1549 अहंकार

अहंकार क्या है ?
अपने को समष्टि से अलग
समझना और ओरो से
अलग समझना चाहे
अच्छे हो या बुरे वो
हि है अहंकार ।
यह काम मैने किया है
मेरे सिवा कोई नहि
कर शकता वो सोचना
हि है अहंकार ।
कर्तापणा का भाव
हि है अहंकार ।
आत्मियता का अभाव
हि है अहंकार ।
जीवनमे सरलता, नम्रता
का अभाव है अहंकार ।
अपना पन और सहजता
का अभाव अहंकार है ।
अहंकार से मुक्ति कैसे ?
सभी अभाव से मुक्ति हि
अहंकार से मुक्ति है ।
कर्तापणा के अभाव से
हि है मुक्ति अहंकार से ।
अहंकार पतन का रास्ता ।
अहंकार न किसी का
टिका है न टिकेगा ।
अहंकारी को न परिवार,या
न समाज करता है पसंद।
ईश्र्वर को न अहंकार या
न अहंकारी पसंद है ।
अगर भक्त को या देवता
को अहंकार आता है तो
जल्द हि ईश्र्वर लीला करके,
अहंकार से मुक्त करता है ।
अहंकारी न बनो, नम्र बनो ।
विनोद आनंद 28/03/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1533 समझोता-2

समझोता गमों से करो
तो गम कभी नहि सताए ।
समझोता अपनों से करो
तो बनेगें रिश्तें मजबूत ।
समझोता दोस्त से करो
तो दोस्ती बढेगी ।
समझोता नसीब से करो
तो नसीबदार बनोगे ।
समझोता हालात से करो
तो हालात सुधर जाएगा ।
समझोता शत्रु से करो
तो दोस्त बनजाएगा ।
समझोता गेरसमज से
करो तो समझ बढेगी ।
समझोता सद्गुणो से करो
तो सज्जन बनोगे ।
समझोता समस्या से करो
तो समाधान मिलेगा ।
समझोता जिंदगी से करो
तो जिंदगी आसान होगी ।
जिंदगी हि समझोता है,
समझोता हि जिंदगी है ।
समझोता हि सब कुछ है
जिंदगी जीने का सहि
तरीका हि समझोता है ।
समझोता करो,पाओ सुख
शांति और सफलता ।
विनोद आनंद 15/03/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1440 सभी आदर्श व्यक्ति बने

दो प्रकार के मनुष्य है, एक
वो जो जीवन कि सच्चाई के
साथ और दूसरा वो जीवन कि
सच्चाई के विपरीत जीता है ।
एक वो जो जीवन धारा के
साथ,और दूसरा वो जीवन
धारा के विरुद्ध जीवन जीता है ।
दो प्रकार के मनुष्य है, एक वो
जो शास्त्रानुसार और दूसरा वो
जो शास्त्रा विरुद्ध जीता है
एक वो जो परिवार के रीत
रिवाज के साथ और दूसरा वो
जो रीत रिवाज को तोडता रहे ।
दो प्रकार के मनुष्य है, एक वो
जो साथ सहकार के साथ और
दूसरा वो जो परेशान करते है ।
एक वो जो ईमानदारी से और
दूसरा वो जो बेईमानी से जीता है ।
पहेला मनुष्य एक आदर्श व्यक्ति है
और दूसरा को आप क्या होगे ?
आप कौन से प्रकार में आते हो ?
शुभ कामना है मेरी कि सभी पहले
प्रकार का मनुष्य बने दूसरे प्रकार
का मनुष्य कोई भी न बने । बिनती
है मेरी कि,सभी आदर्श व्यक्ति बने ।
विनोद आनंद 29/12/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1402 हम यह भूलें करते है-3

कहेते है कि मनुष्य मात्र भूल के
पात्र लेकिन भूल बार बार करना
मुनासीत नही है फिर भी हम भूलें
करते है क्यूँकि आदत से मजबूर ।
* हम जिंदगी को मोज मस्ती, एसो
आराम का अवसर समज ने कि
भूल करके जिंदगी को बहेतरीन
बनाने का अवसर गवा देते है ।
* हम परिवार में 100% जिम्मेदारी
नही निभाने कि भूल करके संबंध
कमजोर बनाने कि भूल करते है ।
हम बेकार कि बातों में, कामो में
जिंदगी का किमती समय गवा ने
कि भूल करते है,कुछ नही करपाते ।
* हम अपना काम समयसर नही
करने कि और नियमीत नही बनने
कि भूल करते है, बहाने बनाते है ।
* हम नकारात्मकता को अपना ने कि,
सकारात्मक नही बनने भूल करते है ।
* हम हमारी सुख शांति के लिए दूसरों
को जिम्मेदार समजने कि भूल करते है ।
* हमे जो करना है वो नही करने कि,
नही करना है वो करने कि भूल करते है ।
* हम छोटी बात को बढा के बडी बनाने
कि भूल करके जिंदगी में दुःखी होते है ।
हमे भूल कि दुनिया को छोड कर एक
अच्छे ईन्सान कि भाँति जीना है ।
भूलें सुधार ले तो जिंदगी सुधार जाएगी ।
विनोद आनंद 26/11/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1202 विकृति

ईन्सान कितना परेशान,अशांत
तनाव और चिंता ग्रस्त है, क्यूँ ?
उस का कारण है, ईन्सान कि
पसंद और जीवन शैली विकृत
हो गई है ईसलिए दिमाग में हिंसा
नकारात्मक,निराशा, दु:ख और
असुरक्षा के विचार हि आते है ।
इसलिए उसका कर्म भी विकृत
होगा जिसे परेशानी, तनाव, चिंता
बढेगी और स्वभाव विकृत होगा ।
खान पान में विकृति जैसे तीखा
तैली, खट्टा और फास्ट फूड रोगो
को आमंत्रण फिर चिंता और तनाव
दूसरी है विकृत जीवन शैली जैसे
न कोई नियम, न कोई अनुशासन
न कोई प्रयोजन,न कोई आयोजन ।
देर से सोना देर से जागना,न कोई
खाने का मुकरर समय,न रिश्तों का
निभाना न परिवारि, न सामाजिक
न आध्यात्मिक समुलित जीवन ।
यही दो विकृति से तनाव, चिंता
डीप्रेशन होगा जिसे डायाबीटीस
ब्लड प्रेसर और हार्ड एटेक जैसे
रोगो के शिकार बनना है ईन्सान ।
सुख शांति स्वस्थ तन-मन चाहते
हो तो सच्ची और सही पसंद,सच्ची
और सही जीवनशैली है जरूरी ।
विकृत पसंदगी,विकृत जीवनशैली
और स्वभाव को बदल दो तो जिंदगी
सँवर जाएगी वरना बीगड जाएगी ।
विनोद आनंद 08/06/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1195 कोसना नहीं

खुद को कोसना मतलब
खुद कि किंमत घटाना,
खुद पर अविश्वास,
खुद से नाराजगी और
निराशा का प्रतिक ।
किस्मत को कोसना
मतलब आलसी पन
पुरूषार्थ का अभाव,
और किस्मत से उमीद ।
अपनी गलती पर दूसरों
को जिम्मेदार बना कर
दूसरों कोसना मतलब
खुद को बेजिम्मेदार
साबित करना ।
परिवार, सोसायटी
सभ्यो को और दुनिया
को कोसना मतलब सब
का दोष देखना और भूल
निकालकर निंदा करना
सब को कोसते रहेना
नाकामीयाब लोगो कि
कहानी है सिर्फ बदनामी
का ईतिहास रच है,
कामीयाबी का नहीं ।
कोसना मतलब अपना
बदनसीब लिखना और
रोते रोते जीना-मरना ।
कोसना बंध करके
पुरूषार्थ से अच्छी
किस्मत लिखने कि
कोशिश करना जिंदगी है ।
विनोद आनंद 01/06/2018
फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

1162 जिंदगी सिर्फ जिम्मेदारी

जिंदगी ओर कुछ भी नहि, है सिर्फ
जिम्मेदारीयाँ का सिलसिला ।
जन्म से मृत्यु तक जिम्मेदारीयाँ कि
राह पे चलना है और मंझिल पाना है ।
जिम्मेदारीयाँ निभाना हि जिंदगी का
उद्देश्य या मकसद या टारगे होता है।
जिम्मेदारीयों से भागना मतलब
जिंदगी से भागना होता है ।
जिम्मेदारीयों को बोज़ समझना
मतलब जिंदगी को बोझ समझना ।
जिंदगी है जिम्मेदारीयों का ढेर उसे
निभाते निभाते जिंदगी को हलका
और सरळ बनाना है वरना वोही
जिम्मेदारीयों का ढेर जिंदगी को
चकनाचूर कर देगा फिर जिनेका
मकसद हि खत्म हो जाएगा ।
जिम्मेदार व्यक्ति को हि जीनेका
हक होता है बेजिम्मेदार व्यक्ति,
समाज, परिवार देश पर बोज है ।
जिंदगी को और ईन्सानियत कि
किंमत जिम्मेदारीयाँ निभाने से हि
चुका शकते हो वरना देवादार बनके
फिर चुकाने के लिए जन्म मरण के
फेरों में पीसते रहोगे ईसलिए बहेतर
है कि अपनी जिम्मेदारीयाँ पूर्ण करो,
कोई कर्ज लेकर दुनिया से न जाना ।
जिम्मेदारी कर्ज है पिछले जन्म का
ईसलिए पूर्णता से चुका के जाना ।
विनोद आनंद 04/05/2018
फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड