1492 अशांति क्यूँ

एक पल कि शांति स्वर्ग
सुख कि अनुभूति ।
एक पल कि अशांति नर्क
के दु:ख कि अनुभूति ।
हम चाहते हुए भी एक
पल शांत नहि रह शकते ।
जैसे रोग निवारण सही
कारण से होता है एसे
अशांति का निवारण सही
कारणो हो शकता है ।
अशांति के करण कई है
जैसे अपनी अमर्यादित
कमनाए, वासनए,उमीदे
ईच्छाए या महत्व काँक्षाए ।
जैसे कि हमारी गलत,आदतें
भावनाएँ, स्वभाव,मान्यताएँ
और दरेक बाबतो में अति ।
जिसे हमे तकलीफे,मुश्किले
परेशानी और अशांति होती
है उसे दूर या कम करनेसे
शांति का माहोल बनता है ।
दूसरा कारणा हमारी जरूरत
से ज्यादा माहिती, शौख और
फेसन जिसे हम संस्कृति से
विकृति कि ओर जल्द आगे
बढते रहते है ।
हमारे भीतर शांति का बीज,
शांत स्वरूप आत्मा है बस हमे
उस पर फोकस करके शांति
बीज को अंकूरित करना है ।
जो चीज़े अशांति के पौधे
उगाडे है उसे जड से उखाड
के फेक देने है ।
विनोद आनंद 11/02/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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1421 ए भी क्या जीना है ?

ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में सुख,चैन,शांति न
हो और मान सन्मान न मिले ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में रिशेंदारों, दोस्तों
का प्यार और साथ न मिले ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में अकेलापन,निराशा
और व्याकुलता हतासा सताए ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में शारीरिक,मानसिक
और संतान सुख न मिले ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
बहुत कुछ हो मगर जिंदगी में
संतोष,भक्ति और आनंद न हो ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में क्लेश, झगडे हो,
और रिश्तों में अपनापन न हो ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में तनाव, परेशानी हो,
निष्फलता और असंतोष हो ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में मरते मरते और उसे
को बोज समजकर जीए ।
विनोद आनंद 10/12/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1334 काम का आरंभ कौसे करे ?

आरंभ सही तो काम सही
पहेले कुछ क्षण मौन से
मनको शांत करो और
ईश्र्वर कि साक्षी में शुभ
संकल्प करो सफलता मिले।
काम करने कि उर्जा ईश्र्वर से
प्राप्त करो और सकारात्म
सोचो से काम प्रसन्न चित
और मन कि एकाग्रता से
आरंभ करने से काम पूर्ण होगा ।
परिवार के सभी सदस्य कि
शुभ कामना और आशीर्वाद
ग्रहण करे जिसे सफल होने
कि शक्यता बढेगी ।
उस के साथ अपनी निष्ठा
और पुरूषार्थ से काम करो
तो सफलता अवश्य मिलेगी ।
सही काम का आरंभ से
आधा काम हो जाता है ।
कोई भी काम का आरंभ
अशांत मन, अशुभ और
नकारात्मता से मत करो ।
काम हि ईश्र्वर कि पूजा है ।
विनोद आनंद 20/10/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1323 घटना से परेशान मत हो

-जिंदगी में बूरी घटना से
परेशान होकर निराश,
कमोजोर और बेकाबु
होकर डर जाते है और
न करने कि प्रतिक्रया
हो जाती है फिर घटना
ओर बढ जाती है ।
जिंदगी में नकारात्मकता
का छा जाती है और
जिंदगी बोज बनती है ।
शांत मन से घटना को
देखो और सकारात्मकता
को जगओ, जैसे कि घटना
को परेशानी न समजो ।
शान से परे न हो, अपने
आपे मे रहो, शांत रहो ।
उस का हल सोच जो,
घटना मे हि हल है ।
घटना कर्म का फल है
या फल भी दे शकती है ।
घटना सीडी है विकास कि ।
घटना शिक्षक है, शीख लो ।
घटना एक चुनौती है स्वीकारो ।
घटना का सामना करना तुम्हारी
जिम्मेदारी है, डरकर भागना नही ।
सकारात्मकता से घटना छोटी है ।
विनोद आनंद 11/10/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1290 परिस्थिति और स्थिति

-परिस्थिति बहार कि स्थिति है
और स्थिति, मन कि स्थिति है ।
जैसी परिस्थिति एसी होती है
मन कि स्थिति और हम उस में
ढल जाकर दुःखी हो जाते है ।
हमारी मन कि स्थिति कि दौर
बहार कि परिस्थिति, व्यक्ति और
चीज़ो पर आधारित है ईसलिए
हम हमेंशा दुःखी रहते है खुश
नही रह शकते ।
चाहे कुछ भी परिस्थिति हो मन
कि स्थिति ठीक रखना हमारे
बस कि बात है, अगर हम यह
कर शकते तो मन स्थिर और
शांत रख शकते है और जीवन में
तनाव या चिंता से बच शकते है,
और हमारी खुशियाँ और शांति
किसी परिस्थिति, व्यक्ति और
चीज़ो पर आधारित नही होती ।
यही सही तरीका है जीवन जीने का ।
विनोद आनंद 08/09/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1217 शक्ति कैसे बढाए ?

शक्ति क्या है ?
आत्म शक्ति, मन कि
और तन कि शक्ति ।
शक्ति का व्यय रोकने से
शक्ति कम नही होती ।
शक्ति के सही उपयोग से
शक्ति बढती है क्यूँकि
खुशी होती है, खुशी से
आत्मविश्र्वास और
शक्ति बढती है ।
अच्छा काम करने से
शक्ति बढती है और
गलत काम करने से
शक्ति घटती है ।
जरूरत से कम बोलने से,
सबसे मिल जूल के रहने से
लक्ष्य पर फोकस करने से
बहेस नही करने से और
बहादूर बन के काम करने से
शक्ति बढती है , वरना
शक्ति का व्यय होता है ।
गुस्सा,आवेश, तनाव और
चिंता से शक्ति कम होती है ।
प्रसन्न चित, शांति और
खुश रहने भी शक्ति बढेगी ।
मन पर संयम और तन को
स्वस्थ रखने से शक्ति बढती है ।
ईश्र्वर उर्जा का स्त्रोत उसे
भक्ति से जूडे रहने से तुम्हारी
शक्ति रीचार्ज होती है ।
काम से उर्जा खर्च होती ही
उस मोबाई कि बेटरी कि
तरहा रीचार्ज करना है ।
विनोद आनंद 24/06/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1208 सबक

सबक तो शीखना चाहीए
खुद या दूसरों के अनुभव से ।
क्यूँकि सबक से सुधार और
सुधार से बहेतर जिंदगी ।
जो गलतियाँ से सबक नही
शीखते वो एक ओर गलती
करके जिंदगी को कठीन
बनाकर परेशान होते है ।
जिंदगी का दूसरा नाम हि
सबक है , और सबक से
शीखने से जिंदगी में सब
कुछ ठीक कर शकते है ।
जिंदगीमें सबक से नही
शीखना है जिंदगी से बेवफाई ।
सबक से शीखने से भिवष्य में
मुश्किलीयाँ या परेशानियाँ
कम कर शकते है और सुख
शांति का जिंदगी जी शकते है ।
जिंदगी पाठशाला है उसमें
सबक शीखना मुनाशीत है ।
सबक से शीखते रहो, आगे बढते
रहो और कामीयाब होते रहो ।
विनोद आनंद 14/06/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड