920 विकास या विनाश 

जिंदगी के दो रास्ते

विकास या विनास

कौनसे रास्ता पे हो

हर पल जांच करो ।

किस वक्त रास्ता 

विकास से विनास कि

ओर बदल जाएगा

पता हि नही चलेगा ।

सिर्फ एक गंदी सोच

रास्ता किस वक्त 

बदल देगी नहीं पता ।

सोचने पर नियत्रंण या

सतत पहेरा रखो कि गंदी 

सोच रास्ता न बदल दे ।

जिंदगी का लक्ष्य विकास, 

मन का ईरादा विकास

और विकास कि चेष्ठा करे तो

गंदी सोच रास्त न बद शके ।

विकास सिर्फ खुदका नहीं 

एक तरफा भी नहीं, 

विकास सबका और

सर्वांगी होना चाहिए ।

दूसरों का विनास से

तुम्हारा विकास 

सही विकास नहीं ।

विनोद आनंद                                16/09/2017

फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

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869 पढाई पारसमणी

पढो और आगे बढो, 

बढो और विकास करो ।

पढाई बीना नहीं उध्धार

और नहीं विकास ।

पढाई ज्ञान बढाए, 

ज्ञान सद् बुध्धि बढाए ।

सद् बुध्धि संस्कार बढाए

और मन को करे शिक्षित ।

शिक्षित मन सज्जन बनाए ।

सज्जन स्वर्ग बनाए ।

पढाई पूजा सरस्वती देवी की

और सेवा देश की, उध्धार 

आत्मा का,और निर्वाह जीवन का ।

पढाई बनाए पंडीत कहते है

राजा पूजयते देश में, 

पंडीत सर्वत्र पूजयते ।

पढाई पद और पैसा दिलाए 

ईसलिए पढाई सोने का अंडा 

देनेवाली मुरघी ।

पढाई जीवन का आधार, 

जीवन निर्वाह और निर्माण 

का साधन और जीवन साधना ।

पढाई पारसमणी, स्पर्स से

जीवन को बनाए सोना और

सुख शांति का धाम ।

विनोद आनंद                                06/08/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

860 द्रष्टि और सृष्टि

जैसी द्रष्टि एसी सृष्टि

जैसी सोच एसी द्रष्टि ।

जब आँखे देखती है 

तब मन सोचता है

सोच द्रष्टि कि जननी है ।

गलत सोच गलत द्रष्टि

गलत द्रष्टि गलत सृष्टि ।

सही सोच सही द्रष्टि

सही द्रष्टि सही सृष्टि ।

सकरात्मक सोच सहि द्रष्टि  

सद् बुध्धि सकरात्मक सोच ।

ज्ञान से बनती है सद् बुध्धि ।

सृष्टि सही या गलत ?  

द्रष्टि करेगा फैसला ।

आँखे सिर्फ देखती है

मन द्रष्टि देता है और

हम आत्मा, आत्मशक्ति 

मन में सही सोच जगए ।
सब सही, अच्छा और 

सुंदर  नज़र आता है ।

विनोद आनंद                                28/07/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

 

854 💐 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-38

🍭ईरादो

उन ईरादो को हवा न दो जो

जिंदगी को रूसवा करदें ।

उन ईरादो को ही हवा दो जो

जिंदगी को रोशन करदें ।

ईरादे मजबूत हो तो 

कामीयाब होते है वरना

ईरादे दम तोड देते है ।

अच्छे ईरादो से जिंदगी 

सँवरती है वरना बोज

बन जाती है जिंदगी । 

🎯 मंझिल

मायुस न हो अगर 

मंझिल न मिले ।

मंझिलें कई है, 

मंझिले बदलो मगर 

ईरादा न बदलो ।

जिंदगी का मकसद ही है

मंझिले सर करना ।

🌻 नही लगता

अच्छा नही लगता, 

जब टूटते है सपने ।

जी नही लगता, 

जब रूढते है अपने ।

दिल नही लगता, 

जब टूटते है दिल ।

मन नही लगता, 

अपनो की जूदाई में ।

नही मिलता प्यार किसी का

तो घूटघूट के जीना पडता है

मरना भी रास नही आता ।

प्यार ही जीने का सहारा है ।

प्यार करो, प्यार से जीओ ।

विनोद आनंद                                21/07/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

846 💐 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-36

💖 व्यक्तित्व और सद् गुण

जैसे फूलो में  खूशबु है 

फलों में  मीठास है ।

एसे व्यक्ति में व्यक्तित्व हो

तो उस कि खूशबु  फैलती है ।

उसके सद् गुणो कि मीठास से

सब का जीवन बनता है मीठा ।

🍁 वाणी व्यवहार और वर्तन

वाणी हो मधुर, 

व्यवहार हो अच्छा

और वर्तन हो सही

तीनों का हो त्रिवेणी संगम 

तो जीवन बने तीर्थ ।

💞 त्रिवेणी संगम 

मन हो संयमी और पवित्र, 

बुध्धि हो विवेकि और शुध्ध, 

आत्मा हो जागृत और संस्कारी, 

तीनों का हो त्रिवेणी संगम 

तो मानव जन्म हो जाए सफल

जीवन बने महान ने यादगार ।

💟 ठूठते है 

हम ठूठते  है, 

सुख में दु:ख, 

दु:ख में ठूठो सुख ।

हम ठूठते  है, 

गैरों में अपनो को, 

अपनो कों भूल कर ।

हम ठूठते  है, 

मान में अपमान को, 

अपमान में ठूठो मान को ।

विनोद आनंद                                12/07/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

829 मन है कि मानता नहीं 

मन है कि मानता नहीं, 

सुनता नहीं,समज़ता नहीं, 

और करता है मन मानी ।

जो नहीं करना है वो करे

जो करना है वो न करे 

कई बूरी आदतें पाली है

तो बूरे काम करवाता है 

मन है कि मानता नहीं

और करता है मन मानी ।

स्वभाव बिगाड के रखा है

गुस्सा आवेश दादागीरी से

सब पर करता है हकूमत

मन है कि मानता नहीं….. 

ईन्द्रियों का राज़ा मन

ईन्द्रियों के बस में है, 

ईन्द्रियों नाच नचाती है,  

बुध्धि-ज्ञान से दूर है, 

मन है कि मानता नहीं….. 

मन को छूडाना ईन्द्रियों से

जोडना है, बुध्धि से, ज्ञान से

समज़ाना है प्रशिक्षण देना है

मन मानेगा, समज़ेगा और

नही करेगा मन मानी फिर

वोही करेगा जो सही हो ।

ईन्द्रियों और मन पे काबू

सबसे बडी है कामीयाबी ।

विनोद आनंद                                02/07/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

823 तूफान

मन में है तूफान 

दिल में  है तूफान

अंदर है तूफान

बहार है तूफान

जिंदगी है तूफान

कस्ती जिंदगी कि

कैसे निकालोगे 

तूफान से बहार ।

दिल है पथ्थर

मन है शैतान तो

अंदर तो होगा तूफान ।

नही बसमें अपने 

बहार के तूफान को

शांत करना ।

है अपने बस में 

अंदर के तूफान को

शांत करना मगर कैसे ।

मन को छूडा ना है

इन्द्रिओ के पंजे से

मन को समजाना है

उनका का इन्द्रिओ

पे करना है काबू ।

अपना काम है, 

मन पे काबू करना ।

अंदर का तूफान 

होगा शांत तो

बहार का तूफान

हो जाएगा शांत ।

विनोद आनंद                                26/06/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड