948 परेशानीयाँ

परेशान है सब टि.वि देखते

जाहेरातों से जहाँ भी देखो

वहाँ जाहेरात होती है ।

परेशान है सब महेंगाई से

और ओफिस में 8 धंटो के 

बदले 12 धंटे काम करने से ।

थके घर आकर सो जाना, 

फिर कब जीएगें जिंदगी ।

हालात कुछ एसे हो गए है कि

परेशानी पिछा नही छोडती ।

जीवन कि पसंद और जीवन

शैली एसी विकृत हो गई है कि

बिमारीयाँ बढ रही है और 

रिश्तों में  तनाव है और 

रिश्तें कमजोर पड जाते है 

तो परेशानीयाँ तो होगी ।

परेशानीयाँ कैसे कम होगी ? 

जीवन में शांति, संतोष और

समज से मन नियंत्रण रखने से ।

जरूरियात कम करने से, 

अपेक्षाओं को कम करने से, 

और रिश्तों को संभालाने से  ।

जीवन जीने के लिए अच्छि

जीवनशैली का निर्माण करना है 

तो पेरेशानीयों से पिछा छूटेगा ।

वरना जिंदगीमें परेशानियाँ 

जानलिवा बन शकती है ।

परेशानीयों से परेशान मत होना 

वो तुम्हारी ताकात से बडी नही है ।

कमजोर होकर परेशानीयों से 

डरना नही डटके सामना करना है ।

विनोद आनंद                               20/10/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

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895 कर्तव्य निष्टा

जब माँ अपने बेटे का हित न चाहे 

पिता उनका भविष्य न सँवारे

मित्र दोस्त का भला न चाहे

शिक्षक स्कूलमें विद्यार्थी को

अच्छी तरह न पढाए ।

जब नावमें सफर करे और 

नाविक ही नाव डुबोए, 

अपने धोखा दे,नफरत करे ।

शासक हि बने शोषक ।

और रक्षक भक्षक बने, 
रक्षक भक्षक बने ।

तो क्या परिणाम आएगा ? 

सब जगह संघर्ष क्लेश और

अशांति और समस्याए होगी ।

क्या एसा होना उचित है ? 

एसा क्यूं होता है ? सोचा है? 

यह सब अपनी बेजिम्मेंदारी 

और स्वार्थ का नतीजा है ।

जब कोई भी अपना काम

निष्टासे नहीं करता तब 

घर में, समाज में और 

देश में  अशांति,अविश्र्वास

और समस्या जन्म लेती है ।

उसका एक ही सरल उपाय

सभी अपनी अपनी जिम्मेंदारी

सभजकर कर्तव्य निष्टा से निभाए ।

विनोद आनंद                                 23/08/2017   फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

851 वो तो सिर्फ चाहते है…. 

नहीं चाहते हीरा मोती

नहीं चाहते बंगला गाडी

वो तो सिर्फ चाहते है 

दो टंक भोजन और स्वमान ।

नहीं चाहते ऐसो आराम 

नही चाहते खुस सगवड

वो तो सिर्फ चाहते है 

तुम्हारे होठे पे हसी 

और जीवन में खुशी ।

नहीं चाहते नफरत 

नहीं चाहते अवगणना 

वो तो सिर्फ चाहते है 

प्रेम के दो मीठे बोल 

और तुम्हारा साथ ।

नहीं चाहते क्लेश   

नहीं चाहते अशांति

वो तो सिर्फ चाहते है 

सुख शांति और चैन ।

वो चाहते है तुम्हे

वो चाहते है सब को

वो तो भी चाहते 

थोडा वक्त तुम्हारा 

अगर तुम दे शको तो

मिलेगा आशीर्वाद,

ईश्रवर कृपा और

शुभकामनाएँ  ।

अगर तुम चेहतो हो

यह सब मिले संतान से

देना शीखो मा बाप को ।
विनोद आनंद                                16/07/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

839 कहाँ से लाओगे…. 

गाडी है बंगला है मगर

बंगले में शांति नही है तो

कहाँ से लाओगे….शांति ।

रिश्ते है,नए रिश्ते बनते है 

मगर रिश्तों में स्वार्थ है, 

कहाँ से लाओगे….प्यार ।

घर में गादी तकिया पलंग है ।

मगर रातों कि निंद नही, 

कहाँ से लाओगे…..निंद ।

लोग जीते है जिंदगी, 

मगर विश्वास नही, 

कैसे जीतोगे विश्वास, 

कहाँ से लाओगे…..विश्वास ।

लोग मिलते है हसते है, 

मगर सब दिखावा है, 

दिल में न दया न करुणा, 

कहाँ से लाओगे…..दया-करुणा ।

जिवन बीताते है लोग, 

कोई जीता नही जीवन, 

सिर्फ पैसा कमाते है लोग

कहाँ से लाओगे……दुआएँ ।

भोग विलास में है मस्त, 

वक्त कि कोई किंमत नही, 

कहाँ से लाओगे बीता वक्त ।

जीते है जीवन गलत तरिके से

फिर कहते है हम ठीक है

कहाँ से लाओगे…… 

सही तरिका जीनेका ।

कई जन्मो के बाद 

मानव जन्म मिला है ।

कहाँ से लाओगे….. 

दूबारा मानव जन्म ।

जरा सोचो यह सब

आपके पास है 

आपके बस में है 

बस प्रयास करना है ।

कहाँ से लाओगे…..प्रयास ।

विनोद आनंद                                08/07/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

 

797 अपनी शक्ति को जगाओ

हम बहोत जल्दी 

चिड जाते है 

बातों बातों में 

गुस्से हो जाते है,क्यूँ ? 

क्या हर वक्त एसा

जरूरी होता है ? 

कि हम एसी ही

आदतों के शिकार

हो गए है या हमने 

अपना स्वभाव 

एसा बना लिया है ? 

क्या एसी आदते और

स्वभाव सुख, शांति और

चैन, शुकुन देता है ? 

तो फिर कमजोर बनकर

क्यूँ एसी आदतें-स्वभाव के 

साथ जी रहे है ।

हम एक शक्ति स्वरूप है

अपनी शक्ति को पहेचानो

जगाओ कि अपनी

खराब आदतें-स्वभाव 

बदल शके और सद्

गुणों के मालिक बन शके ।

एक सुख, शांति,चैन और

शुकुन सी जिंदगी जी शके ।

विनोद आनंद                                 02/06/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

 

793 जिंदगी कि बाज़ी जीतलो

क्या पकडाना है ? 

जो छोडना चाहे, 

उसे पकडो ।

क्या छोडोना है ? 

जो पकडना चाहे, 

उसे छोडो ।

जो खराब है,उसे छोडो ।

जो अच्छा है,उसे पकडो ।

अहंकार को छोडो, 

स्वमान को पकडो ।

जो सही है,उसे पकडो ।

जो  गलत है,उसे छोडो ।

प्रेम को पकडो,मोह को छोडो ।

मित्रताको पकडो,शत्रुताको छोडो ।

जो जूठ्ठ  है,उसे छोडो ।

जो सच है, उसे पकडो ।

संसार कि माया को छोडो, 

ईश्र्वर कि भक्ति को पकडो ।

लोभ-लालच को छोडो

संतोष-शांति को पकडो ।

द्वेष-ईर्षा को छोडो

दया-करूणा को पकडो ।

कुसंग को छोडो, 

सत्संग को पकडो ।

जिसे छोडना है उसे

छोडने कि हिंमत रखो

जिसे पकडना है उसे

पकडने कि जिद करो ।

अगर यह होने लगा तो

समजना कि जिंदगी कि

बाज़ी आपने जीत ली ।                                         

विनोद आनंद                                 30/05/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

775 जो भी करो….. 

जो भी करो सोच समज के, 

और एकाग्रता से करो ।

जो भी करो अयोजन से, 

समयसर और नियमीत करो ।

जो भी करो मन बुध्धि और

दिल कि सहमति से करो ।

जो भी करो आत्म विश्वास 

और होस में  करो ।

जो भी करो सब कि भलाई

और हीत के लिए करो ।

जो भी करो सफलता और

सार्थकता के लिए करो ।

जो भी करो लगन, मगन

और अगन से करो ।

जो भी करो सब कि खुशी

और शांति के लिए करो ।

जो भी करो किस के विरुध्ध

या बदले कि भावना से न करो ।

जो भी करो प्रसन्न चित और

आनंदित होकर करो ।

जो भी करो अच्छा करो

और शुभ करो ।

जो भी करो ईमानदारी

और निष्ठा से करो ।                                 

जो भी करो आन बान

और शान बढे एसा करो ।

विनोद आनंद                               14/05/2017 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड