1678 वरना पडेगा अकाल

बहोत बाग लगाए और फूलों
कि खूसबु से महेकाया माहोल ।
बहुत उगाए फूल गमलों में,
घर कि शोभा बढाने के लिए ।
भूल गए सद् गुण के फूल
खिलाके मन कि बंजर ज़मी
पे, घर को महेकाने के लिए
ईसलिए मन कि ज़मी पे
दुर्गुणो के कांटे उग जाते है ।
कांटें बीना महेनत उग जाते ।
भूल गए है अच्छि भावनाओं
के फूल खिलाना दिल के गमले
में, जीवन को सजाने के लिए ।
ईसलिए दिल के गमले में बुरी
भावनाओं के कांटे उग जाते है ।
कांटें बीना महेनत उग जाते है ।
हमे किसान कि तरह अनाज
उगाने से पहेले काटों को तोड
के फेकना हि पडेगा और सद्
गुणों और अच्छि भावनाओं
कि खेती करनी हि पडेगी तब
सुख शांति और सफलता कि
फसल उगेगी जीवन में, वरना
जिवन में सद् गुणों और अच्छि
भावनाओं का पडेगा अकाल ।
विनोद आनंद 28/07/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड^

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1674 गलतियाँ

ईन्सान गलतियाँ करता है
लेकिन सुधरता नहि और
उस से सबक शीखता नहि,
लेकिन गलती दोहराता है ।
ईन्सान गलतियों का पूतला है ।
ईन्सान गलतियाँ बार बार
करके मुश्केलियाँ बढाता है ।
गलतियाँ जाने अनजाने में हो
जाती, जान बुजकर गलतीयाँ
करना मूर्खता कि निशानी है ।
बीना सोच समज से किया
काम अक्सर गलत होता है ।
गलती से बचना है तो सोच
समज कर काम करना चाहिए ।
गलतियाँ सफलता का बैरी है ।
गलतियाँ निष्फताका दोस्त है ।
गलतियाँ से नुकशान होता है ।
सावधान, गलत काम करने से
पहेले सोचो और काम न करो ।
गलतियाँसे रिश्ता तोडो,सुधारसे
रिश्ता जोडो तो होंगे कामयाब ।
गलतियाँ नाकामीयबी का बीज है ।
गलतियों से बचो, निष्फलता बचो ।
विनोद आनंद 24/07/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1667 सफलता कि तीन चाबी

जिंदगी का मक्सद है सफलता
कोई भी कारण हो सफलता का,
तीन लोग है तो सफलता मिलेगी ।
सफल व्यक्ति के जीवन तीनों लोगों
का होना आवश्य होता हि है ।
1) सब से पहेले गुरू जो सहि
समय पर सहि तरीके से भूल
को सुधारते है और सहि राह
दिखाते है । स्वामी विवेकानंद
का गुरू राम किष्णा परमहंस,
और शिवाजी के गुरू राम दास ।
जीवनमें गुरू होना जरूरी है ।
2) दूसरा गाईडींग लाईट, जीवीत
हो या न हो लेकिन आंख बंध करे
तो मार्गदर्शन मिलता है, वो चाहे
ईश्र्वर हो या कोई प्रेरक सफलता
के लिए प्रोत्साहित करता है ।
3) तीसरा है तुम्हारे जीवन यानी
समय का हिसाब रखने वाला,
आपे लक्ष्य पे नजर रखने वाला,
और समय पर आप को सलाह
सुचना देने वाला तुम्हारी सफलता
के लिए प्रयत्न करने वाला तुम्हारा
सलाहाकार और सच्चा दोस्त ।
तीनों लोगों का संयोग-संगम हि
है सफलता कि चाबक ।
विनोद आनंद 16/07/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1656 विश्र्वसनीय बनो

विश्र्वसनीय बनोगे तो सब
भरोशा करेगा वरना कोई
विश्र्वास नहि करेगा ।
परिवार और समाज में एक
दूसरे पर भरोशा जरूरी है ।
भरोशा है पंख, रिश्तों कि ।
जैसे बीन पंख, पंखी उड न
शके, एसै बीन भरोशे मानवी
जीवन जी न शके और रिश्तें
टीक न शके ।
परिवार और समाज में एसा
व्यवहार मत करो, जैसे कि
झूठ बोलना, बहाने बना, सीधी
बात न करना, कहे वो न करना,
वचन न निभाना, कोई काम ढंसे
न करना और पैसे उघार ले के
न लौटाना ईत्यादि, जिसे कोई
आप का विश्वास न करे । आप
के साथ रिश्ता न रखे, कोई भी
आप कि मदद न करे ।
परिवार-समाज में रहेते हुए, आप
अकेले न हो जाओ । जीवन का
उदेश्य हि हो विश्र्वसनीय बनना तो
जीवन सफल, सार्थक समृध्ध बने ।
लोगों का विश्र्वास जीतना है तो
समजलो जग जीत लिया क्यूँकि जग
में विश्वास का हि सिक्का चलता है
अविश्वास का नहि ।
विनोद आनंद 07/07/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1654 सुंदरता किस में है ?

सुंदरता किस में है ?
सुंदरता सुगंधीत फूलों में है ।
सुंदरता प्रकृति में और
दुनिया बनाने वाले में है ।
सुंदरता मानवता में है ।
सुंदरता मुस्कान में है ।
सुंदरता आबरू और
प्रभाव में है ।
सुदरता सद् गुणों में
और सद् आचरण में है ।
सद् गुणों से और सद्
आचरण से खुद को सुंदर
बनाओ ।
सुंदरता हर सुंदर चीजों
में छूपी नज़र आती है ।
कहेवत है कि सुंदरता पाने
से पहेले सुंदर बनना पडेगा ।
हर एक सुंदर चीज़, सुंदर
चीज़ को आकर्षित करती है ।
सुंदर बन के सुंदरता से रिश्ता
जोडो तो जीवन बने सुंदर ।
सुंदर जीवन सफल जीवन ।
तन कि और मन कि सुंदरता
हि है जीवन कि सुंदरता ।
विनोद आनंद 06/07/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1620 मन पर संयम

मन मनमानी करता है
लेकिन तुम अपनी मरजी
अनुसार कब करोगे, तुम
मन के अनुसार कब तक
गुलाम बन के जीओगे ?
मन कब तक नचाएगे, तुम
मन को कब नचाओगे ।
मन न ज्ञान, न बुध्धि को
पूछता है क्या सहि है या
क्या गलत ? सिर्फ अपनी
ईच्छा और मरजी अनुसार
आप पर हकूमत करता है ।
कब तक आप मन कि बातें
सुनते रहेंगे, तुम कब उस
पर हकुमत करोगे ।
अब बहुत हो गया, अब तो
मन को समजाना है या उस कि
हर बात को अनसुनी करना है ।
जो वो कहे वो तुरंत बालक
कि भाँति नहि करना, सोचना
समजना कि क्या सहि है क्या
गलत, फिर जो ज्ञान-बुध्धि के
अनुसार जो सहि है वो मानो,
जो गलत है वो न मानो,न करो ।
धीरे धीरे हकुमत बदल जाएगी
आप राजा बनोगे, मन गुलाम ।
सहि तरिका है मन पर संयम
पाकर सफलता पाने का ।
मन पर संयम विकास, मन कि
मनमानी विनास का रास्ता है ।
विकास जिंदगी का ध्येय हो, मन
पर संयम हो तो ध्येय पूर्ण होगा ।
विनोद आनंद 04/06/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1609 नतीजा

नतीजा यानी परिणाम यानी
महेनत या कर्मो का फल ।
जैसा कर्म करेगा एसा फल
देगा भगवान, जैसी महेनत
करोगे एसा नतीजा आएगा ।
बीना महेनत बीना कर्म फल
मिलता हि नहि, सफलता
महेनत कि दासी है । श्रीमद्
भगवद् गीता में कहा है कि
कर्म करने में तेरा अधिकार
है फल में नहि, कैसा और
कब फल देना मेरे हाथ में है,
तु सिर्फ कर्म किए जा फल
तो असश्य मिलेगा उस कि
चिंता मत कर । किस ने सच
हि कहा कि बूरे काम का बूरा
नतीजा । बूरे काम करने से
पहेले सत बार सोचना नतीजा
क्या होगा, करना सोच विचार
तो शायद कदम रूक जाए ।
कुछ भी बोलने से या कुकर्म
करने से पहेले सोचना फिर
बोलना या कर्म करना वरना
बुरे कामका बूरा नतीजा यह सच
हो जाएगा तब पस्ताना पडेगा ।
विनोद आनंद 24/05/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड