1030 आदर्श मात पिता

एक आदर्श व्यक्ति,

एक आदर्श पति और

एक आदर्श पत्नि ही

आदर्श मात पिता है ।

एक गुणवान व्यक्ति ही

आदर्श व्यक्ति है ।

जो व्यक्ति का स्वभाव 

सरल ,न मन कटुलाई 

वो ही  आदर्श व्यक्ति है ।

आदर्श मात पिता कि

संतान ही आदर्श है ।

जो संतान को गर्भ से

और जन्म के बाद जीवन

पर्यन्त संस्कार सिंचन 

करे वो आदर्श मात पिता है ।

जो संतान के भविष्य के 

लिए अपनी मनोकामना

सुख सगवड और मोज़

शौख का त्याग करे वो

आदर्श मात पिता है ।

संतान का भरण पोषण

के साथ उस के संस्कारो 

पर ज्यादा ध्यान दे वो

आदर्श मात पिता है ।

जीवन का दो लक्ष्य हो

आदर्श व्यक्ति और आदर्श

माता पिता बनना ।

विनोद आनंद                              09/01/2018      फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

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1002 महान कैसे बनोगे

सब का प्रिय पात्र बनोगे,

सब के दिल कि धडकन बनोगे,

सब के मन के विचार बनोगे,

महान बनने का स्वप्न होगा,

साकार करने कि ईच्छा होगी,

महान बनने का संकल्प होगा,

जीवन में साधना होगी,

खुद पर  विश्वास होगा तो,

जीवन में महान बन शकोगे ।

जीवन में महान लक्ष्य होगा,

प्राप्त करने का आयोजन होगा

प्राप्त करने का द्दढ निश्र्य होगा

प्राप्त करने का पुरूषार्थ होगा,

उदेश्य महान बनने का होगा,

महापुरूषो का चरित्र पढोगे,

महापुरूषो से प्रेरणा लोगे तो,

जीवन में महान बन शकोगे ।

विनोद आनंद                              11/12/2017       फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

965 जीवन है साधना

मानव जीवन है साधना 

साधन नही भोग का ।

जानवर जीवन भोग योनी है

मानव जीवन नहीं ।

मानव शरीर और जीवन 

टीकाने के लिए कर्म 

करना  ही साधना है ।

साधना बीना सिध्धि कहाँ ।

जीवन में कुछ प्राप्त करना 

परिश्रम  यानी साधना है ।

जीवन में साधना कैसे करोगे ?

जीवन में लक्ष्य रख के संकल्प

करना है और आयोजन युक्त

प्राप्त करने कि कर्म यानी 

साधना करनी है । 

जीवन में सुख शांति और

समृध्धि पानेका जीवन में

प्रयास ही एक साधना है ।

विनोद आनंद                               11/11/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

943 जागो और जगाओ

जगाने के लिए पहले

खूद जागना जरूरी है

ईसलिए जागो और 

दूसरों को जगाओ ।

पहेले आत्मको जगाना है

मतलब आत्मको जानना है  

और समजना है कि हम

शरीर नहीं आत्मा है ।

फिर उस कि शक्ति को

जानना है,  समजना है और 

आत्मविश्र्वास जगाना है ।

बाद में आत्मा के गुणों को

जानना है समजना है और

जगा के आत्मसाद करना है ।

फिर हमें कम, क्रोध, लोभ, मोह, 

मद और मत्सर को भगाना है ।

मोज शोख और एसो आराम

कि गहेरी निंद से जागना है ।

लक्ष्यहीन जिंदगी को जगाना है

और सद् विचारो को जगाना है ।

जीवन में सतत जागृत रहेना है

और दूसरों को भी जगाना है ।

जीवन को महान, अमर और

अदभूत बनाना है ईसलिए

जागो और दूसरों को जगाओ ।

विनोद आनंद                               06/10/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

925 झीरो से हीरो

जो पहेले या अभी हीरो है, 

पहेले वो कभी झीरो थे ।

झीरो में से हीरो बनना है ।

साधारण में से असाधारण 

बनना है यही है जिंदगी कि 

सफलता और महानता ।

कोई पहेले से अचानक 

झीरो में  से हीरो नही बनता ।

समय लगता है,महेनत लगती, 

हीरो बनने तीव्र ईच्छा लगती, 

द्रढता और सतत प्रयत्न लगता है, 

तभी आदमी झीरो से हीरो 

बन शकनेमें  कामीयाब होता है ।

लेकिन सिर्फ हीरो कि नकल 

करने से हीरो नही बन शकते ।

हीरो से प्रेरणा और पयत्न से

आदमी अवश्य झीरो में से 

हीरो बन शकता है ।

उस के लिए हम जो भी है

उस में हि जिंदगी बीता दे, 

और आगे बढने कि अग्नि

सीने में प्रज्वलित न करे तो हम

झीरो से हीरो नही बन शकते ।

याद रहे हीरो से फिर झीरो न

बन जाय उस का ख्याल रखना

और हीरो ही बनके रहेना है ।

याद रहे हीरो बनना ही जीवन 

का लक्ष्य होना चाहीए ।

विनोद आनंद                               21/09/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

920 विकास या विनाश 

जिंदगी के दो रास्ते

विकास या विनास

कौनसे रास्ता पे हो

हर पल जांच करो ।

किस वक्त रास्ता 

विकास से विनास कि

ओर बदल जाएगा

पता हि नही चलेगा ।

सिर्फ एक गंदी सोच

रास्ता किस वक्त 

बदल देगी नहीं पता ।

सोचने पर नियत्रंण या

सतत पहेरा रखो कि गंदी 

सोच रास्ता न बदल दे ।

जिंदगी का लक्ष्य विकास, 

मन का ईरादा विकास

और विकास कि चेष्ठा करे तो

गंदी सोच रास्त न बद शके ।

विकास सिर्फ खुदका नहीं 

एक तरफा भी नहीं, 

विकास सबका और

सर्वांगी होना चाहिए ।

दूसरों का विनास से

तुम्हारा विकास 

सही विकास नहीं ।

विनोद आनंद                                16/09/2017

फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

911 निस्वार्थ,निर्भय,निश्चित जीवन

निस्वार्थ, निर्भय और निश्चित 

जीवन हि उत्तम आदर्श जीवन ।

निस्वार्थ में  नहीं कोई अपेक्षा

सिर्फ अपनी जिम्मेदारी,फर्ज

और कर्म निष्ठा से करना ।

निर्भय जीवनमें अच्छें कर्म

अच्छा स्वभाव,अच्छी आदतें 

अच्छी भावनए,ईश्र्वर में श्रध्धा,

विश्र्वास और आराधना हो ।

निस्वार्थ, निर्भय  जीवन 

निश्चित जीवन कि नींव और 

फिर लक्ष्य और आयोजन

युक्त जीवन बने निश्चिंत ।

सब के प्रति प्रेम,दया,अपनापन 

मदद करने कि भावना और 

न हो बदले कि भावना ।

एसे जीवन से बनता है 

निस्वार्थ,निर्भय,निश्चित जीवन ।

विनोद आनंद                                10/09/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड