1897 छोटी छोटी बातों

छोटी छोटी अच्छी बातों
पर ध्यान देने से रिश्तें बेहतर
बनते है और छोटी छोटी बुरी
बातों पर ध्यान देने से रिश्ते
कमजोर बनते है ।
हर बात का बुरा मानने वालों
और हर बार दूसरों कि बुराई
करने वालों के दूसरों के साथ
रिश्ते हमेशा खराब रहते है ।
रिश्तो में कमजोरी या खराबी
जीवन में ज़हर खोलते है ।
छोटी छोटी बातों का बुरा
मानना और हर बार दूसरों
कि बुराई करना खतरनाक
आदत है,उसे छोड दो वरना
लोग तुम्हें छोड देगें ।
हम जीस बातों पे ध्यान देते
है एसा हि हम देखने लगते है
और हम एसे बन जाते है ।
हम दूसरों कि अच्छी बातों
पर ध्यान देते है और बुरी
बातों को नजरअंदाज करे तो
दुनिया कि कोई ताकात रिश्तों
को कमजोर नहि बना शकती ।
बहेतरीन रिश्तें खुसाली देते है ।
कमजोर रिश्तें दुःख दर्द देते है ।
विनोद आनंद 17/02/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड उतु

1894 रिश्तों में क्या ढूँढते है ?

रिश्तों में हम क्या ढूँढते है ?
रिश्तों में अपना अधिकार
ढूँढने में हम अपना कर्तव्य
को भूला देते है । कर्तव्य
से हि रिशतें सँवरते है ।
रिश्तों में हम क्या ढूँढते है ?
रिश्तों में अपना स्वार्थ
ढूँढने में हम अपना समर्पण
को भूला देते है । समर्पण
से हि रिशतें सँवरते है ।
रिश्तों में हम क्या ढूँढते है ?
रिश्तों में अपनी अपेक्षाएँ
ढूँढने में हम दूसरों कि
अपेक्षा भूला देते है ।
अपेक्षा पूर्ण न होने से रिश्तें
बिगडते है सँवरते नहि ।
रिश्तों में हम क्या ढूँढते है ?
रिश्तों में अपना लाभ
ढूँढने में हम दूसरों का
लाभ भूल जाते है ।
दोनों तरफ के लाभ से
हि रिश्ते सँवरते है ।
रिश्तों में हम क्या ढूँढते है ?
रिश्तों में नकारात्मकता
ढूँढते है, सकारात्मकता
नहि । सकारात्मकता से
रिश्ते सँवरते है ।
रिश्तों में खामीयाँ और
बूराई ढूँढते । खुबीयाँ और
अच्छाई देखने से हि
रिश्ते सँवरते है ।
रिश्तों को ईस्तमाल से नहि
ईमानदारी से सँवरते है ।
रिश्तें प्रेम और स्नेह से
सँवरते है ।
रिश्तें जीवन का प्राण है ।
विनोद आनंद 15/02/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

💙 1883 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-92

🌹 राजपथ
रिश्ते हि रास्ते है,
जिंदगी में मंझिल
तक पहुँचाते है ।
रास्ते बीगड जाएँ
तो मंझिल तक कैसे
पहुँचोगे ?
रिश्ते को राजपथ
बनाओ तो मंझिल
चलके पास आएगी ।
🌻 वजुद
बीना पेट्रोल कि गाडी
एक ईन्च नहि चलेगी
बीना ब्रेक गाडी नहि
रूक शकती ।
जैसे बीना इन्धन और
बीना ब्रेक गाडी का
नहि कोई वजुद, एसे
हि बीना प्रेम और संयम
जिदगी का वज़ूद नहि ।
🍁 सिर्फ
सिर्फ खेत में बीज़ बोने
से फसल नहि होती ।
सिर्फ बातें करने से बात
नहि बनती ।
सिर्फ बडे स्वप्ने देखने से
स्वप्ने सच नहि होते ।
सिर्फ नसीब पर विश्र्वास
करने से सफलता नहि
मिलती आखिर महेनत
तो करनी हि पडती है ।
बीना महेनत सफलता कहाँ ?
विनोद आनंद 05/02/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1723 रिश्तों को कैसे निभाओगे ?

रिश्तों को कैसे निभाओगे ?
रिश्तें बनते है और बिगते है
क्यूँ कि हम निभाते नहि, हम
रिश्तों कि कद्र नहि करते,
रिश्तों कि हेमीयत नहि जानते,
रिश्तों का ईस्तमाल करते है ।
रश्तें में अधिकार मागते है,
अपना कर्तव्य नहि करते ।
हम रिस्तों में शुकरियाँ नहि,
करते मगर शिकायत करते है,
और रिश्तें निभाना नहि पाते ।
उम्र गुजर जाती है,मगर रिश्तें
कमजोर रहते है क्यूँ कि हमे
रिश्तें निभाना नहि शकते ।
रिश्तों में शुकरियाँ करे और
कर्तव्य करो और रिश्ते को
मजबूत बनाओ । रिश्तें को
समर्पण,प्रेम से निभाना है ।
रिश्तों को निभाना है तो सहन
और समज शक्ति कि जरूरी है
रिश्तें निभाना आ गया तो
समजो जीना आ गया ।
जीवन कल्प वृक्ष है और
रिश्तें उस कि जडे है उसे
मजबूत बनाओगे तो उस
पर सुख, शांति, समृद्धि के
मीठे फल आएगे और जो
ईच्छा करोगे पूर्ण होगी ।
विनोद आनंद 10/09/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1601 रिश्तें टूटते क्यूँ ?

जो टूट जाए वो रिश्ते नहि,जो
रिश्ते तोडे वो ईन्सान नहि ।
रिश्ते ईन्सान बनाता है अगर
वो हि रिश्ते तोडात है तो उसे
रिश्तों कि हेमीयत या रिश्तों
कि ताकात नहि पता है ।
वो रिश्तें का सिर्फ ईस्तमाल,
करता है निभाना नहि है ।
रिश्तें निभाने से टूटते नहि ।
रिश्तें में जिम्मेदारी होती है
न निभाने से रिश्ते टूटते है ।
रिश्तों में प्रेम होना जरूरी है,
प्रेम बीना रिश्तें टूटने लगते है ।
रिश्ते समर्पण से सँवरते है
स्वार्थ से रिश्तें टूटते है ।
मान सन्मान और मर्यादा
के अभाव से रिश्तें टूटते है ।
समझ से और सहन करने से
रिश्तें टिकटे है वरना टूटते है ।
क्रोध,लोभ,मद और ईर्षा रिश्तें
के जानी दुश्मन टोडते है रिश्ते ।
रिश्तें जीवन कि जडीबुट्टी बने
जीवन स्वस्थ,सफल सार्थक ।
रिश्तों को अग्रता देने से, हेमीयत
देने से, निभाने से और सँवारने से
रिश्तें टूटते नहि, मजबूत होते है ।
हम अपने हक पर ध्यान देते,
अपनी जिम्मेदारी पर ध्यान नहि
देते ईसलिए रिश्ते टूटते है ।
विनोद आनंद 18/05/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1590 एसा लगा जैसे….

एक संत को देखा तो
एसा लगा जैसे, आया है
प्रेम कि मदिरा पीला ने ।
एक दोस्त को देखा तो
एसा लगा जैसे, आया है
खुशी का खजाना देने ।
एक शिक्षक को देखा तो
एसा लगा जैसे, आया है
संस्कार जगाने दिलों में ।
एक सिपाई को देखा तो
एसा लगा जैसे, आया है
सुरक्षा का कवच ले कर ।
एक बालक को देखा तो
एसा लगा जैसे,आया है
मासुमीयत का पैगाम ले के ।
एक लडकी को देखा तो एसा
लगा जैसे लक्ष्मी का अवतार ।
एक लडके को देखा तो एसा लगा
जैसे;मा बाप कि घडपण की लाढी ।
एक बहेन को देखा तो एसा लगा
जैसे भैया कि खुसी का आशीर्वाद ।
एक सासु को देखा तो एसा
लगा जैसे कि बहु कि यशोदा माँ ।
एक ससुर को देखा तो एसा
लगा जैसे कि बहु का नंद बाबा ।
एक पाडोशी को देखा तो एसा
लगा जैसे कि पहेला सगा ।
जिदगी को देखा एसा लगा
जैसे, तो रिश्तों का मेला फिर
भी सभी अकेले अकेले अकेले ।
विनोद आनंद 09/05/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1585 दौलत

ये एसो आराम देने वाली,
लेकिन रातों कि निंद उडाने
वाली, और बगलोंज़,गाडीयाँ
सगवड देने वाली लेकिन दिन
का चैन चुराने वाली, ये दौलत
अगर मिल भी जाए तो क्या है ?
समाज़ में प्रतिष्ठा दिलाने वाली
लेकिन परीवार से सुख छीनने
वाली, और जो चाहे वो सब कुछ
देने वाली, लेकिन अस्वस्थ करने
वाली ये दौलत अगर मिल भी
जाए तो क्या है ?
अमीरों कि नामावली में नाम
लिखने वाली, लेकिन रिश्तेदारों
से दूर करने वाली और महेफिलें
और क्लबो का माहोल देने वाली,
लेकिन परिवार का संग छुडाने
वाली, ये दौलत अगर मिल भी
जाए तो क्या है ?
दौलत कि दौड और नसे ने
अभिमानी और घमंडी बनाने
के बाद,सब कुछ छीन कर,ये
दौलत भी मिल जाए तो क्या है ?
दौलत कि भूख मिटती नहि लेकिन
संस्कार बिगाड ने वाली,शरीर और
संबंध बिगाडने वाली, ये दौलत
अगर मिल भी जाए तो क्या है ?
जरूरत से ज्यादा दौलत है धीमा
और मीठा जह़र, लेकिन जीते जी
मारने वाली ये दौलत अगर मिल
भी जाए तो क्या है ?
विनोद आनंद 02/05/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड