1198 आदर्श हम सफर

जब कोई बात बिगड जाए तब
बात सवाँर देना मेरे हम सफर ।
जब कोई मुश्किल पड जाए तब
मुश्किल आसान कर देना हम सफर ।
जब कोई परेशानी आ जाए तब
परेशानी को मीटा देना हम सफर ।
जब कोई भूल हो जाए तब भूल को
माफ करके देना मेरे हम सफर ।
जब कोई गलतफहमी हो जाए
तब गलतफहमी को गलत
साबित कर देना मेरे हम सफर ।
जब कोई शंका कुशका हो तब
उसे दूर कर देना मेरे हम सफर ।
जब कभी तू तू मैं मैं हो जाए तब
जरा सब्र रखना मेरे हम सफर ।
जब कभी बातों बातों में रिश्ता
टूटने लगे तो रिश्तो को बचा
लेना मेरे हम सफर ।
यही है एक आदर्श हम सफर
जो हर हाल हर परिस्थिति में
सुख शांति का दामन न छोडे ।
जिंदगी को सफल सार्थक बनाए ।
विनोद आनंद 04/06/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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1100 मेरा स्वभाव-3

मेरा स्वभाव मेरा सच्चा
साथी और जिगर दोस्त ।
मैं न निंदा, न चुगली और
न आलोचना करता हूँ किसी कि ।
कबूल करता हूँ अपनी गलती
माग कर माफी, और करता
हूँ माफ दूसरों कि गलतियाँ ।
मेरा स्वभाव मेरा जीवन
मेरी पहेचान, मेरे संस्कार ।
मैने दूसरों के गुण देखना,
खुद के दोष देखना शीखा है ।
स्वभाव में नकारात्मक द्रष्टि
नही हकारात्मक द्रष्टि रखना
शीखा है मैं ने ।
मेरा स्वभाव मेरी खुशी,
मेरी शांति और दौलत है ।
मेरे स्वभावने हि मुझे वक्ता,
और लेखक बनाकर दोस्त,
फिलोसोफर,गाईड बनाया ।
आभार शुकरीयाँ और धन्यवाद
ईश्र्वर का,श्रोताओ का और मेरे
विचारोंको पढने और पसंद करने वालो का ।
विनोद आनंद 01/03/2018
फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड

1031नारज़गी

नाराज होकर नाराज़गी

प्रगट करना क्या सही है ?

अपनों से क्या नाराज़गी

गलत वहेमी से नारज़ भी 

हो गए तो गलत वहेमी दूर

करके नाराजगी दूर करो ।

नाराज़गी को लंबी मत खीचना

और बोलचाल न करना बंध ।

वरना रिश्ते कि बुनियाद 

हो जाएगी कमजोर ।

भूल से कोई नाराज़ हो जाए 

तो माफ़ि माग कर मना लेना ।

रिश्तों कि खातर बरदास्त 

करलो तो नाराजगी नहीं होगी ।

कभी कभी नाराज़गी दिखानी

पडती है जिसे दूसरों को उस कि

गलती का एहसास होने से उसे

गलती सुधारने का मौका मिले ।

नारज़गी को न दिल में न मन में 

बीठाना वरना रिश्तें टूट शकते है ।

विनोद आनंद                              10/01/2018       फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

979 मन कि समझदारी

मन ईतना समझदार है

कि दूसरों को समझाने कि,

सलाह देने कि और सुधारने

कि कोशिश करता रहेता है ।

लेकिन न खुद को समझाने कि

न सलाह देने कि और न

सुधारने कि कोशिश करता है ।

मन कि समझ का क्या कहेना ?

मन ईतना समझदार है कि

दूसरों कि भूल निकालता है

और कमी निकालता है ।

लेकिन खुद कि भूल और कमी

नही निकालता तो,

मन कि समझ का क्या कहेना ?

मन कि समझदारी उस में है कि

खुद के लिए ईस्तमाल करे तो

खुद का कल्याण हो शके, वरना

मन कि समझदारी का कोई

फायदा नही मिलता ।

विनोद आनंद 23/11/2017 फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

848 सब के प्रिय बनोगे कैसे ? 

सब के  प्रिय बनोगे कैसे ? 

जीवन का उद्देश और लक्ष्य  रखो ।

फिर उस पर चिंतन करो तो

अवश्य सब के प्रिय बनोगे ।

आपके लिए कुछ महत्वपूर्ण टीप्स ।

जब भी मिलो मुस्करा के मिलो ।ञ

किसीसे वादा करो तो निभाओ ।

वचनबध्धता और विश्वास पेदा करो ।

किस का दिया हुआ काम करो ।

तो बनोगे सब के प्रिय ।

किसी कि रुचि अनुसार और

उने फायदा कि बात करो ।

किसी की बात ध्यान से सुनो 

अगर हो शके तो योग्य सुझाव दो

तो बनोगे सब के प्रिय ।

सही व्यवाहार करो तो कोई 

गेर समझ पेदा न हो ।

अगर हो जाए तो दूर करो ।

भूल हो जाए तो माफि माग लेना ।

दूसरों कि भूल को माफ कर देना ।

तो बनोगे सब के प्रिय ।

सब से प्रेम करो न किसी से

नफरत न कोई द्वेष न दुश्मनी 

न निंदा चुगली, न बदले कि चेष्ठा

दलील करवा टेव छोडो

जतु करवा नी टेव पाडो

सहन करवा नी टेव पाडो 
तो बनोगे सब के प्रिय ।

विनोद आनंद                                15/07/2017    

फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

830 ठीक नहीं है

हसना बुरी बात नहीं, 

किसी कि हँसी उडाना ठीक नही ।

मजाक करना बुरी बात नहीं, 

किसी कि मजाक उडाना ठीक नहीं ।

गलती हो जाए बूरी बात नहीं, 

गलती कि माफि न मागना, 

गलतियाँ करते रहेने ठीन नहीं ।

गिरना बुरी बात नहीं,   

गिर के नही उठना ठीक नहीं ।

जरूरी गुस्सा करना बूरी बात नहीं, 

बीन जरूरी गुस्सा करना ठीक नहीं ।

कभी कभी बीना सोचे बोलना बुरी नहीं, 

हर वक्त बीना सोचे बोलना ठीक नहीं ।

कभी बहार खाना बुरी बात नहीं है, 

बार बार बहार खाना ठीक है ।

जल्दबाजी करना कोई बात नही, 

लेकिन जल्दबाजी में नुकशान 

और घाटा हो ठीक नही ।

बात बीगडे कोई बात नही, 

बात बिगडती जाए वो ठीक नही ।

किस कि जान बचाने 

झूठ बोलना बूरी बात नही, 

गलती छूपा कर झूठ ₹

बोलना ठीक नहीं, जो ठीक है वो ही 

करने कि चेष्टा करो,वरना भूल जावो ।

विनोद आनंद                                02/07/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

799 ईन्सान क्या नही करता-1

ईन्सान क्या नही करता ? 

अपनी गलती कबूल नही करता ।

दूसरों को जिम्मेदार समजता है ।

उसने गुस्सा किया, बात बढ गई 

उस में मेरी को गलती नही है ।

ईन्सान हर वक्त यही करता है ।

ईन्सान क्या नही करता ? 

किसी कि गलती माफ नही करता ।

गलती कि है तो सज़ा मिलेगी ।

जब खुद गलती करे तो सरिफ, 

दूसरें करे तो गुन्हेगार ।

ईन्सान हर वक्त यही करता है ।

ईन्सान क्या नही करता ? 

अपनी गलती कि माफि नही मागता ।

मैं  क्यूँ माफि मांगु ? 

मैं मेरी कमाई से पेट भरता हूँ, 

उसकि कमाई का नही खाता ।

अपना इगो बनाए रखता है ।

ईन्सान हर वक्त यही करता है ।

ईन्सान क्या नही करता ? 

अपनी किसी से प्यार नही करता

प्यार घाटे का सौदा है 

जिंदगी में  मुनाफा चाहीए

प्यारे पेट नही भरता तो

जिंदगी बसर कैसे होगी 

ईन्सान हर वक्त यही करता है ।

विनोद आनंद                                 04/06/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड