1660 जीने का सहि तरीका

जीवन में कोई भी कमी
होगी तो चलेगा लेकिन
थोडी सी कमी प्रेम कि
सहन नहि कर शकेगें ।
जीवन कोई भी चीज़ टूटे
मन को समझा शकते है
लेकिन अगर दिल टूटे तो
मन को नहि समझा शकेगें ।
जीवन में कुछ खो जाए तो
ढूँढ लेगे लेकिन मन खो जाए
तो मन को नहि ढूँढ शकेगें ।
जीवन मे कोई भी रूढ जाए
तो मना शकेगे मगर अपनों
को नहि मना शकेगें।
जीवन में एक दिन खाना नहि
मिले तो चलेगा लेकिन पानी
बीना एक दिन भी नहि चले ।
जीवन में जो गौण है उसे के
बीना जी शकते है लेकिन
जो जरूरी है और आवश्य है
उसे बीना जीना मुश्किल है ।
जीवन में जरूरी-आवश्य और
बीन जरूरी- बीन आवश्य कि
समझ आए तो समझलो कि
जीने का सहि तरीका आगया ।
विनोद आनंद 10/07/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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1654 सुंदरता किस में है ?

सुंदरता किस में है ?
सुंदरता सुगंधीत फूलों में है ।
सुंदरता प्रकृति में और
दुनिया बनाने वाले में है ।
सुंदरता मानवता में है ।
सुंदरता मुस्कान में है ।
सुंदरता आबरू और
प्रभाव में है ।
सुदरता सद् गुणों में
और सद् आचरण में है ।
सद् गुणों से और सद्
आचरण से खुद को सुंदर
बनाओ ।
सुंदरता हर सुंदर चीजों
में छूपी नज़र आती है ।
कहेवत है कि सुंदरता पाने
से पहेले सुंदर बनना पडेगा ।
हर एक सुंदर चीज़, सुंदर
चीज़ को आकर्षित करती है ।
सुंदर बन के सुंदरता से रिश्ता
जोडो तो जीवन बने सुंदर ।
सुंदर जीवन सफल जीवन ।
तन कि और मन कि सुंदरता
हि है जीवन कि सुंदरता ।
विनोद आनंद 06/07/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1647 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-90

🌻 गलती
आँख बंध करके चलोगे
तो गीर जाओगे, गीरना
गलती नहि है, आँख बंध
करके चलना और गीर
कर फिर न उठना ।
🌹 विश्र्वास
विश्र्वास करना बूरा नहि,
किसी कि मीठी मीठी
बातों से प्रभावीत होकर
बीना सोचे विश्र्वास
करना सही नहि है ।
सोच समजकर विश्र्वास
करना मगर आँख बंध
करके नहि ।
🌺 बातों से जीवन
कुछ बातें सुनाता हूँ मैं
जो जरूरी है तुम्हारे लिए,
ध्यान से सुनना, मन से
दिमाग में और दिल से रोम
रोम में उतारना फिर देखना,
कितन किंमती है मेरी बातें ।
बातों से बात बनती है, बात
बनने से काम बनता है और
काम से जीवन बनता है ।
विनोद आनंद 30/06/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1620 मन पर संयम

मन मनमानी करता है
लेकिन तुम अपनी मरजी
अनुसार कब करोगे, तुम
मन के अनुसार कब तक
गुलाम बन के जीओगे ?
मन कब तक नचाएगे, तुम
मन को कब नचाओगे ।
मन न ज्ञान, न बुध्धि को
पूछता है क्या सहि है या
क्या गलत ? सिर्फ अपनी
ईच्छा और मरजी अनुसार
आप पर हकूमत करता है ।
कब तक आप मन कि बातें
सुनते रहेंगे, तुम कब उस
पर हकुमत करोगे ।
अब बहुत हो गया, अब तो
मन को समजाना है या उस कि
हर बात को अनसुनी करना है ।
जो वो कहे वो तुरंत बालक
कि भाँति नहि करना, सोचना
समजना कि क्या सहि है क्या
गलत, फिर जो ज्ञान-बुध्धि के
अनुसार जो सहि है वो मानो,
जो गलत है वो न मानो,न करो ।
धीरे धीरे हकुमत बदल जाएगी
आप राजा बनोगे, मन गुलाम ।
सहि तरिका है मन पर संयम
पाकर सफलता पाने का ।
मन पर संयम विकास, मन कि
मनमानी विनास का रास्ता है ।
विकास जिंदगी का ध्येय हो, मन
पर संयम हो तो ध्येय पूर्ण होगा ।
विनोद आनंद 04/06/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1580 मनोविज्ञान-1

मनोविज्ञान क्या है ?
मनोविज्ञान का मतलब
है ? मन क्या है ? उस का
काम क्या है ? क्या कर रहा है ?
कैसा है और कैसा होना है,यानी
मन कि मानसिकता क्या है ?
आदमी को मन को जानना है ।
हमारे शरीर के दो हिस्से है ।
स्थूल शरीर और सूक्ष्म शरीर ।
स्थूल शरीर जो दिखता है वो है,
पांच ज्ञानेन्द्रिया-पांच कर्मेन्द्रिया ।
सूक्ष्म शरीर जो नही दिखता वो है
मन,बुध्धि,आत्मा-चैतन्य है,स्थूल
शरीर का नियंत्रण करता है ।
उस में मन ईन्द्रियों का राजा,
काम है इन्द्रियो पे राज करना ।
इन्द्रियाँ राज करती है मन पर ।
मन को गुलाम बना दीया है ।
मन इन्द्रियाँ के वश में है ।
मन बुध्धि को नहि पूछता,
करता है मन मानी, ईन्द्रियों
कि गुलामी करता है ईसलिए
काम क्रोध लोभ मोह मद
मत्सर जैसे दुर्गणो का ढेर
बन के मनुष्य का दुश्मन है ।
मन ईन्द्रियों कि ईच्छाओ
कि पूर्ति बुध्धि के तराजु में
तोलकर नहि करता ।
मन कैसा है, कैसा होना है ?
यानी मन कि मानसिकता है ।
के लिए पढो मनोविज्ञान-2
विनोद आनंद 28/04/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1581 मनोविज्ञान-2

मनोविज्ञान-1 के अनुसंधान में ।
मन कैसा है, कैसा होना है ?
मन कि शक्ति अपार, सहि
दिशा में लगाओ तो जीवन में
होगा विकास वरना विनाश ।
* मन अधोगामी है उसे उर्ध्वगामी
बनाओ तो विकास वरना विनास ।
* मन अति चंचल या अस्थिर है उसे
एकाग्रह या स्थिर बनाना है ।
* मन अशुध्ध और अपवित्र है
उसे सदगुणों से शुध्ध और
पवित्र बनाना है ।
* मन आलसी और भोगविलाशी है,
कर्मयोगी या क्रियाशील बनाना है ।
* मन तुम्हारा दुश्मन बन बैठा है,
मन को दोस्त बनाना है ।
* मन असंयमी और ईन्द्रियो का
गुलाम है उसे बुध्धि के साथ
जोड कर संयमी बनाना है ।
* संयमी मन अच्छा नौकर है ।
असंयमी मन बेवफा राजा है ।
* मन कामचोर और हरामी है,
लगातार काम दिया करो क्यूँ कि
खाली मन दैत्यो का अखाडा है ।
* मन हि बंधन का कारण है, मन हि
मुक्ति का जरीया है । मन कि हारे,
हार या मन का जीते जित ।
मन का असर तन पे और तन
का असर मन पे पडता रहेता है,
ईसलिए मन हमेंशा खुस या
प्रसन्न तो, तन भी रहे स्वस्थ ।
तन स्वस्थ तो मन भी स्वस्थ ।
मन कि सच्चाई जानो, मन को
गुलाम बनाओ वरना आपको वो
गुलाम बनाके छोडेगा ।
विनोद आनंद 28/04/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1576 साक्षी

जिंदगी को बहेतर बनाना है
तो सही जीवन जीना जरूरी है ।
सही जीवन जीने का तरीका है
साक्षी भाव से जीना, मतलब है
सतर्क, होश में रह कर जीना ।
सो प्रतिशत जागृत रह के जीना ।
तुम क्या बोलते हो, कैसे चलते हो
क्या करते हो, पूरे होस हवास में
सोच समजकर, सही है वो करो ।
यह है शारीरिक साक्षी भाव ।
कभी भी अनजाने में, बेहोशी में
रोबर्ट कि भाँति कुछ भी न करो ।
दूसरा साक्षी भाव है मानसिक
तोर पे जागृत रहे तन के साथ
मन को भी साक्षी बनाए और
सोचे कि सही है या गलत,
फिर कार्य करना चाहिए ।
कभी मन आदत से बेहोशी में
कुछ गलत काम कर देता है
बाद में पता चलता गलत है ।
तीसरा साक्षी भाव है भावनाए
हर वक्त हमे अपनी भावना पर
नज़र रखनी है कि किस भाव से
काम हो रहा है ।हम आत्मा है ।
हमे आत्मा को अपना साक्षी
बनाकर हमे होश पूर्वक सोच
समज़कर काम करना है ।
सही तरीके से जी कर,जिंदगी
को बहेतर बना शकते है ।
विनोद आनंद 25/04/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड