1066 अदभूत परिवार

सफलता का परिवार
अदभूत परिवार ।
सफलता कि माता
कल्पना और पिता लक्ष्य ।
सफलता कि पत्नि संकल्प
और पति द्दढता ।
सफलता का बेटा निर्णय
और बेटी ईच्छा ।
सफलता का हमसफर
आयोजन और प्रयास ।
सफलता का गुरू
उत्साह और साहस ।
सफलता का दुश्मन आलस्य
बेजिम्मेदारी और कमीयाँ ।
सफलता का दादा अनुभव
और दादी अवलोकन ।
सफलता के परिवार के
सभी सदस्य दिलाए
लक्ष्य प्राप्ति और सफलता ।
किसी कि भी कमी लक्ष्य
प्रप्ति में देर या निष्फलता ।
विनोद आनंद 07/02/2018
फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड

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1056 प्रयास से परिवर्तन

परिवर्तन दुनिया का नियम है
जीवन का दूसरा नाम है परिवर्तन ।
बहेता पाणी शुध्ध होता है और
परिवर्तन से सफला मिलती है ।
सोच बदलने से परिवर्तन नही,
प्रयास से परिवर्तन आता है ।
ईच्छा हो तो प्रयास होता है ।
प्रयास एक दो दिन का नही
सतत प्रयास से परिवर्तन है ।
सतत प्रयास दढ निश्चिय से है ।
परिवर्तन से भविष्य का निर्माण है ।
जो व्यक्ति परिवर्तन न इच्छे
उसका विकास नही होता ।
प्रयास के साथ अगाघ महेनत
जूद जाए तो जीवन सफल हो ।
प्रयास एक एसी शरुआत है
जिसे मंझिल मिल जाती है ।
प्रयास असफलता को सफलता
में परिवर्ततीत कर शकता है
विनोद आनंद 30/01/2018
फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड

1053 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-51

🌹 वरना
आज नही तो कल,कल नही परसो,
परसो नही तो नरसो,नरसो नही तो
कभी भी सफलता कदम चूमेगी ।
मगर शर्त है कि, उमीद न छोडना,
निराश न होना,हिंमत न हार ना,
न कोशीश छोडना, वरना सफलता
छूट जाएगी और जिंदगी रूढ जाएगी ।
🌻उठने कि देर है ।
आशा नी कस्ती न डुबाया करो,
निराशा में खुद को न डुबोया करो ।
मजबुत इरादे मंझिल तक ले जाएगे,
कमजोरी को गले लगाया न करो ।
नाकामियाबी से मायुस न हो तुम,
नाकामियाबी के पीछे ही खडी है
कामियाबी, बस उठने कि देर है ।
🌺 गौर न करना
सुनो सब कि करो दिल कि
लोग तो कमीया निकालेगें
कमीया निकालने वाले कि
कमी नही वो तो साधु संतो में
भी कमीया निकालेगें ।
उस पर गौर न करना ।
विनोद आनंद 27/01/2018
फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड

1040 शादी से पहेले क्या करना है ?

शादी, गृहस्थ या दाम्पत्य

जीवन का श्री गणेश या

ब्रम्हचरीर्य जीवन का ईति ।

ब्रम्हचरीर्य जीवन,गृहस्थ जीवन

का नींव यानी दाम्पत्य जीवनके

सफलता का रहस्य या जादू है ।

गृहस्थ आश्रम को जीवन के

चारों आश्रम में सुंदर कहा है ।

उस कि तैयारी ब्रम्हचरीर्य में

करनी है, अगर यह चूक गए तो

दाम्पत्य जीवन बदसूरत होगा ।

शादी से पहेले हमे उम्र ,व्यक्यित्व ,

आर्थिक के हिसाबसे लायक बनना है ।

शादी का रहस्य, मतलब, कर्तव्य

और सामाजिक किंमत समझना है ।

शादी सिर्फ मोज मस्ती और

वासना कि पूर्ति के लिए नही है ।

गृहस्थ जीवन में पति-पत्नि और

परिवार सभी रिस्तों कि हेमीयत

समझकर उसे निभाना शीखना है ।

शादी से पहेले हमे खुद को आदर्श

व्यक्ति का निर्माण करना है, वोही

गृहस्थ जीवन सफल और सुंदर

बनाने का रहस्य और कर्तव्य है ।

अगर शादी से पहेले यह नहीं सोच

और निर्माण नही किया तो शादी

बरबादी या तमासा बन जाएगी ।

सावधान लायक बनने से पहेले

कभी शादी करके गृहस्थ जीवन में

प्रवेश मत करन वरना परेशान और

दु:खी होकर असफल हो जाओगे ।

विनोद आनंद 17/01/2018 फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड

967 मथंन 

मंथन विचारों का 

समस्या का हल 

और मंथन दधि का 

मखन बनाने की

एक श्रेष्ठ  साधना ।

जैसे पहले दूध का दधि 

बनाकर मथनी से मंथन

करने से बनता है मखन ।

एसे पहले विचारों का चिंतन 

फिर ज्ञान और बुध्धि कि 

मथनी से मंथन करने से

निकलता है श्रेष्ठ निश्कर्ष ।

बीना विचार,चिंतन और मंथन

जीवन में नहि मिलती सफलता ।

मंथन से व्यक्तित्व विकास कैसे  ?

मन को जानो,समझो फिर

पहले मन का मंथन करो तो 

दुर्गणो को जह़र निकलगा,

जैसे  समुद्र मंथन से पहले 

जह़र निकला था । मंथन से

मन शुध्ध पवित्र बनेगा और 

निकलेगा सद् गुण का मखन ।

मंथन हि श्रेष्ठ साधन जीवन में

सुख,शांति और समृध्धि पानेका ।

विनोद आनंद                               14/11/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

947 ज्ञान

ज्ञान सबसे महान

सबसे पवित्र और पूजनीय ।

ज्ञान का देवता है सूरज, 

करता है दुनिया में उजाला, 

ज्ञान करता है जीवन में उजाला ।
राजा पूजनीय देश में 

ज्ञानी पूजनीय सर्वत्र ।

ज्ञान उजाला और 

जीवन कि रोशनी 

अज्ञान जीवन का अंधकार ।

ज्ञान बीना जग सुना निरश

ज्ञान ही सब कुछ जीवन में ।

ज्ञान संग भक्ति जूडे तो ज्ञानी 

भक्त ईश्र्वर को अति प्रिय ।

ज्ञान ईश्र्वर, ईश्र्वर ही ज्ञान है ।

ज्ञान कि गंगा बहाते चलो 

भक्ति का यमुना बहाते चलो

जीवन को सफलता,सार्थकता

समृद्धि कि दिशा दिखाते रहो ।

ज्ञानी बनो अज्ञानी नही 

ज्ञान होते हुए भी ज्ञान का

ईस्तमाल न करे वो है मूढ ।

विनोद आनंद                               11/10/2017

फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

901 फूरसद नहिं

लिख ने वाले लिखते है

अपनी अच्छि सोच को दूर 

दूर तक पहोंचाने के लिए ।

एसी उमिद से कि हर

कोई पढे और मन में 

ह्रदय में बसाकर एक 

अच्छि सोच बनाए ।

अच्छि सोच हि जीवन में 

अच्छे कर्मो का बीज है ।

लिखनेवाला अच्छि सोच का

बीज मन कि जमीन में  

बोना चाहता है जिसे 

जिंदगी में सत्कर्मो कि

फसल तैयार हो जिसे

जिंदगी में सफलता और

समृध्धि कि दोलत मिले ।

अच्छि सोच और अच्छे

सुविचार सभी को लगते है 

अच्छे मगर उस कि   

अच्छाई से जिंदगी को

सँवारने नी फूरसद नहि

किसी के पास और खुद में 

परिवर्तन लाने कि ईच्छा नहिं है । 

तो लिखनेवाला करे तो क्या करे  ? 

विनोद आनंद                                 30/08/2017

फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड