1723 रिश्तों को कैसे निभाओगे ?

रिश्तों को कैसे निभाओगे ?
रिश्तें बनते है और बिगते है
क्यूँ कि हम निभाते नहि, हम
रिश्तों कि कद्र नहि करते,
रिश्तों कि हेमीयत नहि जानते,
रिश्तों का ईस्तमाल करते है ।
रश्तें में अधिकार मागते है,
अपना कर्तव्य नहि करते ।
हम रिस्तों में शुकरियाँ नहि,
करते मगर शिकायत करते है,
और रिश्तें निभाना नहि पाते ।
उम्र गुजर जाती है,मगर रिश्तें
कमजोर रहते है क्यूँ कि हमे
रिश्तें निभाना नहि शकते ।
रिश्तों में शुकरियाँ करे और
कर्तव्य करो और रिश्ते को
मजबूत बनाओ । रिश्तें को
समर्पण,प्रेम से निभाना है ।
रिश्तों को निभाना है तो सहन
और समज शक्ति कि जरूरी है
रिश्तें निभाना आ गया तो
समजो जीना आ गया ।
जीवन कल्प वृक्ष है और
रिश्तें उस कि जडे है उसे
मजबूत बनाओगे तो उस
पर सुख, शांति, समृद्धि के
मीठे फल आएगे और जो
ईच्छा करोगे पूर्ण होगी ।
विनोद आनंद 10/09/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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1716 असली स्वभाव

मनुष्य का असली स्वभाव
क्या है ? जानना जरूरी है ।
आत्मा का स्वभाव हि मनुष्य
का असली स्वभाव होना है ।
लेकिन वो कुछ ओर होता है ।
आत्मा का स्वभाव है प्रेम, तो
मनुष्य का स्वभाव प्रेम हि है ।
मगर द्वेष, ईर्षा और नफरत में
तबदिल हो गया है ।
आत्मा का स्वभाव है शांति तो,
मनुष्य का स्वभाव हि है शांति ।
मनुष्य गुस्सा करेके अशांत है ।
आत्मा का स्वभाव है पवित्रता
तो मनुष्य का दिल साफ और
मन पवित्र होना चाहिए, मगर
मन मैला दिल भावना हिन है ।
आत्मा का स्वभाव है दयालु,
तो मनुष्य का स्वभाव दयालु है
मगर कठोर और दयाहिन है ।
आत्मा का स्वभाव है आनंद,तो
मनुष्य का स्वभाव भी आनंद है,
मगर मनुष्य, दुःखी, उदास और
निराश रहेता है ।
आत्मा ज्ञानी और शक्तिशाली है
मगर मनुष्य अज्ञानी, कमजोर है
क्यूँकि स्वभाव बदल गया है,
और ज्ञान और शक्ति का सहि
उपयोग नहि करता ।
हमे अपना असली स्वभाव प्राप्त
करके धरती को स्वर्ग बनाना है ।
विनोद आनंद 04/09/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1670 प्रेम, प्रेमी और प्रेमिका

प्रेम,प्रेमी और प्रेमिका
का मिलन एक सुखद
संयोग जब प्रेम है सच्चा ।
प्रेम, प्रेमी और प्रेमिका का
मिलन एक दुःखद संयोग,
जब प्रेम में भेळसेळ हो,
आकर्षण,स्वार्थ, मोह हो ।
प्रेमी और प्रेमिका आज
काल के जवान लडका
लडकि का खेल-प्रपंच है ।
जवानी के नसे में आज
के माहोल में एसे किस्से
बनते है,बिगडते है क्यूँकि
जो भी होता है वो जोस में
नशे में, बेहोशी में होता है ।
यह उम्र केरियर-चरित्र के
घडतर कि होती है प्रेम के
चक्कर में पड के जीवन का
किंमती सयम बरबाद करने
के लिए नहि है ।
जीवन साथी ढूँढने कि
जिम्मेदारी मा बाप कि है ।
उन का हक मत छिनना,
और अनुमती के बीना कोई
गलत कदम न उठाना क्यूँकि
वो दोनों के जीवनको दुःख
और अशांति के सिवाय
कुछ नहि दे शकता ।
बाद में पस्ताने से क्या
फायदा ईसलिए जो भी करो
सोच समज कर होश में करो ।
विनोद आनंद 19/07/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1660 जीने का सहि तरीका

जीवन में कोई भी कमी
होगी तो चलेगा लेकिन
थोडी सी कमी प्रेम कि
सहन नहि कर शकेगें ।
जीवन कोई भी चीज़ टूटे
मन को समझा शकते है
लेकिन अगर दिल टूटे तो
मन को नहि समझा शकेगें ।
जीवन में कुछ खो जाए तो
ढूँढ लेगे लेकिन मन खो जाए
तो मन को नहि ढूँढ शकेगें ।
जीवन मे कोई भी रूढ जाए
तो मना शकेगे मगर अपनों
को नहि मना शकेगें।
जीवन में एक दिन खाना नहि
मिले तो चलेगा लेकिन पानी
बीना एक दिन भी नहि चले ।
जीवन में जो गौण है उसे के
बीना जी शकते है लेकिन
जो जरूरी है और आवश्य है
उसे बीना जीना मुश्किल है ।
जीवन में जरूरी-आवश्य और
बीन जरूरी- बीन आवश्य कि
समझ आए तो समझलो कि
जीने का सहि तरीका आगया ।
विनोद आनंद 10/07/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1635 ईतना तो करना प्यारे

कम खाओ, गम खाओ और
जरूरत से ज्यादा न बोलो ।
जो मिले उसे स्वीकरो और
हर पल खुस खुसाल रहो ।
ईतना तो करना प्यारे अगर
सुख शांति से जिना है तो ।
गम से न गभराना,समस्या से
न भागना और डरो से न डरना ।
अपनी भूल कबुल करके माफि
माग लेना, दूसरों कि भूल माफ
करके रिश्तों को सँवारना ।
ईतना तो करना प्यारे अगर
सुख शांति से जिना है तो ।
जैसा व्यवहार आप दूसरों से
नहि चाहते एसा व्यवहार आप
दूसरों के साथ मत करना ।
सब के प्रति सम् भाव, सद् भाव
प्रेम भाव, परोपकार भाव रखना ।
ईतना तो करना प्यारे अगर
सुख शांति से जिना है तो ।
किस कि निंदा, चाडी चुगली
न करना, दूसरों कि प्रगति में
बाधा न डालना खुस रहेना ।
जिंदगी में कम जरूरत हो,
अपनों से कोई अपेक्षा न हो ।
ईतना तो करना प्यारे अगर
सुख शांति से जिना है तो ।
जिंदगी में काम ,क्रोध, लोभ
मोह, मद, ईर्षा से बचो ।
नैतिक, धार्मिक, आध्यात्मिक
जीवन जीओ ।
ईतना तो करना प्यारे अगर
सुख शांति से जिना है तो ।
विनोद आनंद 17/06/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1630 एसा हि बनो

मर्यादा महानता और
अमर्यादा नीचता है,
मर्यादित जीवन जीओ ।
उदारता उत्तमता और
कंजूसाई मूर्खता है,
उदारता दिखाओ ।
समजदारी सफलता
और नासमझ निष्फलता
समजदार बनो ।
नम्रता ईन्सानीयत और
क्रूरता शैतानीयत है,
नम्र बनो ।
उत्साह उन्नति और
निराशा अधोगति है ,
जीवन में उत्साही बनो
समाधान समाधि और
असमाधान लडाई,
समाधान पर ध्यान दो ।
प्रेम परमात्मा है और
नफरत दुश्मन है ।
परमात्मा को प्रेम करो ।
हिंमत साहस है
कमजोरी निर्बलता है
हिंमतवान बनो ।
सहिष्णुता संबंध का
रखवाल संबंधी है,
असहिष्णुता संबंध
तोडने वाल वैरी है ।
सहनशीली बनो ।
सदगुणो सुंदरता और
दुर्गणो कुरूपता है
सदगुणो बनो ।
अच्छी आदतें अच्छा
जीवन और बुरी आदतें
बदनाम जीवन ।
अच्छा जीवन सुख
शांति, बदनाम जीवन
दु:खी, अशांत जीवन ।
भक्ति हि मुक्ति और
भोग हि है बंधन,
भक्त बनो भोगी नहि ।
विनोद आनंद 14/06/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1615 किंमत चुकानी पडेगी ।

हर चीज़ मूल्यवान है
जिसे पाने के लिए उस
कि किंमत चुकानी पडेगी ।
कोई चीज़ एसे हि नहि
मील जाती है । उसे के
बदलेमें पैसा, प्रेम और
महेनत करनी होगी ।
किंमत उस के मूल्यसे
ज्यादा चुकानी होगी ।
मुफ्तमें पाने कि चेष्ठा
या कोशिश नहि करना ।
अगर सहि वक्त पे मौका
देख कर काम करोगे तो
शायद किंमत कम होगी ।
जिंदगी में सहि तरीके से
खुद कि और दूसरों का
सहि मूल्यांकण करना ।
चोरी, लूट और धोके से
पाई हुई चीज कि किंमत
भी एक दिन चुकानी होगी ।
जिंदगी में किस्मत भी किए
हुए कर्मो कि किंमत है ।
विनोद आनंद 30/05/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड