987 श्रेष्ठ संपदा 

जो किंमती है वो श्रेष्ठ है

सब से किंमती संपदा है समय ।

समय का अर्थ जीवन ।

बाद में है संस्कार ने संस्कृति ।

बाद में है स्वस्थ मन और तन ।

बाद में  है परिवार का प्रेम 

बाद में है सद् गुणो का खजाना ।

यह सब संपदा आवश्य है 

यह सब संपदा खुस शांति और

समाज में आदर सत्कार देता है ।

बाद में है धन संपदा और 

स्थावरजंग संपदा ।

यह संपदा जरूरी है ।

यह संपदा सुख सगवड देता है ।

समाज में मान सन्नमान देता ।

जिस के पास सब है वो श्रेष्ठ है ।

जिस के पास सिर्फ धन संपदा है

वो श्रेष्ठ दिखता है लेकिन नही है ।

संतानो संस्कार कि संपदा दो

और धन संपदा कमाने क्षमता दो 

श्रेष्ठ संपदा है संस्कार, स्वस्थ 

तन-मन, परिवार का प्रेम ।

विनोद आनंद                                30/11/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

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960 प्रेम और नफरत

प्रेम है वहाँ नफरत नहीं है ।

नफरत ज़हर है, सभी दुर्गुणों का

बीज है,नफरत का बीज न बोओ ।

जहाँ नफरत वहाँ प्रेम कहाँ  ? 

प्रेम अमृत है, सद् गुणों का

बीज है, प्रेम का बीज बोओ ।

जैसा बीज एसी फसल ।

गटर से फूलों कि सुवास 

नही आशकती । सुवास तो 

बागों से आती है ।

नफरत के पेड पे

प्रेम नही पलता ।

प्रेम के पेड पर नफरत के

कांटे नही होते ।

प्रेम में पूर्णता है और

पूर्णता में परमेश्र्वर है ।

प्रेम परमात्मा कि है आराधना ।

नफरत शैतान कि बेटी है, 

विनाश कि साधना है ।

दिल में प्रेम भरते जाओ तो 

दिल से नफरत नीकल जाएगी ।

जैसे खाली बोत में पानी भरने से

बोतल से हवा बहार आ जाती है ।

विनोद आनंद                                05/11/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

934 मंत्र

जादू टोना से वशीकरण, 

दूसरों पे काबू या उनको

परेशान करने के लिए 

लोग करते है वशीभूत ।

यह एक मैली विध्या है 

जिससे इन्सान के दिलो

दिमाग पे हकूमत करती है ।

गुलाम और परवश बनाती है ।

दुनिया में  शुध्ध और पवित्र 

वशीकरण प्रचलित नुक्सा है ।

जरा आजमाना उसे किसी पर 

वो पीडा या तकलीफ नही, 

सिर्फ सुख शांति देता है ।

वो है प्रेम कि जडी बूट्टी ।

मगर उस में  है तप, साधना, 

सेवा समर्पण और शुध्धता ।

सभी यह जडी बूट्टी से

वशीभूत हो जाएगे ।

यह प्रेम का जादू टोना है ।

उसे इन्सान तो क्या भगवान 

भी वशीभूत हो जाते है ।

प्रेम करो और प्रेम को हि

जीवन का मंत्र बनाओ 

क्यूकि प्रेम हि है परमेश्र्वर ।

विनोद आनंद                               26/09/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

903  जब जब…… 

जब जब सूरज उदय हो

उजाला हि उजाला फैले

जब जब फूल खिले 

खुशबु हि खुशबु फैले

जब जब आए हसी चहरे पे

खुशियाँ हि खुशियाँ फैले ।

जब जब बारिस हो

ठंडा हि ठंडा फैले ।

जब जब संगीत बजे

मस्ती हि मस्ती फैले ।

जब जब मंद हवा चले

ठंडी लहरे हि लहरे फैले

जब जब समुद्र में उठे मौजे

मौज हि मौज फैले।

जब जब प्रेम बरसे

शूगुन हि शूगुन फैले ।

लेकिन, 

जब जब नफरत बरशे

तबाहि तबाहि फैले ।

जब जब छल कपट बरशे

विनाश हि विनाश फैले ।

जब जब गेर समज जन्म ले

गरबरड हि गरबड फैले।

जब जब द्वेष ईर्षा हो

जलन हि जलन फैले ।

जब जब धोखा हो ।

क्लेश हि क्लेश फैले ।

जब जब  ईन्सान ईन्सान बने

स्वर्ग हि स्वर्ग फैले ।

जब जब  ईन्सान शैतान बने

नर्क  हि नर्क फैले ।

स्वर्ग बनाने का सही, 

सरल और सचोट उपाया है 

ईन्सान या सज्जन बने रहो ।

विनोद आनंद                               01/09/2017       फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

881 मुक्ति

दिल में  जब प्रेम जागता है

आँखों से प्रेम ही बरसता है, 

सृष्टि प्रेम सभर हो जाती है,  

वोही प्रेम आँखों से सब के 

दिल में उतर जाता है और

दिल में सोये प्रेम को जगता है ।

ईसी तरह यह सिलसिला चलेतो 

ईश्र्वर कृपा से सभी के जीवन में 

प्रेम का मौसम छा जाएगा ।

धरती पर स्वर्ग उतर आए ।

स्वर्ग का निर्माता है प्रेम ।

प्रेम करो,प्रेम बरसाओ और

सब को प्रेमसे भीगोदो, 

तो नफरत, द्रेष, क्रोध और

ईर्षा से मिलेगी मुक्ति ।

विनोद आनंद                                13/08/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

873  संबंध

संबंध एक बंधन, निभाना है । 

संबंध एक बचन, पूरा करना है ।

संबंध एक साधना, सिध्ध करना है ।

संबंध एक आश्रय,  सहार देना है ।

संबंध एक जादू, चमत्कार दिखाना है ।

संबंध एक पहेचान, पहेचान बनानी है ।

संबंध ही जीवन, संबंध बीना जीवन नहीं ।

संबंध सबसे पहेल बाद में सब कुछ ।

संबंध सबसे किंमती, किंमत चूकाना है ।

संबंध प्रत्ये बेजीम्मेदारी, बेवफाई, 

लापरवाही, बेदरकारी और बेध्यान

संबंध में दरार और लागणी में हीनता ।

संबंध में छल कपट, निंदा चुगली

और स्वार्थ संबंध का जनाजा ।

संबंध में दिखावा, चापलूशी और

ढोंग, तोहीम है तो संबंध कि 

उसे बचाना मुश्किल है, 

लेकिन नामुनकीन नही है  ।

संबंध प्रेम, विश्र्वाश,

और स्नेह,समर्पण से

बनते है संबंध मजबूत ।

संबंध ही जीवन का आधार ।

संबंध ही जीवन कि वैशाखी

वरना जीवन होता है अपाहीत 

विनोद आनंद                                10/08/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

853 💐 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-37

💞 स्वर्ग भी बसेगा 

माया का पर्दा खुलेगा तो 

ईश्र्वर का दर्शन भी होगा ।

दर्शन भी होगा दिल भी मिलेगा ।

दिल भी मिलेगा तो प्रेम भी बरसेगा ।

प्रेम भी बरसेगा तो दिल भी खिलेगा ।

दिल भी खिलेगा तो खूशबु भी फैलेगी ।

खूशबु भी फैलेगी तो माहोल महेंकेगा ।

माहोल महेंकेगा तो धरती, 

पर स्वर्ग भी बसेगा ।

👪 संबंध को समझो 

प्रेम से संबंध खिलते है, 

नफरत से मुरझाते है ।

सेवा से संबंध बढते है

स्वार्थ से संबंध घटते है ।

प्रशंसा से संबंध कायम रहेते है ।

निंदा से संबंध हंगामी रहते है ।

समर्पण से संबंध मजबूत बनते है

हक छीनने से संबंध मरते है ।

मीठे वचन सही व्यवहार से, 

संबंध शाश्र्वत बनने है ।

कटु वचन, गलत व्यवहार से, 

संबंध टूटते है ।

मिलते जुलते रहनेसे, 

संबंध निखरता है ।

ताल मेल मिलाते  रहोगे, 

तो संबंध सँवरता है ।

संबंध को समजो, 

तो जीवन सँवरेंगा ।

💝 आप निर्देशक हो

मन शुध्ध है तो स्वर्ग,  

मन अशुध्ध है तो नर्क  ।

मन पवित्र है तो स्वर्ग ,  

मन अपवित्र है तो नर्क  ।

मन सकारात्मता है तो स्वर्ग , 

मन नकारात्मता है तो नर्क  ।

मन शांत तो है तो स्वर्ग

मन अशांत है तो नर्क है ।

मन संत हो तो स्वर्ग, 

मन शैतन है तो नर्क ।

मन ही निर्माता है 

स्वर्ग या नर्क का ।

आप निर्देशक है ।

क्या चाहते हो स्वर्ग या नर्क ? 
विनोद आनंद                                20/07/2017

फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड