1958 विरोध कैसे करे ?

विरोध किसी का मन में
दुश्मनी का भाव जगाए ।
जिस का विरोध करो वो
गुस्से से अपमान करे और
आपसे नाराज हो जाए और
संबंध को बनाए कमजोर ।
तो फिर विरोध क्यूँ करना ?
परिवार में कोई गलती करे
तो उस को कहेना के रोकना
भी जरूरी है । तो क्या करे ?
कैसे विरोध करे । कोई तो
होगा एसा उपाय कि साप
मरे और लाठी भी न टुटे
मतबल विरोध भी करो फिर
भी नाराज न हो ,गुस्सा भी
न हो और संबंध न बीगडे ।
बुध्धि, समज, होशियारी,
सुज बुज और धैर्य से काम
लेना होगा फिर भी बात न
बने तो मना लेना सोरी बोल
देना संबंध को बचा लेना ।
विरोध क्रोध, युक्त नफरत
युक्त नीचा दिखाने के लिए
नहि लेकिन करूणा, प्रेम
युक्त हो, कल्याण करने का
बक्सद हो ।
विरोध आक्रामक नहि हो
लेकिन शांति से हो तो विरोध
सुधार बन जाए और संबंध
टुटे नहि बलकि मजबूत बने ।
विरोध बोस का, पहेलवान का
डोक्तर का,रसोई करने वालों का
और ज्ञानी का भूलसे न करना ।
विरोध को सकारात्मक द्रष्टि से
देखो नकारात्मक द्रष्टि से नहि ।
विनोद आनंद 01/04/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1919 कुरूक्षेत्र

जिंदगी कुरूक्षेत्र युध्ध का
मैदान हर व्यक्ति है योध्धा ।
दुश्मनों से लडना है,भागना
नहि, जीतना है हर हाल में ।
जीवन रथ का सारर्थी हो
जो दिखाए सहि दिशा ।
दुशमन को जानो कौन है
उस कि चाल समझो और
बनाओ योजना हराने कि ।
हिंमत, होसला, होस और
जोस बनए रखो उमीद न
छोडो जीतने कि तो पा
शकोगे जीत जिंदगी पे ।
दुश्मन है काम, क्रोध, लोभ
मोह, मद और मत्सर ।
गूरू है सद् गुणें प्रेम, शांति
दया, करूणा, पवित्रता ।
शस्त्र है ध्येय, संकल्प, धर्म
मर्यादा, द्दढता,कर्तव्य और
तुम्हारा पुरूषार्थ, जंग जीत
जाओगे अगर सारर्थी हो
श्री कृष्ण जगद् गुरू द्वारा
कुरूक्षेत्र में श्री अर्जुनने
कहेली श्रीमद् भागवत
गीता के
बोध वचनो ।
विनोद आनंद 07/03/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1908 आप एसे बने कि….

आप एसा बने कि अस्तित्व आपको
पसंद करे, आप क्या पसंद करते है
वो महत्वपूर्ण नहि है ,खुद को एसा
बनाने कि महेनत करे कि सिर्फ लोग
नहि बल्कि हर चिज़ आपको पसंद
करे बीना नहि रह शके, हर चिज़
अनपे अच्छे रूपमें आपके सामने
आएगी तो जीवन खिल उठेगा और
वरदान बनेगा ।आप के आसपास
मौजूद हर चिज़ आप कि उपस्थिती
पसंद करके, खुद को उपलब्ध करे ।
आप कि पसंद या ना पसंद हि
आप के दुःख का कारण है, आप
जिस को पसंद करते है या नापसंद
दोनों को आप मन में बढा चढा कर
देखतें है मतलब आप चीज़ जैसी है
वैसी नहि देख पाते, जीवन वरदान
नहि श्राप बनता है । आप अपने
पसंद के हिसाब से चलोगे तो जीवन
अच्छे रूप में आप के सामने नहि
आएगा । आध्यत्मिक क्रिया आप
को एसा बनाने कि कोशिश है ।
आप को एसा बनने के लिए आप
को सब के प्रति संवेदनशील बनके
दिलमें प्रेम दया और करूणा प्रगट
करना आवश्यक और जरूरी है ।
वरना आप ब्रम्हाड में असुरक्षि
अकेले और तनाव ग्रस्त रहोगे ।
विनोद आनंद 26/02/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1900 एसा क्यूँ होता है ?

हम जिसे चाहते है,
उसे ईतना चाहते है,
कि उस कि हर बात हमे
अच्छी लगने लगती है ।
हम जिसे नहि चाहते है,
उसे ईतनी नहि चाहते है,
कि उस कि अच्छी बात भी
हमे बूरी लगने लगती है ।
हम जिसे प्रेम करते है,
उसे ईतना प्रेम करते है,
कि उस कि सभी हरकते
हमे खुशी देने लगती है ।
हम जिसे नफरत करते है,
उसे ईतना नफरत करते है,
कि उस कि सभी हरकते
हमे दुःख देने लगती है ।
हम जिसे पसंद करते है
उसे ईतना पसंद करते है
कि उस कि गलती हमे
दिखाई नहि देती ।
हम जिसे नापसंद करते है
उसे ईतना नापसंद करते है
कि उस कि सही बात में
भी गलती दिखाई देती है ।
हम जिससे मोहित होते है
तो ईतने मोहित होते है कि
हम उस कि भूलोंको नज़र
अंदाज करते है ।
एसा क्यूँ होता है ?
हमारी सच या जूठ्ठ
और अच्छाई या बूराई को
परखने और समझने कि
क्षमता क्यूँ क्षीण हो जाती है ?
विनोद आनंद 21/02/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1889 जीओ तो एसे कि…..

जीओ तो एसे जैसे
ईन्सान जीता है ।
ईन्सानीयत हि जीने
का जरीया है ।
ईन्सान कि अच्छी
नीयत है ईन्सानीयत ।
जीओ तो एसे जैसे कि
सब को लगो प्यारे ।
आप को मिल ने को
तरसे, मिल के खुश हो ।
जहाँ जाने वाले हो वहाँ
बेसबरी से करे आप का
ईन्तजार ।
जीओ तो एसे जैसे कि
सज्जन जीते हो ।
सज्जनता हि है जीने
का जरीया ।
सद् भाव,सम भाव,प्रेम
भाव परोपकार भाव से
जीना है सज्जनता ।
जीओ तो एसे जैसे कि
आप को जीते जी नहि
मरने के बाद भी याद करे ।
जब तुम आऐ तुम रोए
जग हसे एसे जीओ और
एसी करणी कल चलो
कि तुम हसो, जग रोए ।
यही है सार्थकता और
सफलता जिंदगी कि ।
विनोद आनंद 09/02/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

💙 1883 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-92

🌹 राजपथ
रिश्ते हि रास्ते है,
जिंदगी में मंझिल
तक पहुँचाते है ।
रास्ते बीगड जाएँ
तो मंझिल तक कैसे
पहुँचोगे ?
रिश्ते को राजपथ
बनाओ तो मंझिल
चलके पास आएगी ।
🌻 वजुद
बीना पेट्रोल कि गाडी
एक ईन्च नहि चलेगी
बीना ब्रेक गाडी नहि
रूक शकती ।
जैसे बीना इन्धन और
बीना ब्रेक गाडी का
नहि कोई वजुद, एसे
हि बीना प्रेम और संयम
जिदगी का वज़ूद नहि ।
🍁 सिर्फ
सिर्फ खेत में बीज़ बोने
से फसल नहि होती ।
सिर्फ बातें करने से बात
नहि बनती ।
सिर्फ बडे स्वप्ने देखने से
स्वप्ने सच नहि होते ।
सिर्फ नसीब पर विश्र्वास
करने से सफलता नहि
मिलती आखिर महेनत
तो करनी हि पडती है ।
बीना महेनत सफलता कहाँ ?
विनोद आनंद 05/02/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1866 क्या फायदा

जिंदगी में खुस नहि रह शकते
तो जिंदगी का क्या फायदा ?
जिंदगी में सफल नहि होते तो
जीने का क्या फायदा ।
जिंदगी में सुख शांति न मिले
तो जीने का क्या फायदा ?
बहुत पढ के ओफिसर बने मगर
दूसरों से व्यवहार करना शीखा
नहि तो क्या फायदा ?
जिंदगी में गलत आदतों से
परेशान है मगर छोडी नहि, तो
परेशानी से, जीने क्या फायदा ?
जिंदगी में एसो आराम कि सभी
चीजें है मगर फिर भी खुशी नहि
तो जीने का क्या फायदा ?
पढ के पंडीत बने, मगर प्रेम कि
भाषा न समजी तो क्या फायदा ?
तन और मन और दोलत भी है
मगर उस का सहि उपयोग नहि
किया तो उस का क्या फायदा ?
सब कुछ है मगर जिंदगी में संतोष
नहि तो जीने का क्या फायदा ?
जिंदगी में बहुत पुस्तके और धर्म
ग्रंथ पढ लिए तो फिर भी कुछ
सुधार नहि हुआ तो जिंदगी
जीने क्या फायदा ?
व्यक्ति का विकास हुआ मगर
व्यक्तित्व का विकास नहि हुआ
तो जीने का क्या फायदा ?
जिंदगी में कुछ भी फायदा नहि, तो
एसी जिंदगी का क्या फायदा ?
विनोद आनंद 21/01/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड