997 💐 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-48

🍁 चमक

आँखों कि चमक रोशनी

चहरे कि चमक मुश्कान

शरीर कि चमक स्फूर्ति

मन कि चमक बुध्धि 

दिल कि चमक प्यार 

व्यक्ति कि चमक व्यक्तित्व 

जिंदगी कि चमक जिंदादिली 

आत्मा कि चमक परमात्मा

खुद को चमका ओगे तो 

जीवन बनेगा महान ।

🌺 परछाई

खुश रहेना है 

खुशी को बुलाना है 

चहरे पे हसी लाना है ।

हसी खुशी दोनों  है 

सहेलीयाँ साथ निभाती है ।

जभी हसी आती है

खुसी पिछे हि खडी होती है ।

खुसी है हसी कि परछाई ।

🌻 संगम

जीवन में सही 

तरीके से जीना है

तो जीना शीखना है

शीखना तो पढना है

पढना है तो समझना है ।

समझना है तो मन,बुध्धि 

आत्मानो त्रिवेणी संगम 

में स्नान करना है ।

विनोद आनंद                              09/12/2017      फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

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997 💐 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-48

🍁 चमक

आँखों कि चमक रोशनी

चहरे कि चमक मुश्कान

शरीर कि चमक स्फूर्ति

मन कि चमक बुध्धि 

दिल कि चमक प्यार 

व्यक्ति कि चमक व्यक्तित्व 

जिंदगी कि चमक जिंदादिली 

आत्मा कि चमक परमात्मा

खुद को चमका ओगे तो 

जीवन बनेगा महान ।

🌺 परछाई

खुश रहेना है 

खुशी को बुलाना है 

चहरे पे हसी लाना है ।

हसी खुशी दोनों  है 

सहेलीयाँ साथ निभाती है ।

जभी हसी आती है

खुसी पिछे हि खडी होती है ।

खुसी है हसी कि परछाई ।

🌻 संगम

जीवन में सही 

तरीके से जीना है

तो जीना शीखना है

शीखना तो पढना है

पढना है तो समझना है ।

समझना है तो मन,बुध्धि 

आत्मानो त्रिवेणी संगम 

में स्नान करना है ।

विनोद आनंद                              09/12/2017      फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

979 मन कि समझदारी

मन ईतना समझदार है

कि दूसरों को समझाने कि,

सलाह देने कि और सुधारने 

कि कोशिश करता रहेता है ।

लेकिन न खुद को समझाने कि

न सलाह देने कि और न 

सुधारने कि कोशिश करता है ।

मन कि समझ का क्या कहेना  ?

मन ईतना समझदार है कि

दूसरों कि भूल निकालता है 

और कमी निकालता है ।

लेकिन खुद कि भूल और कमी

नही निकालता तो, 

मन कि समझ का क्या कहेना ?

मन कि समझदारी उस में है कि 

खुद के लिए ईस्तमाल करे तो

खुद कल्याण हो शके, वरना 

मन कि समझदारी का कोई

फायदा नही मिलता ।

विनोद आनंद                                23/11/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

955 दिल से न लगाना

अपनों के कडवे बचन को

दिलसे मत लगाना ।

कडवे बचन के रहस्य को 

जानने कि कोशिश करो ।

शायद कडवे बचन में 

करेला का गुण हो ।

अगर एसा नही है तो भी

बातों को दिल से न लगान 

क्योंकि,बात दिल से लगाने से

दिल में बैठ जाती है और फिर

लाख कोशिश करने पर भी

दिल से नही जाती और

मन को परेशान करती है ।

दिल में उस के प्रति नफरत

हो जाती है और बदले कि

भावना जन्म लेती है ।

धीरे धीरे रिश्तों में दरार और

फिर दरार, दिवार बन जाती है ।

जिंदगी दूसवार हो जाएगी ।

ईसलिए किसी कि, किसी भी 

बात को दिलसे लगाने से 

पहेले सोचना जरूरी होता है ।

किसी कि अच्छी बातों को ही

दिलसे लगाना दिल में बीठाना ।

बूरी बातों को न दिल से और 

न मन से लगाना, तो जीवन में 

हमेंशा होगा शुभ और मंगल ।

विनोद आनंद                               28/10/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

920 विकास या विनाश 

जिंदगी के दो रास्ते

विकास या विनास

कौनसे रास्ता पे हो

हर पल जांच करो ।

किस वक्त रास्ता 

विकास से विनास कि

ओर बदल जाएगा

पता हि नही चलेगा ।

सिर्फ एक गंदी सोच

रास्ता किस वक्त 

बदल देगी नहीं पता ।

सोचने पर नियत्रंण या

सतत पहेरा रखो कि गंदी 

सोच रास्ता न बदल दे ।

जिंदगी का लक्ष्य विकास, 

मन का ईरादा विकास

और विकास कि चेष्ठा करे तो

गंदी सोच रास्त न बद शके ।

विकास सिर्फ खुदका नहीं 

एक तरफा भी नहीं, 

विकास सबका और

सर्वांगी होना चाहिए ।

दूसरों का विनास से

तुम्हारा विकास 

सही विकास नहीं ।

विनोद आनंद                                16/09/2017

फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

869 पढाई पारसमणी

पढो और आगे बढो, 

बढो और विकास करो ।

पढाई बीना नहीं उध्धार

और नहीं विकास ।

पढाई ज्ञान बढाए, 

ज्ञान सद् बुध्धि बढाए ।

सद् बुध्धि संस्कार बढाए

और मन को करे शिक्षित ।

शिक्षित मन सज्जन बनाए ।

सज्जन स्वर्ग बनाए ।

पढाई पूजा सरस्वती देवी की

और सेवा देश की, उध्धार 

आत्मा का,और निर्वाह जीवन का ।

पढाई बनाए पंडीत कहते है

राजा पूजयते देश में, 

पंडीत सर्वत्र पूजयते ।

पढाई पद और पैसा दिलाए 

ईसलिए पढाई सोने का अंडा 

देनेवाली मुरघी ।

पढाई जीवन का आधार, 

जीवन निर्वाह और निर्माण 

का साधन और जीवन साधना ।

पढाई पारसमणी, स्पर्स से

जीवन को बनाए सोना और

सुख शांति का धाम ।

विनोद आनंद                                06/08/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

860 द्रष्टि और सृष्टि

जैसी द्रष्टि एसी सृष्टि

जैसी सोच एसी द्रष्टि ।

जब आँखे देखती है 

तब मन सोचता है

सोच द्रष्टि कि जननी है ।

गलत सोच गलत द्रष्टि

गलत द्रष्टि गलत सृष्टि ।

सही सोच सही द्रष्टि

सही द्रष्टि सही सृष्टि ।

सकरात्मक सोच सहि द्रष्टि  

सद् बुध्धि सकरात्मक सोच ।

ज्ञान से बनती है सद् बुध्धि ।

सृष्टि सही या गलत ?  

द्रष्टि करेगा फैसला ।

आँखे सिर्फ देखती है

मन द्रष्टि देता है और

हम आत्मा, आत्मशक्ति 

मन में सही सोच जगए ।
सब सही, अच्छा और 

सुंदर  नज़र आता है ।

विनोद आनंद                                28/07/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड