1208 सबक

सबक तो शीखना चाहीए
खुद या दूसरों के अनुभव से ।
क्यूँकि सबक से सुधार और
सुधार से बहेतर जिंदगी ।
जो गलतियाँ से सबक नही
शीखते वो एक ओर गलती
करके जिंदगी को कठीन
बनाकर परेशान होते है ।
जिंदगी का दूसरा नाम हि
सबक है , और सबक से
शीखने से जिंदगी में सब
कुछ ठीक कर शकते है ।
जिंदगीमें सबक से नही
शीखना है जिंदगी से बेवफाई ।
सबक से शीखने से भिवष्य में
मुश्किलीयाँ या परेशानियाँ
कम कर शकते है और सुख
शांति का जिंदगी जी शकते है ।
जिंदगी पाठशाला है उसमें
सबक शीखना मुनाशीत है ।
सबक से शीखते रहो, आगे बढते
रहो और कामीयाब होते रहो ।
विनोद आनंद 14/06/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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1198 आदर्श हम सफर

जब कोई बात बिगड जाए तब
बात सवाँर देना मेरे हम सफर ।
जब कोई मुश्किल पड जाए तब
मुश्किल आसान कर देना हम सफर ।
जब कोई परेशानी आ जाए तब
परेशानी को मीटा देना हम सफर ।
जब कोई भूल हो जाए तब भूल को
माफ करके देना मेरे हम सफर ।
जब कोई गलतफहमी हो जाए
तब गलतफहमी को गलत
साबित कर देना मेरे हम सफर ।
जब कोई शंका कुशका हो तब
उसे दूर कर देना मेरे हम सफर ।
जब कभी तू तू मैं मैं हो जाए तब
जरा सब्र रखना मेरे हम सफर ।
जब कभी बातों बातों में रिश्ता
टूटने लगे तो रिश्तो को बचा
लेना मेरे हम सफर ।
यही है एक आदर्श हम सफर
जो हर हाल हर परिस्थिति में
सुख शांति का दामन न छोडे ।
जिंदगी को सफल सार्थक बनाए ।
विनोद आनंद 04/06/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1184 एकता

रेशे, रेशे से बनती है मजबूत रस्सी ।
एक एक काठी से बनती है गठरी ।
तीनके तीनके से बनता है खोंसला ।
आसमान से बुंदे बरसती है और
बुंदे बुंदे से सागर बनता है ।
छोटी खुशीयाँ से बनती है बडी खुशी ।
एक एक व्यक्ति से बनता है संगठन ।
रस्सी, गठरी, संगठन कि एकता से
बनती है ताकात और ताकात से
कुछ भी काम कर शकते हो ।
ईसलिए सब के संग मिलजुलकर,
साथ सहकार से रहेने से हर
मुशीबत या परेशानी का हल
आसानीसे निकाल शकते हो ।
जूडे रहने से कोई तोड नही
शकेगा और न परेशान कर
शकेगा और जीवन मे सुख
शांति और सफलता मिलेगी ।
परिवार में,समाज में एकता से
जीवन सफल,सार्थक बनेगा ।
विनोद आनंद 22/05/2018
फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

1172 क्रोध से मुक्ति कैसे ?

क्रोध एक आग सब कुछ
जलाकर राख कर देता है ।
शांति से क्रोध शांत होता है
क्रोध से शांति जलजाती है ।
क्रोध से मुक्ति यानी शांति ।
मगर कैसे हो क्रोध से मुक्ति
और मिलन शांति से ?
जिवन में कुछ भी चाहते हो
उसे पाने कि जिद्दी चाहत हो ।
एसी हि चाहत और जिद्द हो तो
तुम्हे क्रोध से मुक्ति मिल जाएगी ।
बस करना है संक्लप ईश्र्वर के
सन्मुख और प्रार्थना करके
मागनी है प्रेरणा, आर्शीवाद और
शक्ति क्रोध से मुक्ति पाने कि ।
फिर सोचना है क्या करना है ।
हमे हमेंशा याद रखना है कि मुझे
आज के बाद क्रोध नही करना है ।
हो जाए तो उसे खत्म करना है ।
अगर हर दिन यह करते रहे तो
क्रोध करना कम हो जाएगा और
अभ्यास से धीरे धीरे क्रोध से मुक्ति
पाने में सफल अवश्य होगे ।
जिवन में सुख शांति होगी ।
क्रोध समस्यो का मूल और
शांति समस्या का समाधान ।
विनोदआनंद 10/05/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1155 मन कि शांति

मन कि शांति, श्रेष्ठ संपदा
मन कि शांति, स्थिर मन
मन कि शांति, विवेक बुध्धि
मन कि शांति, मन कि शक्ति
मन कि शांति, सही निर्णय
मन कि शांति इन्दियों पर काबू
मन कि शांति, आत्मविश्र्वास
मन कि शांति, सदगुणों का बीज़
मन कि शांति, दुर्गुणों का दुश्मन
मन कि शांति, सही दिशा
मन कि शांति, सही रास्ता
मन कि शांति, चारित्र घडतर
मन कि शांति, सुख शांति समृध्धि
मन कि शांति, स्वर्ग का निर्माण
मन कि शांति हर समस्या
और मुश्केलिओ का उपाय ।
मन में शाति आए कैसे ?
लो द्रढ निर्णय मन को शांत
करने का और मन को शांत
मौन कि साधना, ध्यान और
प्रणायाम से करो ।
हंमेशा याद रखो में आत्मा
शांत स्वरूप और बोलो मंत्र
ॐ शांति ॐ शांति ॐ शांति ।
साधना बीना न कोई सिध्धि ।
मन कि शांति बीना सफलता नहीं ।
विनोद आनंद 24/04/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1146 हम परेशान क्यू है ?

जिंदगी में हम परेशान है
क्यूँकि हम शान से नही जीते ।
शान से कैसे जी शकते है ?
शान से जीने के लिए अपनी
कमीयों दूर करके खुबीयों का
जिंदगी में स्वागत करना है ।
अपनी गलत द्रष्टि और सोच
बदल ना जरूरी है ।
अपनी बूरी आदतों को
छोड कर अच्छी आदतें का
स्वागत करना जरूरी है ।
अपने दुर्गुणो को दूर करके
सद् गुणोका स्वागत करना है ।
अपनी बूरी भावनाओं को
जलाकर प्रेम,दया,अहिंसा जैसी
नई शुध्ध भावएँ जगनी है ।
अनीति- अप्रमाणीकता को
नीति-प्रमाणीकता में बदलकर
हम शान से रह शकते है और
परेशानियाँ से बच कर सुख
और शांति से रह शकते है ।
विनोद आनंद 14/04/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1144 सकारात्मक अभिगम कैसे बने ?

सकारात्मक अभिगम बनाना है
तो पहेले नकारात्मक अभिगम को
स्वअभ्यास से दूर करने से
सकारात्म अभिगम बनेगा ।
उस के लिए पहले हमे अपनी
वाणी में सकारात्म शब्दो का
ईस्तमाल करना शीखना है ।
मन में सकारात्म भाव को
जगाकर सोच सकारात्म बनानी है ।
अच्छी पुस्तके और सकारात्मक
व्यक्ति का संग करने से मन को
सकारात्मकता का प्रशिक्षण देना है ।
मन पर बहार के बुरे वातावरण का
असर होता है इसलिए अच्छा स्वच्छ
और संस्कारी वातावरण में रहेना है ।
द्दढ नार्णय, प्रयास और कोशिश से
सकारात्मक अभिगम बना शकते है ।
सकारात्मक अभिगम हि सफलता,
खुशी और शांत जीवन कि चाबी है ।
सकारात्मक अभिगम तनाव,चिंता
और निराशा से बचने का उपाय है ।
सकारात्मकता स्वर्ग कि सीडी और
नकारात्मकता नर्क कि सीडी ।
सकारात्मक अभिगम विकास है ।
नकारात्मक अभिगम विनाश है ।
विनोद आनंद 12/04/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड