1559 मानसिकता

मन है, ईसलिए मानव है ।
मन है तो मानसिकता है ।
मानसिकता वो वलण या
वृति या स्वभाव जो जीवन
कि गाडी कि उर्जा है ।
मानसिकता मन कि उपज,
मानसिकता है संस्कार वो
अच्छी या बूरी भी होती है ।
मैं ठीक हूँ सच्चा हूँ बाकि
सब ठीक नहि है झूठे है ।
वो गलत मानसिकता है ।
मैं ठीक हूँ, सच्चा हूँ ।
बाकि सब भी ठीक सच्चे है,
सिर्फ संस्कार अलग है,
वो सहि मानसिकता है ।
जिंदग में सिर्फ मेरी जीत हो,
बाकि दूसरों कि हार हो ।
सिर्फ मेरा हि फायदा हो
दूसरों का कोई फायदा न हो
यह गलत मानसिकता है ।
सही मानसिकता है कि
जिंदगी में सब कि जीत हो
सब का फायदा हो एसी
वीन-वीन खेल खेलना हि
सहि मानसिकता है ।
मेरी भूल या गलती नहि
और दूसरों कि गलती है,
यह गलत मानसिकता है ।
दूसरों कि भूल या गलती
न देखना, अपनी भूल या
गलती देखना हि सहि
मानसिकता है ।
कई गलत मानसिकता से
मनुष्य पीडीत है ,दुःखी है
ईसलिए सुख शांति नहि है ।
मानसिकता को सहि करो
तो जिंदगी सरल,सहज़
सफल और सार्थक बनेगी ।
मानसिकता बदलो जिंदगी
बदल जाएगी याद रखना ।
विनोद आनंद 06/04/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

Advertisements

1504 रोगों का ढेर

मानव का तन, मन और जीवन
रोगों का ढेर है । तन और मन के
रोगों का ईलाज़ डोक्टर करे ।
हम जीवन में कई एसे रोगों को
जाने अनजाने पनहा देते है, उस
का जिक्र करना जरूरी है क्यूँ कि
उसका ईलाज कर शके वरना
जीवन को खोखला कर देंगे ।
* क्या कहेगें लोग-सब से बडा रोग ।
* मन मानी करना ।
* मैं ठीक हूँ सब गलत है ।
* किसी कि बात नहि सूनना
* दूसरों कि भूल निकालना ।
* नकारात्मक विचार करना ।
* मन-ईन्द्रयों कि गुलामी करना ।
* फरियाद करना,कमीयाँ निकालना।
* मैं कहेता हूँ या करता हूँ वो सच है ।
* काम चोरी,काम को कल पर छोडना ।
* खुद कि प्रशंसा करना दूसरों कि नहि ।
* दूसरों को सलाह देना और सुधारना ।
जीवन में यह सभी रोगों न हो तो जीवन
मधुवन और स्वर्ग बन जाए ।
विनोद आनंद 17/02/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1402 हम यह भूलें करते है-3

कहेते है कि मनुष्य मात्र भूल के
पात्र लेकिन भूल बार बार करना
मुनासीत नही है फिर भी हम भूलें
करते है क्यूँकि आदत से मजबूर ।
* हम जिंदगी को मोज मस्ती, एसो
आराम का अवसर समज ने कि
भूल करके जिंदगी को बहेतरीन
बनाने का अवसर गवा देते है ।
* हम परिवार में 100% जिम्मेदारी
नही निभाने कि भूल करके संबंध
कमजोर बनाने कि भूल करते है ।
हम बेकार कि बातों में, कामो में
जिंदगी का किमती समय गवा ने
कि भूल करते है,कुछ नही करपाते ।
* हम अपना काम समयसर नही
करने कि और नियमीत नही बनने
कि भूल करते है, बहाने बनाते है ।
* हम नकारात्मकता को अपना ने कि,
सकारात्मक नही बनने भूल करते है ।
* हम हमारी सुख शांति के लिए दूसरों
को जिम्मेदार समजने कि भूल करते है ।
* हमे जो करना है वो नही करने कि,
नही करना है वो करने कि भूल करते है ।
* हम छोटी बात को बढा के बडी बनाने
कि भूल करके जिंदगी में दुःखी होते है ।
हमे भूल कि दुनिया को छोड कर एक
अच्छे ईन्सान कि भाँति जीना है ।
भूलें सुधार ले तो जिंदगी सुधार जाएगी ।
विनोद आनंद 26/11/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1398 हम यह भूलें करते है-2

कहेते है कि मनुष्य मात्र भूल के
पात्र लेकिन भूल बार बार करना
मुनासीत नही है फिर भी हम भूलें
करते है क्यूँकि आदत से मजबूर ।
हम दूसरों के दोष देखने कि और
अपने दोषो को छूपाने कि भूल
करके अपनी दोषो दूर करने का
द्वार बंद करते रहते है ।
हम दूसरों कि निंदा,चाडीचूगली
करने कि भूल करके खुद कि
बदनामी खरीदते है ।
हम खाने के लिए जीते है और
अपने स्वास्थ कि लिलाम करने
कि भूल करते है ।
हम दूसरोंको सलाह दे कर सुधार
ने कि भूल करते है और अपना
मान सन्मान गीरवे रख देते है ।
जिंदगी में अपने हि बूरे स्वभाव
आदतों से परेशान हो कर भी
नही सुधारने कि भूल करते है ।
हमे अच्छे बूरे का ख्याल है फिर
अच्छाई कि ओर नही जाने कि
भूल करके अपने को कमजोर
बनाने कि भूल करते है ।
हम भूलों से नही शीख ने कि
भूल करके भूलो को बढाते है ।
सफलता,प्रसिध्धि में हमारी भूलें
जिम्मेदार है, हो शके तो उसे
सफलता कि सीडी बनाओ ।
विनोद आनंद 25/11/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1356 दिल तक पहोंचे का रास्ते

दिल तक पहोंचना है तो कैसे ?
दश रास्तें, दिल तक पहोंच ने का ।
* पहेला रास्ता है होठों पे मुसकान ।
मुस्कारओ, दिल में उतर जाओ ।
* दूसरा रास्ता है मीठे बोल ।
दिल को प्रेम भाव भर दो ।
* तीसरा रास्ता उस के स्वभाव
अनुसार व्यवहार करो और
अच्छे काम बखाण करो ।
चौथा रास्ता है शिकायत
मत करना ।
* पाचवाँ रास्ता है बार बार
मिलो और हाल चाल पूछो ।
* छठ्ठा रास्त है दुःख में साथे
रहो और मदद करो ।
* सातवाँ रास्ता कभी याद करके
फोन करो संबंध ताजा करो ।
* आठवा रास्ता कभी कभी घर पे
बुलाओ, खाना खिलाओ,आदर
सत्कार करो ।
* नववाँ रास्ता है साल में एक
बार साथ पिकनीक करो ।
* दसवाँ रास्ता कभी गेर
समज हो तो दूर करो या भूल
हो जाए तो माफि मागीलो ।
यह सब रास्ते मिल कर
एक रास्ता तैयार होता है
जो किसी के दिल तक
पहोचता है ।
विनोद आनंद 31/10/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1256 काश कभी न कहेना

-हम करते है उपयोग कई बार
काश शब्द का जैसे कि
कास नसीब अच्छा होता,
कास मेरी पसंद कि पत्नि होती,
कास मैं यह गलती नही करता,
कास अच्छी नौकरी मीलती,
जो हम चाहे वो नही होता तब
हम कई बार कास शब्द का
प्रयोग करते है और नाराज
या निराश या दुःखी होते है ।
काश पश्र्चाताप का आँशू है,
और विकास में अवरोध है ।
अपने गलत निर्णय या भूल
या देखा देखी और खुद कि
जीद्द कि वज़ह से भविष्य में
काश शब्द जुबापे आ जाता है ।
कोई भी निर्णय और पसंदगी
सही तरीकेसे सोच समजकर
लेने से हमे काश शब्द का
प्रयोग नहि करना पडता ।
उस के बावजूद भी कुछ हमारी
पसंद या ईच्छा अनुसार न हुआ
तो भी काश शब्द का प्रयोग नहि
करना क्यूकि जो होता है वो
अच्छे के लिए होता है समझकर
उसे स्वीकार करलो और फिर
जीवन में आगे बढते रहो ।
काश बोलकर अपने होसले को
और शक्ति को कम मत करो ।
विनोद आनंद 04/08/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गlईड

1198 आदर्श हम सफर

जब कोई बात बिगड जाए तब
बात सवाँर देना मेरे हम सफर ।
जब कोई मुश्किल पड जाए तब
मुश्किल आसान कर देना हम सफर ।
जब कोई परेशानी आ जाए तब
परेशानी को मीटा देना हम सफर ।
जब कोई भूल हो जाए तब भूल को
माफ करके देना मेरे हम सफर ।
जब कोई गलतफहमी हो जाए
तब गलतफहमी को गलत
साबित कर देना मेरे हम सफर ।
जब कोई शंका कुशका हो तब
उसे दूर कर देना मेरे हम सफर ।
जब कभी तू तू मैं मैं हो जाए तब
जरा सब्र रखना मेरे हम सफर ।
जब कभी बातों बातों में रिश्ता
टूटने लगे तो रिश्तो को बचा
लेना मेरे हम सफर ।
यही है एक आदर्श हम सफर
जो हर हाल हर परिस्थिति में
सुख शांति का दामन न छोडे ।
जिंदगी को सफल सार्थक बनाए ।
विनोद आनंद 04/06/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड