1167 ईन्सान का चहेरा

हसाता खिलता चमकता और जो
निर्भय है वो चहेरा है ईन्सान का ।
मगर एसा चहेरा नज़र नही आता
ईन्सान का चहेरा खामोश, भयभीत
निर्भयता नजर आती है । क्या
मजबूरी है ? कि चहेरे पे हसी
और चमक गायब हो गई है ।
जो अंतः करण में है वो चहेरे
प्रगट हो जाएगा मन कमजोर
और भयभीत हो तो चहेरे पे हसी
कहाँ से आएगी , मन प्रसन्न
और खुश है तो चहेरे हसेगा ।
मन अशुध्ध और मेला है तो
चहेरे पे चमक कहाँ से आएगी ।
मन शुध्ध और पवित्र है तो
चहेरा चमकेगा और चमता रहेगा ।
विचार अच्छे है कर्म अच्छे है तो
चहेरे पे निर्भयता आएगी ।
चहेरे पे हसी, चमक निर्भयता के
लिए चित्त निर्मल,मन पवित्र, बुध्धि
शुध्ध, कर्म अच्छे होना जरूरी है ।
विनोदआनंद 05/05/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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1149 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-57

🌹 सलामत
मूळ और थड सलामत
तो वृक्ष रहे हरा भरा ।
धर्म सलामत तो जीवन रहे
सुखमय और आनंदमय ।
बुध्धि सुबुध्धि तो
जीवन सलामत ।
बुध्धि कुबुध्धि तो
जीवन असलामत
🌻 छे बातें
सत्य,करूणा ,तप, अहिंसा,
अचौर्य,अपरिग्रह छे बातें तारे
काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद
और मत्सर छे बातें मारे
पसंदगी है तुम्हारी ।
जीवन नैया पार लगानी है ।
या जीवन नैया डुबानी है ।
🌺 खुशी और गम
छूप छूप के रोने से गम छीपेगा,
मगर गम कम नहीं हो शकता ।
गम से मत गभराना और तडपना
तब गम का बोज हलका होगा ।
छूप छूपे हसने से खुशी न छीपेगी,
मगर खुशी बाँटने से बढती है ।
दूसरों कि खुशी में खुश रहने से
खुशी बढ जाती है । खुशी बढती
तो गम कम होता है । खुश रहो ।
विनोद आनंद 19/04/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1118 मन का प्रशिक्षण

मन का प्रशिक्षण अति आवश्यक
मन बालक और बंदर जैसा चंचल ।
जैसे बालक को प्रशिक्षण और उस
काबू जरूरी,एसे मन का प्रशिक्षण
और मन पर काबू पाना जरूरी है ।
मन गलत संग से गलत दिशा चुनेगा
फिर उसे रोकना होगा मुश्किल ।
इसलिए पहले से उसे प्रशिक्षण
देना और उस पर काबू पाना है ।
मन को जीता सो जग जीता ।
बीना प्रशिक्षण मन बने दुश्मन
प्रशिक्षण से उसे दोस्त बनाओ ।
मगर मन का प्रशिक्षण करे कैसे ?
पहले मन को समजना है और
अर्ध जागृत मन में सुसंग और
सत्संग से ज्ञान भरना है । कुसंग से
दूर रखना है और समजाना है ।
जागृत मन को अर्ध जागृत मन का
चोकिदार बनाकर नकारात्मक
यययझ को अर्ध जागृत मने में
जाने से रोको और सकारात्मक
से मन को सकारात्मक बनाओ ।
मन काबू पाने के लिए मन जो कहे
और करे उस पर सोचो, वो सही है
या गलत है फिर सुनो या करो ।
मन को पसंद है वो न करो,
जो ना पसंद है वो करो और
मन को ना कहेनी कि आदत डालो ।
मन को बुध्धि से जोड कर और
आत्मवविश्र्वास से मन धीरे धीरे
प्रशिक्षण से और मन पर काबू
पाने के अभ्यास से काबू पालो ।
विनोद आनंद 19/03/2018
फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड

997 💐 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-48

🍁 चमक

आँखों कि चमक रोशनी

चहरे कि चमक मुश्कान

शरीर कि चमक स्फूर्ति

मन कि चमक बुध्धि 

दिल कि चमक प्यार 

व्यक्ति कि चमक व्यक्तित्व 

जिंदगी कि चमक जिंदादिली 

आत्मा कि चमक परमात्मा

खुद को चमका ओगे तो 

जीवन बनेगा महान ।

🌺 परछाई

खुश रहेना है 

खुशी को बुलाना है 

चहरे पे हसी लाना है ।

हसी खुशी दोनों  है 

सहेलीयाँ साथ निभाती है ।

जभी हसी आती है

खुसी पिछे हि खडी होती है ।

खुसी है हसी कि परछाई ।

🌻 संगम

जीवन में सही 

तरीके से जीना है

तो जीना शीखना है

शीखना तो पढना है

पढना है तो समझना है ।

समझना है तो मन,बुध्धि 

आत्मानो त्रिवेणी संगम 

में स्नान करना है ।

विनोद आनंद                              09/12/2017      फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

869 पढाई पारसमणी

पढो और आगे बढो, 

बढो और विकास करो ।

पढाई बीना नहीं उध्धार

और नहीं विकास ।

पढाई ज्ञान बढाए, 

ज्ञान सद् बुध्धि बढाए ।

सद् बुध्धि संस्कार बढाए

और मन को करे शिक्षित ।

शिक्षित मन सज्जन बनाए ।

सज्जन स्वर्ग बनाए ।

पढाई पूजा सरस्वती देवी की

और सेवा देश की, उध्धार 

आत्मा का,और निर्वाह जीवन का ।

पढाई बनाए पंडीत कहते है

राजा पूजयते देश में, 

पंडीत सर्वत्र पूजयते ।

पढाई पद और पैसा दिलाए 

ईसलिए पढाई सोने का अंडा 

देनेवाली मुरघी ।

पढाई जीवन का आधार, 

जीवन निर्वाह और निर्माण 

का साधन और जीवन साधना ।

पढाई पारसमणी, स्पर्स से

जीवन को बनाए सोना और

सुख शांति का धाम ।

विनोद आनंद                                06/08/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

860 द्रष्टि और सृष्टि

जैसी द्रष्टि एसी सृष्टि

जैसी सोच एसी द्रष्टि ।

जब आँखे देखती है 

तब मन सोचता है

सोच द्रष्टि कि जननी है ।

गलत सोच गलत द्रष्टि

गलत द्रष्टि गलत सृष्टि ।

सही सोच सही द्रष्टि

सही द्रष्टि सही सृष्टि ।

सकरात्मक सोच सहि द्रष्टि  

सद् बुध्धि सकरात्मक सोच ।

ज्ञान से बनती है सद् बुध्धि ।

सृष्टि सही या गलत ?  

द्रष्टि करेगा फैसला ।

आँखे सिर्फ देखती है

मन द्रष्टि देता है और

हम आत्मा, आत्मशक्ति 

मन में सही सोच जगए ।
सब सही, अच्छा और 

सुंदर  नज़र आता है ।

विनोद आनंद                                28/07/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

 

846 💐 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-36

💖 व्यक्तित्व और सद् गुण

जैसे फूलो में  खूशबु है 

फलों में  मीठास है ।

एसे व्यक्ति में व्यक्तित्व हो

तो उस कि खूशबु  फैलती है ।

उसके सद् गुणो कि मीठास से

सब का जीवन बनता है मीठा ।

🍁 वाणी व्यवहार और वर्तन

वाणी हो मधुर, 

व्यवहार हो अच्छा

और वर्तन हो सही

तीनों का हो त्रिवेणी संगम 

तो जीवन बने तीर्थ ।

💞 त्रिवेणी संगम 

मन हो संयमी और पवित्र, 

बुध्धि हो विवेकि और शुध्ध, 

आत्मा हो जागृत और संस्कारी, 

तीनों का हो त्रिवेणी संगम 

तो मानव जन्म हो जाए सफल

जीवन बने महान ने यादगार ।

💟 ठूठते है 

हम ठूठते  है, 

सुख में दु:ख, 

दु:ख में ठूठो सुख ।

हम ठूठते  है, 

गैरों में अपनो को, 

अपनो कों भूल कर ।

हम ठूठते  है, 

मान में अपमान को, 

अपमान में ठूठो मान को ।

विनोद आनंद                                12/07/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड