816 बहेतरीन तरीका जीने का 

जीने का  बहेतरीन तरीका कौनसा ? 

जीओ और जीने दो, 

हसो और हसाओ

खुस रहो खुस रखो, 

है बहेतरीन तरीका जीने का ।

जीने का  बहेतरीन तरीका कौनसा ? 

न फसो न फसाओ, 

न रोओ न रूलाओ, 

न दु:खी हो न दुःखी करो, 

माफ करो दो, माफि मागीलो, 

प्रेम करो, प्रेम पामो, 

है बहेतरीन तरीका जीने का ।

जीने का  बहेतरीन तरीका कौनसा ? 

मैं ओ.के. तुम भी ओ.के, 

मैं जीतु तुम भी जीतो, 

मैं स्वीकार करू तुम्हे, 

तुम भी स्वीकार करो मुझे ।

मैं सहन करू तुम्हे, 

तुम भी सहन करो मुझे ।

है बहेतरीन तरीका जीने का ।

जीने का  बहेतरीन तरीका कौनसा ? 

मैं न रूठू  तुम्हे से

तुम भी न रूठो मुझसे ।

मैं खुस रखु तुम्हे, 

तुम भी खुस रखो मुझे ।

मैं न शिकायत करू  तुम्हे, 

तुम भी न करो शिकायत मुझे ।   

विनोद आनंद                                20/06/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

793 जिंदगी कि बाज़ी जीतलो

क्या पकडाना है ? 

जो छोडना चाहे, 

उसे पकडो ।

क्या छोडोना है ? 

जो पकडना चाहे, 

उसे छोडो ।

जो खराब है,उसे छोडो ।

जो अच्छा है,उसे पकडो ।

अहंकार को छोडो, 

स्वमान को पकडो ।

जो सही है,उसे पकडो ।

जो  गलत है,उसे छोडो ।

प्रेम को पकडो,मोह को छोडो ।

मित्रताको पकडो,शत्रुताको छोडो ।

जो जूठ्ठ  है,उसे छोडो ।

जो सच है, उसे पकडो ।

संसार कि माया को छोडो, 

ईश्र्वर कि भक्ति को पकडो ।

लोभ-लालच को छोडो

संतोष-शांति को पकडो ।

द्वेष-ईर्षा को छोडो

दया-करूणा को पकडो ।

कुसंग को छोडो, 

सत्संग को पकडो ।

जिसे छोडना है उसे

छोडने कि हिंमत रखो

जिसे पकडना है उसे

पकडने कि जिद करो ।

अगर यह होने लगा तो

समजना कि जिंदगी कि

बाज़ी आपने जीत ली ।                                         

विनोद आनंद                                 30/05/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

732 रिश्तें को निभाए कैसे ? 

क्या क्या करना है 

रिश्तें निभाने के लिए ? 

रिश्तों कि जरूरत,किंमत 

और हेमीयत समजनी है ।

रिश्तों कि मान मर्यादा 

का करना है जतन और

समजनी है जिम्मेदारी अपनी ।

रिश्तेंदारों से मधुर, मीठी 

और नम्र बोलनी है वाणी ।

दु:खोंमें साथ निभाना है ।

रिश्तों में बरदास्त करना है ।

रिश्तों के लिए बूरी आदतें 

और व्यसनो को छोडना है ।

रिश्तों में एक दूजे का 

ख्याल रखना है और सेवा 

समर्पण का भाव रखना है ।

रिश्तों में दूसरों के कर्तव्य को

अपना अधिकार नही समजना ।

रिश्तों में  अपेक्षा नही रखना ।

रिश्तें प्रेम-स्नेह से पलते है ।

नहीं के,द्वेष, ईर्षा और निंदा से।

रिश्तों से परिवार बनता है

परिवार से संस्कार बनता है

और संस्कार से जीवन बनता है ।   

विनोद आनंद                              08/04/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

731 हम सब क्या चाहते है ? 

हम सब मान-सन्मान चाहते है

मान-सन्मान करना नही शीखा

तो चाहत कैसे होगी पूर्ण  ? 

हम सब मस्वरा देना चाहते है

किसी का मस्वरा पसंद नही

तो कैसे चलेगा व्यवहार ? 

हम अपनों से प्रेम चाहते है, 

अपनो से गैरो जैसा व्यवहार

तो कैसे चलेगा संसार ? 

हम सही है और दूसरे गलत

हम जुकाना चाहते है 

मगर जुकना नही चाहते ।

हम गुस्सा करते है, चाहते है 

कि दूसरें गुस्सो न करें 

तो कैसे चलेगा जीवन  ? 

हमे चाहते सब हमारा 

खयाल रखे लेकिन हम 

किसी दरकार न करे तो

कैसे टीकेगा संबंध  ? 

हम चाहते सभी अपनी

जिंम्मेदारी निभाए लेकिन

हम जिंम्मेदारी से भागते रहे

तो कैसे बनेगी बात ? 

व्यवहार दोनों तरफा 

सही और समान न हो तो

समतुलन बीगड जाएगा ।

समतुलन, समत्व ही है, 

सफलता का सूत्र ।

विनोद आनंद                                 07/04/2017 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

710 बहार और भीतर

बहार अंधेरा,तो चिराग जलाने

से चारो ओर होगा उजाला ।

भीतर अंधेरा तो क्या जलाए ? 

भीतर अंधेरा तो प्रेम श्रध्धा और 

विश्र्वास का जलाए दिप । 

ज्ञान का दिपक और भक्ति की

बाती से आत्मा का दिप जलाए ।

आत्मिय सद् गुण का प्रकाश से

भीतर जागेगा प्रेम श्रध्धा 

और विश्र्वास तो, होगा 

दूर अंधेरा भीतर का ।

भीतर उजाला तो बहार भी 

उजाला, दूसरों के भितर भी

जगाए  उजाला लेकिन, 

बहार का उजाला भीतर में 

नही कर शकता उजाला ।

न बहार का अंधेरा भीतर

 कर शकेगा अंधेरा ।

विनोद आनंद                             24/03/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

697 मर्यादा-निती नियम से जीओ

रूठना एसे कि पल में मानजाओ 

वरना मोसम बदल जाएगा ।

प्रेम करना एसे कि नफरत 

डर कर भाग जाए ।

कर्म करो एसे कि कर्म

अकर्म बन जाए ।

ईतना नाराज-उदास न हो कि

सुख शांति और प्रसंन्नता

भाग जाएगी ।

जीवन एस न जीओ कि

तुम्हारा नाम मिट जाए ।

प्रदार्थो को ईतना महत्त्व न दो

कि उस का नसा हो जाए ।

खुसी में न बहेक जाओ कि

संभलना हो जाए मुश्किल ।

दु:ख में इतना न हो परेशान कि

सहन शक्ति हो जाए खत्म ।

किसे से ईतान नफरत और ईर्षा

न करो कि तुम्हार बदन 

ज़हरीला हो जाए ।

रिश्तों से इतना न उलझना

कि रिश्तें कमजोर हो जाए ।

पैसे ईतना कमाओ कि 

जरूरतें सभी हो पूरी ।

स्वास्थ बेचकर पैसा न कमाओ

क्यूकि स्वास्थ है तो जीवन है ।

वाहन ईतना तेज न चलाओ कि

स्वास्थ-सुरक्षा खतरे में पडे ।

कुछ भी करो तो सोच समझकर

मर्यादा में निती नियम से करो

जीवन में सुख शांति और 

प्रसन्नता बनी रहेगी ।

विनोद आनंद                             12/03/2017 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

689 तो प्रेम हो प्रगट 

कहे दो कोई न करे 

एसा प्रेम जो हो

शर्तो का मोहताज, 

जो हो कामना या

वासना का मोहताज, 

जो हो ईच्छा या 

स्वार्थ का मोहताज ।

क्यूंकि एसा प्रेम है कलंक ।

कहे दो सभी करे

एसा प्रेम जो हो

बीन शर्ती, नि:स्वार्थी ।

कहे दो सभी करे

एसा प्रेम जो न हो

कामनाओ, ईच्छाओ या

वासना का मोहताज ।

एसा प्रेम भक्ति है क्यूंकि 

प्रेम ईश्र्वर का स्वरूप ।

प्रेम कैसे करे ? 

किसी को नफरत, धृणा

तिरस्कार न करो तो 

प्रेम होगा मन में प्रगट ।

किसी कि निंदा न करो, 

इर्षा न करो, बदला न लो

तो प्रेम होगा मन में प्रगट ।

सब के प्रति सद् भाव

और सम् भाव रखो तो

प्रेम होगा मन में प्रगट ।

ईश्र्वर में श्रध्धा रखो, 

ईश्र्वर में विश्र्वास करो

और तन मन से समर्पीत, 

नि:ष्काम भक्ति करो तो

प्रेम होगा मन में प्रगट ।

प्रेम सद् गुणों का राजा ।

प्रेम शांति का दूत और

आत्म कल्याण का मार्ग है ।

प्रेम एक तपस्या और

ईश्र्वर को प्रगट करने का

सरल हो उत्तम साधन ।

प्रेम करो और प्रेम पाओ ।

विनोद आनंद                          07/03/2017 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड