1889 जीओ तो एसे कि…..

जीओ तो एसे जैसे
ईन्सान जीता है ।
ईन्सानीयत हि जीने
का जरीया है ।
ईन्सान कि अच्छी
नीयत है ईन्सानीयत ।
जीओ तो एसे जैसे कि
सब को लगो प्यारे ।
आप को मिल ने को
तरसे, मिल के खुश हो ।
जहाँ जाने वाले हो वहाँ
बेसबरी से करे आप का
ईन्तजार ।
जीओ तो एसे जैसे कि
सज्जन जीते हो ।
सज्जनता हि है जीने
का जरीया ।
सद् भाव,सम भाव,प्रेम
भाव परोपकार भाव से
जीना है सज्जनता ।
जीओ तो एसे जैसे कि
आप को जीते जी नहि
मरने के बाद भी याद करे ।
जब तुम आऐ तुम रोए
जग हसे एसे जीओ और
एसी करणी कल चलो
कि तुम हसो, जग रोए ।
यही है सार्थकता और
सफलता जिंदगी कि ।
विनोद आनंद 09/02/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

💙 1883 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-92

🌹 राजपथ
रिश्ते हि रास्ते है,
जिंदगी में मंझिल
तक पहुँचाते है ।
रास्ते बीगड जाएँ
तो मंझिल तक कैसे
पहुँचोगे ?
रिश्ते को राजपथ
बनाओ तो मंझिल
चलके पास आएगी ।
🌻 वजुद
बीना पेट्रोल कि गाडी
एक ईन्च नहि चलेगी
बीना ब्रेक गाडी नहि
रूक शकती ।
जैसे बीना इन्धन और
बीना ब्रेक गाडी का
नहि कोई वजुद, एसे
हि बीना प्रेम और संयम
जिदगी का वज़ूद नहि ।
🍁 सिर्फ
सिर्फ खेत में बीज़ बोने
से फसल नहि होती ।
सिर्फ बातें करने से बात
नहि बनती ।
सिर्फ बडे स्वप्ने देखने से
स्वप्ने सच नहि होते ।
सिर्फ नसीब पर विश्र्वास
करने से सफलता नहि
मिलती आखिर महेनत
तो करनी हि पडती है ।
बीना महेनत सफलता कहाँ ?
विनोद आनंद 05/02/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1866 क्या फायदा

जिंदगी में खुस नहि रह शकते
तो जिंदगी का क्या फायदा ?
जिंदगी में सफल नहि होते तो
जीने का क्या फायदा ।
जिंदगी में सुख शांति न मिले
तो जीने का क्या फायदा ?
बहुत पढ के ओफिसर बने मगर
दूसरों से व्यवहार करना शीखा
नहि तो क्या फायदा ?
जिंदगी में गलत आदतों से
परेशान है मगर छोडी नहि, तो
परेशानी से, जीने क्या फायदा ?
जिंदगी में एसो आराम कि सभी
चीजें है मगर फिर भी खुशी नहि
तो जीने का क्या फायदा ?
पढ के पंडीत बने, मगर प्रेम कि
भाषा न समजी तो क्या फायदा ?
तन और मन और दोलत भी है
मगर उस का सहि उपयोग नहि
किया तो उस का क्या फायदा ?
सब कुछ है मगर जिंदगी में संतोष
नहि तो जीने का क्या फायदा ?
जिंदगी में बहुत पुस्तके और धर्म
ग्रंथ पढ लिए तो फिर भी कुछ
सुधार नहि हुआ तो जिंदगी
जीने क्या फायदा ?
व्यक्ति का विकास हुआ मगर
व्यक्तित्व का विकास नहि हुआ
तो जीने का क्या फायदा ?
जिंदगी में कुछ भी फायदा नहि, तो
एसी जिंदगी का क्या फायदा ?
विनोद आनंद 21/01/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1857 सही तरीका जीने का

मिल के नमस्ते करते रहो,
और दिलमें ज़गह बनाते रहो ।
हसते हसते मिलते रहो,
और दिल में बसते रहो ।
सब को प्रेम करते रहो और
दिल चूराके अपना बनाते रहो ।
भूल हो जाए तो सोरी सोरी
कहेते रहो और मनाते रहो ।
जिसे जो भी मिलता है,उसका
आभारसे उन्हे खुस करते रहो ।
दुःखी के आशूं पोसते पोसते,
दर्द हलका करके, हसाते रहो ।
सब को साथ सहकार देकर
सबे आशीर्वाद पाते रहो ।
दूसरों कि जिंदगी को सँवार के
खुद कि जिंदगी को सँवारते रहो ।
जिंदगी और खुदको प्यार करके
जिंदगी को महान बनाते रहो ।
श्रध्धा-विश्र्वास से ईश्र्वर कि
भक्ति करते करते ईश्र्वर कि
दया और कृपा पाते रहो ।
सहि तरिके से जिंदगी जीते जीते
जिंदगी पर जीत हासिल करते रहो ।
विनोद आनंद 13/01/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1723 रिश्तों को कैसे निभाओगे ?

रिश्तों को कैसे निभाओगे ?
रिश्तें बनते है और बिगते है
क्यूँ कि हम निभाते नहि, हम
रिश्तों कि कद्र नहि करते,
रिश्तों कि हेमीयत नहि जानते,
रिश्तों का ईस्तमाल करते है ।
रश्तें में अधिकार मागते है,
अपना कर्तव्य नहि करते ।
हम रिस्तों में शुकरियाँ नहि,
करते मगर शिकायत करते है,
और रिश्तें निभाना नहि पाते ।
उम्र गुजर जाती है,मगर रिश्तें
कमजोर रहते है क्यूँ कि हमे
रिश्तें निभाना नहि शकते ।
रिश्तों में शुकरियाँ करे और
कर्तव्य करो और रिश्ते को
मजबूत बनाओ । रिश्तें को
समर्पण,प्रेम से निभाना है ।
रिश्तों को निभाना है तो सहन
और समज शक्ति कि जरूरी है
रिश्तें निभाना आ गया तो
समजो जीना आ गया ।
जीवन कल्प वृक्ष है और
रिश्तें उस कि जडे है उसे
मजबूत बनाओगे तो उस
पर सुख, शांति, समृद्धि के
मीठे फल आएगे और जो
ईच्छा करोगे पूर्ण होगी ।
विनोद आनंद 10/09/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1716 असली स्वभाव

मनुष्य का असली स्वभाव
क्या है ? जानना जरूरी है ।
आत्मा का स्वभाव हि मनुष्य
का असली स्वभाव होना है ।
लेकिन वो कुछ ओर होता है ।
आत्मा का स्वभाव है प्रेम, तो
मनुष्य का स्वभाव प्रेम हि है ।
मगर द्वेष, ईर्षा और नफरत में
तबदिल हो गया है ।
आत्मा का स्वभाव है शांति तो,
मनुष्य का स्वभाव हि है शांति ।
मनुष्य गुस्सा करेके अशांत है ।
आत्मा का स्वभाव है पवित्रता
तो मनुष्य का दिल साफ और
मन पवित्र होना चाहिए, मगर
मन मैला दिल भावना हिन है ।
आत्मा का स्वभाव है दयालु,
तो मनुष्य का स्वभाव दयालु है
मगर कठोर और दयाहिन है ।
आत्मा का स्वभाव है आनंद,तो
मनुष्य का स्वभाव भी आनंद है,
मगर मनुष्य, दुःखी, उदास और
निराश रहेता है ।
आत्मा ज्ञानी और शक्तिशाली है
मगर मनुष्य अज्ञानी, कमजोर है
क्यूँकि स्वभाव बदल गया है,
और ज्ञान और शक्ति का सहि
उपयोग नहि करता ।
हमे अपना असली स्वभाव प्राप्त
करके धरती को स्वर्ग बनाना है ।
विनोद आनंद 04/09/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1670 प्रेम, प्रेमी और प्रेमिका

प्रेम,प्रेमी और प्रेमिका
का मिलन एक सुखद
संयोग जब प्रेम है सच्चा ।
प्रेम, प्रेमी और प्रेमिका का
मिलन एक दुःखद संयोग,
जब प्रेम में भेळसेळ हो,
आकर्षण,स्वार्थ, मोह हो ।
प्रेमी और प्रेमिका आज
काल के जवान लडका
लडकि का खेल-प्रपंच है ।
जवानी के नसे में आज
के माहोल में एसे किस्से
बनते है,बिगडते है क्यूँकि
जो भी होता है वो जोस में
नशे में, बेहोशी में होता है ।
यह उम्र केरियर-चरित्र के
घडतर कि होती है प्रेम के
चक्कर में पड के जीवन का
किंमती सयम बरबाद करने
के लिए नहि है ।
जीवन साथी ढूँढने कि
जिम्मेदारी मा बाप कि है ।
उन का हक मत छिनना,
और अनुमती के बीना कोई
गलत कदम न उठाना क्यूँकि
वो दोनों के जीवनको दुःख
और अशांति के सिवाय
कुछ नहि दे शकता ।
बाद में पस्ताने से क्या
फायदा ईसलिए जो भी करो
सोच समज कर होश में करो ।
विनोद आनंद 19/07/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड