1601 रिश्तें टूटते क्यूँ ?

जो टूट जाए वो रिश्ते नहि,जो
रिश्ते तोडे वो ईन्सान नहि ।
रिश्ते ईन्सान बनाता है अगर
वो हि रिश्ते तोडात है तो उसे
रिश्तों कि हेमीयत या रिश्तों
कि ताकात नहि पता है ।
वो रिश्तें का सिर्फ ईस्तमाल,
करता है निभाना नहि है ।
रिश्तें निभाने से टूटते नहि ।
रिश्तें में जिम्मेदारी होती है
न निभाने से रिश्ते टूटते है ।
रिश्तों में प्रेम होना जरूरी है,
प्रेम बीना रिश्तें टूटने लगते है ।
रिश्ते समर्पण से सँवरते है
स्वार्थ से रिश्तें टूटते है ।
मान सन्मान और मर्यादा
के अभाव से रिश्तें टूटते है ।
समझ से और सहन करने से
रिश्तें टिकटे है वरना टूटते है ।
क्रोध,लोभ,मद और ईर्षा रिश्तें
के जानी दुश्मन टोडते है रिश्ते ।
रिश्तें जीवन कि जडीबुट्टी बने
जीवन स्वस्थ,सफल सार्थक ।
रिश्तों को अग्रता देने से, हेमीयत
देने से, निभाने से और सँवारने से
रिश्तें टूटते नहि, मजबूत होते है ।
हम अपने हक पर ध्यान देते,
अपनी जिम्मेदारी पर ध्यान नहि
देते ईसलिए रिश्ते टूटते है ।
विनोद आनंद 18/05/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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1590 एसा लगा जैसे….

एक संत को देखा तो
एसा लगा जैसे, आया है
प्रेम कि मदिरा पीला ने ।
एक दोस्त को देखा तो
एसा लगा जैसे, आया है
खुशी का खजाना देने ।
एक शिक्षक को देखा तो
एसा लगा जैसे, आया है
संस्कार जगाने दिलों में ।
एक सिपाई को देखा तो
एसा लगा जैसे, आया है
सुरक्षा का कवच ले कर ।
एक बालक को देखा तो
एसा लगा जैसे,आया है
मासुमीयत का पैगाम ले के ।
एक लडकी को देखा तो एसा
लगा जैसे लक्ष्मी का अवतार ।
एक लडके को देखा तो एसा लगा
जैसे;मा बाप कि घडपण की लाढी ।
एक बहेन को देखा तो एसा लगा
जैसे भैया कि खुसी का आशीर्वाद ।
एक सासु को देखा तो एसा
लगा जैसे कि बहु कि यशोदा माँ ।
एक ससुर को देखा तो एसा
लगा जैसे कि बहु का नंद बाबा ।
एक पाडोशी को देखा तो एसा
लगा जैसे कि पहेला सगा ।
जिदगी को देखा एसा लगा
जैसे, तो रिश्तों का मेला फिर
भी सभी अकेले अकेले अकेले ।
विनोद आनंद 09/05/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1585 दौलत

ये एसो आराम देने वाली,
लेकिन रातों कि निंद उडाने
वाली, और बगलोंज़,गाडीयाँ
सगवड देने वाली लेकिन दिन
का चैन चुराने वाली, ये दौलत
अगर मिल भी जाए तो क्या है ?
समाज़ में प्रतिष्ठा दिलाने वाली
लेकिन परीवार से सुख छीनने
वाली, और जो चाहे वो सब कुछ
देने वाली, लेकिन अस्वस्थ करने
वाली ये दौलत अगर मिल भी
जाए तो क्या है ?
अमीरों कि नामावली में नाम
लिखने वाली, लेकिन रिश्तेदारों
से दूर करने वाली और महेफिलें
और क्लबो का माहोल देने वाली,
लेकिन परिवार का संग छुडाने
वाली, ये दौलत अगर मिल भी
जाए तो क्या है ?
दौलत कि दौड और नसे ने
अभिमानी और घमंडी बनाने
के बाद,सब कुछ छीन कर,ये
दौलत भी मिल जाए तो क्या है ?
दौलत कि भूख मिटती नहि लेकिन
संस्कार बिगाड ने वाली,शरीर और
संबंध बिगाडने वाली, ये दौलत
अगर मिल भी जाए तो क्या है ?
जरूरत से ज्यादा दौलत है धीमा
और मीठा जह़र, लेकिन जीते जी
मारने वाली ये दौलत अगर मिल
भी जाए तो क्या है ?
विनोद आनंद 02/05/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1538 बिखर मत जाना

बिखरे हुए बाल सँवारो
तो, उसे सवँरना कहेते है ।
बिखरे मोतीयों को धागे में पीरो
दो तो, उसे माला कहेते है ।
बिखरा हुआ मन किसी पर टिका
दो तो, उसे एकाग्रता कहेते है ।
बिखरे हुए रिश्ते प्रेम के धागे में
बाध दो तो,रिश्ते निभाया कहेते है ।
बिखरी हुए काम निपटा दो तो,
उसे पुरूषार्थ कहेते है ।
बिखरे हुए स्वप्ने सच कर दो
तो, उसे सफलता कहेते है ।
बिखरी यादें समेटलो तो,
उसे दिल बहेलाना कहेते है ।
बिखरी बिखरी जिंदगी समेट
लो तो, उसे जीना कहेते है ।
बिखरे हुए विचारो को दिशा
दे दो तो उसे लक्ष्य कहते है ।
सभी बिखरी हुई चीजों को
सभाल शके, समेट शके तो उसे
ईन्सान कहेते है, मर्द कहेते है ।
कुछ भी हो जाए, कितनी भी
मुश्केलियाँ या परेशानियाँ
आए तो खुद को बिखरने मत
देना हिंमत, ताकात,होसलो से
सामना करो तो, जिंदगी पर जीत
हासिल कर शकोगे ।
विनोद आनंद 18/03/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1495 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-81

🌹 मोहताज
ईन्सान हमेंशा खुस नही
रह शकता और तरक्की
नही कर शकता जब तब
वो किसी व्यक्ति पर
निर्भर या आधारित है ।
अपनी खुशी या तरक्की
अपनी जिम्मेदारी है उसे किसी
व्यक्ति कि मोहताज न बनाओ ।
🌺 क्षमा
क्षमा वो फूलो के समान है
जो कुचल जाने के बाद भी
खुसबू बिखेरता है ।
🌻 नींव है
भरोशा टूट जाए तो
समजलो आगे बढने का
द्वार बंध हो जाता है ।
रिश्ते चाहे गहेरा हो न हो
भरोशा गहेरा होना चाहिए ।
भरोशा नींव है रिश्तों कि
🍀खामोश
शब्दों का भी एक अहेसास
होता है खुद अहेसास करले
अच्छा लगे तो दूसरों को कहेंगेे
वरना शब्दों को खोमोश करदे ।
🍁शिकायतों से
रिश्ते अंकूरित होते है
प्रेम से, बने रहते है संवाद से
और महेसूस होते है संवेदनाओ
से,जीए जाते है दिल से और
मुरझा जाते है शिकायतों से ।
विनोद आनंद 15/02/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1476 मोहताज़

ना दूर रहने से रिश्ते टूट
जाते हैं और ना पास रहने
से जुड़ जाते हैं यह तो
एहसास के पक्के धागे है जो
रिश्तों को मज़बूत करता है ।
रिश्ते टूटने के लिए नही ।
रिश्ते निभाने के लिए है
जो टूट जाते है वो रिश्ते
नही वो, रिश्ते कि छाया है ।
एसे रिश्ते से अच्छा कि
रिश्ते बनाए नही, अगर
बनाए तो तोडे नही ।
पास या दूरी किस्मत कि
बात है मगर रिश्ते में प्रेम
मिलाना रिस्तेदारों का
काम है । प्रेम है मजबूर
धागा जो रिश्तों को
बिखरने नही देता ।
रिश्तें जीवन कि बुनीयाद
रिश्ते बीना जीवन सुना
जीवन है रिश्तों का मोहताज ।
प्रेम बीना रिश्ते बीमार
रिश्ते है प्रेम के मोहताज ।
विनोद आनंद 31/01/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1421 ए भी क्या जीना है ?

ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में सुख,चैन,शांति न
हो और मान सन्मान न मिले ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में रिशेंदारों, दोस्तों
का प्यार और साथ न मिले ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में अकेलापन,निराशा
और व्याकुलता हतासा सताए ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में शारीरिक,मानसिक
और संतान सुख न मिले ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
बहुत कुछ हो मगर जिंदगी में
संतोष,भक्ति और आनंद न हो ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में क्लेश, झगडे हो,
और रिश्तों में अपनापन न हो ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में तनाव, परेशानी हो,
निष्फलता और असंतोष हो ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में मरते मरते और उसे
को बोज समजकर जीए ।
विनोद आनंद 10/12/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड