809 दृढ़ता

अपने निर्णय पर, 

अपने लक्ष्य पर, 

हिमालय जैसी दृढ़ता 

दिलाएगी सफलता ।

हर समय,हर परिस्थिति में 

दृढ़ता बनी रहे, अपने निर्णय, 

अपने लक्ष्य से न हो चलित

तो होगा लक्ष्य पूर्ण ।

दृढ़ता सफलता जननी है

दृढ़ता मन कि बेटी है

अगर मन पर संयम हो

जीवन में लक्ष्य हो,संकल्प हो

तो मन में दृढ़ता लेती है जन्म 

आत्म विश्र्वास और बढता है ।

हर वक्त सफलता मिलती है ।

जीवन में सुख शांति और

समृध्धि लाती है दृढ़ता ।

सफलता जडी बुट्टि है दृढ़ता ।                              विनोद आनंद                                   16/06/2017        फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

766 तितिक्षा

तितिक्षा, बरदास्त करने कि

क्षमता रिश्तों कि बुनीयाद ।

सारे रिश्तें तितिक्षा पे टिके है

थोडा तुम बरदास्त करलो

थोडा मैं बरदास्त करलू तो

रिश्ते बने रहेंगे वरना रिश्ते 

होगे मगर रिश्तें बेजान होंगे ।

रिश्तें जीवन में खुसीयाँ लाते

है जीवन जीने लायक बनते है ।

जीवन मे तितिक्षा का सद् गुण

होना जरूरी है और उस का

निरंतर अभ्यास करते रहेना ।

परिवार में रिश्तों कि हेमीयत

समजनी है उसे सुरक्षित और

बजबूर करने लिए बरदास्त

करना शीखना है, माफ करना, 

और वाणी का संयम जरूरी है ।

बरदास्त नही करने से वाणी में 

कटुता आजाती है और रिश्तों

की बुनीयाद हील जाती है तब

जीने ख्वाईस मीट जाती है ।

जीने ख्वाईस जगाती है तितिक्षा ।

संतो का सद् गुण है तितिक्षा ।

विनोद आनंद                               05/05/2017

फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

692 पहेरा

दिल से निकली 

हर बात दुआ है, 

दुआ शुभ मंगल है ।

मन से निकली 

हर बात विचार है, 

सद विचार सत्कर्म है ।

दिल भावना का ठीकाना

जज़बात कि जननी ।

शुभ मंगल भावनाएँ तो

जीवन से शुभ मंगल हो ।

मन कि हर बात न मानो

वो ईन्द्रियों से प्रेरीत है ।

बुध्धि से प्रेरीत नही है ।

मन कि वो बात मानो

जो  बुध्धि से प्रेरीत हो ।

वरना मन बेकाबु हो जाएगा ।

इन्द्रियों विषयों से प्रेरीत है

विषयों ईच्छाओ से प्रेरीत है

विषयों का नशा विष है

मन और बुध्धि का पहेरा न हो

तो इन्द्रियों बेकाबु हो जाएगी ।

आत्म परमात्मा का अंश

शक्ति का सोत्र 

संस्कारी आत्मा 

शक्ति का सही उपयोग, 

वरना गलत उपयोग ।

विनोद आनंद                             09/03/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

  

688 आत्म कल्याण 

चहरे पे हसी और

होठों पे मुस्कान तो

जीवन में खुशोयों कि बारात ।

आखों में नमी और 

मासुमीयत चहेर पे 

तो सुंदरता का श्रींगार

वाणी में मीठास और

व्यवहार में सरलता

तो अपनापण का अहेशास ।

विचारों में हकारात्मकता

भावनाओं में  शुध्धता

तो सत्कर्म का आरंभ ।

ईन्द्रियों पर संयम

मन पर संयम 

तो जीवन महान ।

जीवन में सद् गुण

और सद् आचरण 

तो उत्तम जीवन ।

जीवन में परोपकार

और ईश्र्वर भक्ति 

तो जीवन धन्य ।

पूर्व जन्म का फल  

भोगे शांति से और

पून:जन्म का अच्छा 

भाग्य घडे समजकर

तो आत्म कल्याण ।

विनोद आनंद                            06/03/2017 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

682 प्रतिबंध

प्रतिबंध किसी चीज़ के 

ईस्तमाल पर हो वो चीज़

बाजार में नहीं मिलती ।

लोक कल्याण कि खातरी

किसी चीज़ पर प्रतिबंध 

लगाया जाता है ।

उदाहर के तोर पे दारु पर 

गुजरात में प्रतिबंध है ।

जिसे दारु के प्रकोप से 

गुजरात कि प्रजा बच शके ।

लेकिन सिर्फ गुजरात में क्यूं ? 

किसी दूसरे राज्यमें क्यूं नही ? 

प्रतिबंध हो तो पूरे भारत में हो ।

जिस राज्यमे नही प्रतिबंध वहाँ से

दारू अधिक किंमत में आती है ।

प्रतिबंध करना है तो पीने पर 

और बीकने पर नही लेकिन 

प्रतिबंध दारू के उत्पाद पर 

हो तो प्रतिबंध सफल हो जाए ।

प्रतिबंध  प्रशासन का हो न हो

लेकिन व्यक्ति खुद पर प्रतिबंध

लगाना है कि जो हानीकार है

उसका सेवन करके व्यसनी न बने ।

व्यक्ति खुद और मन पर संयम रखे

वोही सही और सफल प्रतिबंध है ।

ईश्र्वरने व्यक्ति को मन बुध्धि दि है

कि वो समज शके क्या गलत है ? 

क्या सही है ? क्या हानीकारक ? 

और लाभदायी  है ?  फिर भी 

जानबुझ व्यक्ति गलती करके

हानी कारक को अपना कर व्यसनी 

बने तो प्रतिबंध सफल न हो शके ।

विनोद आनंद                           01/03/2017 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

 

आलस्य

​आलस्य महा शत्रु ईन्सान का

पुरूषार्थ का विरोधी ने

जिंदगी में ज़हर और भोग

विलासीयों का दोस्त ।

हर पल दस्तक देती है
आलस्य जिंदगी में

द्वार न खोलना वरना

कर देगा जिंदगी नाकामीयाब ।

अगर आलस्य घर कर गई है तो
जितना हो शके जल्दि भगादो वरना 

वो छीन लेगा जिंदगी तुम्हारी ।

सावधान, सतत जागृत रहो
आलस्य से बचने के लिए ।

कभी भी थोडा सा आलस्य

महेंगा पड शकता है ।

आलस्य पे जीत है, 
प्रमाणपत्र सफलता का 

और सफलता  है, 

प्रमाणपत्र महानता का ।

विनोद आनंद                             25/08/2016     फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड  

कहाँ है तनाव-स्ट्रेस

​तनाव समीकरण दबाण / आंतरिक शक्ति ।

दबाण-प्रेसर बढता है और शक्ति कम है

तो तनाव बढ़ता है ।

दबाण उपाय से कम करना और आंतरिक शक्ति को

बढ़ाओ तनाव कम होगा । कहाँ है तनवा ? 

आंतरिक शक्ति-आत्मविश्वास, मन पर संयम साहस,सहन

 शक्ति,समझ शक्ति बढाओ                 तो कहाँ है तनवा ? 

जैसे काम का दबाव बढ़ा और काम नही किया

और मूलतवी किया तो तनाव अवश्य आएगा । 

काम आया और पूरा किया तो कहाँ है तनवा ? 

दबाण-प्रेसर का संग्रह न करो तुरंत उपाय से

उसे रीलीझ करो-छोडी दो  तो कहाँ है तनवा ? 

अपना काम सोच समझकर,आयोजन से,समय से 

पहले या समयसर करो तो कहाँ है तनवा ? 

अपनी वाणी,व्यवहार कुशलता,सकारात्मकता से मर्यादा और शिस्तसे जीवन जिओ,तो कहाँ है तनवा?

अगर हम ऐसा,  जरा जागृत और  सतर्क रहे

तो तनाव हार जाएगा, तो कहाँ है तनवा ? 
विनोद आनंद                         05/07/2016

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