1953 विचारों से मुक्ति क्यूँ ?

विचारों से मुक्ति क्यूँ चाहिए ?
विचार तो जिंदगी का बीज है ।
अगर विचार से मुक्ति तो क्या
बोओगे और क्या पाओगे ।
विचार तो आएगे और जाएंगे
उसे हमे देखना है उस के प्रति
जागृत होना है, समजना है ।
उसे तादात्म्य या लगाव नहि
रखना, आप और विचार दोनों
भिन्न हो और उसे तुम साक्षी
से देखो उसे तालूकात न रखो,
विअच्छााऋरों के भँवर में न फसो ।
तुम्हे तुम्हारे विचारो का द्रष्टा
बनना है, उसे अलग रहो और
निरीक्षक बनकर तपासो कि
सकारात्म है या नकारात्मक,
भूतकाल के है या भविष्य कि
चिंता का है ,अधोगामी है या
उर्धवगाम, विकास के है या
विनाश के,कामके है या बेकार ।
अच्छे विचारों को मन में
बोना, सफलता तक पोषो ।
बाकि के सभी विचार को मन
में गाड दो, जो फिर न आए ।
कभी ध्यान में विचार शून्य
बनना है तो मन के मौन का
अभ्यास से विचारों से मुक्त
हो शकते हो वरना विचार से
लडो मत उसे देखो समजो फिर
जीने का अभ्यास करो ।
विनोद आनंद 31/03/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1941 शब्दों से सफलता

सफलता सें कामीयाबी
का एहेसास होता है ।
कामीयाबी से जिंदगी
बहेतरीन बनती है ।
शब्दों में शक्ति है उस का
अशर होता है अगर आप
उसे प्रभावीत हो और दिल
दिमाग में उतर जाए ।
फिर दिल दिमाग हि आप को
सफलता दिला एगा वरना वो
कमाल नहि दिखाए पाएगा ।
शब्दो का असर होता है चाहे
वो सकारात्म या नकारात्म ।
नकारात्म शब्द अधोगति और
सकारात्म ऊर्धव गति देते है ।
जीवन में सकारात्म शब्दो का
ईस्तमाल करने कि आदत हो
तो शब्दों से सफलता मिलेगी ।
लेकिन उसे के लिए जागृत रहे
और ईस्तमाल करने से पहेल
कुछ क्षण सोच कर सकारात्मक
शब्दों का हि प्रयोग करे और
सफलता के अधिकारी बने,
वरना सफलता नहि मिलेगी ।
विनोद आनंद 24/03/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1928 औकात क्या है ?

औकात में मत रहो
औकात से ज्यादा
कुछ किया जाए वो
हि सच्ची सफलता है ।
ईसलिए औकात में
मत रहो, हर दिन
औकात बढाते रहो ।
औकात क्या है और
उसे कौन बनाता है ?
औकात हेसियत है ।
आप खुद के बारे में
क्या सोचते हो वो हि
आप कि औकात है ।
औकात को अपनी
जंजीर मत बनाओ ।
औकात खुद कि राय
है खुद के बारे में ।
औकात भूतकाळ कि
बातें और अनुभव से
बनती है,खुद कि सोच से
बनती है और दूसरो कि
सोच या बातों से बनती है ।
लेकिन आप कि औकात
वो नहि जो दूसरें लोग
आप के बारे में सोचते है ।
अपनी सोच ईतनी मजबूत
और बढीया बनाओ कि आप
कि औकात बढती हि रहे ।
अगर भविष्य बनाना है तो
औकात में मत रहो, औकात
बढाते रहो और कामीयाब
होते रहो ।
विनोद आनंद 14/03/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1889 जीओ तो एसे कि…..

जीओ तो एसे जैसे
ईन्सान जीता है ।
ईन्सानीयत हि जीने
का जरीया है ।
ईन्सान कि अच्छी
नीयत है ईन्सानीयत ।
जीओ तो एसे जैसे कि
सब को लगो प्यारे ।
आप को मिल ने को
तरसे, मिल के खुश हो ।
जहाँ जाने वाले हो वहाँ
बेसबरी से करे आप का
ईन्तजार ।
जीओ तो एसे जैसे कि
सज्जन जीते हो ।
सज्जनता हि है जीने
का जरीया ।
सद् भाव,सम भाव,प्रेम
भाव परोपकार भाव से
जीना है सज्जनता ।
जीओ तो एसे जैसे कि
आप को जीते जी नहि
मरने के बाद भी याद करे ।
जब तुम आऐ तुम रोए
जग हसे एसे जीओ और
एसी करणी कल चलो
कि तुम हसो, जग रोए ।
यही है सार्थकता और
सफलता जिंदगी कि ।
विनोद आनंद 09/02/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

💙 1883 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-92

🌹 राजपथ
रिश्ते हि रास्ते है,
जिंदगी में मंझिल
तक पहुँचाते है ।
रास्ते बीगड जाएँ
तो मंझिल तक कैसे
पहुँचोगे ?
रिश्ते को राजपथ
बनाओ तो मंझिल
चलके पास आएगी ।
🌻 वजुद
बीना पेट्रोल कि गाडी
एक ईन्च नहि चलेगी
बीना ब्रेक गाडी नहि
रूक शकती ।
जैसे बीना इन्धन और
बीना ब्रेक गाडी का
नहि कोई वजुद, एसे
हि बीना प्रेम और संयम
जिदगी का वज़ूद नहि ।
🍁 सिर्फ
सिर्फ खेत में बीज़ बोने
से फसल नहि होती ।
सिर्फ बातें करने से बात
नहि बनती ।
सिर्फ बडे स्वप्ने देखने से
स्वप्ने सच नहि होते ।
सिर्फ नसीब पर विश्र्वास
करने से सफलता नहि
मिलती आखिर महेनत
तो करनी हि पडती है ।
बीना महेनत सफलता कहाँ ?
विनोद आनंद 05/02/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1875 एसी जिंदगी न जीओ

जिंदगी एसी न जीओ के
जिंदगी बोज लगने लगे ।
जिम्मेदारी उठा ओगे तो
जिंदगी बोज नहि लगेगी ।
जिंदगी एसी न जीओ के
जिंदगी में तनाव आए ।
आयोजन युक्त और शिस्त
बध्ध जीओगे तो जिदगी में
तनाव हि नहि आएगा ।
जिंदगी एसी न जीओ कि
जिंदगी अशांत लगेने लगे ।
साथ, सहकार और प्रेम से
जीओ तो अशांत नहि लगगी ।
जिंदगी एसी न जीओ कि
जिंदगी कठीन लगने लगे ।
जो व्यवहार तुम्हे पसंद नहि
वो व्यवहार दूसरों से न करो,
तो जिंदगी कठीन नहि लगेगी ।
जिंदगी एसी न जीओ के
जिंदगी में झगडे होते रहे ।
समजदारी से सहन करना
शीख लो तो जिंदगी में कभी
नहि होंगे झगडे ।
जिंदगी एसी न जीओ कि
जिने कि ख्वाईश न रहे ।
नई उमीदें और आशाओं से
जिंदगी जीओ कि जीने कि
ख्वाईस दुगनी हो जाए ।
जिंदगी एसी न जीओ कि
जिंदगी भर रोना पडे ।
सब को हसते हसाते जीना
शीखलो, रोना नहि पडेगा ।
जिंदगी जीना आप के हाथ में है
तो एसे जीओ कि जिदगी सफल
सार्थक और समृध्ध बन जाए ।
विनोद आनंद 29/01/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1849 समझो और जानो

जिंदगी को जीना है, तो उस
कि किंमत, हेमीयत समझो ।
जिंदगी को जीतना है तो उस
का रहस्य और उद्देश जानो ।
समझने से और जानने से
जिंदगी बनेगी आसान ।
जिंदगी से कोई भी चीज़
ज्यादा किंमती नहि है जिसे
जिंदगी से कुछ पा शकते हो ।
जिंदगी साधना है तुम साधन ।
जिंदगी कि हेमीयत सब से
ज्यादा है, ज्यादा हि समझना,
जिंदगी है तो जहाँन है ।
जिंदगी आसानी से नहि मीली,
लख चौरेसी जन्म-मरण के फेरे
के बाद यह जिंदगी मिली है ।
अच्छे कर्मो से नई जिंदगी का
निर्माण करना है वरना मानव
जन्म नहि मिलेगा दूबारा यहि
रहस्य है जिंदगी का ।
सभी प्राणीयों में मानव श्रेष्ठ
क्यूँ कि उसे पास मन बुध्धि
आत्म शक्ति और कार्य शक्ति है ।
उस के सहि उपयोग से श्रेष्ठ
बनने का उद्देश है जिंदगी का ।
जिंदगी जानो और समझो तो
सफल, समृध्ध, महान बनेगी ।
विनोद आनंद 06/01/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड