848 सब के प्रिय बनोगे कैसे ? 

सब के  प्रिय बनोगे कैसे ? 

जीवन का उद्देश और लक्ष्य  रखो ।

फिर उस पर चिंतन करो तो

अवश्य सब के प्रिय बनोगे ।

आपके लिए कुछ महत्वपूर्ण टीप्स ।

जब भी मिलो मुस्करा के मिलो ।ञ

किसीसे वादा करो तो निभाओ ।

वचनबध्धता और विश्वास पेदा करो ।

किस का दिया हुआ काम करो ।

तो बनोगे सब के प्रिय ।

किसी कि रुचि अनुसार और

उने फायदा कि बात करो ।

किसी की बात ध्यान से सुनो 

अगर हो शके तो योग्य सुझाव दो

तो बनोगे सब के प्रिय ।

सही व्यवाहार करो तो कोई 

गेर समझ पेदा न हो ।

अगर हो जाए तो दूर करो ।

भूल हो जाए तो माफि माग लेना ।

दूसरों कि भूल को माफ कर देना ।

तो बनोगे सब के प्रिय ।

सब से प्रेम करो न किसी से

नफरत न कोई द्वेष न दुश्मनी 

न निंदा चुगली, न बदले कि चेष्ठा

दलील करवा टेव छोडो

जतु करवा नी टेव पाडो

सहन करवा नी टेव पाडो 
तो बनोगे सब के प्रिय ।

विनोद आनंद                                15/07/2017    

फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

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830 ठीक नहीं है

हसना बुरी बात नहीं, 

किसी कि हँसी उडाना ठीक नही ।

मजाक करना बुरी बात नहीं, 

किसी कि मजाक उडाना ठीक नहीं ।

गलती हो जाए बूरी बात नहीं, 

गलती कि माफि न मागना, 

गलतियाँ करते रहेने ठीन नहीं ।

गिरना बुरी बात नहीं,   

गिर के नही उठना ठीक नहीं ।

जरूरी गुस्सा करना बूरी बात नहीं, 

बीन जरूरी गुस्सा करना ठीक नहीं ।

कभी कभी बीना सोचे बोलना बुरी नहीं, 

हर वक्त बीना सोचे बोलना ठीक नहीं ।

कभी बहार खाना बुरी बात नहीं है, 

बार बार बहार खाना ठीक है ।

जल्दबाजी करना कोई बात नही, 

लेकिन जल्दबाजी में नुकशान 

और घाटा हो ठीक नही ।

बात बीगडे कोई बात नही, 

बात बिगडती जाए वो ठीक नही ।

किस कि जान बचाने 

झूठ बोलना बूरी बात नही, 

गलती छूपा कर झूठ ₹

बोलना ठीक नहीं, जो ठीक है वो ही 

करने कि चेष्टा करो,वरना भूल जावो ।

विनोद आनंद                                02/07/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

799 ईन्सान क्या नही करता-1

ईन्सान क्या नही करता ? 

अपनी गलती कबूल नही करता ।

दूसरों को जिम्मेदार समजता है ।

उसने गुस्सा किया, बात बढ गई 

उस में मेरी को गलती नही है ।

ईन्सान हर वक्त यही करता है ।

ईन्सान क्या नही करता ? 

किसी कि गलती माफ नही करता ।

गलती कि है तो सज़ा मिलेगी ।

जब खुद गलती करे तो सरिफ, 

दूसरें करे तो गुन्हेगार ।

ईन्सान हर वक्त यही करता है ।

ईन्सान क्या नही करता ? 

अपनी गलती कि माफि नही मागता ।

मैं  क्यूँ माफि मांगु ? 

मैं मेरी कमाई से पेट भरता हूँ, 

उसकि कमाई का नही खाता ।

अपना इगो बनाए रखता है ।

ईन्सान हर वक्त यही करता है ।

ईन्सान क्या नही करता ? 

अपनी किसी से प्यार नही करता

प्यार घाटे का सौदा है 

जिंदगी में  मुनाफा चाहीए

प्यारे पेट नही भरता तो

जिंदगी बसर कैसे होगी 

ईन्सान हर वक्त यही करता है ।

विनोद आनंद                                 04/06/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

686 भेद भाव

अपने लिए कुछ अलग

दूसरों के लिए कुछ अलग

नियम,नज़रिया, और सोच ।

दूसरों की बडी समस्या छोटी

अपनी छोटी समस्या बडी ।

दूसरों कि गलती, माफ नही

अपनी गलती माफ ।

दूसरों के दुर्णगु कहेना

अपने दुर्णगु छूपाना ।

दूसरों के सद् गुण न देखना

अपने सद् गुण कहेना ।
दूसरों के लिए कुछ ओर ।

अपने लिए कुछ ओर

दूसरों का व्यवहार निंदनीय, 

अपना व्यवहार सराहनीय ।

दूसरों का स्वभाव खराब, 

अपना स्वभाव अच्छा ।

दूसरे का जो भी कर्म  वो गलत, 

अपना जैसा भी कर्म  वो सही ।

दूसरो की गलतियाँ निकालना

अपनी गलती नही निकालना ।

दूसरो सब जूठ्ठे, अपना सब सच ।

दूसरों का ओर अपनो का अलग

हीसाब क्यूँ ? दूसरों के साथ 

एसा भेदभाव क्यूँ ? 

जब खत्म हो एसा भेदभाव

तब होगा परस्पर मेल जुल ।

विनोद आनंद                          05/03/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

भूलना या याद रखना क्या ? 

भूलना नही है हमे

अपनी गलतीयों को

कुछ शीखे बीना ।

याद नही रखना है हमे

दूसरो कि गलतीयों को

क्षमा करने के बाद ।

भूलना नही है हमे

दूसरों के अहेसानो को

अहेसान करने से पहेले ।

याद नही रखना है हमे

किए हुए अहेसानो को 

करते रहेना है अहेसान ।

भूलना नही है हमे

अच्छे दिनों को, जो

बुरे दिनों का साथी है ।

याद नही रखना है हमे

बीते हुए दु:खो को 

हमेंशा खूश रहेना है । 

क्या याद रखना और

क्या भूलना है अगर 

वो आ गया जिंदगी में

तो जिंदगी आशान होगी

वरना जिंदगी कठीन होगी ।

 विनोद आनंद                          22/01/2016         फ्रेन्ड, फिलोसोफर,गाईड 

बहेतर है…… 

​खुद समझना नही चाहते, 

ओरों को समझाते है ।

कोई नही समजता और

गेर समझ जन्म लेती है ।

बेहतर है खुद समझ जाए ।

खुद सुधारना नही चाहते, 

औरों को सुधारना चाहते है ।

कोई नही सुधरता, संबंध बिगडे है ।

बेहतर है खुद सुधर जाए ।

खुद के नुक्स नही दीखते, 

ओरों के नुक्स निकाले है । 

खुद में नुक्स ईक्कठा होता है ।

बेहतर है ओरों कि अच्छाई देखे ।

खुद कि भूल छूपाना और

ओरों कि भूले दिखाना । 

बेहतर है खुद कि भूल कबूल 

करो फिर न करो और ओरों 

की भूल माफ करो ।

खुद को सच समजना

साबित करने को दलील करना

और औरों को झूठा समझकर

साबित करने को दलिल करना 

बहेतर है सच्चाई का साथ दो ।

खुद झूकना नही चाहते

ओरों को झूकाना चाहते है ।

सब से झगड़े फिर ते है ।

बहेतर है नम्र बनो ।                                                विनोद आनंद                         13/07/2016          फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड

दोष-भूल सुधार

दोष देखना दूसरों का
दोषी समजना और
दोष देना, दोषी कहेना,
दोषी ठहेराना और
देना सज़ा दूसरों ।
दोष देखना छोडो
देखना है दोष तो
खूदका देखो ।
खूद को सज़ा दो और सुधारो ।

भूल देखना दूसरो की
भूल समझना
भूल बताना
न भूल सुधारना और
देना सज़ा दूसरों को ।
भूल देखना छोडो
भूल देखना है तो
खूद की भूल देखो और  सुधारो ।

दूसरों की भूल, दोष निकालना
और सुधारना आसान है ।
लेकीन खूद की भूल
दोष निकालना और
सुधारना कठीन है ।

आसान काम तो सब करते है
कठीन काम कम करते है ।
आसान काम से जिंदगी कठीन और
कठीन काम से जिंदगी आसान बनती है

विनोद आनंद                              07/05/2016
फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड