
कंजूसाई मूर्खता है,
उदारता दिखाओ ।
समजदारी सफलता
और नासमझ निष्फलता
समजदार बनो ।
नम्रता ईन्सानीयत और
क्रूरता शैतानीयत है,
नम्र बनो ।
उत्साह उन्नति और
निराशा अधोगति है ,
जीवन में उत्साही बनो
समाधान समाधि और
असमाधान लडाई,
समाधान पर ध्यान दो ।
प्रेम परमात्मा है और
नफरत दुश्मन है ।
परमात्मा को प्रेम करो ।
हिंमत साहस है
कमजोरी निर्बलता है
हिंमतवान बनो ।
सहिष्णुता संबंध का
रखवाल संबंधी है,
असहिष्णुता संबंध
तोडने वाल वैरी है ।
सहनशीली बनो ।
सदगुणो सुंदरता और
दुर्गणो कुरूपता है
सदगुणो बनो ।
अच्छी आदतें अच्छा
जीवन और बुरी आदतें
बदनाम जीवन ।
अच्छा जीवन सुख
शांति, बदनाम जीवन
दु:खी, अशांत जीवन ।
भक्ति हि मुक्ति और
भोग हि है बंधन,
भक्त बनो भोगी नहि ।
विनोद आनंद 14/06/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1469 जिंदगी कि सार्थकता

जिंदगी कि सार्थकता किस में
कुछ पाने में या कुछ खोने में ?
कुछ खोये बीना कुछ पा नहि
शकते, पाना और खोना हि
जिंदगी है । हर हाल में खुश
रहने में है जिंदगी के लिए बुराई को
छोडना पडेगा, बुराई छोडकर
अच्छाई को अपनाने में हि है
जिंदगी कि सार्थकता ।
दुर्गणो को छोडकर और सद्
गुणो को अपनाने में हि
जिंदगी कि सार्थकता है ।
बुरे ईरादे और बुरी आदतों को
छोडना और अच्छे ईरादे और
आदतों को अपनाने में हि
जिंदगी कि सार्थकता है ।
बुरे शौख और व्यसनों को छोडने
में हि जिंदगी कि सार्थकता है ।
अपनों से प्यार दूसरो से सद
भाव और सम् भाव जताने में
हि जिंदगी कि सार्थकता है ।
एक आदर्श व्यक्ति बनने में हि
जिंदगी कि सार्थकता है ।
जिंदगी कि सार्थकता में हि
जिंदगी कि सफलता छूपी है ।
विनोद आनंद 24/01/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1321 समय कि पुकार और माँग

समय कि पुकार क्या है ?
समय कि पुकार सांभळो है ।
समय कि माँग क्या है ?
समय कि माँग समजो ।
समय कि पुकार-माँग है
कि समय के साथ चलो,
जीवन में नियमित बनो,
प्रमाणिक बनो ।
समाज में कई दुर्घटनाए
घट रही है और माहोल
तनाव और चिंता का है
समय कि माँग है कि
समय वर्ते सावधान,
और जागृत हो जाओ
कि आप कोई दुर्घटना
के शिकार न हो जाओ ।
समय कि पुकार है कि
अपने आपको बचाए ।
दुर्घटनाओ का मूल है
लोगों में ईन्सानिय का
अभाव और दुर्गणों,
कुभाव, और कुविचारो
कुकर्म का प्रभाव ।
समय कि माँग और
पुकार है कि हम अपने
व्यक्तित्व को निखारे, सद्
गुणोंसे, अच्छी आदतोंसे,
भावनाओं से और सद्
आचरण से ।
सयम कि पुकार और
माँग का अनुमोदन करे ।
विनोद आनंद 09/10/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड