1231 अच्छा और सच्चा दोस्त

सभी रिश्ते जन्म से बनते है
सिर्फ दोस्ती का रिश्ता हमे
बनाना है सच्चा और अच्छा
दोस्त पसंद करके, कैसे भी
निभाना है दोस्ती, अच्छा
दोस्त, सच्चा दोस्त बनके ।
अच्छा दोस्त कौन ?
दोस्त को गलत करने से रोके ।
दूर रहने पर भी याद करे, जब
भी मिले तो खुशी से पगला जाए ।
तुम्हारी गेरमौजुदगी में तारीफ करे ।
तुम्हारे विकास का मौका ढूँढे और
तुम्हारा साथ दे और मदद करे ।
परिवार कि कदर करता है और
सब को अपना समजता है ।
अच्छा दोस्त आप जैसे हो
एसे हि स्वीकार करता है ।
अच्चे दोस्तों को बोलते समय
क्या बोलना है वो सोचना नही
पडता, मज़ाक भी कर शकता है ।
अच्छे दोस्त से बातों मे समय
बीत जाता है पता नही चलता ।
अच्छा और सच्चा दोस्त लालची,
ढोंगी और जूठा नही होता ।
अच्छे दोस्त के घर जाने को
इज़ाजत नही लेनी पडती ।
जो मीठा बोले प्रसंशा और विरोध
न करे, वो सच्छा दोस्त लगता है ।
अच्छा और सच्चा वो तुम्हारे लिए
गोली खाने को भी तैयार हो जाए ।
दोस्ती हो तो कृष्ण सुदामा जैसी ।
विनोद आनंद 10/07/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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🌹 1163 शेर शायरीयों का गुलदस्ता

🌺 ईन्तज़ार
दुःख के बादल सुख के
सूरज को छूपा देते है ।
दुःख के बादल हटते है
सुख का सूरज फिर चमकेगा ।
सिर्फ जरूरी है आशा को
जगाए रखना कि दुःख के
बादल हट जाएगे, सुख का
सूरज फिर चमकेगा सब्र
करके ईन्तज़ार करना है ।
🌹 होसला
जब सुख सूरज चमके
जीवन में, बहेक न जना
खुशि के नसे में ।
होस में रहेना और
यह न भूलन जाना ।
कि गम के बादल फिर
न जाने कब जाएंगे, उस का
सामना करने कि हिमंत और
होसला बनाए रखना है ।
मजबूत रिश्तें
जब रिश्तों में ताल मेल
बीठाना आ गया तब
रिश्ते मजबूत होते है,
🌻 मजबूर नही ।
मजबूरी कुछ कर शकती है
रिश्तों को तोडने के मामले में ।
कभी भी मजबूर न बनीए
हाला कि मजबूत मन अच्छे
ईरादो और द्दढ निश्चिय से
रिश्तों को निभाना शिखना है ।
विनोदआनंद 02/05/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1120 💐शेर शायरीयों का गुलदस्ता-53

🌹 जिंदगानी
कभी जिंदगी बने कहानी तो
कभी कहानी बने जिंदगानी ।
महान पुरुष कि कहानी को
बनालो जिंदगानी तो जिंदगी
तुम्हारी बनजाएगी कहानी,
ओरों की बनाएगी जिंदगानी ।
🌻 सिर्फ एक बार
सिर्फ एक बार दिल से
नफरत निकाल के तो देखो
कैसा शुकून मिलता है ।
सिर्फ एक बार दिल में
प्रेम जगा के देखो तो कैसे
पीधल जाती है नफरत ।
सिर्फ एक बार मन कि
मनमानी रोककर तो देखो
मन को ‘ ना ‘ कहेकर तो देखो
कैसे मन भीगी बिल्ली बनेगा
और आप बनजाओगे शेर ।
🌺 लिहाज़
भूखा ईन्सान पसंद
नापसंद नही देखता
प्यासा ईन्सान पानी कि
किंमत नही पूछता ।
निंद कभी जगह नही देखती ।
एसे स्वार्थी ईन्सान कभी
रिश्ते का लिहाज नही करता ।
विनोद आनंद 22/03/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1040 शादी से पहेले क्या करना है ?

शादी, गृहस्थ या दाम्पत्य

जीवन का श्री गणेश या

ब्रम्हचरीर्य जीवन का ईति ।

ब्रम्हचरीर्य जीवन,गृहस्थ जीवन

का नींव यानी दाम्पत्य जीवनके

सफलता का रहस्य या जादू है ।

गृहस्थ आश्रम को जीवन के

चारों आश्रम में सुंदर कहा है ।

उस कि तैयारी ब्रम्हचरीर्य में

करनी है, अगर यह चूक गए तो

दाम्पत्य जीवन बदसूरत होगा ।

शादी से पहेले हमे उम्र ,व्यक्यित्व ,

आर्थिक के हिसाबसे लायक बनना है ।

शादी का रहस्य, मतलब, कर्तव्य

और सामाजिक किंमत समझना है ।

शादी सिर्फ मोज मस्ती और

वासना कि पूर्ति के लिए नही है ।

गृहस्थ जीवन में पति-पत्नि और

परिवार सभी रिस्तों कि हेमीयत

समझकर उसे निभाना शीखना है ।

शादी से पहेले हमे खुद को आदर्श

व्यक्ति का निर्माण करना है, वोही

गृहस्थ जीवन सफल और सुंदर

बनाने का रहस्य और कर्तव्य है ।

अगर शादी से पहेले यह नहीं सोच

और निर्माण नही किया तो शादी

बरबादी या तमासा बन जाएगी ।

सावधान लायक बनने से पहेले

कभी शादी करके गृहस्थ जीवन में

प्रवेश मत करन वरना परेशान और

दु:खी होकर असफल हो जाओगे ।

विनोद आनंद 17/01/2018 फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड

1031नारज़गी

नाराज होकर नाराज़गी

प्रगट करना क्या सही है ?

अपनों से क्या नाराज़गी

गलत वहेमी से नारज़ भी 

हो गए तो गलत वहेमी दूर

करके नाराजगी दूर करो ।

नाराज़गी को लंबी मत खीचना

और बोलचाल न करना बंध ।

वरना रिश्ते कि बुनियाद 

हो जाएगी कमजोर ।

भूल से कोई नाराज़ हो जाए 

तो माफ़ि माग कर मना लेना ।

रिश्तों कि खातर बरदास्त 

करलो तो नाराजगी नहीं होगी ।

कभी कभी नाराज़गी दिखानी

पडती है जिसे दूसरों को उस कि

गलती का एहसास होने से उसे

गलती सुधारने का मौका मिले ।

नारज़गी को न दिल में न मन में 

बीठाना वरना रिश्तें टूट शकते है ।

विनोद आनंद                              10/01/2018       फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

992 खुशनसीब

वो खुसनसीब है जो

खुस रहेता है और दूसरों 

को भी खुस रखता है ।

हसता है और हसाता है ।

वो खुसनसीब है जो,

ईश्र्वर में श्रध्धा हो और

अटल विश्वास हो ।

मिला है उसमें संतोष हो ।

वो खुसनसीब है जो   

ज्यादा के लिए करे कोशिश 

लेकिन न मिलने तो मायुस

न हो और खुश रहे ।

रिश्तों कि हेमीयत समजे

और उस का पोषण करे ।

वो खुसनसीब है जो,

जिंदगी में भोगी न बने

लेकिन कर्म योगी बने ।

सब के प्रति सद्भाव,

सम् भाव, प्रेमभाव और 

परोपकार भाव रखे ।

वो खुसनसीब है जो

खुद अपने अच्छे कर्मो से

नसीब लिखे और खुश रहे ।

बुराई से रिश्ता न जोडे,

अच्छाई से रिश्ता जोडे तो,

वो खुशनसीब बन शकता है ।

विनोद आनंद                                05/12/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

976 मकसद

टूटे हुए रिश्तोंसे जिंदगी 

टुकडो में बीखर जाएगी तो

कैसे जिओगे जिंदगी,बहेतर 

यह है कि रिश्तों को जोड दो,

और जिंदगी का लुप्त उठाओ ।

उलझे हुए रिश्तों मेंसे जिंदगी

उलझन मे पड जाएगी बहेतर

यह है कि रिश्तों को सुलझा दो

और जिंदगी सुलझ जाएगी ।

बिगडे हुए रिश्तोंसे जिंदगी में

कोई बात नही बनेगी,बहेतर 

यह है रिश्तों को सुधार लो

और जिंदगी में बात बनेगी ।

रिश्तें जूडे,सुलझे और सुधरे

हुए हो, तो जिंदगी खूबसुरत

और खुशखुशाल बनेगी ।

रिश्तों को सँभालो,सँवारो 

और निभाओ यही होना

चाहिए जिंदगी का मकसद ।

विनोद आनंद                                20/11/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड