1495 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-81

🌹 मोहताज
ईन्सान हमेंशा खुस नही
रह शकता और तरक्की
नही कर शकता जब तब
वो किसी व्यक्ति पर
निर्भर या आधारित है ।
अपनी खुशी या तरक्की
अपनी जिम्मेदारी है उसे किसी
व्यक्ति कि मोहताज न बनाओ ।
🌺 क्षमा
क्षमा वो फूलो के समान है
जो कुचल जाने के बाद भी
खुसबू बिखेरता है ।
🌻 नींव है
भरोशा टूट जाए तो
समजलो आगे बढने का
द्वार बंध हो जाता है ।
रिश्ते चाहे गहेरा हो न हो
भरोशा गहेरा होना चाहिए ।
भरोशा नींव है रिश्तों कि
🍀खामोश
शब्दों का भी एक अहेसास
होता है खुद अहेसास करले
अच्छा लगे तो दूसरों को कहेंगेे
वरना शब्दों को खोमोश करदे ।
🍁शिकायतों से
रिश्ते अंकूरित होते है
प्रेम से, बने रहते है संवाद से
और महेसूस होते है संवेदनाओ
से,जीए जाते है दिल से और
मुरझा जाते है शिकायतों से ।
विनोद आनंद 15/02/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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1476 मोहताज़

ना दूर रहने से रिश्ते टूट
जाते हैं और ना पास रहने
से जुड़ जाते हैं यह तो
एहसास के पक्के धागे है जो
रिश्तों को मज़बूत करता है ।
रिश्ते टूटने के लिए नही ।
रिश्ते निभाने के लिए है
जो टूट जाते है वो रिश्ते
नही वो, रिश्ते कि छाया है ।
एसे रिश्ते से अच्छा कि
रिश्ते बनाए नही, अगर
बनाए तो तोडे नही ।
पास या दूरी किस्मत कि
बात है मगर रिश्ते में प्रेम
मिलाना रिस्तेदारों का
काम है । प्रेम है मजबूर
धागा जो रिश्तों को
बिखरने नही देता ।
रिश्तें जीवन कि बुनीयाद
रिश्ते बीना जीवन सुना
जीवन है रिश्तों का मोहताज ।
प्रेम बीना रिश्ते बीमार
रिश्ते है प्रेम के मोहताज ।
विनोद आनंद 31/01/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1421 ए भी क्या जीना है ?

ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में सुख,चैन,शांति न
हो और मान सन्मान न मिले ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में रिशेंदारों, दोस्तों
का प्यार और साथ न मिले ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में अकेलापन,निराशा
और व्याकुलता हतासा सताए ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में शारीरिक,मानसिक
और संतान सुख न मिले ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
बहुत कुछ हो मगर जिंदगी में
संतोष,भक्ति और आनंद न हो ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में क्लेश, झगडे हो,
और रिश्तों में अपनापन न हो ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में तनाव, परेशानी हो,
निष्फलता और असंतोष हो ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में मरते मरते और उसे
को बोज समजकर जीए ।
विनोद आनंद 10/12/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1420 ए भी क्या बोलना है ?

ए भी क्या बोलना है दोस्तो
कि दोस्त दुश्मन बन जाए
और कोई नाराज हो जाय ।
ए भी क्या बोलना है दोस्तो
कि बोलना बकवास बन जाए,
और अपनो को पराया कर दे ।
ए भी क्या बोलना है दोस्तो कि
दिल दिमाग को छलनी कर दे
और कोई देखकर रास्ता बदल दे ।
ए भी क्या बोलना है दोस्तो कि
हम सब नज़रों मे गीर जाए,
और बोल तुम्हारे ज़हर बन जाए ।
एसी बानी बोलीए कि बानी
बने अमृत, सब खुस हो जाए
और सब के प्रिय बन जाओ ।
एसी बानी बोलीए कि दिल
दिमाग खुस हो जाए सब का ।
एसी बानी न बोलिए जिस में
न हो कटाक्ष, न हो उपेक्षा
जिसे हो क्लेश और अनबन ।
एसी बानी बोलना कि जिसे से
संबंध निखरे और बने मजबूत
और न कभी भी बीगडे ।
बानी रिश्तें बीगाड शकती है
और सँवार भी शकती है,
पसंद तुम्हारी कैसी बानी बोले ।
जैसी बानी एसे बनेगे रिश्तें ।
विनोद आनंद 09/12/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1385 अच्छी बहू

अच्छी बहू का स्वप्न सब माँ
देखती है अपने बेटे के लिए
लेकिन सब माँ अपनी बेटी
को अच्छी बहू बनाने का
स्वप्न देखती तो सब माँ
को अच्छी बहू मिल जाती ।
बेटी एक अच्छा पति का
स्वप्न देखती है लेकिन बेटी
एक अच्छी बहु बनने स्वप्न
देखे तो सब परिवार को
अच्छी बहू मिल जाती ।
हालता एसे होते जाते है
कि अच्छी बहू मिलना
स्वप्ना बन गया है ।
अगर यह स्वप्ना साकार
करना है तो सिर्फ बेटी या
बेटे को अच्छा बनने कि
आश्यकता नही लेकिन
परिवार के सभी सदस्य
को आदर्श व्यक्ति बनने
कि आश्यकता है ।
उस के साथ साथ दूसरों से
अच्छाई कि उमीद रखने से
बहेतर है हम खुद अच्छाई से
नाता जोडे तो रिश्ते निखरेगें ।
पति को अच्छी बहू और पत्नि
को अच्छा पति और परिवार
अच्छा परिवार मिल जाएगा ।
विनोद आनंद 13/11/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1378 मजाक

जिंदगी में कभी कभी मजाक करना
चाहिए, जब माहोल मजाक का हो
या माहोल उदास या मन बैचन हो
या दिल उदास हो तो सोच समज
मजाक करने से माहोल में क्षणीक
आनंद कि लहेर आ जाती है ।
तन मन और दिल बहेल जाता है ।
मगर माहोल गंभीर या दुःखी हो
तो मजाक मत करना, चूप रहेना है ।
किसी पर व्यक्ति का मजाक मत
करना, चुटकूला सुनाना, तो हसी
खुसी का माहोल बन जाएगा ।
अंग हीन,ज्यादा अंग वाले,अज्ञानी,
वृध्ध, गरीब, कूरुप, छोटी जाती के
लोगों कि माजाक मत उडाना क्यूँ कि
उस में उन का कोई दोष नही होता ।
हो शकेतो उन पर दया करूणा करके
उन के कल्याण कि ईश्र्वर को प्रार्थना
करना या मदद करना ईन्सानीयत है ।
मजाक कि सीमा रखना जरूरी है
वरना वो माजक मजाक में लडाई
झगडे, हिंसा का माहोल बनता है ।
किसी को किसी कि मजाक से मजा
लेने कि आदत होती है वो ठीक नही ।
मजाक मजाक में रिश्ते न टूट जाए,
सोच समज कर मजाक करना ।
विनोद आनंद 11/11/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1306 समझदारी और सहनशक्ति

समजदारी और सहनशक्ति
दोनों जिंदगी कि सहेली है ।
समजदारी और सहनशक्ति
दोनों जिगरी दोस्त । जहाँ
समजदारी वहाँ सहनशक्ति ।
समजदारी संस्कार कि सहेली
ज्ञान और बुध्धि कि बेटी है ।
समजदारी, ज्ञान और बुध्धि
से आती है सहन शक्ति यानी
वो बरदास्त करने कि शक्ति
समजदारी से आती है तो
रिश्तें टिकते है,सँवरते है ।
रिश्तों से परिवार बनता और
परिवार से जिंदगी बनती है ।
वरना रिश्ते टूटने लगते है और
जिंदगी बिखरने लगती है ।
जिंदगी को सँवारना है तो
समजदारी से सहन शक्ति
को प्रगट करना जरूरी है ।
विनोद आनंद 25/09/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड