1790 हम दुःखी कब होते है

हम दुःखी अपनी नकारात्मक
सोच से होते है, सकारात्मक
सोचो तो दुःखी नहि होगे ।
हम भूतकाल में और भविष्य में
जीते है वर्तमान में जीते नहि,
ईसलिए दुःखी होते है ।
हमारे पास जो है,उसे हम खुस
नहि है, जो नहि उसे दुःखी होते है ।
हम दूसरों कि खुस से दुःखी है ।
हम प्रतिकूल और ना पसंद
परिस्थिति में दुःखी होते है ।
हम हमारी खराब आदतों कि
वज़ह से दुःखी होते है ।
हम सुखमें दुःखको याद करके
दुःखी होते है । हम अपने गलत
व्यवहार से भी दुःखी होते है ।
हम अपनी गलतीयों, समस्यासे
दुःखी होती है ।
हमारी ईच्छा या अपेक्षा पूर्ण नहि
होती तो हम दुःखी होते है ।
दुःख से प्रभावित होकर हम दुःख
को पनाह देकर दुःखी होते है ।
दुःख हमारे साथ बहुत देर तक
चला, दुःख हार, हमे जीत गए ।
हमे दुःख, दुःखी न कर शका ।
दुःख से न गभराना, न डरना या
न दुःखी होना और सुख दुःख में
समत्व रखना तो दुखी नहि होंगे ।
विनोद आनंद 15/11/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1774 आदर्श जीवन बन जाएगा

हसते हसते जी लो जीवन,
तुम्हारा जीवन खुशियों से
भर जाएगा ।
खुशी खुशी जी लो जीवन,
तुम्हारा जीवन बदल जाएगा ।
भुला भुला के भूतकाल जी लो
जीवन,वर्तमानमें जीना आजाएगा ।
छोड के चिंता भविष्य कि जी लो
जीवन,तुम्हारा जीवन सँवर जाएगा ।
गलत आदतें छोड के जी लो जीवन
तुम्हारा जीवन सुधर जाएगा ।
नकारात्मक सोच बदल के जी लो,
जीवन सकारात्मक बन जएगा ।
दुर्भावनाएँ बदल के जी लो जीवन
तुम्हारा जीवन सुंदर बन जाएगा ।
अच्छे कर्म करके जी लो जीवन,
तुम्हारा नसीब बदल जाएगा ।
साथ सहकार से जी लो जीवन,
जीवन अदभूत बन जाएगा ।l
छोड कर चिंता जी लो जीवन,
तुम्हारा जीवन सुख शांति से
भर जाएगा ।
मन को नया बना के और ह्रदय
परिवर्तन करके जी लो जीवन, तो
तो जीवन आदर्श बन जाएगा ।
विनोद आनंद 01/11/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1714 जिंदगी का मकसद

खुद को ईतना लायक बनादो कि
निष्फळता तुम्हे छू न शके,अगर
छूले तो भी सफलता छीन न शके ।
अपनी सोच ईतनी सकारात्मक
बना दो कि नकारात्मता तुम्हारा
पीछा छोड,सफलता तुम्हे न छोडे ।
अपनी महेनत ईतनी बढादो कि तुम
खुद तुम्हारी किस्मत लिख शको ।
स्वप्नोमें उमीदोंका रंग ईतना भर
दो कि स्वप्ना हकिकत बन जाए ।
अपनी हिंमत ईतनी बढा दो और
डटके डर का बुकाबला ईतना करो
कि डर लौट जाए, सफलता लौटे ।
गर्व ईतना रखो कि हम भारतीय है
तो देश को भी आप पर गर्व होगा ।
खुद को परिवार को और जिंदगी
को प्रेम ईतना करो कि जिंदगी
तुम्हे खुशीयों का हार पहेनाए ।
दुनिया में ईतना कुछ करो कि
दुनिया तुम्हारी पीछे पीछे चले ।
जब तुम आए जग हसा, एसी
करणी कर चलो कि तुम हसो
और जग रोए । यहि है जिंदगी
जीने का मकसद । नमस्कार
विनोद आनंद 01/09/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1713 कही सुनी बातें-3

* आप क्या हो, आप कहाँ हो,
आप के पास क्या है ईसे कुछ
फर्क नहि पडता । आप क्या
बनना चाहते हो कहाँ पहोंचना
चाहते है, क्या पाना चाहते हो
यह जानना बहुत जरूरी है ।
* जिंदगी में डर और एक्न दोनों में
से चुनाव करना है, तो क्या चुनोगे ?
जो चुनोगे वो मजबूत होगा ।
एक्नको चुनोगे, कामियाब मिलेगी ।
* आप कि हिंमत को यह न कहो
कि आप कि कमजोरीयाँ कितनी है,
कमजोरीयों को यह बताईए कि आप
कि हिंमत कितनी है ।
* खुद को ईतना काबील बना दो
कि सफलाता तुम्हारा ख्वाब देखे
तुम्हे पाने का ।
* अपनी सोच को ईतनी उची करदो
कि आसमान ख्वाब देखे तुम्हारी
सोच को पाने का ।
* अपनी महेनत में ईतना दम भरदो कि
किस्मत ख्वाब देखे तुम्हे पाने का ।
* अपने स्वप्नो में ईतनी जान भरदो कि
डर को भी डर लगे तुमसे टकराने का ।
* स्किल, एबीलीटी के अनुसार स्वप्न
नहि देखो, पहेले बडे स्वप्न देखो फिर
स्किल, एबीलीटी बढाना ।
* खुद पे विश्र्वास रखो और बीलीव करो ।
विनोद आनंद 01/09/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1698 गुस्सा का विज्ञान-2

गुस्सा खुद को, दूसरे को
सुधारने के लिए, अन्याय के
खिलाफ, किसी के कल्याण
कि खातिर करना चाहिए ।
यह गुस्से का सकारात्मक
पहेलु है । एक ओर पहेलू
है कि अगर कोई आपका
किसी कारण से अपमान
करे तो उस के बदले में
तुरंत गुस्सा नहि करके वो
गुस्से को जिंदा रखके जिस
वज़ह से अपमान किया है
उस वज़ह को हि दूर कर
के मुह तोड जवाब देना है ।
गुस्से का नकारात्मक ढंग
से बढावा नहि देना है, जो
किसी के लिए अच्छा नहि ।
कोई गुस्सा करे तो आप
खुद पे नियंत्रण करके चुप
रहे और उस के प्रति क्षमा
का भाव प्रगट करे तो उस
का गुस्सा शांत हो जाएगा ।
किसी भी वज़ह से अगर
गुस्सा करना है तो होश
में रह कर गुस्सा करो,
लेकिन उस का रेगुलेटर
आप के पास रखो और
बात बढने से पहेले गुस्से
को शांत करना जरूरी है ।
गुस्से तन और मन पर भी
बहुत बुरा अशर होता है ।
संबंध बिगते है और संबंध
बिगडने से जीवन बिगडता है ।
गुस्सा वो ज्वालामूखी है,जो
सब कुछ जला के राख कर
देता है जिंदा रहते है मगर
जिंदगी छिन लेता है । अगर
आप उस के शिकार है तो
आप शिकारी बन के उस
का शिकार करके जीवन
को सुख शांति से भर दो ।
विनोद आनंद 16/08/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1554 खुश मिज़ाज के लक्षणें

संशोधन से पता चला है
कि 1/3 लोग हि खुश
मिज़ाज रह शकते है जो
गरीबी रेखा के उपर है ।
वो हि खुश मिज़ाज रह
शकते है जो स्वधर्म
अनुसार जीते है ।
सुनते है सब कि, मगर
जीते है स्वधर्म अनुसार ।
दूसरा लक्षण है वो लोग
सर्जनात्मक होते है और
अपने काम में खो जाते,
खुश मिज़ाज में जीते है ।
वो लोग है, जो न धन या
यस पाने के लिए जीते है ।
वो सिर्फ वर्तमान में जी के
खुश मिज़ाज में रहते है ।
काम करते वक्त या बादमें
भी यह नहि सोचते कि
यह काम मैं ने किया है वो
सोचते कि काम मेरे द्वारा
हो रहा है मैं तो नीमीत हूँ ।
संशोधन कहेता है कि
खुश मिज़ाज रहने में
10% बहारी परिस्थिति
पर निर्भर, 90% आंतरिक
परिस्थिति पर निर्भर है ।
वो जो बहारी परिस्थिति
को सकारात्म द्रष्टिकोण
से देखते है, खुश मिज़ाज
रहते है । वो जिस का खुशी
दूसरों पे या परिस्थिति पर
निर्भर नहि है वो हि हमेशा
खुश मिज़ाज रह शकते है ।
वो जो ईश्र्वरमां श्रध्धा और
विश्र्वास रखता है वो भी
खुश मिज़ाज रह शकता है ।
सब लक्षणों से कोई भी
खुश मिज़ाज रह शकता है ।
खुश मिज़ाज रहेना जिंदगी
कि आन,बान और सान है ।
विनोद आनंद 01/04/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1543 बहुत सोचना,ज्यादा सोचना

बहुत सोचना ज्यादा सोचना
वो एक आदत है । बदलना है ।
सोचना वरदान है मानव को,
सोच से तो अगल है,प्राणी से
ईसलिए सर्व श्रेष्ठ है मानव है ।
सोचना मानव का अधिकार है ।
जैसी सोच ,वैसा बनेगा मानव ।
सोच जिंदगी का बीज है ।
मगर बहुत सोचना,ज्यादा सोचना
परेशान होना,सोच का दुरुपयोग है,
सोच अभिश्राप बनती शकती है ।
क्यूँकि आप गलत,नकारात्मक,
भूतकाल या भविष्य के बारे में
व्यर्थ बातों पे सोचते रहेते हो ।
* सोचने पर काबू नहि कर शकते,
लेकिन सकारात्मक, वर्तमान के बारे
में सोच कर,सहि दिशा दे शकते हो ।
* आती जाती सोच दुःखदाई है तो
उस पर ध्यान न दो, ब्रेक लगाओ ।
* मन को कोई दूसरे काम सोंपदो
तो सोच का सीलसीला बंध होगा ।
* बहुत सोचना ज्यादा सोचना यह
मन का डायेरीया है ।मन को
सहि सोच हि, उस कि दवा है
* अकेले में खुद से बातें कम करो,
खुद को,दूसरों को माफि दो तो बहुत
सोचना,ज्यादा सोचना कम होगा ।
विनोद आनंद 23/03/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड