1226 पहले खुद से फिर दूसरों को

ख़ुद के साथ,वक़्त बिताओ फिर,
दूसरों के साथ वक़्त बिताओ ।
खुद को खुद से बात कराओ,
फिर दूसरों से बात करो ।
ख़ुद का परिचय, ख़ुद से कराओ,
फिर दूसरों का परिचय करो ।
ख़ुद के साथ में, घूमने जाओ,
फिर दूसरों के साथ घूमो ।
ख़ुद के अन्दर, दीप जलाओ फिर,
दूसरों के अंदर दिप जलाओ ।
ख़ुद से ख़ुद को, मिलाओ,
फिर दूसरों से मिलो ।
खुद को खुद से समजाओ,
फिर दूसरों को समजाओ ।
खुद को खुद से प्रेम करो,
फिर दूसरों से प्रेम करो ।
खुद को खुद से सुधारो,
फिर दूसरों को सुधारो ।
खुद से खुद का कल्याण करो,
फिर दूसरों का कल्याण करो ।
खुद को खुदा से नाता जोडो,
फिर दूसरों से नाता जोडो ।
पहेले खुद को जीना शीखओ,
फिर दूसरों को जीना शीखाओ ।
खुद को खुदा जैसा बनाओ ।
विनोद आनंद 04/07/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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1213 प्यास और आश

जो प्यास छीपे वो प्यास
जो न छीपे वो आश ।
प्यासा वो नही जो प्यास
बुझने के बाद भी प्यासा रहे ।
न छीपने वाली प्यास नही,
वो न बुझने वाली आश है ।
पानी कि प्यास, बुझ शकती है
पैसे,प्रतिष्ठा,वासना, सत्ता कि
प्यास नही बुझने वाली,
वो तो ओर भडकेगी ,न बुझेगी
जबतक नही जलाएगी ।
जब तक जलाएगी नही ।
कोइ भी प्यास मर्यादित
और जरुरियात के अनुरूप
हो तो प्यास कहेलाती है,
नही तो वो आग कहेलाती है ।
किसी भी प्यास को नियंत्रीत
करने को संतोष धन काफि है ।
हमेशा प्यासा रहने वाला
प्यासा हि मर जाता है ।
न उस कि प्यास न आश
बुझ शकती है ।
पाने के बाद जो बुझे
वो हि प्यास है नही तो
वो न छीपे एसी आश है
विनोद आनंद 20/06/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1199 रिश्तें क्या कहते है ? सुनो

यह रिश्तें क्या कहते है
जरा सुनो, ध्यान दो नही तो
रिश्तें कमजोर बनते जाएंगे ।
रिश्तें कहते है कि बेरहेमी से पेश
न आओ वरना मैं टूट जाऊगा ।
हो शके तो मुझ पर रहेम करो ।
रिश्तें कहते है कि मुझे नफरत
से मत देखो वरना मै नफरत कि
आग में जल के राख हो जाऊगा ।
रिश्तें कहते है कि मुझ स्वार्थ के
रसायण में न भीगोओ वरना मैं
पीघल जाऊँगा हाथ नही आऊँगा ।
रिश्तें कहते है कि मुझे प्रेम और
स्नेह के पवित्र जल से नहलाओ मैं
पवित्र और शक्तिशाली बन जाऊँगा ।
रिश्तें कहते है कि मेरा मान सन्मान
करो और निभाने कि कोशिश करना ।
रिश्तें कहते है कि मुझे गलत
ईरादे और छल कपट से बचाना
वरना मैं तडप तडप के मर जाऊँगा ।
रिश्तें कहते है कि परिवार में मेलजुल
बढाना वरना किस पल मै बिखर जाऊँगा ।
रिश्तों से हि है जिंदगी वरना क्या
जिओगे ईसलिए जो मैं कहता हूँ उस
पर सोचो और रिश्तों को बचाओ
वरना तुम्हे कोन बचा एगा ?
विनोद आनंद 05/06/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1149 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-57

🌹 सलामत
मूळ और थड सलामत
तो वृक्ष रहे हरा भरा ।
धर्म सलामत तो जीवन रहे
सुखमय और आनंदमय ।
बुध्धि सुबुध्धि तो
जीवन सलामत ।
बुध्धि कुबुध्धि तो
जीवन असलामत
🌻 छे बातें
सत्य,करूणा ,तप, अहिंसा,
अचौर्य,अपरिग्रह छे बातें तारे
काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद
और मत्सर छे बातें मारे
पसंदगी है तुम्हारी ।
जीवन नैया पार लगानी है ।
या जीवन नैया डुबानी है ।
🌺 खुशी और गम
छूप छूप के रोने से गम छीपेगा,
मगर गम कम नहीं हो शकता ।
गम से मत गभराना और तडपना
तब गम का बोज हलका होगा ।
छूप छूपे हसने से खुशी न छीपेगी,
मगर खुशी बाँटने से बढती है ।
दूसरों कि खुशी में खुश रहने से
खुशी बढ जाती है । खुशी बढती
तो गम कम होता है । खुश रहो ।
विनोद आनंद 19/04/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1146 हम परेशान क्यू है ?

जिंदगी में हम परेशान है
क्यूँकि हम शान से नही जीते ।
शान से कैसे जी शकते है ?
शान से जीने के लिए अपनी
कमीयों दूर करके खुबीयों का
जिंदगी में स्वागत करना है ।
अपनी गलत द्रष्टि और सोच
बदल ना जरूरी है ।
अपनी बूरी आदतों को
छोड कर अच्छी आदतें का
स्वागत करना जरूरी है ।
अपने दुर्गुणो को दूर करके
सद् गुणोका स्वागत करना है ।
अपनी बूरी भावनाओं को
जलाकर प्रेम,दया,अहिंसा जैसी
नई शुध्ध भावएँ जगनी है ।
अनीति- अप्रमाणीकता को
नीति-प्रमाणीकता में बदलकर
हम शान से रह शकते है और
परेशानियाँ से बच कर सुख
और शांति से रह शकते है ।
विनोद आनंद 14/04/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1123 खत्म हो जाए तलाश

सभी को अच्छे ईन्सान कि तलाश है ।
अगर हम अच्छे ईन्सान बनजाए तो
शायद खत्म हो तलाश अच्छे ईन्सान कि ।
सभी को तलाश है एक अच्छा पति
या पत्नि कि । अगर हम हि अच्छे
पति या पत्नि बने तो तलाश
खत्म हो अच्छा पति या पत्नि कि
सभी को तलाश है प्रेम करने वालों कि
अगर हम हि दिल में प्रेम जगाए तो
खत्म हो प्रेम करने वालों कि तलास ।
सभी को तलाश है सुख शांति कि
अगर सभी ढूंढे सुख शांति भीतर में
तो खत्म हो तलाश सुख शांति कि ।
सभी को तलाश है अपनों कि
अगर सभी अपनापन दिखाए
तो तलाश खत्म हो अपनों कि ।
सभी को तलाश है पैसों कि
अगर सभी पुरूषार्थ करे तो
खत्म हो तलाश पैसों कि ।
सभी को तलाश है ईन्सान
सुधार ने के लिए अगर सभी
खुद हि सुधर जाए तो खत्म हो
तलाश ईन्सान कि जिसे हम
सुधारना चाहते है ।
विनोद आनंद 24/03/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1120 💐शेर शायरीयों का गुलदस्ता-53

🌹 जिंदगानी
कभी जिंदगी बने कहानी तो
कभी कहानी बने जिंदगानी ।
महान पुरुष कि कहानी को
बनालो जिंदगानी तो जिंदगी
तुम्हारी बनजाएगी कहानी,
ओरों की बनाएगी जिंदगानी ।
🌻 सिर्फ एक बार
सिर्फ एक बार दिल से
नफरत निकाल के तो देखो
कैसा शुकून मिलता है ।
सिर्फ एक बार दिल में
प्रेम जगा के देखो तो कैसे
पीधल जाती है नफरत ।
सिर्फ एक बार मन कि
मनमानी रोककर तो देखो
मन को ‘ ना ‘ कहेकर तो देखो
कैसे मन भीगी बिल्ली बनेगा
और आप बनजाओगे शेर ।
🌺 लिहाज़
भूखा ईन्सान पसंद
नापसंद नही देखता
प्यासा ईन्सान पानी कि
किंमत नही पूछता ।
निंद कभी जगह नही देखती ।
एसे स्वार्थी ईन्सान कभी
रिश्ते का लिहाज नही करता ।
विनोद आनंद 22/03/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड