1630 एसा हि बनो

मर्यादा महानता और
अमर्यादा नीचता है,
मर्यादित जीवन जीओ ।
उदारता उत्तमता और
कंजूसाई मूर्खता है,
उदारता दिखाओ ।
समजदारी सफलता
और नासमझ निष्फलता
समजदार बनो ।
नम्रता ईन्सानीयत और
क्रूरता शैतानीयत है,
नम्र बनो ।
उत्साह उन्नति और
निराशा अधोगति है ,
जीवन में उत्साही बनो
समाधान समाधि और
असमाधान लडाई,
समाधान पर ध्यान दो ।
प्रेम परमात्मा है और
नफरत दुश्मन है ।
परमात्मा को प्रेम करो ।
हिंमत साहस है
कमजोरी निर्बलता है
हिंमतवान बनो ।
सहिष्णुता संबंध का
रखवाल संबंधी है,
असहिष्णुता संबंध
तोडने वाल वैरी है ।
सहनशीली बनो ।
सदगुणो सुंदरता और
दुर्गणो कुरूपता है
सदगुणो बनो ।
अच्छी आदतें अच्छा
जीवन और बुरी आदतें
बदनाम जीवन ।
अच्छा जीवन सुख
शांति, बदनाम जीवन
दु:खी, अशांत जीवन ।
भक्ति हि मुक्ति और
भोग हि है बंधन,
भक्त बनो भोगी नहि ।
विनोद आनंद 14/06/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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1469 जिंदगी कि सार्थकता

जिंदगी कि सार्थकता किस में
कुछ पाने में या कुछ खोने में ?
कुछ खोये बीना कुछ पा नहि
शकते, पाना और खोना हि
जिंदगी है । हर हाल में खुश
रहने में है जिंदगी के लिए बुराई को
छोडना पडेगा, बुराई छोडकर
अच्छाई को अपनाने में हि है
जिंदगी कि सार्थकता ।
दुर्गणो को छोडकर और सद्
गुणो को अपनाने में हि
जिंदगी कि सार्थकता है ।
बुरे ईरादे और बुरी आदतों को
छोडना और अच्छे ईरादे और
आदतों को अपनाने में हि
जिंदगी कि सार्थकता है ।
बुरे शौख और व्यसनों को छोडने
में हि जिंदगी कि सार्थकता है ।
अपनों से प्यार दूसरो से सद
भाव और सम् भाव जताने में
हि जिंदगी कि सार्थकता है ।
एक आदर्श व्यक्ति बनने में हि
जिंदगी कि सार्थकता है ।
जिंदगी कि सार्थकता में हि
जिंदगी कि सफलता छूपी है ।
विनोद आनंद 24/01/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1321 समय कि पुकार और माँग

समय कि पुकार क्या है ?
समय कि पुकार सांभळो है ।
समय कि माँग क्या है ?
समय कि माँग समजो ।
समय कि पुकार-माँग है
कि समय के साथ चलो,
जीवन में नियमित बनो,
प्रमाणिक बनो ।
समाज में कई दुर्घटनाए
घट रही है और माहोल
तनाव और चिंता का है
समय कि माँग है कि
समय वर्ते सावधान,
और जागृत हो जाओ
कि आप कोई दुर्घटना
के शिकार न हो जाओ ।
समय कि पुकार है कि
अपने आपको बचाए ।
दुर्घटनाओ का मूल है
लोगों में ईन्सानिय का
अभाव और दुर्गणों,
कुभाव, और कुविचारो
कुकर्म का प्रभाव ।
समय कि माँग और
पुकार है कि हम अपने
व्यक्तित्व को निखारे, सद्
गुणोंसे, अच्छी आदतोंसे,
भावनाओं से और सद्
आचरण से ।
सयम कि पुकार और
माँग का अनुमोदन करे ।
विनोद आनंद 09/10/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1268 जिंदगी बहेतर कैसे बने-2

-जिंदगी बहेतर बनाने के लिए
जिंदगी में सतत सुधार से
जिंदगी बहेतर बन शकती है ।
जिंदगीको बहेतर बनाने कि टीप्स ।
दुःखी हो तो थोडा समय शांत
रहो फिर लंबी साँस लो और
धीरे धीरे बहार निकालो ।
थोडे समय तक प्राणायाम करो ।
जो चिज़ या व्यक्ति पसंद नहि
उसे दूर रहो नहि तो गरबड होगी ।
चिज़ो का एक साल तक उपयोग
न किया हो निकाल दो या जरूरत
मंद को दो तो आपको खुशी होगी ।
सबको खुश रखनेकि कोशिश न करो
थोडे शब्दो में काम चल जाए तो
ज्यादा शब्दो का ईस्तमाल न करो ।
बातचीत करो वाद विवाद न करो ।
काम करने कि जगह एकदम
व्यवस्थित रखीए तो आप का
मन शांत और सकारात्म रहेगा ।
किसी भी बात का अनुमान मत
लगाना गेरसमज हो शकती है
बात करके या पूछकर जानलो ।
सोचो कौनसी महत्वपूर्ण काम है
जो मैं आसानीसे करके जिंदगी
बहेतरी बना शकता हूँ वो करो ।
जीओ तो एसे जीओ कि जिंदगी
बहेतरीन बने नाकामियाब नही । विनोद आनंद 13/08/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1267 जिंदगी बहेतर कैसे बने-1

-जिंदगी बहेतर बनाने के लिए
जिंदगी में सतत सुधार से
जिंदगी बहेतर बन शकती है ।
सुधार के लिए, क्या कमी है या
क्या खराबी या कौनसी खराब
आदते और दुर्गुण है जो जिंदगी
को बहेतर बनाने से बाधक है ।
उसे जानकर दूर करना चाहिए ।
जिंदगीको बहेतर बनाने कि टीप्स ।
घर में सब चिज़ें अपनी अपनी जगह
पर रखे तो वो आशानीसे मिल शके ।
कल क्या काम करना है उस कि
यादी अगले दिन तैयार करो तो
सब काम आसानी से पूरे होंगे ।
घरमें खरीदी हप्तेमें एक बार करो ।
आप जो भी काम करते है वो
100% और एकाग्रता से करो ।
एक हि समय में एक हि काम
करे तो अच्छा परिणाम मिलेगा,
और जिंदगी बहेतर बनेगी ।
उन चीजों को कभी न करे
जो आप को पसंद नही ।
रोज कुछ एक अच्छा काम करे,
जिसे मन हलका और खुश रहे ।
टीप्स ओर भी है ईन्जार करे ।
जिंदगी बहेतर कैसे बने – 2
क्रमशः
विनोद आनंद 13/08/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1155 मन कि शांति

मन कि शांति, श्रेष्ठ संपदा
मन कि शांति, स्थिर मन
मन कि शांति, विवेक बुध्धि
मन कि शांति, मन कि शक्ति
मन कि शांति, सही निर्णय
मन कि शांति इन्दियों पर काबू
मन कि शांति, आत्मविश्र्वास
मन कि शांति, सदगुणों का बीज़
मन कि शांति, दुर्गुणों का दुश्मन
मन कि शांति, सही दिशा
मन कि शांति, सही रास्ता
मन कि शांति, चारित्र घडतर
मन कि शांति, सुख शांति समृध्धि
मन कि शांति, स्वर्ग का निर्माण
मन कि शांति हर समस्या
और मुश्केलिओ का उपाय ।
मन में शाति आए कैसे ?
लो द्रढ निर्णय मन को शांत
करने का और मन को शांत
मौन कि साधना, ध्यान और
प्रणायाम से करो ।
हंमेशा याद रखो में आत्मा
शांत स्वरूप और बोलो मंत्र
ॐ शांति ॐ शांति ॐ शांति ।
साधना बीना न कोई सिध्धि ।
मन कि शांति बीना सफलता नहीं ।
विनोद आनंद 24/04/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1073 क्रोध का परिवार

कामना कि पूर्ति न हो या
तुम्हारी ईच्छा के अनुसार
न चले या आपका अपमान हो
या अहंकार को चोट लगे ।
तब आता है क्रोध ।
क्रोध से मूढता,मूढता से
स्मृति से और स्मृति
बुध्धि नास होती है और
बुध्धि से विनाश होता है ।
क्रोध दुर्गुणो का राजा है ।
क्रोध का पूरा परिवार है ।
क्रोध की बहन है, ज़िद ।
क्रोध की पत्नी है, हिंसा ।
क्रोध का बडा भाई है, अंहकार ।
क्रोध का बाप है, भय ।
क्रोध की बेटियाँ हैं निंदा-चुगली ।
क्रोध का बेटा है बैर ।
क्रोध की बहू है ईर्ष्या
क्रोध की पोती है घृणा
क्रोध की माँ है उपेक्षा और
क्रोध का दादा है द्वेष ।
तो इस परिवार से हमेशा
दूर रहें और हमेशा खुश रहो ।
तो दुर्गणो से मिलेगी मुक्ति और
सद् गुणो से होगी दोस्ती ।
विनोद आनंद 10/02/2018
फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड