851 वो तो सिर्फ चाहते है…. 

नहीं चाहते हीरा मोती

नहीं चाहते बंगला गाडी

वो तो सिर्फ चाहते है 

दो टंक भोजन और स्वमान ।

नहीं चाहते ऐसो आराम 

नही चाहते खुस सगवड

वो तो सिर्फ चाहते है 

तुम्हारे होठे पे हसी 

और जीवन में खुशी ।

नहीं चाहते नफरत 

नहीं चाहते अवगणना 

वो तो सिर्फ चाहते है 

प्रेम के दो मीठे बोल 

और तुम्हारा साथ ।

नहीं चाहते क्लेश   

नहीं चाहते अशांति

वो तो सिर्फ चाहते है 

सुख शांति और चैन ।

वो चाहते है तुम्हे

वो चाहते है सब को

वो तो भी चाहते 

थोडा वक्त तुम्हारा 

अगर तुम दे शको तो

मिलेगा आशीर्वाद,

ईश्रवर कृपा और

शुभकामनाएँ  ।

अगर तुम चेहतो हो

यह सब मिले संतान से

देना शीखो मा बाप को ।
विनोद आनंद                                16/07/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

839 कहाँ से लाओगे…. 

गाडी है बंगला है मगर

बंगले में शांति नही है तो

कहाँ से लाओगे….शांति ।

रिश्ते है,नए रिश्ते बनते है 

मगर रिश्तों में स्वार्थ है, 

कहाँ से लाओगे….प्यार ।

घर में गादी तकिया पलंग है ।

मगर रातों कि निंद नही, 

कहाँ से लाओगे…..निंद ।

लोग जीते है जिंदगी, 

मगर विश्वास नही, 

कैसे जीतोगे विश्वास, 

कहाँ से लाओगे…..विश्वास ।

लोग मिलते है हसते है, 

मगर सब दिखावा है, 

दिल में न दया न करुणा, 

कहाँ से लाओगे…..दया-करुणा ।

जिवन बीताते है लोग, 

कोई जीता नही जीवन, 

सिर्फ पैसा कमाते है लोग

कहाँ से लाओगे……दुआएँ ।

भोग विलास में है मस्त, 

वक्त कि कोई किंमत नही, 

कहाँ से लाओगे बीता वक्त ।

जीते है जीवन गलत तरिके से

फिर कहते है हम ठीक है

कहाँ से लाओगे…… 

सही तरिका जीनेका ।

कई जन्मो के बाद 

मानव जन्म मिला है ।

कहाँ से लाओगे….. 

दूबारा मानव जन्म ।

जरा सोचो यह सब

आपके पास है 

आपके बस में है 

बस प्रयास करना है ।

कहाँ से लाओगे…..प्रयास ।

विनोद आनंद                                08/07/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

 

797 अपनी शक्ति को जगाओ

हम बहोत जल्दी 

चिड जाते है 

बातों बातों में 

गुस्से हो जाते है,क्यूँ ? 

क्या हर वक्त एसा

जरूरी होता है ? 

कि हम एसी ही

आदतों के शिकार

हो गए है या हमने 

अपना स्वभाव 

एसा बना लिया है ? 

क्या एसी आदते और

स्वभाव सुख, शांति और

चैन, शुकुन देता है ? 

तो फिर कमजोर बनकर

क्यूँ एसी आदतें-स्वभाव के 

साथ जी रहे है ।

हम एक शक्ति स्वरूप है

अपनी शक्ति को पहेचानो

जगाओ कि अपनी

खराब आदतें-स्वभाव 

बदल शके और सद्

गुणों के मालिक बन शके ।

एक सुख, शांति,चैन और

शुकुन सी जिंदगी जी शके ।

विनोद आनंद                                 02/06/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

 

793 जिंदगी कि बाज़ी जीतलो

क्या पकडाना है ? 

जो छोडना चाहे, 

उसे पकडो ।

क्या छोडोना है ? 

जो पकडना चाहे, 

उसे छोडो ।

जो खराब है,उसे छोडो ।

जो अच्छा है,उसे पकडो ।

अहंकार को छोडो, 

स्वमान को पकडो ।

जो सही है,उसे पकडो ।

जो  गलत है,उसे छोडो ।

प्रेम को पकडो,मोह को छोडो ।

मित्रताको पकडो,शत्रुताको छोडो ।

जो जूठ्ठ  है,उसे छोडो ।

जो सच है, उसे पकडो ।

संसार कि माया को छोडो, 

ईश्र्वर कि भक्ति को पकडो ।

लोभ-लालच को छोडो

संतोष-शांति को पकडो ।

द्वेष-ईर्षा को छोडो

दया-करूणा को पकडो ।

कुसंग को छोडो, 

सत्संग को पकडो ।

जिसे छोडना है उसे

छोडने कि हिंमत रखो

जिसे पकडना है उसे

पकडने कि जिद करो ।

अगर यह होने लगा तो

समजना कि जिंदगी कि

बाज़ी आपने जीत ली ।                                         

विनोद आनंद                                 30/05/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

775 जो भी करो….. 

जो भी करो सोच समज के, 

और एकाग्रता से करो ।

जो भी करो अयोजन से, 

समयसर और नियमीत करो ।

जो भी करो मन बुध्धि और

दिल कि सहमति से करो ।

जो भी करो आत्म विश्वास 

और होस में  करो ।

जो भी करो सब कि भलाई

और हीत के लिए करो ।

जो भी करो सफलता और

सार्थकता के लिए करो ।

जो भी करो लगन, मगन

और अगन से करो ।

जो भी करो सब कि खुशी

और शांति के लिए करो ।

जो भी करो किस के विरुध्ध

या बदले कि भावना से न करो ।

जो भी करो प्रसन्न चित और

आनंदित होकर करो ।

जो भी करो अच्छा करो

और शुभ करो ।

जो भी करो ईमानदारी

और निष्ठा से करो ।                                 

जो भी करो आन बान

और शान बढे एसा करो ।

विनोद आनंद                               14/05/2017 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

725 दूर रहना तो…पास रहोगे…. 

दूर रहना दुर्गुणो से, 

तो पास रहोगे अपनों के ।

पास रहोगे अपनों के, 

तो प्यार पाओगे अपनों का ।

दूर रहना व्यसनो से, 

तो स्वास्थ रहेगा निरोगी ।

स्वास्थ रहेगा निरोगी तो, 

जीवन होगा खुशखुशाल ।

दूर रहना कुसंग से, 

तो पास रहोगे सत्संग के ।

पास रहोगे सत्संग से, 

तो पाओगे कृपा ईश्र्वर कि ।

दूर रहना आलसिय से, 

तो साथ रहोगे  समय के ।

साथ रहोगे  समय के, 

तो बनोगे कर्मयोगी ।

दूर रहना गुस्से से, 

तो पास रहोगे  शांति के ।

पास रहोगे  शांति के तो, 

पास रहोगे सफलता के ।

दूर रहना बुरी आदतो से, 

तो पास रहोगे सब के ।

पास रहोगे सब के तो, 

पास रहोगे जिंदगी के ।
गलत चीजों से दूर रहेना, 

अच्छी चीजों के पास रहेना

आगया तो समजना कि,

जीनेका सही तरीका आगया ।

जीनेका सही तरीका आगया,

तो जीवन बनेगा महान ।

विनोद आनंद                          02/04/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

684 आत्मसात् करो 

हम पहले आत्मा है फिर तन ।

तन आत्मा का गणवेश ।

आत्मा परमात्मा का अंश ।

आत्मा के सात गुणें आत्मसात्

करे तो तन-मन रहे निरोगी ।

निरोगी तन पहेला सुख ।

सद् गुणी मन  दूसरा सुख और

संस्कारी आत्मा तिसरा सुख ।

आत्मा का सात गुणें, करे आत्मसात् 

तो तन, मन को करे प्रभावीत । 

जैसे ज्ञान – नरवस सीस्टम कोकरे प्रभावीत । 

शांति – रस्पीरेशन सीस्टम को करे प्रभावीत ।

सुख – पाचन  सीस्टम  और

प्रेम – सरक्युलेन सीस्टम को करे प्रभावीत ।

पवित्रता – ईन्द्रियों का सीस्टम और

आनंद – होरमन्स सीस्टम को करे प्रभावीत । 

शक्ति – मस्कुलर,स्केलेटन सीस्टम को करे प्रभावीत ।

आत्मा के गुण आत्मसात् कि

कोशीश करो तो सफलता  मिलेगी ।

जीवन में सुख शांति और समृध्धि मिलेगी । 

निरोगी तन, पीस ओफ माईन्ड,  

और शक्तिशाली आत्मा तो जीवन महान ।

विनोद आनंद                           03/03/2017 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड