1772 नये साल कि शुभकामनाएँ

साल नया आता है उत्साह
लाता है खुशियाँ लाता है,
लेकिन कुछ दिनों के बादमें वो
हि पुराणी निरस,उदास और
गमगीन जिंदगी, तो फिर साल
नया क्यूँ कहते है ? साल नया
नहि है, उसे नया बनाना है ।
लेकिन कैसे ?
नया साल, नया तब बनेगा
जब आपका मन नया बनेगा ।
उदास, निरस, और गमगीन
मन में उत्साह भर के मन कि
कमजोरी,मजबूरीओं को दूर
करके मनको मजबूत करना है ।
मन में पलती गलत मान्यताए,
आदतें,सोच,ईरादे, दुर्गणो और
दुर्भावनाओ को दूर करना है ।
मन में अच्छि सोच, मान्यताएँ
सदगुणें,आदतें, और अच्छि
भावनाओ से भरना है ।
नये साल में जीवन को नया
करने का द्दढ निर्णय करके
साल को नया बनाना है ।
आपका नया साल नया बने
यह हि मेरी शुभकामनाएँ ।
विनोद आनंद 28/10/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1762 होश क्या है ?

होस क्या है ?
होस कोई प्रक्रीया नहि
लेकिन कोई भी प्रक्रीया
करते वक्त होश में रहेना,
मतलब प्रक्रिया ध्यान से
करे, मतलब प्रक्रीया करते
समय तुम्हारा मन किसी ओर
नहि जाना चाहिए, प्रक्रीया के
साथ रहेना चाहिए उसे होस
में रहके काम करना कहते है ।
काम होश में करे तो काम अच्छा
होता है,ज्यादा होता है,थकते नहि
बलकि ताजगी महेसुश करते है ।
हम कई काम बेहोशीमें करते है,
क्यूँकि हमारा मन कहि ओर
भटकता रहेता है, तब मन और
शरीर के बीच तनाव होता है
हम थक जाते है, काम ठीक से
नहि होता पाता है ।
कोई भी काम ध्यान से,खेल
समज कर, खुशी से करने
का अभ्यास करे तो आपकी
क्षमता बढेगी,सफलता मिलेगी ।
नवयुवको और नवयुवतीयो में
जवानी का जोस होता है मगर
होस का अभाव होने से गलत
काम करते है और बाद में होस
आते है तो फिर क्या होगा ?
होशपूर्वक जीना हि जीनेका सहि
और अच्छा तरिका है ।
विनोद आनंद 19/10/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1752 दुःख के कारण

दुःख कि कोई एक परिभाषा
नहि होती, क्यूँकि जो किसी
के लिए दुःख है, वो दूसरों के
लिए सुख हो शकता है ।
दुःख के कारण कई होते है ।
मन हि दुःख का कारण है ।
अगर मन दुःख को दुःख न
माने तो, वो दुःख नहि लगता ।
मुशीबतें,तकलिफें,परेशानी को
दुःख न समजे वो अपने कर्मो
का फल है या हम खुद है ।
किसी चीज़ के अभाव दुःख
का कारण बनता है ।
किसी का अभिप्राय दुःख
कारण बन शकता है ।
खुद का अभिगम दुःख का
कारण बन शकता है ।
खुद कि आतदें, स्वभाव और
भावनाएँ दुःख का कारण बन
शकता है ।
जीवन में असंतोष दुःख का
कारण बन शकता है ।
ईच्छा पूर्ण न होना दुःख का
कारण बन शकता है ।
सभी एसे कारण है जो दूर
कर शके तो जीवन में दुःख न
रहे बस सुख हि सुख है ।
दुःख के प्रति अभिगम बदलो
दुःख चुनौती और गुरू समजो
तो, दुःख से दुखी नहि होंगे ।
विनोद आनंद 11/10/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1750 एक जान, सो दुश्मन

एक जान और सो दुश्मन
हमारे दोस्त कम है और
दुश्मन ज्यादा तो क्या करे ?
दुश्मन कौन, जरा जाने और
कम करके दोस्त बनाए ।
पहेला दुश्मन तुम खुद हो ।
दूसरा दुश्मन है तुम्हारा मन ।
तुम्हार मन ईन्द्रियो का गुलाम
और आप मन के गुलाम ।
ओर कई दुश्मन आप के मन
में पनाह लिए हुए बैठे है ।
वो षढ दुश्मन है काम, क्रोध
लोभ, मोह, मद और ईर्षा ।
यह सब भीतर के दुश्मन है
न जाने बहार के कितने होंगे ।
आप के दुर्गुणें,बूरी आदतें और
दुर्भावनाए, दुश्मन से कभ नहि ।
दुश्मन बहार के या भीतर के
उसे बचना या दुश्मनी खत्म
करो या समाधान करो ।
दुश्मननो के साथ जीना भी
क्या जीना है जिसे तकलीफें,
मुश्किलें और परेशान और
दु:खी होकर जीना पडता है ।
कम दुश्मन और अच्छे दोस्त
और परिवार के साथ हसी
खुशी और शांति से जीना हि
सही तरीका है जीनेका ।
ओर छूपे दुश्मन है सोसीयल
मीडीया और टेलीवीशन जो
आप के जीवन के महत्त्वपूर्ण
समय बरबाद करते है और आप
कि एकाग्रता कम करते है ।
सावधान एसे दुश्मनो से उसे
छुटका पाने का सोचो ।
एक जान और सो दुश्मन तो
कैसे चैन और सुख शांति कि
जिंदगी जी पाओगे जरा सोचो ।
विनोद आनंद 08/10/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1734 मन,बुध्धि और तुम

मन तुम्हरी मुठ्ठी में तो जिंदगी
जिंगा लाला क्यूँकि मन है गुलाम ।
जब तुम मन कि मुठ्ठीमें तो जिंदगी
बेलगाम क्यूँकि तुम गुलाम मन का ।
मन ईन्दियो का, तुम मन का गुलाम
तो तुम गुन्हेगार और जिंदगी केद
खाना क्यूँकि मन सहि या गलत
नहि सोचता, वो बुध्धि ज्ञान से
मसहरा नहि करता, न सुनता है,
वो मन मानी करता है, ईन्दियो कि
ईच्छा और ख्वाईस पूर्ण करता है ।
मन परिणाम, परिस्थिति कि फ्रिक
नहि करता, बीना सोचे वो बोलता है
कर्म करता है,फिर पस्तावा करता है ।
बाद में क्या जब चिडीया चुग गई खेत,
सब कुछ लुटा के होशमें आए तो क्या ?
हमे मन को बुध्धि और ज्ञान से जूड
कर गलत कर्मो से बचना है ईन्दियों
और मन का गढबंधन तोडना है ।
मन को निर्णय नहि लेना है तुम्हे
बुध्धि-ज्ञान से सहि निर्णय लेना है ।
मन को जीतना है और मन पर काबू
पा के उसे गुलाम बनाना है मतलब
मन को अपनी मुठ्ठी मे रखना है ।
मन मानी करने से रोकना है, तो वो
तुम्हार दोस्त बन के सहि रास्ता
दिखाएगा, वरना दुश्मन बनकर गलत
रास्ते पे ले जाएगा, जिंदगी को बरबाद
कर देनेमें कोई कसर नहि छोडेगा ।
विनोद आनंद 22/09/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1730 विचार शुध्धि कैसे करे ?

जिंदगी का महत्त्वपूर्ण
हिस्सा है आपके विचार ।
जैसे विचार के बीज एसा
जीवन बनेगा । जैसे जीवन
बनाना एसै विचार करो ।
विचार का शुध्धिकरण करना
आवश्यक, जरूरी है, वरना
अशुध्ध-अपवित्र विचारों से
जीवन का घडतर नहि होगा ।
विचार शुध्धिकरण कैसे करे ?
विचारों का उदभव स्थान मन है,
अच्छी माहिती-ज्ञान से विचार
शुध्धि कर शकते है ।
जीवन में सद् वांचन,सद्श्रवण,
सद् संग से विचारों का शुध्धि
करण हो शकता है ।
हमे मन का चोकिदार बनना
होगा, जिसे अपने मन में शुभ,
मंगळ विचार स्टोर कराना है ।
अशुभ अमंगल बिचारों को
मन में घुसने नहि देना है ।
विचारों का शुध्धि मेडीटेशन,
प्रार्थना, मात पिता, गुरु के
संस्करों से होती है ।
प्रकृति के संग थोडा समय
व्यतित करने से विचारों का
शुध्धिकरण कर शकते है ।
क्यूँ कि वो शुध्ध पवित्र और
निर्मल स्वरूप है जिसे तुम
विचा शुध्धि कर शकते हो ।
मन को बार बार कहो कि
“मैं शुध्ध,पवित्र,प्रेम,ज्ञान
शांत,आनंद स्वरुप आत्मा हूँ ”
जिस से चित शुध्धि और
चिचार शुध्धि हो शकती है ।
विनोद आनंद 18/09/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1711 हम बदल क्यूँ नहि पाते

हम बदल नहि पाते क्यूँ कि
कभी हम बदलना नहि चाहते
या अगर हम बदलना चाहते है
और दूसरे नहि चाहते, इसलिए
हम जीवन में बदल नहि पाते ।
पहेले मन मानसिकता है कि
वो बदलाव का विरोध करेगा क्यूँ
कि मन महेनत नहि चाहता कठीनाई
उठाना नहि चाहता और डरता है ।
हमे पहेले मन को समजाना है कि
बदलाव जरूरी विकास के लिए ।
बदलाव के चार तब्बके है जिसे
बदलाव ला शकते है ।
1) बदलाव कि शरुआत तो करदो
जो कठीन है बाद में ठीक होगा,
सिर्फ सोचने से कुछ नहि होगा ।
शरूआत हि सफलता कि सीडी है ।
2) द्दढता से आगे बढो उस में
रूकावट आएगी आंतरिक और
बाहरी जो आगे नहि बढने देगी ।
3) बीच मझधार में पहोचकर भी
तूफान आने से पीछे हटने से बचो
आगे कदम बढाते रहो ।
4) मझधार से बचोगे तो फिर
सफलता निश्र्चित पाओगे ।
बस शरूआत करो, किसी कि
न सुनो, मुश्केलियों का सामना
करो और द्दढते से आगे बढो तो
आप खुद को बदल पाओगे ।
बाँधे कहाँ रोक पाती है आगे
बढने वालों को, हिमते मर्दा
तो मददे खुदा । निराश न हो
कोशिश करो, कोशिश करने
वालो कि कभी हार नहि होती ।
विनोद आनंद 28/08/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड