1815 सहि तरिका जीने का

खुशी खुशी जी लो जीवन,
तेरी बन जाएगी किस्मत ।
हसी हसी करलो बात,
रिश्तें सब जाएंगे सुधर।
पल पल में जीना शीखलो
तो जीवन सँवर जाएगा ।
घीरे घीरे करलो काम तो
काम हो जाएगा अच्छा ।
राजी राजी करो लो काम
मिलेगी सफलता ।
कम कम खाना खा लो तो,
शरीर बन जाएगा स्वस्थ ।
छोटे छोटे कदम चलोगे तो
एक दिन मिल जाएगी मंजिल ।
थोडा थोडा रोज करलो सुधार,
तो एक दिन ईन्सान बन जाएगे ।
रोज रोज घर कि सफाई कर लो
घर बन जाएगा सुंदर।
सहि तरिके से जीवन जीओगे तो
जीवन बन जाएगा आसान/सफल ।
विनोद आनंद 06/12/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1804 मिलेगी सफलता

सफलता कि ईच्छा है मगर
नही होते क्यूँ कि आप कि
ईच्छा है मगर ईरादा नहि है ।
ईच्छा के साथ सौदा होता है
ईरादें का सौदा नहि होता ।
दबाव में ईच्छा कमजोर
और ईरादे मजबूत होते है
ईसलिए सफल होने कि
ईच्छा को ईरादा बनादो।
इरादें को ध्येय बनालो ।
ईच्छाएँ तो जीवन के महा
सागर में उठने वाली लहरें है,
ईरादे पहाड जैसे मजबूत है ।
सफलता ईरादों से मिलेगी य ।
समस्या हल हो तो हल करदो,
न हो तो स्वीकार करदे और
उसे पहेचान ले,एसी बुध्धि और
समज हो तो सफलता मिलेगी ।
जीवन फैसला है हमे सफलता
का फैसला लेना है और समय
समय जीवन में परिस्थिति से
समझोता से सफलता मिलेगी ।
विनोद आनंद 27/11/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1784 चाबी

जैसे हर एक ताले कि
चाबी होती है एसे हर
एक समस्या के हल
कि चाबी और हर एक
सफलता कि चाबी होती है ।
मगर चाबी ढूँढनी पडती है ।
हर समस्या और सफलता
कि चाबी मिले तो समझो
कि किस्मत के ताले कि
चाबी मिल गई ।
जो समस्या कि चाबी अपने
हाथ में नहि उसे दूसरी चाबी
से खोलने कि कोशिश न करो,
परिस्थितिका स्वीकार करके
जीने कि आदत बनालो जिसे
दुःख महेशूस नहि होगा सुखो
कि बारिश होगी ।
समस्या से डर गया समझो
दुःखी हो गया ।
कोई समस्या ईन्सान से बडी
नहि, जैसे हर ताले कि चाबी
होती है एसे हर एक समस्या
कि चाबी यानि हल होता है ।
हल ढूँढना के खुश रहेना हि
सहि जीने सहि तरिका है ।
विनोद आनंद 11 /11/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1783 कही सुनी बातें

* दो तरह के व्यक्ति से दूर रहेना
बीझी व्यक्ति जो अपनी मरजी से बात
करेगा और घमंडी जो सिर्फ मतलब से
बात करेगा ।
* जिंदगी आसान नहि होती,आसान
बनानी पडती है, कुछ अंदाज से तो
कुछ नज़रअंदाज से ।
* पिता कि दौलत का क्या धमंड करना,
मजा तो तब है जब दौलत अपनी हो
और धमंड पिता का हो ।
* सफल नहि होने के बहाने मत बनाईए
आप के पास भी 24 घंटे होते है जो
सफल व्यक्ति के पास होते है ।
* अगर आप शूकुन चाहते हो तो लोगों
कि बातें दिल से लगाना छोड दो ।
* जिदगी रूकने का नहि आगे बढने का
नाम है, बदल ने के लिए लडना पडता
और आसान करने के लिए समझना
पडता है ।
* शुक्रगुजार होना भी एक आदत है
उस कि आदत डालनी पडेगी ।
* भरोसा खुदा पे है तो वो मिलेगा
जो किस्मत में लिखा है मगर
भरोसा खुद पे हो तो खुदा वो हि
लिखेगा जो आप चाहते हो ।
* भरोसा खुद पे रखो तो ताकात
बन जाती है भरोसा दूसरों पे रखो
तो कमजोरी बन जाती है ।
विनोद आनंद 10/11/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1781 बारह समझ

ईश्र्वर कृपा से सत्संग
सत्संग से ज्ञान,ज्ञान से समझ
समझ से सुधार,सुधार से सफलता
सफलता से प्रसिध्धि ।
जीवन में कुछ आवश्यक समझ हो तो
जीवन बने सुंदर,आसन और समृध्ध ।
समझ-1: जैसा व्यवहार आप दूसरों
से चाहते हो,एसा व्यवहार दूसरों से करें ।
समझ-2 : दूसरों में अच्छाई-खुबीयाँ देखना ।
समझ-3 : दूसरों कि गलती को माफ करना
और खुद कि गलती कि माफि मागना ।
समझ-4 : खुद को सुधारना, दूसरों को नहि ।
समझ-5 : कर्म के फल कि और दूसरों से
अपेक्षा मत रखना ।
समझ-6 हर हाल में मुस्कराना और खुस
रहेना शीखना ।
समझ-7 वक्त कि किंमत समझने और वक्त
के साथ चलना, समय का सदोपयोग करना।
समझ-8 जीवन में सकारात्मक सोचो और
आशावादी बनना ।
समझ-9 काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, ईर्षा
जैसे कसाई ओ से बचना ।
समझ-10 प्रेम, दया, करूणा, शांति जैसे
सद् गुणों से दोस्ती करना ।
समझ-11 किसी कि प्रसंशा, आभार करना ।
समझ-12 समझ को जीवन में आत्मसात करना ।
बारह समझ जीवन में आ जाए तो जिंदगी
सुंदर, आसन, सफल और समृध्ध बनेगी ।
विनोद आनंद 08/11/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1762 होश क्या है ?

होस क्या है ?
होस कोई प्रक्रीया नहि
लेकिन कोई भी प्रक्रीया
करते वक्त होश में रहेना,
मतलब प्रक्रिया ध्यान से
करे, मतलब प्रक्रीया करते
समय तुम्हारा मन किसी ओर
नहि जाना चाहिए, प्रक्रीया के
साथ रहेना चाहिए उसे होस
में रहके काम करना कहते है ।
काम होश में करे तो काम अच्छा
होता है,ज्यादा होता है,थकते नहि
बलकि ताजगी महेसुश करते है ।
हम कई काम बेहोशीमें करते है,
क्यूँकि हमारा मन कहि ओर
भटकता रहेता है, तब मन और
शरीर के बीच तनाव होता है
हम थक जाते है, काम ठीक से
नहि होता पाता है ।
कोई भी काम ध्यान से,खेल
समज कर, खुशी से करने
का अभ्यास करे तो आपकी
क्षमता बढेगी,सफलता मिलेगी ।
नवयुवको और नवयुवतीयो में
जवानी का जोस होता है मगर
होस का अभाव होने से गलत
काम करते है और बाद में होस
आते है तो फिर क्या होगा ?
होशपूर्वक जीना हि जीनेका सहि
और अच्छा तरिका है ।
विनोद आनंद 19/10/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1728 संघर्ष

प्राणी मात्र के जिवन में
जीने के लिए संघर्ष है ।
संघर्ष बीना जिवन नहि ।
जिवन निर्वाह के लिए पैसा
कमाने के लिए संघर्ष है ।
संघर्ष हि कडी महेनत है ।
संघर्ष हि प्रारब्ध बनता है ।
नारी और बेबी प्रसृति में
पीडाजनक संघर्ष करते है ।
संघर्ष का परिणाम कुछ
प्राप्ति या सफलता हि है ।
मानव आबरू ईज्जत के
लिए संघर्ष करता रहेता है ।
न किया तो बेईज्जत होगा ।
हर कोई प्राणी जिवन में प्रेम,
लाड दूलार और सुरक्षा के
लिए संघर्ष करता रहेता है ।
संघर्ष से सिध्धि मिलती है ।
संघर्ष से न गभराना, संघर्ष
जिवन जीने का जरीया है ।
जो जीने के लिए, प्रेम के लिए
और आबरू के लिए संघर्ष
करता रहेता है, वो हि आदर्श
ईन्सान बन शकता है, वरना
वो किसी प्राणी से कम नहि ।
विनोद आनंद 14/09/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड