1781 बारह समझ

ईश्र्वर कृपा से सत्संग
सत्संग से ज्ञान,ज्ञान से समझ
समझ से सुधार,सुधार से सफलता
सफलता से प्रसिध्धि ।
जीवन में कुछ आवश्यक समझ हो तो
जीवन बने सुंदर,आसन और समृध्ध ।
समझ-1: जैसा व्यवहार आप दूसरों
से चाहते हो,एसा व्यवहार दूसरों से करें ।
समझ-2 : दूसरों में अच्छाई-खुबीयाँ देखना ।
समझ-3 : दूसरों कि गलती को माफ करना
और खुद कि गलती कि माफि मागना ।
समझ-4 : खुद को सुधारना, दूसरों को नहि ।
समझ-5 : कर्म के फल कि और दूसरों से
अपेक्षा मत रखना ।
समझ-6 हर हाल में मुस्कराना और खुस
रहेना शीखना ।
समझ-7 वक्त कि किंमत समझने और वक्त
के साथ चलना, समय का सदोपयोग करना।
समझ-8 जीवन में सकारात्मक सोचो और
आशावादी बनना ।
समझ-9 काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, ईर्षा
जैसे कसाई ओ से बचना ।
समझ-10 प्रेम, दया, करूणा, शांति जैसे
सद् गुणों से दोस्ती करना ।
समझ-11 किसी कि प्रसंशा, आभार करना ।
समझ-12 समझ को जीवन में आत्मसात करना ।
बारह समझ जीवन में आ जाए तो जिंदगी
सुंदर, आसन, सफल और समृध्ध बनेगी ।
विनोद आनंद 08/11/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1559 मानसिकता

मन है, ईसलिए मानव है ।
मन है तो मानसिकता है ।
मानसिकता वो वलण या
वृति या स्वभाव जो जीवन
कि गाडी कि उर्जा है ।
मानसिकता मन कि उपज,
मानसिकता है संस्कार वो
अच्छी या बूरी भी होती है ।
मैं ठीक हूँ सच्चा हूँ बाकि
सब ठीक नहि है झूठे है ।
वो गलत मानसिकता है ।
मैं ठीक हूँ, सच्चा हूँ ।
बाकि सब भी ठीक सच्चे है,
सिर्फ संस्कार अलग है,
वो सहि मानसिकता है ।
जिंदग में सिर्फ मेरी जीत हो,
बाकि दूसरों कि हार हो ।
सिर्फ मेरा हि फायदा हो
दूसरों का कोई फायदा न हो
यह गलत मानसिकता है ।
सही मानसिकता है कि
जिंदगी में सब कि जीत हो
सब का फायदा हो एसी
वीन-वीन खेल खेलना हि
सहि मानसिकता है ।
मेरी भूल या गलती नहि
और दूसरों कि गलती है,
यह गलत मानसिकता है ।
दूसरों कि भूल या गलती
न देखना, अपनी भूल या
गलती देखना हि सहि
मानसिकता है ।
कई गलत मानसिकता से
मनुष्य पीडीत है ,दुःखी है
ईसलिए सुख शांति नहि है ।
मानसिकता को सहि करो
तो जिंदगी सरल,सहज़
सफल और सार्थक बनेगी ।
मानसिकता बदलो जिंदगी
बदल जाएगी याद रखना ।
विनोद आनंद 06/04/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1504 रोगों का ढेर

मानव का तन, मन और जीवन
रोगों का ढेर है । तन और मन के
रोगों का ईलाज़ डोक्टर करे ।
हम जीवन में कई एसे रोगों को
जाने अनजाने पनहा देते है, उस
का जिक्र करना जरूरी है क्यूँ कि
उसका ईलाज कर शके वरना
जीवन को खोखला कर देंगे ।
* क्या कहेगें लोग-सब से बडा रोग ।
* मन मानी करना ।
* मैं ठीक हूँ सब गलत है ।
* किसी कि बात नहि सूनना
* दूसरों कि भूल निकालना ।
* नकारात्मक विचार करना ।
* मन-ईन्द्रयों कि गुलामी करना ।
* फरियाद करना,कमीयाँ निकालना।
* मैं कहेता हूँ या करता हूँ वो सच है ।
* काम चोरी,काम को कल पर छोडना ।
* खुद कि प्रशंसा करना दूसरों कि नहि ।
* दूसरों को सलाह देना और सुधारना ।
जीवन में यह सभी रोगों न हो तो जीवन
मधुवन और स्वर्ग बन जाए ।
विनोद आनंद 17/02/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1402 हम यह भूलें करते है-3

कहेते है कि मनुष्य मात्र भूल के
पात्र लेकिन भूल बार बार करना
मुनासीत नही है फिर भी हम भूलें
करते है क्यूँकि आदत से मजबूर ।
* हम जिंदगी को मोज मस्ती, एसो
आराम का अवसर समज ने कि
भूल करके जिंदगी को बहेतरीन
बनाने का अवसर गवा देते है ।
* हम परिवार में 100% जिम्मेदारी
नही निभाने कि भूल करके संबंध
कमजोर बनाने कि भूल करते है ।
हम बेकार कि बातों में, कामो में
जिंदगी का किमती समय गवा ने
कि भूल करते है,कुछ नही करपाते ।
* हम अपना काम समयसर नही
करने कि और नियमीत नही बनने
कि भूल करते है, बहाने बनाते है ।
* हम नकारात्मकता को अपना ने कि,
सकारात्मक नही बनने भूल करते है ।
* हम हमारी सुख शांति के लिए दूसरों
को जिम्मेदार समजने कि भूल करते है ।
* हमे जो करना है वो नही करने कि,
नही करना है वो करने कि भूल करते है ।
* हम छोटी बात को बढा के बडी बनाने
कि भूल करके जिंदगी में दुःखी होते है ।
हमे भूल कि दुनिया को छोड कर एक
अच्छे ईन्सान कि भाँति जीना है ।
भूलें सुधार ले तो जिंदगी सुधार जाएगी ।
विनोद आनंद 26/11/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड