797 अपनी शक्ति को जगाओ

हम बहोत जल्दी 

चिड जाते है 

बातों बातों में 

गुस्से हो जाते है,क्यूँ ? 

क्या हर वक्त एसा

जरूरी होता है ? 

कि हम एसी ही

आदतों के शिकार

हो गए है या हमने 

अपना स्वभाव 

एसा बना लिया है ? 

क्या एसी आदते और

स्वभाव सुख, शांति और

चैन, शुकुन देता है ? 

तो फिर कमजोर बनकर

क्यूँ एसी आदतें-स्वभाव के 

साथ जी रहे है ।

हम एक शक्ति स्वरूप है

अपनी शक्ति को पहेचानो

जगाओ कि अपनी

खराब आदतें-स्वभाव 

बदल शके और सद्

गुणों के मालिक बन शके ।

एक सुख, शांति,चैन और

शुकुन सी जिंदगी जी शके ।

विनोद आनंद                                 02/06/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

 

793 जिंदगी कि बाज़ी जीतलो

क्या पकडाना है ? 

जो छोडना चाहे, 

उसे पकडो ।

क्या छोडोना है ? 

जो पकडना चाहे, 

उसे छोडो ।

जो खराब है,उसे छोडो ।

जो अच्छा है,उसे पकडो ।

अहंकार को छोडो, 

स्वमान को पकडो ।

जो सही है,उसे पकडो ।

जो  गलत है,उसे छोडो ।

प्रेम को पकडो,मोह को छोडो ।

मित्रताको पकडो,शत्रुताको छोडो ।

जो जूठ्ठ  है,उसे छोडो ।

जो सच है, उसे पकडो ।

संसार कि माया को छोडो, 

ईश्र्वर कि भक्ति को पकडो ।

लोभ-लालच को छोडो

संतोष-शांति को पकडो ।

द्वेष-ईर्षा को छोडो

दया-करूणा को पकडो ।

कुसंग को छोडो, 

सत्संग को पकडो ।

जिसे छोडना है उसे

छोडने कि हिंमत रखो

जिसे पकडना है उसे

पकडने कि जिद करो ।

अगर यह होने लगा तो

समजना कि जिंदगी कि

बाज़ी आपने जीत ली ।                                         

विनोद आनंद                                 30/05/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

775 जो भी करो….. 

जो भी करो सोच समज के, 

और एकाग्रता से करो ।

जो भी करो अयोजन से, 

समयसर और नियमीत करो ।

जो भी करो मन बुध्धि और

दिल कि सहमति से करो ।

जो भी करो आत्म विश्वास 

और होस में  करो ।

जो भी करो सब कि भलाई

और हीत के लिए करो ।

जो भी करो सफलता और

सार्थकता के लिए करो ।

जो भी करो लगन, मगन

और अगन से करो ।

जो भी करो सब कि खुशी

और शांति के लिए करो ।

जो भी करो किस के विरुध्ध

या बदले कि भावना से न करो ।

जो भी करो प्रसन्न चित और

आनंदित होकर करो ।

जो भी करो अच्छा करो

और शुभ करो ।

जो भी करो ईमानदारी

और निष्ठा से करो ।                                 

जो भी करो आन बान

और शान बढे एसा करो ।

विनोद आनंद                               14/05/2017 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

725 दूर रहना तो…पास रहोगे…. 

दूर रहना दुर्गुणो से, 

तो पास रहोगे अपनों के ।

पास रहोगे अपनों के, 

तो प्यार पाओगे अपनों का ।

दूर रहना व्यसनो से, 

तो स्वास्थ रहेगा निरोगी ।

स्वास्थ रहेगा निरोगी तो, 

जीवन होगा खुशखुशाल ।

दूर रहना कुसंग से, 

तो पास रहोगे सत्संग के ।

पास रहोगे सत्संग से, 

तो पाओगे कृपा ईश्र्वर कि ।

दूर रहना आलसिय से, 

तो साथ रहोगे  समय के ।

साथ रहोगे  समय के, 

तो बनोगे कर्मयोगी ।

दूर रहना गुस्से से, 

तो पास रहोगे  शांति के ।

पास रहोगे  शांति के तो, 

पास रहोगे सफलता के ।

दूर रहना बुरी आदतो से, 

तो पास रहोगे सब के ।

पास रहोगे सब के तो, 

पास रहोगे जिंदगी के ।
गलत चीजों से दूर रहेना, 

अच्छी चीजों के पास रहेना

आगया तो समजना कि,

जीनेका सही तरीका आगया ।

जीनेका सही तरीका आगया,

तो जीवन बनेगा महान ।

विनोद आनंद                          02/04/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

684 आत्मसात् करो 

हम पहले आत्मा है फिर तन ।

तन आत्मा का गणवेश ।

आत्मा परमात्मा का अंश ।

आत्मा के सात गुणें आत्मसात्

करे तो तन-मन रहे निरोगी ।

निरोगी तन पहेला सुख ।

सद् गुणी मन  दूसरा सुख और

संस्कारी आत्मा तिसरा सुख ।

आत्मा का सात गुणें, करे आत्मसात् 

तो तन, मन को करे प्रभावीत । 

जैसे ज्ञान – नरवस सीस्टम कोकरे प्रभावीत । 

शांति – रस्पीरेशन सीस्टम को करे प्रभावीत ।

सुख – पाचन  सीस्टम  और

प्रेम – सरक्युलेन सीस्टम को करे प्रभावीत ।

पवित्रता – ईन्द्रियों का सीस्टम और

आनंद – होरमन्स सीस्टम को करे प्रभावीत । 

शक्ति – मस्कुलर,स्केलेटन सीस्टम को करे प्रभावीत ।

आत्मा के गुण आत्मसात् कि

कोशीश करो तो सफलता  मिलेगी ।

जीवन में सुख शांति और समृध्धि मिलेगी । 

निरोगी तन, पीस ओफ माईन्ड,  

और शक्तिशाली आत्मा तो जीवन महान ।

विनोद आनंद                           03/03/2017 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

​ढूंढते है हम जो खो गया है

​ढूंढते है हम जो खो गया है

लेकिन क्या खो गया ? 

सुख, चैन, और शांति ।

सब कुछ है मगर 

सुख, चैन और शांति नही है ।

क्यूकि हम उन्हे जहाँ नही है

वहाँ ढूंढते है, बेखर है हम ।

हम चीजों में,धन दौलत में

ढूंढते है सुख, चैन,और शांति ।

शायद मिल भी जाय तो, 

वो नही है  शाश्र्वत ।

तो कहाँ है सुख, चैन, शांति ।

ज्ञानी कहते है कि वो 

मनुष्य के अतःकरण में 

गहरी निंद में सोई है ।

उन्हे जगाना है,लेकिन कैसे ? 

अपनी सोच,नजरिया और

मान्यता बदलनी है । 

हम शरीर के निवासी 

अविनासी,नित्य आत्मा है, 

जो अंश है परमात्मा का ।

हमारे अत:करण में जो है वो

भूल चूके है,उसे बहार ढूंढते है ।

बस सिर्फ याद करना है और

जिवन में सद् विचार और

सद् आचरण करना है, तुम्हे

शाश्र्वत सुख, चैन, और 

शांति अवश्य मिल जाएगी ।

विनोद आनंद                            07/01/2017      फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड 

खोज

​जिंदगी के सफर में

मानवी सत्य कि खोज में

निकला है तब अक्शर 

मुलाकाता होती है जूठ्ठ से

इरादा बदल जाता है 

जूठ्ठ से दोस्ती हो जाती है।

सत्य कि खोज खो जाती है ।

जिंदगी के सफर में

मानवी ईमानदारी कि खोज में

निकला है तब अक्शर 

मुलाकाता होती है बेईमानी से 

इरादा बदल जाता है 

बेईमानीसे से दोस्ती हो जाती है।

ईमानदारी सो जाती है ।

जिंदगी के सफर में

मानवी शांति कि खोज में

निकला है तब अक्शर 

अशांति का माहोल मिलता है

मानवी अशांत हो जाता है 

शांति कही खो जाती है।

मानवी कि खोज पूर्णन ही होती ।

खोज करनी है तो द्रढ  संकल्प 

द्रढ निर्णय,अटल विश्र्वास और

सतत प्रयास हो तो खोज पूर्ण हो

वरना खोज अधूरी रह जाती है ।

विनोद आनंद                         18/12/2016           फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड