1188 कब तनाव जन्म लेता है ?

तनाव जिंदगी का हिस्सा है ।
तनाव का कारण है निवारण ।
निवारण के लिए जरूरी है जानना
कि तनाव कब जन्म लेता है ?
अनैतिक व्यवहार या व्यापार से
जिंदगी में तनाव जन्म लेता है ।
नैतिकता हि निवारण है
तनाव से बचने जिंदगी में ।
जिंदगी में स्त्री और पुरूष के बीच
सांसारिक मर्यादा के उल्लंघन से
जिंदगी में तनाव जन्म लेता है ।
सांसारि मर्यादा का पालन हि
निवारण है तनाव से बचने का ।
अशिस्त,आयोजनहीन जीवन से
जिंदगी में तनाव जन्म लेता है ।
शिस्त,आयोजनयुक्त जीवन हि
निवारण है तनाव से बचने का ।
तुम्हारा नकारात्मक वलण
और निराशाजनक वलण से
जिंदगी में तनाव जन्म लेता है ।
सकारात्मक, आशावादी वलण
हि निवारण है तनाव से बचने का ।
जिंदगी के मूळभूत सिध्धांतो का
अभाव, और मन का असंयम से
जिंदगी में तनाव जन्म लेता है ।
मन पर संयम और समतुल हि
निवारण है तनाव से बचने का ।
खानपान का अति और कसरत का
अभाव, बहार के खानेसे और तन
मन बिगडने से जिंदगी में
तनाव जन्म लेता है ।
योग्य खान पान, कसरत और
स्वस्थ तन मन हि, निवारण है
तनाव से बचने का ।
दिन का 24 घंटे का जिंदगी में
असमतुलन, अयोग्य वितरण से
जिंदगी में तनाव जन्म लेता है ।
समय का समतुल योग्य वितरण
हि निवारण है तनाव से बचने का ।
तनाव का जन्म हि न हो तो वो हि
सर्व श्रेष्ठ निवारण है तनाव का ।
तनाव पैदा करके निवारण ढूँढना
कहाँ कि बुध्धिमत्ता है ।
विनोद आनंद 26/05/2018
फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

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1182 सामंजस्य

सामंजस्य महत्वपूर्ण सद् गुण
पारिवारिक,समाजिक ताल मेल ।
अगर गायक संगीत से ताल मेल
से गाए तो गीत संगीत मधुर बने ।
ईस तरह परिवार-समाज में एक
दूसरे के स्वभाव अनुसार व्यवहार
करे तोताल मेल यानी सामंजस्य हो
तो संसार से सुख शांति का सुरिला
संगीत प्रगट हो और एक आदर्श
परिवार-समाज का निर्माण हो ।
ताल मेला बीठाने के लिए कुछ
महत्वपूर्ण बातें भी जानना है ।
पहले सब का स्वभाव और
सारी आदतें बगैर जानना है ।
दूसरी बात है सब कि तकलीफे
परेशानी भी जानना, समजना है ।
तीसरी बात सहन शक्ति और धैर्य
जैसे सद् गुण का विकास करना है ।
चोथी बात किसी के प्रति द्वेष ईर्षा
और नफरत का भाव नहीं रखना है ।
पाँचवा सेवा सर्मपणका भाव रखना है ।
सामंजस्य मतलब सब के साथ मिल
जूलकर प्रेम से साथ रहेना है ।
मन पर संयम और दिल को विशाल
बनाना है फिर देखो संसार कितना
सुंदर और मधुर बना शकते हो ।
सामंजस्य संजीवनी बुटी खुश खुसाल
परिवार और आदर्श समाज के लिए ।
विनोद आनंद 23/05/2018
फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

882 अजीब तरीका 15 अगस्त मनाने का

15 अगस्त-स्वातंत्र दिन मुबारक ।

15 अगस्त-स्वातंत्र दिन कि

सब को मेरी शुभ कामना ।

चलो अजीब तरीके से मनाए 

2017 का 15 अगस्त-स्वातंत्र दिन ।

क्या है अजीब तरीका जाने ।

हमारे जीवन में खुद का 15 अगस्त 

स्वातंत्र का दिन आए ।

हम अपनी स्वछंदता से, 

अपने मन-ईन्द्रियो कि 

गुलामी से मुक्त होकर 

एक संयमी जीवन बनाने

का सपथ ले और खुद को

असंयमी जीवन से मुक्त करे ।

तब भी हमारे जीवन में खुद का

15 अगस्त-स्वतंत्र दिन आएगा ।

तबभी हम 15 अगस्त-स्वातंत्र 

दिन मनाने के लायक होगे ।

यही है अजीब तरीका 

स्वातंत्र दिन मनाने के ।

प्रार्थाना है मेरी ईश्र्वर से

कि हम सभी एसा कर शके ।

विनोद आनंद                                 14/08/2017

फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

 

829 मन है कि मानता नहीं 

मन है कि मानता नहीं, 

सुनता नहीं,समज़ता नहीं, 

और करता है मन मानी ।

जो नहीं करना है वो करे

जो करना है वो न करे 

कई बूरी आदतें पाली है

तो बूरे काम करवाता है 

मन है कि मानता नहीं

और करता है मन मानी ।

स्वभाव बिगाड के रखा है

गुस्सा आवेश दादागीरी से

सब पर करता है हकूमत

मन है कि मानता नहीं….. 

ईन्द्रियों का राज़ा मन

ईन्द्रियों के बस में है, 

ईन्द्रियों नाच नचाती है,  

बुध्धि-ज्ञान से दूर है, 

मन है कि मानता नहीं….. 

मन को छूडाना ईन्द्रियों से

जोडना है, बुध्धि से, ज्ञान से

समज़ाना है प्रशिक्षण देना है

मन मानेगा, समज़ेगा और

नही करेगा मन मानी फिर

वोही करेगा जो सही हो ।

ईन्द्रियों और मन पे काबू

सबसे बडी है कामीयाबी ।

विनोद आनंद                                02/07/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

823 तूफान

मन में है तूफान 

दिल में  है तूफान

अंदर है तूफान

बहार है तूफान

जिंदगी है तूफान

कस्ती जिंदगी कि

कैसे निकालोगे 

तूफान से बहार ।

दिल है पथ्थर

मन है शैतान तो

अंदर तो होगा तूफान ।

नही बसमें अपने 

बहार के तूफान को

शांत करना ।

है अपने बस में 

अंदर के तूफान को

शांत करना मगर कैसे ।

मन को छूडा ना है

इन्द्रिओ के पंजे से

मन को समजाना है

उनका का इन्द्रिओ

पे करना है काबू ।

अपना काम है, 

मन पे काबू करना ।

अंदर का तूफान 

होगा शांत तो

बहार का तूफान

हो जाएगा शांत ।

विनोद आनंद                                26/06/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

809 दृढ़ता

अपने निर्णय पर, 

अपने लक्ष्य पर, 

हिमालय जैसी दृढ़ता 

दिलाएगी सफलता ।

हर समय,हर परिस्थिति में 

दृढ़ता बनी रहे, अपने निर्णय, 

अपने लक्ष्य से न हो चलित

तो होगा लक्ष्य पूर्ण ।

दृढ़ता सफलता जननी है

दृढ़ता मन कि बेटी है

अगर मन पर संयम हो

जीवन में लक्ष्य हो,संकल्प हो

तो मन में दृढ़ता लेती है जन्म 

आत्म विश्र्वास और बढता है ।

हर वक्त सफलता मिलती है ।

जीवन में सुख शांति और

समृध्धि लाती है दृढ़ता ।

सफलता जडी बुट्टि है दृढ़ता ।                              विनोद आनंद                                   16/06/2017        फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

766 तितिक्षा

तितिक्षा, बरदास्त करने कि

क्षमता रिश्तों कि बुनीयाद ।

सारे रिश्तें तितिक्षा पे टिके है

थोडा तुम बरदास्त करलो

थोडा मैं बरदास्त करलू तो

रिश्ते बने रहेंगे वरना रिश्ते 

होगे मगर रिश्तें बेजान होंगे ।

रिश्तें जीवन में खुसीयाँ लाते

है जीवन जीने लायक बनते है ।

जीवन मे तितिक्षा का सद् गुण

होना जरूरी है और उस का

निरंतर अभ्यास करते रहेना ।

परिवार में रिश्तों कि हेमीयत

समजनी है उसे सुरक्षित और

बजबूर करने लिए बरदास्त

करना शीखना है, माफ करना, 

और वाणी का संयम जरूरी है ।

बरदास्त नही करने से वाणी में 

कटुता आजाती है और रिश्तों

की बुनीयाद हील जाती है तब

जीने ख्वाईस मीट जाती है ।

जीने ख्वाईस जगाती है तितिक्षा ।

संतो का सद् गुण है तितिक्षा ।

विनोद आनंद                               05/05/2017

फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड