742 सही तरीका

कोई भी काम करने का 

सही तरीका होता है ।

सही तरीक से काम 

कम समय में, आराम से

और अचछा होता है ।

हमे फूरसत कहाँ 

सही तरिका ढूंढने का ।

तरीका सही तो सफलता  ।

सही काम करने का तरीके

ही सही जीवन जीने तरीका है।

काम करने का जो भी तरीका हो, 

उसे भी अच्छा तरीका हो शकता है, 

जिसे कम समय मे,आसानी से और

अच्छा काम हो शकता है ।

बुध्धि से जरा सोचो तो

मिलेगा सही तरीका फिर

अपना कर देखो फायदा होगा

मन की सर्जन शक्ति को

जगाओ सही तरीके अपनते 

रहो तो जीवन,होगा सफळ ।

विनोद आनंद                               16/04/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

692 पहेरा

दिल से निकली 

हर बात दुआ है, 

दुआ शुभ मंगल है ।

मन से निकली 

हर बात विचार है, 

सद विचार सत्कर्म है ।

दिल भावना का ठीकाना

जज़बात कि जननी ।

शुभ मंगल भावनाएँ तो

जीवन से शुभ मंगल हो ।

मन कि हर बात न मानो

वो ईन्द्रियों से प्रेरीत है ।

बुध्धि से प्रेरीत नही है ।

मन कि वो बात मानो

जो  बुध्धि से प्रेरीत हो ।

वरना मन बेकाबु हो जाएगा ।

इन्द्रियों विषयों से प्रेरीत है

विषयों ईच्छाओ से प्रेरीत है

विषयों का नशा विष है

मन और बुध्धि का पहेरा न हो

तो इन्द्रियों बेकाबु हो जाएगी ।

आत्म परमात्मा का अंश

शक्ति का सोत्र 

संस्कारी आत्मा 

शक्ति का सही उपयोग, 

वरना गलत उपयोग ।

विनोद आनंद                             09/03/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

  

नवीनीकरण

​अशांत, असंयम मन 

अस्थिर, चंचल मन

अशुध्ध और अपवित्र मन

मनुष्यका दोस्त, शुभ चिंतक

कल्याण कारी नही होता । 

मनुष्य का दुश्मन होता है, 

क्यूकि एसा मन सही विचार,

सूचना और मस्वरा नही देता, 

क्यूकि एसा मन अज्ञानी, 

ईन्द्रियो का गुलाम और

मंदबुध्धि होते है इसलिए, 

जीनेका तरीका सही नही होता, 

जो मुश्केलियाँ,परेशानी,तनाव,

चिंता और दुख लाती है ।

क्या करे ? 

एसे मन का नवीनीकरण करना है ।

नवीनीकरण कैसे करे ? 

मन को जानना,समजना है, 

फिर अभ्यास से समजाना है, 

नियम साधना से नया बनाना है ।

शांत संयमी, शुध्ध और पवित्र 

मन कि शक्ति अपार, करो उपयोग 

तो हो विकास, कल्याण और मुक्ति ।

विनोद आनंद                            03/01/2017       फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

बहिर्मुख या अंतर्मुखी

​जिंदगी जीने का तरीका

बहिर्मुख है जैसे हमारी

सब इन्दियाँ बहिर्मुख है ।

हमारी जिंदगी पर भौतिक 

चीजों पर आधारित है ।

अपनी सोच भी बहिर्मुख है ।

हमे अपनी जिंदगी जीनेका 

तरीका अंतर्मुखी करना है

हम बाहारी चीजों से  शांति

और खुस रहेना चाहते और

आनंदित रहेना चाहते ।

हमे अतर्मुखी बन के अंतःकरण, 

मन, बुध्धि और आत्मा को

शुध्ध, पवित्र और शांत करना है

फिर अपनी जिंदगी बहार कि 

चीजों कि मोहताज नही होगी ।

बहार कि परिस्थिति कैसी भी

हो आप कि खुसी, शांति को

छीन शकता और आप कि जिंदगी 

सफल और सार्थक होगी ।

विनोद आनंद                               28/11/2016         फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

एसी प्रेक्टीस हो जाए

​जरा रूको, सोचो और फिर

कुछ बोलो, या कुछ करो 

या जवाब दो, उस से पहेले 

कुछ भी नही ।

एक एसा पल, जो खुद से, 

मन से बुध्धिमता से 

बात करके, सही निर्णय 

लेने का वक्त है, जो सही 

परिणाम दे । 

जीवन में एसी प्रेक्टीस

अगर रास आ जाए और 

आदत बन जाए तो कुछ 

जल्द बाज़ी में खराब 

परिणाम कि गुंजाईस नही ।

सफलता ही सफलता होगी ।

जीवनमें होगा सुख,शांति का

 आगमन ।

विनोद आनंद                           05/10/2016

फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

  

किस का कल्याण किस में 

​आत्मा का कल्याण परमात्माना 

साक्षात्कार और मोक्ष में ।

मन का कल्याण मन के संयम में ।

बुध्धि का कल्याण सही निर्णय में ।

शरीर का कल्याण तन्दुरस्ती में ।

मानव का कल्याण आत्मा कल्याण में ।

परिवार का कल्याण सुख शांति मे ।

संबंधीओ का कल्याण रिश्ते निभाने में ।

समाज का कल्याण सब के कल्याण में ।

देश का कल्याण देश कि समृध्धि, 

और देशवासीओं कि खुसाली में ।

विश्व का कल्याण विश्व शांति में ।

जिस का जिस में हो कल्याण

हे ईश्वर उसे उसका ही दो वरदान 

चलो यही प्रर्थना करे तो, 

‘ वसुध्धेव कुटुंम्बकम्, 

का स्वप्न हो सिध्ध ।

विनोद आनंद                               27/08/2016   फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड

बस इतना ही कहेना है

बस इतना ही कहेना है आपसे की
आप अपनी अंतरात्मा की सुनो
ईश्वर की सुनो, गुरु-सदगुरू की सुनो ।
मगर मन-ईन्द्रियों की न सुनो ।

अंतरात्मा – मन, बुध्धि,
आत्मा का त्रिवेणी संगम,
मेल जूल,सहयोग तीनो में
ईन्द्रियो पर पा शकते हो काबू ।
बस इतना ही कहेना है आपको ।

ईन्द्रियाँ अपने विषयों की कामना
में मस्त है और बहेकने लगती है ।
मन भी नही बच सकता विषयों से ।
मन को छूडाना है काम वासना से ।
बस इतना ही कहेना है आपको ।

विशुध्ध-विवेक बुध्धि और
ज्ञान-आत्मा के संस्कार ही
मन पर नियंत्रण कर शकते है,
समझा के या जबरजस्ति से ।
संयमी मन ईन्द्रियाँ को विषयों की
काम वासना से मुक्त कर शकता ।
बस इतना ही करना है आपको ।
बस इतना ही कहेना है आपको ।

विनोद आनंद                         05/02/2016
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड