882 अजीब तरीका 15 अगस्त मनाने का

15 अगस्त-स्वातंत्र दिन मुबारक ।

15 अगस्त-स्वातंत्र दिन कि

सब को मेरी शुभ कामना ।

चलो अजीब तरीके से मनाए 

2017 का 15 अगस्त-स्वातंत्र दिन ।

क्या है अजीब तरीका जाने ।

हमारे जीवन में खुद का 15 अगस्त 

स्वातंत्र का दिन आए ।

हम अपनी स्वछंदता से, 

अपने मन-ईन्द्रियो कि 

गुलामी से मुक्त होकर 

एक संयमी जीवन बनाने

का सपथ ले और खुद को

असंयमी जीवन से मुक्त करे ।

तब भी हमारे जीवन में खुद का

15 अगस्त-स्वतंत्र दिन आएगा ।

तबभी हम 15 अगस्त-स्वातंत्र 

दिन मनाने के लायक होगे ।

यही है अजीब तरीका 

स्वातंत्र दिन मनाने के ।

प्रार्थाना है मेरी ईश्र्वर से

कि हम सभी एसा कर शके ।

विनोद आनंद                                 14/08/2017

फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

 

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829 मन है कि मानता नहीं 

मन है कि मानता नहीं, 

सुनता नहीं,समज़ता नहीं, 

और करता है मन मानी ।

जो नहीं करना है वो करे

जो करना है वो न करे 

कई बूरी आदतें पाली है

तो बूरे काम करवाता है 

मन है कि मानता नहीं

और करता है मन मानी ।

स्वभाव बिगाड के रखा है

गुस्सा आवेश दादागीरी से

सब पर करता है हकूमत

मन है कि मानता नहीं….. 

ईन्द्रियों का राज़ा मन

ईन्द्रियों के बस में है, 

ईन्द्रियों नाच नचाती है,  

बुध्धि-ज्ञान से दूर है, 

मन है कि मानता नहीं….. 

मन को छूडाना ईन्द्रियों से

जोडना है, बुध्धि से, ज्ञान से

समज़ाना है प्रशिक्षण देना है

मन मानेगा, समज़ेगा और

नही करेगा मन मानी फिर

वोही करेगा जो सही हो ।

ईन्द्रियों और मन पे काबू

सबसे बडी है कामीयाबी ।

विनोद आनंद                                02/07/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

823 तूफान

मन में है तूफान 

दिल में  है तूफान

अंदर है तूफान

बहार है तूफान

जिंदगी है तूफान

कस्ती जिंदगी कि

कैसे निकालोगे 

तूफान से बहार ।

दिल है पथ्थर

मन है शैतान तो

अंदर तो होगा तूफान ।

नही बसमें अपने 

बहार के तूफान को

शांत करना ।

है अपने बस में 

अंदर के तूफान को

शांत करना मगर कैसे ।

मन को छूडा ना है

इन्द्रिओ के पंजे से

मन को समजाना है

उनका का इन्द्रिओ

पे करना है काबू ।

अपना काम है, 

मन पे काबू करना ।

अंदर का तूफान 

होगा शांत तो

बहार का तूफान

हो जाएगा शांत ।

विनोद आनंद                                26/06/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

809 दृढ़ता

अपने निर्णय पर, 

अपने लक्ष्य पर, 

हिमालय जैसी दृढ़ता 

दिलाएगी सफलता ।

हर समय,हर परिस्थिति में 

दृढ़ता बनी रहे, अपने निर्णय, 

अपने लक्ष्य से न हो चलित

तो होगा लक्ष्य पूर्ण ।

दृढ़ता सफलता जननी है

दृढ़ता मन कि बेटी है

अगर मन पर संयम हो

जीवन में लक्ष्य हो,संकल्प हो

तो मन में दृढ़ता लेती है जन्म 

आत्म विश्र्वास और बढता है ।

हर वक्त सफलता मिलती है ।

जीवन में सुख शांति और

समृध्धि लाती है दृढ़ता ।

सफलता जडी बुट्टि है दृढ़ता ।                              विनोद आनंद                                   16/06/2017        फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

766 तितिक्षा

तितिक्षा, बरदास्त करने कि

क्षमता रिश्तों कि बुनीयाद ।

सारे रिश्तें तितिक्षा पे टिके है

थोडा तुम बरदास्त करलो

थोडा मैं बरदास्त करलू तो

रिश्ते बने रहेंगे वरना रिश्ते 

होगे मगर रिश्तें बेजान होंगे ।

रिश्तें जीवन में खुसीयाँ लाते

है जीवन जीने लायक बनते है ।

जीवन मे तितिक्षा का सद् गुण

होना जरूरी है और उस का

निरंतर अभ्यास करते रहेना ।

परिवार में रिश्तों कि हेमीयत

समजनी है उसे सुरक्षित और

बजबूर करने लिए बरदास्त

करना शीखना है, माफ करना, 

और वाणी का संयम जरूरी है ।

बरदास्त नही करने से वाणी में 

कटुता आजाती है और रिश्तों

की बुनीयाद हील जाती है तब

जीने ख्वाईस मीट जाती है ।

जीने ख्वाईस जगाती है तितिक्षा ।

संतो का सद् गुण है तितिक्षा ।

विनोद आनंद                               05/05/2017

फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

692 पहेरा

दिल से निकली 

हर बात दुआ है, 

दुआ शुभ मंगल है ।

मन से निकली 

हर बात विचार है, 

सद विचार सत्कर्म है ।

दिल भावना का ठीकाना

जज़बात कि जननी ।

शुभ मंगल भावनाएँ तो

जीवन से शुभ मंगल हो ।

मन कि हर बात न मानो

वो ईन्द्रियों से प्रेरीत है ।

बुध्धि से प्रेरीत नही है ।

मन कि वो बात मानो

जो  बुध्धि से प्रेरीत हो ।

वरना मन बेकाबु हो जाएगा ।

इन्द्रियों विषयों से प्रेरीत है

विषयों ईच्छाओ से प्रेरीत है

विषयों का नशा विष है

मन और बुध्धि का पहेरा न हो

तो इन्द्रियों बेकाबु हो जाएगी ।

आत्म परमात्मा का अंश

शक्ति का सोत्र 

संस्कारी आत्मा 

शक्ति का सही उपयोग, 

वरना गलत उपयोग ।

विनोद आनंद                             09/03/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

  

688 आत्म कल्याण 

चहरे पे हसी और

होठों पे मुस्कान तो

जीवन में खुशोयों कि बारात ।

आखों में नमी और 

मासुमीयत चहेर पे 

तो सुंदरता का श्रींगार

वाणी में मीठास और

व्यवहार में सरलता

तो अपनापण का अहेशास ।

विचारों में हकारात्मकता

भावनाओं में  शुध्धता

तो सत्कर्म का आरंभ ।

ईन्द्रियों पर संयम

मन पर संयम 

तो जीवन महान ।

जीवन में सद् गुण

और सद् आचरण 

तो उत्तम जीवन ।

जीवन में परोपकार

और ईश्र्वर भक्ति 

तो जीवन धन्य ।

पूर्व जन्म का फल  

भोगे शांति से और

पून:जन्म का अच्छा 

भाग्य घडे समजकर

तो आत्म कल्याण ।

विनोद आनंद                            06/03/2017 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड