878 💐 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-41

💚 भव्य मंदिर

मंदिर भव्य होना चाहीए

लेकिन मंदिर जाने वाले का

जीवन भव्य होना चाहिए है ।

मंदिर भव्य तब बनता है जब

मंदिर जाने वाला व्यक्ति का

जीवन भव्य बने ।

मंदिर जाए और जीवन 

भव्य न बने तो मंदिर जाना

बेकार और समय का बीगाड ।

💟 कुछ नहीं पाया

आलीसान बंगलो और गाडी 

एसो आराम का सभी सामान

हो लेकिन किसा प्यार नही, 

मान सन्नमान नही, शुभा

आषीस नही, किसी कि 

हमदर्दि नहीं तो जीवन में 

कुछ नहीं पाया ।

💛 बडा के छोटा

आदमी कितना भी बडा हो

मगर उनकि सोच घटीया है, 

उनका स्वभाव नीच हो और

व्यवहार जानवर जैसा हो तो

वो पहले आदमी नहीं और 

बडा होकर भी छोटा है ।

💗 बातें एसी करो

हज़ार बातें करते लोग

न कोई प्रेरणादाई 

तो सब है बकवास ।

सिर्फ एक ही बात जो

जीवन बदल दे वोही है

अमृत बाकि सभी है ज़हर ।

बाते एसी करो के 

बात बन जाए ।

न करो एसी बातें 

जो बात बीगडे ।

876 💐 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-40

💖 शीखो

ठोकर से गीर के 

फिर खडे हो शकते है ।

लेकन किसी के 

दिल से गीर के फिर

दिल में  नही रह शकते ।

ठोकरों से शीखो धीरे चलना 

और अपनों से शीखो

दिल में रहना ।

💘 शायद

टूटके गीरना शायद 

नसीब हो शकता है 

लेकिन गीर के फिर 

खडा होकर, संभलकर 

चलना ही कर्म है ।

💞 ईच्छा

स्वप्ने देखना कल्पना है

ईच्छा को स्वप्न और

स्वप्न को कल्पना बनादो

ईच्छा होगी पूरी जरूरी 

एक ईच्छा पूर्ण हुई

और दूसरी हो गई प्रगट ।

नहीं कोई अंत ईच्छाओ का

करनी है ईच्छाओ नियंत्रीत ।

विनोद आनंद                                12/08/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

854 💐 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-38

🍭ईरादो

उन ईरादो को हवा न दो जो

जिंदगी को रूसवा करदें ।

उन ईरादो को ही हवा दो जो

जिंदगी को रोशन करदें ।

ईरादे मजबूत हो तो 

कामीयाब होते है वरना

ईरादे दम तोड देते है ।

अच्छे ईरादो से जिंदगी 

सँवरती है वरना बोज

बन जाती है जिंदगी । 

🎯 मंझिल

मायुस न हो अगर 

मंझिल न मिले ।

मंझिलें कई है, 

मंझिले बदलो मगर 

ईरादा न बदलो ।

जिंदगी का मकसद ही है

मंझिले सर करना ।

🌻 नही लगता

अच्छा नही लगता, 

जब टूटते है सपने ।

जी नही लगता, 

जब रूढते है अपने ।

दिल नही लगता, 

जब टूटते है दिल ।

मन नही लगता, 

अपनो की जूदाई में ।

नही मिलता प्यार किसी का

तो घूटघूट के जीना पडता है

मरना भी रास नही आता ।

प्यार ही जीने का सहारा है ।

प्यार करो, प्यार से जीओ ।

विनोद आनंद                                21/07/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

853 💐 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-37

💞 स्वर्ग भी बसेगा 

माया का पर्दा खुलेगा तो 

ईश्र्वर का दर्शन भी होगा ।

दर्शन भी होगा दिल भी मिलेगा ।

दिल भी मिलेगा तो प्रेम भी बरसेगा ।

प्रेम भी बरसेगा तो दिल भी खिलेगा ।

दिल भी खिलेगा तो खूशबु भी फैलेगी ।

खूशबु भी फैलेगी तो माहोल महेंकेगा ।

माहोल महेंकेगा तो धरती, 

पर स्वर्ग भी बसेगा ।

👪 संबंध को समझो 

प्रेम से संबंध खिलते है, 

नफरत से मुरझाते है ।

सेवा से संबंध बढते है

स्वार्थ से संबंध घटते है ।

प्रशंसा से संबंध कायम रहेते है ।

निंदा से संबंध हंगामी रहते है ।

समर्पण से संबंध मजबूत बनते है

हक छीनने से संबंध मरते है ।

मीठे वचन सही व्यवहार से, 

संबंध शाश्र्वत बनने है ।

कटु वचन, गलत व्यवहार से, 

संबंध टूटते है ।

मिलते जुलते रहनेसे, 

संबंध निखरता है ।

ताल मेल मिलाते  रहोगे, 

तो संबंध सँवरता है ।

संबंध को समजो, 

तो जीवन सँवरेंगा ।

💝 आप निर्देशक हो

मन शुध्ध है तो स्वर्ग,  

मन अशुध्ध है तो नर्क  ।

मन पवित्र है तो स्वर्ग ,  

मन अपवित्र है तो नर्क  ।

मन सकारात्मता है तो स्वर्ग , 

मन नकारात्मता है तो नर्क  ।

मन शांत तो है तो स्वर्ग

मन अशांत है तो नर्क है ।

मन संत हो तो स्वर्ग, 

मन शैतन है तो नर्क ।

मन ही निर्माता है 

स्वर्ग या नर्क का ।

आप निर्देशक है ।

क्या चाहते हो स्वर्ग या नर्क ? 
विनोद आनंद                                20/07/2017

फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

846 💐 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-36

💖 व्यक्तित्व और सद् गुण

जैसे फूलो में  खूशबु है 

फलों में  मीठास है ।

एसे व्यक्ति में व्यक्तित्व हो

तो उस कि खूशबु  फैलती है ।

उसके सद् गुणो कि मीठास से

सब का जीवन बनता है मीठा ।

🍁 वाणी व्यवहार और वर्तन

वाणी हो मधुर, 

व्यवहार हो अच्छा

और वर्तन हो सही

तीनों का हो त्रिवेणी संगम 

तो जीवन बने तीर्थ ।

💞 त्रिवेणी संगम 

मन हो संयमी और पवित्र, 

बुध्धि हो विवेकि और शुध्ध, 

आत्मा हो जागृत और संस्कारी, 

तीनों का हो त्रिवेणी संगम 

तो मानव जन्म हो जाए सफल

जीवन बने महान ने यादगार ।

💟 ठूठते है 

हम ठूठते  है, 

सुख में दु:ख, 

दु:ख में ठूठो सुख ।

हम ठूठते  है, 

गैरों में अपनो को, 

अपनो कों भूल कर ।

हम ठूठते  है, 

मान में अपमान को, 

अपमान में ठूठो मान को ।

विनोद आनंद                                12/07/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

835 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-35

💟 शिकवा गीला

शिकवा गीला दिल से न लगाना

मान जाना या मना लेना

हस लेना और हसा देना 

वरना जिंदगी रूठने मनाने में 

यूही खर्च हो जाएगी ।

💞 ज्यादा

अपनों से ज्यादा 

गैरों को याद करते है, 

जिसने दिया है धोखा ।

मगर प्यार करने वाले को नही, 

नफरत करने वालों को

ज्यादा याद करते है ।

मान देने वालों को नही 

अपमान करने वाले को 

ज्याद याद करते है ।

अपनों को ज्यादा याद करो ।

💝 याद रखना 

चूभती है शब्दों कि सूई मन में 

चूभ जाते है नैनो के बाण दिलमें

शरीर पर लगा घाव  

दिल दिमाग पे लगे घाव से

जल्द  ठीक हो जाता है 

याद रखना ।

💚 मिज़ाज

रूप रंग शरीर का मिजाज है

गुण सद् गुण मन का मिजाज है

रूप रंग का अभिमान व्यथ है

जीवन में अच्छाई और सज्जनता 

जिंदगी कि सफळता और महानता है                           विनोद आनंद                                06/07/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

821💐शेर शायरीयों का गुलदस्ता-34

💛 यकीन नही होता

सोच ने से नही थकाता

लिखते लिखते नही थकाता

कहते कहते नही थकता लेकिन 

यह सुनते सुनते थक गया कि

कुछ नही होगा,कोई नही सुधरेंगे 

सब अपनी अपनी मस्ती में  है 

कोई नही सुनता किसी कि ।

यकीन नही होता कि ज्ञान 

ईतना बेअसर हो गया है कि

लोग बेअसर हो गए है ।

💙 बात बनेगी 

जब कोई बात बीगड जाए

सभाँल ना होगा खुदको 

फिर बात को एसे कि 

बात ओर न बीगडे 

तो ही बात बनेगी वरना 

बात ओर बगडती जाएगी ।

💚 निकाल दो तो

पथ्थर से बीन जरूरी निकाल दो 

तो भगवान कि मूरत बनती है ।

अगर पथ्थर दिल ईन्सान से

बीन जरूरी दुर्गुण निकाल दो

तो एक आर्दश ईन्सान बनता है ।

विनोद आनंद                                22/06/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड