869 पढाई पारसमणी

पढो और आगे बढो, 

बढो और विकास करो ।

पढाई बीना नहीं उध्धार

और नहीं विकास ।

पढाई ज्ञान बढाए, 

ज्ञान सद् बुध्धि बढाए ।

सद् बुध्धि संस्कार बढाए

और मन को करे शिक्षित ।

शिक्षित मन सज्जन बनाए ।

सज्जन स्वर्ग बनाए ।

पढाई पूजा सरस्वती देवी की

और सेवा देश की, उध्धार 

आत्मा का,और निर्वाह जीवन का ।

पढाई बनाए पंडीत कहते है

राजा पूजयते देश में, 

पंडीत सर्वत्र पूजयते ।

पढाई पद और पैसा दिलाए 

ईसलिए पढाई सोने का अंडा 

देनेवाली मुरघी ।

पढाई जीवन का आधार, 

जीवन निर्वाह और निर्माण 

का साधन और जीवन साधना ।

पढाई पारसमणी, स्पर्स से

जीवन को बनाए सोना और

सुख शांति का धाम ।

विनोद आनंद                                06/08/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

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860 द्रष्टि और सृष्टि

जैसी द्रष्टि एसी सृष्टि

जैसी सोच एसी द्रष्टि ।

जब आँखे देखती है 

तब मन सोचता है

सोच द्रष्टि कि जननी है ।

गलत सोच गलत द्रष्टि

गलत द्रष्टि गलत सृष्टि ।

सही सोच सही द्रष्टि

सही द्रष्टि सही सृष्टि ।

सकरात्मक सोच सहि द्रष्टि  

सद् बुध्धि सकरात्मक सोच ।

ज्ञान से बनती है सद् बुध्धि ।

सृष्टि सही या गलत ?  

द्रष्टि करेगा फैसला ।

आँखे सिर्फ देखती है

मन द्रष्टि देता है और

हम आत्मा, आत्मशक्ति 

मन में सही सोच जगए ।
सब सही, अच्छा और 

सुंदर  नज़र आता है ।

विनोद आनंद                                28/07/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

 

846 💐 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-36

💖 व्यक्तित्व और सद् गुण

जैसे फूलो में  खूशबु है 

फलों में  मीठास है ।

एसे व्यक्ति में व्यक्तित्व हो

तो उस कि खूशबु  फैलती है ।

उसके सद् गुणो कि मीठास से

सब का जीवन बनता है मीठा ।

🍁 वाणी व्यवहार और वर्तन

वाणी हो मधुर, 

व्यवहार हो अच्छा

और वर्तन हो सही

तीनों का हो त्रिवेणी संगम 

तो जीवन बने तीर्थ ।

💞 त्रिवेणी संगम 

मन हो संयमी और पवित्र, 

बुध्धि हो विवेकि और शुध्ध, 

आत्मा हो जागृत और संस्कारी, 

तीनों का हो त्रिवेणी संगम 

तो मानव जन्म हो जाए सफल

जीवन बने महान ने यादगार ।

💟 ठूठते है 

हम ठूठते  है, 

सुख में दु:ख, 

दु:ख में ठूठो सुख ।

हम ठूठते  है, 

गैरों में अपनो को, 

अपनो कों भूल कर ।

हम ठूठते  है, 

मान में अपमान को, 

अपमान में ठूठो मान को ।

विनोद आनंद                                12/07/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

829 मन है कि मानता नहीं 

मन है कि मानता नहीं, 

सुनता नहीं,समज़ता नहीं, 

और करता है मन मानी ।

जो नहीं करना है वो करे

जो करना है वो न करे 

कई बूरी आदतें पाली है

तो बूरे काम करवाता है 

मन है कि मानता नहीं

और करता है मन मानी ।

स्वभाव बिगाड के रखा है

गुस्सा आवेश दादागीरी से

सब पर करता है हकूमत

मन है कि मानता नहीं….. 

ईन्द्रियों का राज़ा मन

ईन्द्रियों के बस में है, 

ईन्द्रियों नाच नचाती है,  

बुध्धि-ज्ञान से दूर है, 

मन है कि मानता नहीं….. 

मन को छूडाना ईन्द्रियों से

जोडना है, बुध्धि से, ज्ञान से

समज़ाना है प्रशिक्षण देना है

मन मानेगा, समज़ेगा और

नही करेगा मन मानी फिर

वोही करेगा जो सही हो ।

ईन्द्रियों और मन पे काबू

सबसे बडी है कामीयाबी ।

विनोद आनंद                                02/07/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

742 सही तरीका

कोई भी काम करने का 

सही तरीका होता है ।

सही तरीक से काम 

कम समय में, आराम से

और अचछा होता है ।

हमे फूरसत कहाँ 

सही तरिका ढूंढने का ।

तरीका सही तो सफलता  ।

सही काम करने का तरीके

ही सही जीवन जीने तरीका है।

काम करने का जो भी तरीका हो, 

उसे भी अच्छा तरीका हो शकता है, 

जिसे कम समय मे,आसानी से और

अच्छा काम हो शकता है ।

बुध्धि से जरा सोचो तो

मिलेगा सही तरीका फिर

अपना कर देखो फायदा होगा

मन की सर्जन शक्ति को

जगाओ सही तरीके अपनते 

रहो तो जीवन,होगा सफळ ।

विनोद आनंद                               16/04/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

692 पहेरा

दिल से निकली 

हर बात दुआ है, 

दुआ शुभ मंगल है ।

मन से निकली 

हर बात विचार है, 

सद विचार सत्कर्म है ।

दिल भावना का ठीकाना

जज़बात कि जननी ।

शुभ मंगल भावनाएँ तो

जीवन से शुभ मंगल हो ।

मन कि हर बात न मानो

वो ईन्द्रियों से प्रेरीत है ।

बुध्धि से प्रेरीत नही है ।

मन कि वो बात मानो

जो  बुध्धि से प्रेरीत हो ।

वरना मन बेकाबु हो जाएगा ।

इन्द्रियों विषयों से प्रेरीत है

विषयों ईच्छाओ से प्रेरीत है

विषयों का नशा विष है

मन और बुध्धि का पहेरा न हो

तो इन्द्रियों बेकाबु हो जाएगी ।

आत्म परमात्मा का अंश

शक्ति का सोत्र 

संस्कारी आत्मा 

शक्ति का सही उपयोग, 

वरना गलत उपयोग ।

विनोद आनंद                             09/03/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

  

नवीनीकरण

​अशांत, असंयम मन 

अस्थिर, चंचल मन

अशुध्ध और अपवित्र मन

मनुष्यका दोस्त, शुभ चिंतक

कल्याण कारी नही होता । 

मनुष्य का दुश्मन होता है, 

क्यूकि एसा मन सही विचार,

सूचना और मस्वरा नही देता, 

क्यूकि एसा मन अज्ञानी, 

ईन्द्रियो का गुलाम और

मंदबुध्धि होते है इसलिए, 

जीनेका तरीका सही नही होता, 

जो मुश्केलियाँ,परेशानी,तनाव,

चिंता और दुख लाती है ।

क्या करे ? 

एसे मन का नवीनीकरण करना है ।

नवीनीकरण कैसे करे ? 

मन को जानना,समजना है, 

फिर अभ्यास से समजाना है, 

नियम साधना से नया बनाना है ।

शांत संयमी, शुध्ध और पवित्र 

मन कि शक्ति अपार, करो उपयोग 

तो हो विकास, कल्याण और मुक्ति ।

विनोद आनंद                            03/01/2017       फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड