1050 मर के भी जिंदा रहेना है ।

मरते दम तक जिंदा रहो और
जीते रहो एसे कि मरने के बाद
भी जिंदा रहो लोगो के दिल में
जिसे मौत भी न निकाल शके ।
सभी जब तुम्हारा कर्म दिखेगा
तो तुम्हारी तस्वीर भी दिखेगी
और तुम जिंदा रहोगे तस्वीर में ।
सभी जब तुम्हारा अच्छा स्वभाव
याद करेंगे तो तुम उन कि यादो में
जिंदा रहोगे सदा प्रेरणा बनके ।
तुम्हारा दिया हुआ साथ भी
उनको याद आएगा और तुम
उन के जीवन का हिस्सा बन
कर उन के मन में रहोगे जिंदा ।
तुम आए थे रोते हुए, हसते थे
कुछ ईसी करनी कर चलो कि
तुम जाओ, तो भी रहो जिंदा ।
तुम्हारी निसानीयाँ बोलेगी तो
तुम्ह जिवीत हो यह अहेसास
दिलाती रहेगी सभी को हर वक्त ।
मरते दम तक एसे जीओ कि
मरने के बाद भी मरो नही ।
विनोद आनंद 26/01/2018
फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड

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1038 दर्पण

दर्पण जूठ्ठ न बोले

सच्चाई का प्रतिक 

सँवार ने का साधन ।

जो जैसे हो एसा दिखाए

वो दर्पण कहेलाए ।

दर्पण पे धूल है तो चहेरा

धूंधला दिखता है । 

धूल को साफ करो तो

चहेरा साफ नज़र आए ।

मन भी एक दर्पण है जिस 

पर बूरे विचारों कि धूल से

अच्छे विचारो कि तस्वीर 

मन के दर्पण में नही दिखती ।

दिल भी एक दर्पण है जिस 

पर बूरी भावनाओं कि धूल से

अच्छी भावनाओं कि तस्वीर 

दिल के दर्पण में नही दिखती ।

जीवन भी एक दर्पण है जिस 

पर खराब कर्मो कि धूल से

अच्छे कर्मो कि तस्वीर 

जीवन के दर्पण में नही दिखती ।

दर्पण को साफ रखोगे तो 

सभी तस्वीरें अच्छी दिखेगी ।

विनोद आनंद                             15/01/2018        फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड 

997 💐 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-48

🍁 चमक

आँखों कि चमक रोशनी

चहरे कि चमक मुश्कान

शरीर कि चमक स्फूर्ति

मन कि चमक बुध्धि 

दिल कि चमक प्यार 

व्यक्ति कि चमक व्यक्तित्व 

जिंदगी कि चमक जिंदादिली 

आत्मा कि चमक परमात्मा

खुद को चमका ओगे तो 

जीवन बनेगा महान ।

🌺 परछाई

खुश रहेना है 

खुशी को बुलाना है 

चहरे पे हसी लाना है ।

हसी खुशी दोनों  है 

सहेलीयाँ साथ निभाती है ।

जभी हसी आती है

खुसी पिछे हि खडी होती है ।

खुसी है हसी कि परछाई ।

🌻 संगम

जीवन में सही 

तरीके से जीना है

तो जीना शीखना है

शीखना तो पढना है

पढना है तो समझना है ।

समझना है तो मन,बुध्धि 

आत्मानो त्रिवेणी संगम 

में स्नान करना है ।

विनोद आनंद                              09/12/2017      फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

979 मन कि समझदारी

मन ईतना समझदार है

कि दूसरों को समझाने कि,

सलाह देने कि और सुधारने 

कि कोशिश करता रहेता है ।

लेकिन न खुद को समझाने कि

न सलाह देने कि और न 

सुधारने कि कोशिश करता है ।

मन कि समझ का क्या कहेना  ?

मन ईतना समझदार है कि

दूसरों कि भूल निकालता है 

और कमी निकालता है ।

लेकिन खुद कि भूल और कमी

नही निकालता तो, 

मन कि समझ का क्या कहेना ?

मन कि समझदारी उस में है कि 

खुद के लिए ईस्तमाल करे तो

खुद कल्याण हो शके, वरना 

मन कि समझदारी का कोई

फायदा नही मिलता ।

विनोद आनंद                                23/11/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

955 दिल से न लगाना

अपनों के कडवे बचन को

दिलसे मत लगाना ।

कडवे बचन के रहस्य को 

जानने कि कोशिश करो ।

शायद कडवे बचन में 

करेला का गुण हो ।

अगर एसा नही है तो भी

बातों को दिल से न लगान 

क्योंकि,बात दिल से लगाने से

दिल में बैठ जाती है और फिर

लाख कोशिश करने पर भी

दिल से नही जाती और

मन को परेशान करती है ।

दिल में उस के प्रति नफरत

हो जाती है और बदले कि

भावना जन्म लेती है ।

धीरे धीरे रिश्तों में दरार और

फिर दरार, दिवार बन जाती है ।

जिंदगी दूसवार हो जाएगी ।

ईसलिए किसी कि, किसी भी 

बात को दिलसे लगाने से 

पहेले सोचना जरूरी होता है ।

किसी कि अच्छी बातों को ही

दिलसे लगाना दिल में बीठाना ।

बूरी बातों को न दिल से और 

न मन से लगाना, तो जीवन में 

हमेंशा होगा शुभ और मंगल ।

विनोद आनंद                               28/10/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

920 विकास या विनाश 

जिंदगी के दो रास्ते

विकास या विनास

कौनसे रास्ता पे हो

हर पल जांच करो ।

किस वक्त रास्ता 

विकास से विनास कि

ओर बदल जाएगा

पता हि नही चलेगा ।

सिर्फ एक गंदी सोच

रास्ता किस वक्त 

बदल देगी नहीं पता ।

सोचने पर नियत्रंण या

सतत पहेरा रखो कि गंदी 

सोच रास्ता न बदल दे ।

जिंदगी का लक्ष्य विकास, 

मन का ईरादा विकास

और विकास कि चेष्ठा करे तो

गंदी सोच रास्त न बद शके ।

विकास सिर्फ खुदका नहीं 

एक तरफा भी नहीं, 

विकास सबका और

सर्वांगी होना चाहिए ।

दूसरों का विनास से

तुम्हारा विकास 

सही विकास नहीं ।

विनोद आनंद                                16/09/2017

फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

869 पढाई पारसमणी

पढो और आगे बढो, 

बढो और विकास करो ।

पढाई बीना नहीं उध्धार

और नहीं विकास ।

पढाई ज्ञान बढाए, 

ज्ञान सद् बुध्धि बढाए ।

सद् बुध्धि संस्कार बढाए

और मन को करे शिक्षित ।

शिक्षित मन सज्जन बनाए ।

सज्जन स्वर्ग बनाए ।

पढाई पूजा सरस्वती देवी की

और सेवा देश की, उध्धार 

आत्मा का,और निर्वाह जीवन का ।

पढाई बनाए पंडीत कहते है

राजा पूजयते देश में, 

पंडीत सर्वत्र पूजयते ।

पढाई पद और पैसा दिलाए 

ईसलिए पढाई सोने का अंडा 

देनेवाली मुरघी ।

पढाई जीवन का आधार, 

जीवन निर्वाह और निर्माण 

का साधन और जीवन साधना ।

पढाई पारसमणी, स्पर्स से

जीवन को बनाए सोना और

सुख शांति का धाम ।

विनोद आनंद                                06/08/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड