1073 क्रोध का परिवार

कामना कि पूर्ति न हो या
तुम्हारी ईच्छा के अनुसार
न चले या आपका अपमान हो
या अहंकार को चोट लगे ।
तब आता है क्रोध ।
क्रोध से मूढता,मूढता से
स्मृति से और स्मृति
बुध्धि नास होती है और
बुध्धि से विनाश होता है ।
क्रोध दुर्गुणो का राजा है ।
क्रोध का पूरा परिवार है ।
क्रोध की बहन है, ज़िद ।
क्रोध की पत्नी है, हिंसा ।
क्रोध का बडा भाई है, अंहकार ।
क्रोध का बाप है, भय ।
क्रोध की बेटियाँ हैं निंदा-चुगली ।
क्रोध का बेटा है बैर ।
क्रोध की बहू है ईर्ष्या
क्रोध की पोती है घृणा
क्रोध की माँ है उपेक्षा और
क्रोध का दादा है द्वेष ।
तो इस परिवार से हमेशा
दूर रहें और हमेशा खुश रहो ।
तो दुर्गणो से मिलेगी मुक्ति और
सद् गुणो से होगी दोस्ती ।
विनोद आनंद 10/02/2018
फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड

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1023 आज कल और आज

आज आप कैसे है ,

कल कैसा होना है ।

कल जब आज बने

तब आप कैसे है ।

चेक करना है कि

आपमें सुधार है या

आप जैसे थे एसे है 

या ज्यादा बिगडे है ।

पहेले आप आलसी थे

आज कर्मयोगी हो ।

वक्त के साथ साथ 

हमे सुधरना है वरना

बिगाडने का तो जारी है ।

चोर और दुर्गुण को 

आमंत्रण कि जरूत नही

सज्जन और सद् गुण

को आमंत्रित करना है ।

दुर्गुणो से सावधान 

जीवन में न आ जाए 

सद् गुणको जीवन में

आमंत्रित करना है ।

बुराई बीन बोलाए 

जीवन में आजाती है ।

अच्छाई को जीवन 

बुलाना में पडता है ।

हमे कल से आज 

थोडा अच्छा होना है ।

हर दिन सुधार जीवन में 

बुराई और दुर्गुण से मिलेगी 

मुक्ति और अच्छाई से

जूड जाएगा रिश्ता ।

विनोद आनंद                              03/01/2018       फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

956 💐शेर शायरीयों का गुलदस्ता-45

🌹दिल या दिमाग 

कैसे बताए दिल का 

हाल किसी को ? 

सब सोचते है दिमाग से ।

कब दिल से और कब 

दिमाग से सोचना यह 

अंदाज होना जरूरी है ।

वरना गरबड हो जाएगी ।

👄 न होगा गलत

रोको जूबा को गलत बोलने से

वरना गज़ब हो जाएगा ।

सोचो जूबा बोल देने से पहेले

अगर है गलत तो रोकलो ।

तो कभी भी नहीं होगा गलत ।

🌹 कम नही है

हसता हुआ चहेरा किसी 

खिले हुए गुलाब से कम नही है ।

व्यक्ति में सद् गुणो कि सुवास

गुलाब कि खुशबू से कम नही है ।

रोता हुआ चहेरा किसी 

मुरझाए हुए फूल से कम नही है ।

व्यक्ति में दुर्गणो कि दुर्गंध

गटर कि दुर्गंध से कम नही है ।

💥कोशिश

उस का कमीज मेरी कमीज से

सफेद कैसे ? सोच के अपनी

कमीज को सफेद करने कि

मानवी कोशिश करता है ।

लेकिन उस के जीवन में 

मेरे जीवन के सद् गुणो से

ज्यादा कैसे  ? सोच कर

सद् गुणो बढाने कि मानवी

नहीं करता कोशिश ।

विनोद आनंद                               30/10/2017

फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

897 जिंदगी जंग के स्वर्ग

जिंदगी जंग हम सिपाही ।

रहना है जागृत,चौकना और 

तैयार दुश्मनों से जंग खेलने को ।

अंदर दुश्मन, बहार दुश्मन ।

घर में दुश्मन,समाज में दुश्मन 

जहाँ आँख खोल के देखो

दुश्मन ही दुश्मन देखाई देंगे ।

जिंदगी को जंग बना देते है ।

अंदर के दुश्मन है….. 

काम, क्रोध, लोभ, मोह, 

मद और मत्सर-ईर्ष जो देते है

बहार के दुश्मन को जन्म ।

ईसलिए पहेले जंग खेलकर 

उन पर जीत हासील करनी है ।

फिर न होगा कोई बहारी दुश्मन ।

कैसे खेलेंगे जंग अंदर के दुश्मन से ।

जीवन में दुर्गुणो से मुक्ति, 

बूरी आदतों छूटकारा पाकर

सद् गुणी बनकर अपने 

व्यक्तित्व को निखारना है

सवाँरना है और जिंदगी का

जंग पर जीत हांसल करनी है ।

फिर न होगा कोई दुश्मन ।

सभी होंगे दोस्त फिर जिंदगी 

जंग नही है, जिंदगी स्वर्ग है                                     विनोद आनंद                                24/08/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड 

821💐शेर शायरीयों का गुलदस्ता-34

💛 यकीन नही होता

सोच ने से नही थकाता

लिखते लिखते नही थकाता

कहते कहते नही थकता लेकिन 

यह सुनते सुनते थक गया कि

कुछ नही होगा,कोई नही सुधरेंगे 

सब अपनी अपनी मस्ती में  है 

कोई नही सुनता किसी कि ।

यकीन नही होता कि ज्ञान 

ईतना बेअसर हो गया है कि

लोग बेअसर हो गए है ।

💙 बात बनेगी 

जब कोई बात बीगड जाए

सभाँल ना होगा खुदको 

फिर बात को एसे कि 

बात ओर न बीगडे 

तो ही बात बनेगी वरना 

बात ओर बगडती जाएगी ।

💚 निकाल दो तो

पथ्थर से बीन जरूरी निकाल दो 

तो भगवान कि मूरत बनती है ।

अगर पथ्थर दिल ईन्सान से

बीन जरूरी दुर्गुण निकाल दो

तो एक आर्दश ईन्सान बनता है ।

विनोद आनंद                                22/06/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

801 दाग

जैसे दाग कपडे पे, धूल ने 

कि तुरंत कोशिश करते है 

एसा नही किया तो

कपडे पे दाग पे दाग

लगते जाएँगे और 

कपडे का रंग या

सुरत बदल जाएगी ।

एसे जिंदगी में कई 

दाग लगते रहते है 

लेकिन उसे धूल ने कि 

कोशिश नही करते और

दाग ईतने बढ जाते है

कि जिंदगी का रंग-ढंग

बदल जाता है और 

जीना मुश्केल हो जाता है ।

जब भी दुर्गुण का दाग लगे

तो तुरंत धूलने कोशिश करे 

तो निकल शकता है । हो शके

तो जिंदगी पे सद् गुणों का 

टिका लगाने का प्रयाश करना ।

जिंदगी दाग रहीत और सद् 

गुणों के टिको से चमकेगी ।

विनोद आनंद                                 05/06/2017

फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

686 भेद भाव

अपने लिए कुछ अलग

दूसरों के लिए कुछ अलग

नियम,नज़रिया, और सोच ।

दूसरों की बडी समस्या छोटी

अपनी छोटी समस्या बडी ।

दूसरों कि गलती, माफ नही

अपनी गलती माफ ।

दूसरों के दुर्णगु कहेना

अपने दुर्णगु छूपाना ।

दूसरों के सद् गुण न देखना

अपने सद् गुण कहेना ।
दूसरों के लिए कुछ ओर ।

अपने लिए कुछ ओर

दूसरों का व्यवहार निंदनीय, 

अपना व्यवहार सराहनीय ।

दूसरों का स्वभाव खराब, 

अपना स्वभाव अच्छा ।

दूसरे का जो भी कर्म  वो गलत, 

अपना जैसा भी कर्म  वो सही ।

दूसरो की गलतियाँ निकालना

अपनी गलती नही निकालना ।

दूसरो सब जूठ्ठे, अपना सब सच ।

दूसरों का ओर अपनो का अलग

हीसाब क्यूँ ? दूसरों के साथ 

एसा भेदभाव क्यूँ ? 

जब खत्म हो एसा भेदभाव

तब होगा परस्पर मेल जुल ।

विनोद आनंद                          05/03/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड