1594 भक्ति कैसे करे ?

भक्ति है प्रेम, आसक्ति प्रेमपूर्ण
परमात्मा के प्रति । मन में
आसक्ति और दिल में प्रेम
परमात्मा के प्रति है भक्ति।
हम प्रेम स्वरूप आत्मा है
परमात्मा को प्रेम करना हि
परमात्मा कि भक्ति है ।
पहेले परमात्मा को मानना,
जानना, समझना, क्षधा
और विश्र्वास करना ।
फिर उसे रिश्ता जोडना
और निभाना और उसके
अनुशार भावना के साथ
भक्ति करना । जीवन में
सात्विकता,सहजता और
सरलता के साथ भक्ति करो ।
प्रभु के चरणों में मन, बुध्धि,
और चित्त समर्पीत भक्ति करो ।
भक्ति में दंभ, छल, कपट और
जूठ्ठ वर्जीत है ।
दिन में बह्म मुहरत में दो घंटे
दो पहर और संध्या को एक
घंटा करना भक्ति नियमीत ।
भक्ति में भजन किर्तन,अर्चना
पूजा, प्रार्थना, स्मरण करना ।
भक्ति का तरीका हो कुछ भी
लेकिन अच्छी भावना और
प्रेम होना आवश्यक है ।
भगवान नहि भूखा चीजों
का, वो तो भूखा है प्रेमका ।
भक्ति में आंखो में आंशु, मन
कोमल, चित और निर्मल हो ।
संपूर्ण शरणागती आवश्य है ।
भक्ति करो भगवान पा लो ।
विनोद आनंद 12/05/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

Advertisements

1593 भक्त भक्ति और भगवान

भगवान कि भक्ति करे
वो भक्त कहेलाए ।
भक्त भगवान का प्राण ।
भगवान भक्त का सब
कुछ है । भक्ति सेतु
भगवान और भक्त के
बीच । भक्ति एकेली
नहि हो, संग उस के
हो ज्ञान और वैराग्य तो
भक्ति मिलाए भगवान ।
श्रीमद् भगवद गीता में
भक्तियोग में कैसा भक्त
भगवान को प्रिय है वो
खुद भगवानने कहा है ।
निष्काम, समर्पीत भक्ति,
भगवान में प्रेम आसक्ति,
श्रध्धा और विश्र्वास हो ।
भक्ति श्रेष्ठ मार्ग भगवान
कि प्राप्ति का । भक्ति हो
तो मीरा,नरसिंह महेता,
जलाराम जैसी तो, हो
सक्षातकार ईश्र्वर का ।
भक्त का सरल स्वभाव,
न मन कटुलाई और यथा
लाभ संतोष सदाई ।
भक्त संसार के द्रन्दो से
मुक्त हो और हर प्राणी में
देखे भगवान कि मूरत ।
सत्य, प्रेम, दया और
करूणा का हो पुजारी ।
भगवान भक्त के आधिन
अगर हो भक्ति सच्ची
और भक्त हो सच्चा ।
भगवान कि कृपा से
प्राप्त होती है भक्ति ।
भक्त,भक्ति और भगवान
का अनोखा रिश्ता है ।
विनोद आनंद 11/05/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईडञ

1421 ए भी क्या जीना है ?

ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में सुख,चैन,शांति न
हो और मान सन्मान न मिले ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में रिशेंदारों, दोस्तों
का प्यार और साथ न मिले ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में अकेलापन,निराशा
और व्याकुलता हतासा सताए ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में शारीरिक,मानसिक
और संतान सुख न मिले ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
बहुत कुछ हो मगर जिंदगी में
संतोष,भक्ति और आनंद न हो ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में क्लेश, झगडे हो,
और रिश्तों में अपनापन न हो ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में तनाव, परेशानी हो,
निष्फलता और असंतोष हो ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में मरते मरते और उसे
को बोज समजकर जीए ।
विनोद आनंद 10/12/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1217 शक्ति कैसे बढाए ?

शक्ति क्या है ?
आत्म शक्ति, मन कि
और तन कि शक्ति ।
शक्ति का व्यय रोकने से
शक्ति कम नही होती ।
शक्ति के सही उपयोग से
शक्ति बढती है क्यूँकि
खुशी होती है, खुशी से
आत्मविश्र्वास और
शक्ति बढती है ।
अच्छा काम करने से
शक्ति बढती है और
गलत काम करने से
शक्ति घटती है ।
जरूरत से कम बोलने से,
सबसे मिल जूल के रहने से
लक्ष्य पर फोकस करने से
बहेस नही करने से और
बहादूर बन के काम करने से
शक्ति बढती है , वरना
शक्ति का व्यय होता है ।
गुस्सा,आवेश, तनाव और
चिंता से शक्ति कम होती है ।
प्रसन्न चित, शांति और
खुश रहने भी शक्ति बढेगी ।
मन पर संयम और तन को
स्वस्थ रखने से शक्ति बढती है ।
ईश्र्वर उर्जा का स्त्रोत उसे
भक्ति से जूडे रहने से तुम्हारी
शक्ति रीचार्ज होती है ।
काम से उर्जा खर्च होती ही
उस मोबाई कि बेटरी कि
तरहा रीचार्ज करना है ।
विनोद आनंद 24/06/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1168 मेरी प्रर्थना

पल पल तुम्हारा स्मरण हो
पल पल तुम्हारी याद आए
पल पल तुम्हारे नाम का जप हो
एसी तुम्हारी भक्ति चाहता हूँ मैं ।
पल पल तुम्हारा दर्शन हो
पल पल तुम्हारा प्यार, कृपा मिले
जीते जी तुम्हारा साक्षात्कार हो
एसी तुम्हारी भक्ति चाहता हूँ मैं ।
अगर जीते जी साक्षात्कार न हो
तो जैसे आप कि मरजी मगर
अंत समय मेरी मरजी को अपनी
मरजी बनाकर दर्शन देने आना ।
जब तक आप नहीं आओगे मैं
शबरी कि भाँति ईन्तजार करुंगा ।
जब तक दर्शन न दोगे तो मैं प्राण
नही छोडुंगा या न छोड पाऊंगा
यह मेरी जिद्द है, आगे तुम्हारी मरजी ।
मेरी आरजू है कि अंत समय तक
तुम्हारे सन्मुख रहुँ, तुम्हारा भक्त
बना रहुँ और तुम्हारा स्मरण रहे ।
राम नाम मुख से निकले जब प्राण
तनसे निकले, तब राम परिवार हो
सामने जब प्राण तनसे निकले,और
तब पूजा कक्ष मैं हूँ , जब प्राण तनसे
निकले । ईतना तो करना स्वामी
जब प्राण तन से निकले ।
एसी तुम्हारी भक्ति मैं चाहता हूँ ।
विनोदआनंद 07/05/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

947 ज्ञान

ज्ञान सबसे महान

सबसे पवित्र और पूजनीय ।

ज्ञान का देवता है सूरज, 

करता है दुनिया में उजाला, 

ज्ञान करता है जीवन में उजाला ।
राजा पूजनीय देश में 

ज्ञानी पूजनीय सर्वत्र ।

ज्ञान उजाला और 

जीवन कि रोशनी 

अज्ञान जीवन का अंधकार ।

ज्ञान बीना जग सुना निरश

ज्ञान ही सब कुछ जीवन में ।

ज्ञान संग भक्ति जूडे तो ज्ञानी 

भक्त ईश्र्वर को अति प्रिय ।

ज्ञान ईश्र्वर, ईश्र्वर ही ज्ञान है ।

ज्ञान कि गंगा बहाते चलो 

भक्ति का यमुना बहाते चलो

जीवन को सफलता,सार्थकता

समृद्धि कि दिशा दिखाते रहो ।

ज्ञानी बनो अज्ञानी नही 

ज्ञान होते हुए भी ज्ञान का

ईस्तमाल न करे वो है मूढ ।

विनोद आनंद                               11/10/2017

फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

793 जिंदगी कि बाज़ी जीतलो

क्या पकडाना है ? 

जो छोडना चाहे, 

उसे पकडो ।

क्या छोडोना है ? 

जो पकडना चाहे, 

उसे छोडो ।

जो खराब है,उसे छोडो ।

जो अच्छा है,उसे पकडो ।

अहंकार को छोडो, 

स्वमान को पकडो ।

जो सही है,उसे पकडो ।

जो  गलत है,उसे छोडो ।

प्रेम को पकडो,मोह को छोडो ।

मित्रताको पकडो,शत्रुताको छोडो ।

जो जूठ्ठ  है,उसे छोडो ।

जो सच है, उसे पकडो ।

संसार कि माया को छोडो, 

ईश्र्वर कि भक्ति को पकडो ।

लोभ-लालच को छोडो

संतोष-शांति को पकडो ।

द्वेष-ईर्षा को छोडो

दया-करूणा को पकडो ।

कुसंग को छोडो, 

सत्संग को पकडो ।

जिसे छोडना है उसे

छोडने कि हिंमत रखो

जिसे पकडना है उसे

पकडने कि जिद करो ।

अगर यह होने लगा तो

समजना कि जिंदगी कि

बाज़ी आपने जीत ली ।                                         

विनोद आनंद                                 30/05/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड