1796 पहेचान

अपनो कि,रिश्तेदारो कि,दोस्तों
कि असली पहेचान अच्छे वक्त में
नहि होती, अच्छे वक्त में तो सब
मधुमखीयों कि तरह चीपकते है ।
असली पहेचान बूरी परिस्थितियों
में होती है, जो मतलबी होते है वो
छोड देते है और जो सच्चे है वो
साथ रहते है । निर्मित परिस्थितियों
में साथ रहने वाला सहि रिश्तेंदार है ।
* रोग कि दशा में साथ रहने वाला
* दुःख दर्द कि अवस्था में साथ दे ।
* गरीबी कि दशा में अपना मानने वाला
* किसी से दुश्मनी-मुश्किल के समय साथ दे ।
* महत्तवपूर्ण पारिवारिक फैसलो में साथ दे ।
* परिवार मृत्यु के दुःख में शामिल हो ।
एसी विकट/विपरीत परिस्थितियों में हि
सब कि असली पहेचान सामने आती है ।
मतलबी से रिश्ता नहि रखने चाहिए ।
रिश्तों को जिनो समझो चकासो और
फिर उसे कुछ भी किंमत पर । निभाओ ।
विनोद आनंद 19/11/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1763 संस्कार

संस्कार शुभ या अशुभ और
अच्छे या बुरे हो शकते है ।
शुभ-अच्छे संस्कार जीवन कि
वो संपदा है जो जीवन सँवारे,
वो अच्छी परवरिश से,संस्कारी
मात,पिता,परिवार से मिलता है ।
मात और पिता कि पवित्र फर्ज है,
कि वो बच्चो को अच्छे संस्कार दे ।
बच्चे का संस्कार 6 तरिके से बनते है
– आत्मा के असली संस्कार से (प्रेम,दया,करूणा,आनंद,पवित्रता,शांति)
– पूर्व जन्म के संस्कार से
– माता पिता, और परिवार से
– सोसायटी, दोस्तो, वातारण से
– व्यक्ति कि ईच्छा शक्ति से ।
– सत्संग से अच्छे संस्कार बनते है ।
संस्कारी माता पिता के संस्कार,
और ईच्छा शक्ति प्रबल तो, वातारण
के बुरे संस्कार का असर नहि होता ।
वो हि संस्कार दूसरे जन्म में पूर्व
जन्म का संस्कार बनता है ।
माता पिता कि परवरिश से बच्चो में
अच्छे संस्कार का निमार्ण होता है ।
अच्छे संस्कार हि संपदा और सुख
शांति का बीज होता है
विनोद आनंद 19/10/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1746 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-91

🌻 वर्तमान को न बीगाडो
कल गया वो भूतकाल
उस को भूला देना,अगर
वर्तमान में जीना है तो ।
कल आएगा वो भविष्य,
उस कि चिंता वर्तमान में
करे के वर्तमान न बीगाडो ।
हसी खुसी वर्तमान में है,
जीना है वर्तमान में, उसे
भूतकाल और भविष्य के
नाम करके वर्तमान को
भूतकाल न बनाओ, वर्तमान
बीगाड के भविष्य न बीगाडो ।
🌹 दौलत
दौलत है जरूरी मगर सब कछ
नही क्यूँ कि अगर कई चीजे
दौलत खरिद शकती है तो कई
चीजे एसी भी है जो दौलत नहि
खरिद शकती है । दौलत जरूरत
से ज्यादा महत्त्व न देना । अपने
परिवार और संबंधो को ज्यादा
महत्त्व दो तो होगा जीवन सफल ।
🍁 काबिल
स्कूल, कोलेज कि कितनी भी
परीक्षा देकर अब जीने के
काबिल बन गए है, मगर क्या
जिंदगी कि परीक्षा में ऊत्तिर्ण
होकर जिंदगी को जीत पाए हो ।
जिंदगी को जीत कर जीना है
हार के नहि । वि फोर विक्टरी ।
विनोद आनंद 04/10/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1689 नासमज

नादान, नासमज, मूर्ख, अल्प
बुध्धि वो है, जो समजते नहि ।
समजना नहि चाहते, वो मद
बुध्धि है या तो है अहंकारी ।
नासमज वो है जो अज्ञानी है
या ज्ञान है फिर भी अपनी
जिद्द या मनमानी कि वज़ह से
समजना नहि चाहे ईसलिए
परिवार में मत भेद, गेर समज
होने से रिश्तें कमजोर होते है ।
घरमें क्लेश तकरार का माहोल
बन जाता है और घर नर्क बन
जाता है ईसलीए नासमज रिश्तें
टूटने का जरिया बन जाती है ।
परिवार में एक दूसरों कि बातें,
भावनाए, तकलीफे समजना है ।
अपनी जिद्द और अहंकार को
टोडना होगा नहि तो रिश्तें टूटेगें
रिश्तों के सिवा परिवार कैसा
होगा ? जीवन कैसा होगा ? सोचो
समजदारी रिश्तोंको निखारती है ।
परीवार में एक दूसरों को समजना
सहन करना, प्रेम करना, सहयोग
करना, सेवा करने कि भावना से
परिवार स्वर्ग और घर बनेगा मंदिर ।
नासमज व्यक्ति दुश्मन परिवार का
और समजदार दोस्त परिवार का ।
समजदारी एक दिव्य सदगुण ।
नासमज एक शैतान का दुर्गुण ।
समजने वाले समज गए, जो न समजे
वो अनाडी है या शैतान से कम नहि ।
विनोद आनंद 07/08/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1682 शराब को छोडो

शराब है खराब, ज़हर,स्वास्थ
का दुश्मन, जिंदगी कि बरबादी ।
लोग पीते है दुःख दर्द में और अब
तो खुशी के माहोल में भी पीते है ।
किसी को देख के पीते है, किसी ने
पीने कि आदत पाल रखी है, कोई
शौख से पीते और दोलत मंद तो
शराब स्टेटस के लिए पीते है ।
मतलब है कि ईन्सान हर हाल में
शराब पीता है, पसंद भी करता है।
चाहे शराब पे प्रतिबंध हो या न हो ।
कई राज्यों में प्रतिबंध है तो कई में
नहिं है लेकिन पीने बालों को क्या ?
प्रतिबंध है तो छूप छूप के ज्यादा
पैसे देकर पीते है और जहाँ नहि है
वहाँ खूले आम पीते है और जिंदगी
का मज़ा उडाके बेहोशी में जीते है ।
शराब ईन्सान को शैतान,बेरह और
बेजिम्मेदार बनाता है और परिवार
के लिए मुशीबत या बोज बन जाते है ।
पैसे वाले तो के परिवार को पैसे कि
तकलिफ नहि होती लेकिन गरीब
शराब पीने लगे तो उस कि आधी से
ज्यादा कमाई शराब में जाती है तो
परिवार क्या हाल होग ? जरा सोचो ।
बुध्धिशाली, समजदार जिंदगी में सुख
शांति से रहने वाले कभी शराब को
छूएगें नहि और गलती से या किसी के
कहने से पीते हो, तो वो छोड देते है ।
हर हालमें ईन्सानको शराब नहि पीना ।
प्रतिबंध है और पोलीस का पहेरा है तो
भी शराब कि तस्करी कैसे होती है ?
दौलत कमाने के लिए कई तरीके है तो
शराब बनाकर या बेचकर लोगों के
स्वास्थ और जिंदगी को बरबाद करके
पाप कि कमाई,कमाके कई परिवारो कि
आह श्राप क्यूँ खरीदते हो ? उसे किसी
का भी भला नहि होता बुरा हि होता है ।
शराबी कि कोई ईज्जत, मान सन्मान
नहि करता बलकी नफरत करते है ।
जो जिंदगी में बहुत तकलीफें, मुशीबतें
बिमारी और नफरत दे उसे तो छोडना
हि अकलमंदी और समजदारी है ।
विनोद आनंद 01/08/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1585 दौलत

ये एसो आराम देने वाली,
लेकिन रातों कि निंद उडाने
वाली, और बगलोंज़,गाडीयाँ
सगवड देने वाली लेकिन दिन
का चैन चुराने वाली, ये दौलत
अगर मिल भी जाए तो क्या है ?
समाज़ में प्रतिष्ठा दिलाने वाली
लेकिन परीवार से सुख छीनने
वाली, और जो चाहे वो सब कुछ
देने वाली, लेकिन अस्वस्थ करने
वाली ये दौलत अगर मिल भी
जाए तो क्या है ?
अमीरों कि नामावली में नाम
लिखने वाली, लेकिन रिश्तेदारों
से दूर करने वाली और महेफिलें
और क्लबो का माहोल देने वाली,
लेकिन परिवार का संग छुडाने
वाली, ये दौलत अगर मिल भी
जाए तो क्या है ?
दौलत कि दौड और नसे ने
अभिमानी और घमंडी बनाने
के बाद,सब कुछ छीन कर,ये
दौलत भी मिल जाए तो क्या है ?
दौलत कि भूख मिटती नहि लेकिन
संस्कार बिगाड ने वाली,शरीर और
संबंध बिगाडने वाली, ये दौलत
अगर मिल भी जाए तो क्या है ?
जरूरत से ज्यादा दौलत है धीमा
और मीठा जह़र, लेकिन जीते जी
मारने वाली ये दौलत अगर मिल
भी जाए तो क्या है ?
विनोद आनंद 02/05/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1567 सुखो का त्रिवेणी संगम

सब से पहेला सुख किस में है ?
वो न हो तो सभी सुख है बेकार ।
पहेला सुख स्वस्थ शरीर में है ।
संकल्प करो स्वस्थ शरीर का ।
प्राथमिकता दो, प्रयास करो ।
सब से बडा सुख कौनसा है ?
वो न हो तो सभी खुस है बेकार ।
सब से बडा सुख है परिवारिक ।
संकल्प करो परिवारिक सुख का ।
कामना, प्रार्थना और प्रयास करो ।
सब से जरूरी सुख कौनसा है ?
सबसे जरूरी सुख भोजन है ।
संकल्प करो,परिश्रम करो पाने का ।
यह तीनों सुख के बाद सब सुख है
वो बीन जरूरी, बाद में समय हो तो
कामना करके करो प्रयास मिले तो
खुश होना,न मिले तो दुःखी न होना ।
बीनजरूरी सुखको प्राथमिकता मत
दो, वरना जरूरी सुख छूट जाएगें ।
शरीर स्वास्थ्य, परिवारिक और
भोजन का सुख है त्रिवेणी संगम ।
जिसे तीनों मिले वो है खुसनसीब ।
विनोद आनंद 14/04/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड