1040 शादी से पहेले क्या करना है ?

शादी, गृहस्थ या दाम्पत्य 

जीवन का श्री गणेश या

ब्रम्हचरीर्य जीवन का ईति ।

ब्रम्हचरीर्य जीवन,गृहस्थ जीवन 

का नींव यानी दाम्पत्य जीवनके

सफलता का रहस्य या जादू है ।

गृहस्थ आश्रम को जीवन के 

चारों आश्रम में सुंदर कहा है ।

उस कि तैयारी ब्रम्हचरीर्य में

करनी है, अगर यह चूक गए तो

दाम्पत्य जीवन बदसूरत होगा ।

शादी से पहेले हमे उम्र ,व्यक्यित्व ,

आर्थिक के हिसाबसे लायक बनना है । 

शादी का रहस्य, मतलब, कर्तव्य 

और सामाजिक किंमत समझना है ।

शादी सिर्फ मोज मस्ती और 

वासना कि पूर्ति के लिए नही है ।

गृहस्थ जीवन में पति-पत्नि और

परिवार सभी रिस्तों कि हेमीयत 

समझकर उसे निभाना शीखना है ।

शादी से पहेले हमे खुद को आदर्श 

व्यक्ति का निर्माण करना है, वोही

गृहस्थ जीवन सफल और सुंदर

बनाने का रहस्य और कर्तव्य है ।

अगर शादी से पहेले यह नहीं सोच

और निर्माण नही किया तो शादी

बरबादी या तमासा बन जाएगी ।

सावधान लायक बनने से पहेले

कभी शादी करके गृहस्थ जीवन में

प्रवेश मत करन वरना परेशान और

दु:खी होकर असफल हो जाओगे ।                         

विनोद आनंद                             17/01/2018       फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड 

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1031नारज़गी

नाराज होकर नाराज़गी

प्रगट करना क्या सही है ?

अपनों से क्या नाराज़गी

गलत वहेमी से नारज़ भी 

हो गए तो गलत वहेमी दूर

करके नाराजगी दूर करो ।

नाराज़गी को लंबी मत खीचना

और बोलचाल न करना बंध ।

वरना रिश्ते कि बुनियाद 

हो जाएगी कमजोर ।

भूल से कोई नाराज़ हो जाए 

तो माफ़ि माग कर मना लेना ।

रिश्तों कि खातर बरदास्त 

करलो तो नाराजगी नहीं होगी ।

कभी कभी नाराज़गी दिखानी

पडती है जिसे दूसरों को उस कि

गलती का एहसास होने से उसे

गलती सुधारने का मौका मिले ।

नारज़गी को न दिल में न मन में 

बीठाना वरना रिश्तें टूट शकते है ।

विनोद आनंद                              10/01/2018       फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

992 खुशनसीब

वो खुसनसीब है जो

खुस रहेता है और दूसरों 

को भी खुस रखता है ।

हसता है और हसाता है ।

वो खुसनसीब है जो,

ईश्र्वर में श्रध्धा हो और

अटल विश्वास हो ।

मिला है उसमें संतोष हो ।

वो खुसनसीब है जो   

ज्यादा के लिए करे कोशिश 

लेकिन न मिलने तो मायुस

न हो और खुश रहे ।

रिश्तों कि हेमीयत समजे

और उस का पोषण करे ।

वो खुसनसीब है जो,

जिंदगी में भोगी न बने

लेकिन कर्म योगी बने ।

सब के प्रति सद्भाव,

सम् भाव, प्रेमभाव और 

परोपकार भाव रखे ।

वो खुसनसीब है जो

खुद अपने अच्छे कर्मो से

नसीब लिखे और खुश रहे ।

बुराई से रिश्ता न जोडे,

अच्छाई से रिश्ता जोडे तो,

वो खुशनसीब बन शकता है ।

विनोद आनंद                                05/12/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

976 मकसद

टूटे हुए रिश्तोंसे जिंदगी 

टुकडो में बीखर जाएगी तो

कैसे जिओगे जिंदगी,बहेतर 

यह है कि रिश्तों को जोड दो,

और जिंदगी का लुप्त उठाओ ।

उलझे हुए रिश्तों मेंसे जिंदगी

उलझन मे पड जाएगी बहेतर

यह है कि रिश्तों को सुलझा दो

और जिंदगी सुलझ जाएगी ।

बिगडे हुए रिश्तोंसे जिंदगी में

कोई बात नही बनेगी,बहेतर 

यह है रिश्तों को सुधार लो

और जिंदगी में बात बनेगी ।

रिश्तें जूडे,सुलझे और सुधरे

हुए हो, तो जिंदगी खूबसुरत

और खुशखुशाल बनेगी ।

रिश्तों को सँभालो,सँवारो 

और निभाओ यही होना

चाहिए जिंदगी का मकसद ।

विनोद आनंद                                20/11/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

955 दिल से न लगाना

अपनों के कडवे बचन को

दिलसे मत लगाना ।

कडवे बचन के रहस्य को 

जानने कि कोशिश करो ।

शायद कडवे बचन में 

करेला का गुण हो ।

अगर एसा नही है तो भी

बातों को दिल से न लगान 

क्योंकि,बात दिल से लगाने से

दिल में बैठ जाती है और फिर

लाख कोशिश करने पर भी

दिल से नही जाती और

मन को परेशान करती है ।

दिल में उस के प्रति नफरत

हो जाती है और बदले कि

भावना जन्म लेती है ।

धीरे धीरे रिश्तों में दरार और

फिर दरार, दिवार बन जाती है ।

जिंदगी दूसवार हो जाएगी ।

ईसलिए किसी कि, किसी भी 

बात को दिलसे लगाने से 

पहेले सोचना जरूरी होता है ।

किसी कि अच्छी बातों को ही

दिलसे लगाना दिल में बीठाना ।

बूरी बातों को न दिल से और 

न मन से लगाना, तो जीवन में 

हमेंशा होगा शुभ और मंगल ।

विनोद आनंद                               28/10/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

948 परेशानीयाँ

परेशान है सब टि.वि देखते

जाहेरातों से जहाँ भी देखो

वहाँ जाहेरात होती है ।

परेशान है सब महेंगाई से

और ओफिस में 8 धंटो के 

बदले 12 धंटे काम करने से ।

थके घर आकर सो जाना, 

फिर कब जीएगें जिंदगी ।

हालात कुछ एसे हो गए है कि

परेशानी पिछा नही छोडती ।

जीवन कि पसंद और जीवन

शैली एसी विकृत हो गई है कि

बिमारीयाँ बढ रही है और 

रिश्तों में  तनाव है और 

रिश्तें कमजोर पड जाते है 

तो परेशानीयाँ तो होगी ।

परेशानीयाँ कैसे कम होगी ? 

जीवन में शांति, संतोष और

समज से मन नियंत्रण रखने से ।

जरूरियात कम करने से, 

अपेक्षाओं को कम करने से, 

और रिश्तों को संभालाने से  ।

जीवन जीने के लिए अच्छि

जीवनशैली का निर्माण करना है 

तो पेरेशानीयों से पिछा छूटेगा ।

वरना जिंदगीमें परेशानियाँ 

जानलिवा बन शकती है ।

परेशानीयों से परेशान मत होना 

वो तुम्हारी ताकात से बडी नही है ।

कमजोर होकर परेशानीयों से 

डरना नही डटके सामना करना है ।

विनोद आनंद                               20/10/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

732 रिश्तें को निभाए कैसे ? 

क्या क्या करना है 

रिश्तें निभाने के लिए ? 

रिश्तों कि जरूरत,किंमत 

और हेमीयत समजनी है ।

रिश्तों कि मान मर्यादा 

का करना है जतन और

समजनी है जिम्मेदारी अपनी ।

रिश्तेंदारों से मधुर, मीठी 

और नम्र बोलनी है वाणी ।

दु:खोंमें साथ निभाना है ।

रिश्तों में बरदास्त करना है ।

रिश्तों के लिए बूरी आदतें 

और व्यसनो को छोडना है ।

रिश्तों में एक दूजे का 

ख्याल रखना है और सेवा 

समर्पण का भाव रखना है ।

रिश्तों में दूसरों के कर्तव्य को

अपना अधिकार नही समजना ।

रिश्तों में  अपेक्षा नही रखना ।

रिश्तें प्रेम-स्नेह से पलते है ।

नहीं के,द्वेष, ईर्षा और निंदा से।

रिश्तों से परिवार बनता है

परिवार से संस्कार बनता है

और संस्कार से जीवन बनता है ।   

विनोद आनंद                              08/04/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड