1580 मनोविज्ञान-1

मनोविज्ञान क्या है ?
मनोविज्ञान का मतलब
है ? मन क्या है ? उस का
काम क्या है ? क्या कर रहा है ?
कैसा है और कैसा होना है,यानी
मन कि मानसिकता क्या है ?
आदमी को मन को जानना है ।
हमारे शरीर के दो हिस्से है ।
स्थूल शरीर और सूक्ष्म शरीर ।
स्थूल शरीर जो दिखता है वो है,
पांच ज्ञानेन्द्रिया-पांच कर्मेन्द्रिया ।
सूक्ष्म शरीर जो नही दिखता वो है
मन,बुध्धि,आत्मा-चैतन्य है,स्थूल
शरीर का नियंत्रण करता है ।
उस में मन ईन्द्रियों का राजा,
काम है इन्द्रियो पे राज करना ।
इन्द्रियाँ राज करती है मन पर ।
मन को गुलाम बना दीया है ।
मन इन्द्रियाँ के वश में है ।
मन बुध्धि को नहि पूछता,
करता है मन मानी, ईन्द्रियों
कि गुलामी करता है ईसलिए
काम क्रोध लोभ मोह मद
मत्सर जैसे दुर्गणो का ढेर
बन के मनुष्य का दुश्मन है ।
मन ईन्द्रियों कि ईच्छाओ
कि पूर्ति बुध्धि के तराजु में
तोलकर नहि करता ।
मन कैसा है, कैसा होना है ?
यानी मन कि मानसिकता है ।
के लिए पढो मनोविज्ञान-2
विनोद आनंद 28/04/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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1581 मनोविज्ञान-2

मनोविज्ञान-1 के अनुसंधान में ।
मन कैसा है, कैसा होना है ?
मन कि शक्ति अपार, सहि
दिशा में लगाओ तो जीवन में
होगा विकास वरना विनाश ।
* मन अधोगामी है उसे उर्ध्वगामी
बनाओ तो विकास वरना विनास ।
* मन अति चंचल या अस्थिर है उसे
एकाग्रह या स्थिर बनाना है ।
* मन अशुध्ध और अपवित्र है
उसे सदगुणों से शुध्ध और
पवित्र बनाना है ।
* मन आलसी और भोगविलाशी है,
कर्मयोगी या क्रियाशील बनाना है ।
* मन तुम्हारा दुश्मन बन बैठा है,
मन को दोस्त बनाना है ।
* मन असंयमी और ईन्द्रियो का
गुलाम है उसे बुध्धि के साथ
जोड कर संयमी बनाना है ।
* संयमी मन अच्छा नौकर है ।
असंयमी मन बेवफा राजा है ।
* मन कामचोर और हरामी है,
लगातार काम दिया करो क्यूँ कि
खाली मन दैत्यो का अखाडा है ।
* मन हि बंधन का कारण है, मन हि
मुक्ति का जरीया है । मन कि हारे,
हार या मन का जीते जित ।
मन का असर तन पे और तन
का असर मन पे पडता रहेता है,
ईसलिए मन हमेंशा खुस या
प्रसन्न तो, तन भी रहे स्वस्थ ।
तन स्वस्थ तो मन भी स्वस्थ ।
मन कि सच्चाई जानो, मन को
गुलाम बनाओ वरना आपको वो
गुलाम बनाके छोडेगा ।
विनोद आनंद 28/04/2019
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1473 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-78

🌹 शायर
महोबत ईश्क और प्यार ने
बहुतो को शयार बनाया,वरना
शायर बनना आसान नहीं है ।
अगर पहेले से होते शायर तो
उसे कोई महोबत नही करते ।
🌻 अच्छे दिन
चुनाव में चिन्ह कुछ भी हो
मगर अच्छे चरित्र वाले को
वोट देंगे तो अच्छे चरित्र वालों
को हि टिकट मिलेगा चुनाव में
तो अच्छे दिन आएगें जरूर ।
🌺 कैसे समजाए ?
कैसे समजाए ना समज को
कौन है ना समज तुम या मन
मन एक बालक कि भाँति उसे
समजाना है तो धीरज रखो
शांत रहो और सोचते रहो
तरिके समजाने के ।
मन बंदर कि भाँति कैसे
समजाए ? वो बातों से नहिं
लातों से मानेगा, उस के साथ
तो बनना पडेगा कठोर अगर
समजाना है तो, वरना तम्हे वो
समजा के बनाएगा गुलाम ।
ना समज मन को ज्ञान, बुध्धि
और अभ्यास से समजाना
पडेगा तो वो समजेगा ।
विनोद आनंद 28/01/2019
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1363 दिल दिमाग,बुध्धि और मैं

-मैं चैतन्य, एक अदभूत
शक्ति परमात्मा का अंश ।
दिल भावनाओ अगाध सागर
दिमाग विचारो का समुद्र ।
बुध्धि ज्ञान का सागर
निर्णय करने वाली ।
दिल दिमाग जैसे एक माँ
के दो संतान अलग अगल
प्रकृति वाले भाई ।
जिंदगी में एसा भी मौका
आता है दिल ना कहेता है
और दिमाग हा कहेता फिर
भी बुध्धि निर्णय लेती है ।
जिंदगी में एसा भी मौका
आता है दिल हा कहेता है
और दिमाग ना कहेता फिर
भी बुध्धि निर्णय लेती है ।
दिल दिमाग के बीच संधर्ष
होता रहेता है ।
दिमाग दिल से कहेता
भावना में आकर निर्णय
नही लेना ।
दिल दिमाग को कहेता
कि स्वार्थी बनके निर्णय
नही लेना ।
विवेक बुध्धि निर्णय ले
तब भी अंतरात्मा चैतन्य
से सलाह मसहारा से बुध्धि
निर्णय ले वो हि होगा सही
और कल्याणकारी निर्णय ।
विनोद आनंद 03/11/2018
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1243 तेज दिमाग कैसे बने

दिमाग कि शक्ति है सही,
सकारात्म,शुभ,हितकारी
सर्जनात्मक सोच,उसे दिमाग
सक्रिय और तेज बनता है ।
बुध्धि,अनुभव और जानकारी
से दिमाग तेज बन शकता है ।
उस के लिए जिज्ञासा, जानने
कि तीव्र ईच्छा और विश्र्लेषण
करने कि आदत जरूरी है ।
कुछ अलग सोच ने कि, तलास
और संसोधन करने कि वृति से
दिमाग को तेज बना शकते हो ।
दिमाग को पहेली ,विडीयो गेम,
कूट प्रश्र्नो से और काल्पना
शक्ति से तेज बना शकते हो ।
दिमाग को जीतना विषेश
तरीके से ईस्तमाल करोगे
ईतना वो तेज बनता जाएगा ।
तेज दिमाग समस्या का हल
भी तुरंत निकाल शकता है ।
विनोद आनंद 21/07/2018
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1239 मन पर संयम कैसे करे ?

मन क्या है ? उस का काम क्या ?
वो जानना है और उस पर नज़र
रखकर उसे नियंत्रित करना है ।
मन को ईन्द्रियों पर काबू रखना है ।
मन ईन्द्रियों के ईशारों को मानता है ।
ईन्द्रियों कि हर एक ईच्छा को बुध्धि
और ज्ञान से चकासना है कि वो
सही है या नही फिर ईन्द्रियों कि
ईच्छा को पूर्ण करना वरना नहि ।
यही तरिका है मन पर संयम पानेका ।
मन को मनमानी न करने दो और मन
को ना कहेने का अभ्यास करना है ।
अगर यहि तरिका और अभ्यास का
सिल सिला चलता रहा तो एक दिन
जरूर मन पर संयम पा शकोगे ।
गीता में श्री कृष्ण ने कहा है कि
अभ्यास और वैराग्य से मन पर
काबू पा शकते हो, धीरज से और
सतत प्रयाश करने से मन पर
संयम पा शकते हो ।
जरूरी है सिर्फती व्र ईच्छा,
द्रढ निश्चिय और कोशिश ।
विनोद आनंद 19/07/2018
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1238 मन क्या है ?

मन सूक्ष्म शरीर का हिस्सा
ज्ञानेन्द्रियो, कर्मेन्द्रियो से
पर और स्थूल शरीर का
नियंत्रक, मन से पर है
बुध्धि जो निर्णयाक और
मन का सलाहकार ।
बुध्धि का सब से अच्छा
दोस्त है ज्ञान जो बुध्ध को
निर्णय लेने में सहायक है ।
सब से पर-सुपर है आत्मा
ज्ञान और शक्ति स्वरूप
शरीर कि चेतना जो न
हो तो शरीर लाश है ।
मन को बुध्धि से, ज्ञान से
आत्म शक्ति से ईन्द्रियों
पर हकूमत करनी है तो
मन है तुम्हार दोस्त ।
अगर मन बुध्धि, ज्ञान
अनुशार नही लेकिन
ईन्द्रियों को अनुशार
काम करता है तो मन
तुम्हार बनेगा दुश्मन ।
मन का बुध्धि से लग्न
और ज्ञान से दोस्ती हो
तो मन को ईन्द्रियों से
छुडाना है तो मन कि
शक्ति का सही उपयोग
होगा और मन आप को
महान बना शकता है ।
यही है मन और ईन्द्रियों
पर संयम पाने कि प्रक्रिया ।
विनोद आनंद 19/07/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड