1374 जागो सोने वालों

-जागो सोने वालो कब तक सोते
रहोगे वक्त फिसलता जाता है ।
रात को आँख बंद करके और दिन
में आँख खुली रख कर सोते हो ।
मन कि मनमानी कब तक करते
रहोगे, अब तो जागो मन को गलत
करने से रोकने के लिए तो जागो ।
जागो सोने वालो अब तो होस में
आओ और मन कि गुलामी छोडो ।
मन पर काबू पाना शीखो, गलत
करते रोको और सही करना कहो
जागो सोने वालो होस में आओ
ईन्द्रियो पे भी पान है काबू और
मुक्त करना मन को ईन्द्रियो से
और दोनों पे पाना है काबू ।
जागो सोने वालो अब,जिंदगी को
सद् गुणो, सद् आचरण, सत्कर्म से
सँवारना है, घर को स्वर्ग बनान है ।
जागो सोने वालो वरना जिंदगी युही
बीत जाएगी, कुछ नही कर पाओगे ।
अभी भी वक्त है कुछ करने का जागो ।
आँखों से नही मन और दिल से जागो ।
विनोद आनंद 09/11/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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1321 समय कि पुकार और माँग

समय कि पुकार क्या है ?
समय कि पुकार सांभळो है ।
समय कि माँग क्या है ?
समय कि माँग समजो ।
समय कि पुकार-माँग है
कि समय के साथ चलो,
जीवन में नियमित बनो,
प्रमाणिक बनो ।
समाज में कई दुर्घटनाए
घट रही है और माहोल
तनाव और चिंता का है
समय कि माँग है कि
समय वर्ते सावधान,
और जागृत हो जाओ
कि आप कोई दुर्घटना
के शिकार न हो जाओ ।
समय कि पुकार है कि
अपने आपको बचाए ।
दुर्घटनाओ का मूल है
लोगों में ईन्सानिय का
अभाव और दुर्गणों,
कुभाव, और कुविचारो
कुकर्म का प्रभाव ।
समय कि माँग और
पुकार है कि हम अपने
व्यक्तित्व को निखारे, सद्
गुणोंसे, अच्छी आदतोंसे,
भावनाओं से और सद्
आचरण से ।
सयम कि पुकार और
माँग का अनुमोदन करे ।
विनोद आनंद 09/10/2018
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956 💐शेर शायरीयों का गुलदस्ता-45

🌹दिल या दिमाग 

कैसे बताए दिल का 

हाल किसी को ? 

सब सोचते है दिमाग से ।

कब दिल से और कब 

दिमाग से सोचना यह 

अंदाज होना जरूरी है ।

वरना गरबड हो जाएगी ।

👄 न होगा गलत

रोको जूबा को गलत बोलने से

वरना गज़ब हो जाएगा ।

सोचो जूबा बोल देने से पहेले

अगर है गलत तो रोकलो ।

तो कभी भी नहीं होगा गलत ।

🌹 कम नही है

हसता हुआ चहेरा किसी 

खिले हुए गुलाब से कम नही है ।

व्यक्ति में सद् गुणो कि सुवास

गुलाब कि खुशबू से कम नही है ।

रोता हुआ चहेरा किसी 

मुरझाए हुए फूल से कम नही है ।

व्यक्ति में दुर्गणो कि दुर्गंध

गटर कि दुर्गंध से कम नही है ।

💥कोशिश

उस का कमीज मेरी कमीज से

सफेद कैसे ? सोच के अपनी

कमीज को सफेद करने कि

मानवी कोशिश करता है ।

लेकिन उस के जीवन में 

मेरे जीवन के सद् गुणो से

ज्यादा कैसे  ? सोच कर

सद् गुणो बढाने कि मानवी

नहीं करता कोशिश ।

विनोद आनंद                               30/10/2017

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935 सही तरीका

2, अक्टूबर का दिन

गांधीजी के नाम ।

कई 2 अक्टूबर गई

न कोई दूसरा गांधी 

जन्मा आज तक ।

कई गांधी ज्यांति 

मनाई फिर भी न कोई

गांधी न बन्या । 

क्या यही सही तरीका

है गांधी ज्यांति मनाने का ।

उनके जीवन दर्पण में  

अपनी तस्वीर देखो, 

उनके नियम सिध्धांतो 

और सद् गुणो से अपनी  

जीवन तस्वीर को सँवारो

तो वोही सही तरीका है

गांधी ज्यांति मनाने का ।

गांधीजी कि तस्वीर को

सिर्फ हार पहेना कर 

गांधी ज्यांति नही मनानी, 

नियम सिध्धांतो या सद् गुणो

का हार बनाकर खूद के 

जीवन को पहेनाना है ।

चलो 2, अक्टूबर के

दिन दूसरा गांधी 

बनने का संकल्प करे ।

वो हि सही तरीका है

गांधी ज्यांति मनाने का ।

विनोद आनंद                               02/10/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

801 दाग

जैसे दाग कपडे पे, धूल ने 

कि तुरंत कोशिश करते है 

एसा नही किया तो

कपडे पे दाग पे दाग

लगते जाएँगे और 

कपडे का रंग या

सुरत बदल जाएगी ।

एसे जिंदगी में कई 

दाग लगते रहते है 

लेकिन उसे धूल ने कि 

कोशिश नही करते और

दाग ईतने बढ जाते है

कि जिंदगी का रंग-ढंग

बदल जाता है और 

जीना मुश्केल हो जाता है ।

जब भी दुर्गुण का दाग लगे

तो तुरंत धूलने कोशिश करे 

तो निकल शकता है । हो शके

तो जिंदगी पे सद् गुणों का 

टिका लगाने का प्रयाश करना ।

जिंदगी दाग रहीत और सद् 

गुणों के टिको से चमकेगी ।

विनोद आनंद                                 05/06/2017

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766 तितिक्षा

तितिक्षा, बरदास्त करने कि

क्षमता रिश्तों कि बुनीयाद ।

सारे रिश्तें तितिक्षा पे टिके है

थोडा तुम बरदास्त करलो

थोडा मैं बरदास्त करलू तो

रिश्ते बने रहेंगे वरना रिश्ते 

होगे मगर रिश्तें बेजान होंगे ।

रिश्तें जीवन में खुसीयाँ लाते

है जीवन जीने लायक बनते है ।

जीवन मे तितिक्षा का सद् गुण

होना जरूरी है और उस का

निरंतर अभ्यास करते रहेना ।

परिवार में रिश्तों कि हेमीयत

समजनी है उसे सुरक्षित और

बजबूर करने लिए बरदास्त

करना शीखना है, माफ करना, 

और वाणी का संयम जरूरी है ।

बरदास्त नही करने से वाणी में 

कटुता आजाती है और रिश्तों

की बुनीयाद हील जाती है तब

जीने ख्वाईस मीट जाती है ।

जीने ख्वाईस जगाती है तितिक्षा ।

संतो का सद् गुण है तितिक्षा ।

विनोद आनंद                               05/05/2017

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686 भेद भाव

अपने लिए कुछ अलग

दूसरों के लिए कुछ अलग

नियम,नज़रिया, और सोच ।

दूसरों की बडी समस्या छोटी

अपनी छोटी समस्या बडी ।

दूसरों कि गलती, माफ नही

अपनी गलती माफ ।

दूसरों के दुर्णगु कहेना

अपने दुर्णगु छूपाना ।

दूसरों के सद् गुण न देखना

अपने सद् गुण कहेना ।
दूसरों के लिए कुछ ओर ।

अपने लिए कुछ ओर

दूसरों का व्यवहार निंदनीय, 

अपना व्यवहार सराहनीय ।

दूसरों का स्वभाव खराब, 

अपना स्वभाव अच्छा ।

दूसरे का जो भी कर्म  वो गलत, 

अपना जैसा भी कर्म  वो सही ।

दूसरो की गलतियाँ निकालना

अपनी गलती नही निकालना ।

दूसरो सब जूठ्ठे, अपना सब सच ।

दूसरों का ओर अपनो का अलग

हीसाब क्यूँ ? दूसरों के साथ 

एसा भेदभाव क्यूँ ? 

जब खत्म हो एसा भेदभाव

तब होगा परस्पर मेल जुल ।

विनोद आनंद                          05/03/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड