1728 संघर्ष

प्राणी मात्र के जिवन में
जीने के लिए संघर्ष है ।
संघर्ष बीना जिवन नहि ।
जिवन निर्वाह के लिए पैसा
कमाने के लिए संघर्ष है ।
संघर्ष हि कडी महेनत है ।
संघर्ष हि प्रारब्ध बनता है ।
नारी और बेबी प्रसृति में
पीडाजनक संघर्ष करते है ।
संघर्ष का परिणाम कुछ
प्राप्ति या सफलता हि है ।
मानव आबरू ईज्जत के
लिए संघर्ष करता रहेता है ।
न किया तो बेईज्जत होगा ।
हर कोई प्राणी जिवन में प्रेम,
लाड दूलार और सुरक्षा के
लिए संघर्ष करता रहेता है ।
संघर्ष से सिध्धि मिलती है ।
संघर्ष से न गभराना, संघर्ष
जिवन जीने का जरीया है ।
जो जीने के लिए, प्रेम के लिए
और आबरू के लिए संघर्ष
करता रहेता है, वो हि आदर्श
ईन्सान बन शकता है, वरना
वो किसी प्राणी से कम नहि ।
विनोद आनंद 14/09/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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1714 जिंदगी का मकसद

खुद को ईतना लायक बनादो कि
निष्फळता तुम्हे छू न शके,अगर
छूले तो भी सफलता छीन न शके ।
अपनी सोच ईतनी सकारात्मक
बना दो कि नकारात्मता तुम्हारा
पीछा छोड,सफलता तुम्हे न छोडे ।
अपनी महेनत ईतनी बढादो कि तुम
खुद तुम्हारी किस्मत लिख शको ।
स्वप्नोमें उमीदोंका रंग ईतना भर
दो कि स्वप्ना हकिकत बन जाए ।
अपनी हिंमत ईतनी बढा दो और
डटके डर का बुकाबला ईतना करो
कि डर लौट जाए, सफलता लौटे ।
गर्व ईतना रखो कि हम भारतीय है
तो देश को भी आप पर गर्व होगा ।
खुद को परिवार को और जिंदगी
को प्रेम ईतना करो कि जिंदगी
तुम्हे खुशीयों का हार पहेनाए ।
दुनिया में ईतना कुछ करो कि
दुनिया तुम्हारी पीछे पीछे चले ।
जब तुम आए जग हसा, एसी
करणी कर चलो कि तुम हसो
और जग रोए । यहि है जिंदगी
जीने का मकसद । नमस्कार
विनोद आनंद 01/09/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1713 कही सुनी बातें-3

* आप क्या हो, आप कहाँ हो,
आप के पास क्या है ईसे कुछ
फर्क नहि पडता । आप क्या
बनना चाहते हो कहाँ पहोंचना
चाहते है, क्या पाना चाहते हो
यह जानना बहुत जरूरी है ।
* जिंदगी में डर और एक्न दोनों में
से चुनाव करना है, तो क्या चुनोगे ?
जो चुनोगे वो मजबूत होगा ।
एक्नको चुनोगे, कामियाब मिलेगी ।
* आप कि हिंमत को यह न कहो
कि आप कि कमजोरीयाँ कितनी है,
कमजोरीयों को यह बताईए कि आप
कि हिंमत कितनी है ।
* खुद को ईतना काबील बना दो
कि सफलाता तुम्हारा ख्वाब देखे
तुम्हे पाने का ।
* अपनी सोच को ईतनी उची करदो
कि आसमान ख्वाब देखे तुम्हारी
सोच को पाने का ।
* अपनी महेनत में ईतना दम भरदो कि
किस्मत ख्वाब देखे तुम्हे पाने का ।
* अपने स्वप्नो में ईतनी जान भरदो कि
डर को भी डर लगे तुमसे टकराने का ।
* स्किल, एबीलीटी के अनुसार स्वप्न
नहि देखो, पहेले बडे स्वप्न देखो फिर
स्किल, एबीलीटी बढाना ।
* खुद पे विश्र्वास रखो और बीलीव करो ।
विनोद आनंद 01/09/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1711 हम बदल क्यूँ नहि पाते

हम बदल नहि पाते क्यूँ कि
कभी हम बदलना नहि चाहते
या अगर हम बदलना चाहते है
और दूसरे नहि चाहते, इसलिए
हम जीवन में बदल नहि पाते ।
पहेले मन मानसिकता है कि
वो बदलाव का विरोध करेगा क्यूँ
कि मन महेनत नहि चाहता कठीनाई
उठाना नहि चाहता और डरता है ।
हमे पहेले मन को समजाना है कि
बदलाव जरूरी विकास के लिए ।
बदलाव के चार तब्बके है जिसे
बदलाव ला शकते है ।
1) बदलाव कि शरुआत तो करदो
जो कठीन है बाद में ठीक होगा,
सिर्फ सोचने से कुछ नहि होगा ।
शरूआत हि सफलता कि सीडी है ।
2) द्दढता से आगे बढो उस में
रूकावट आएगी आंतरिक और
बाहरी जो आगे नहि बढने देगी ।
3) बीच मझधार में पहोचकर भी
तूफान आने से पीछे हटने से बचो
आगे कदम बढाते रहो ।
4) मझधार से बचोगे तो फिर
सफलता निश्र्चित पाओगे ।
बस शरूआत करो, किसी कि
न सुनो, मुश्केलियों का सामना
करो और द्दढते से आगे बढो तो
आप खुद को बदल पाओगे ।
बाँधे कहाँ रोक पाती है आगे
बढने वालों को, हिमते मर्दा
तो मददे खुदा । निराश न हो
कोशिश करो, कोशिश करने
वालो कि कभी हार नहि होती ।
विनोद आनंद 28/08/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1710 परेशानीमें कुछ बातें ध्यान रखो

जिंदगीमें उतार चढाव आता है
मुश्केलीयाँ, परेशान करती है ।
एसी हालात में हमे संभालना है,
मनको समजाकर,समतुलन रखने
के लिए कुछ बातें ध्यान रखो जिसे
तुम्हारी परेशानी कम हो जाएगी ।
* लोगों कि राय कि चिंता न करो,
लोग कहेंगे, लोगों काम है कहेना ।
* अतीत को याद न करो,उसे याद
करके परेशान न हो, उसे शीख लो ।
* जो होता है वो अच्छे के लिए है ।
समय के साथ हालत बेहतर होगो ।
* अति निराश होकर दुःखी मत हो
आशा का दिप जलाओ उमीद रखो ।
* खुशी भीतर पाई जाती है बहार नहि ।
* सकारात्मक विचार करो,तो माहोल
सकारात्मक बनेगा तो,शुकून मीलेगा ।
* जिंदगी में विफल तब होगे जब
आप प्रयास नहि करोगे, कोशिश
करने वालो कि हार नहि होती है ।
* याद रखो, जैसी करणी एसी भरनी
मुश्केलियों में भी अच्छे कर्म करो ।
यह बातों को समजोगे तो, संभल
जाओगे और परेशानियाँ पीछे छूट
जाएगी और कामीयाब पीछा करेगी ।
विनोद आनंद 27/08/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1678 वरना पडेगा अकाल

बहोत बाग लगाए और फूलों
कि खूसबु से महेकाया माहोल ।
बहुत उगाए फूल गमलों में,
घर कि शोभा बढाने के लिए ।
भूल गए सद् गुण के फूल
खिलाके मन कि बंजर ज़मी
पे, घर को महेकाने के लिए
ईसलिए मन कि ज़मी पे
दुर्गुणो के कांटे उग जाते है ।
कांटें बीना महेनत उग जाते ।
भूल गए है अच्छि भावनाओं
के फूल खिलाना दिल के गमले
में, जीवन को सजाने के लिए ।
ईसलिए दिल के गमले में बुरी
भावनाओं के कांटे उग जाते है ।
कांटें बीना महेनत उग जाते है ।
हमे किसान कि तरह अनाज
उगाने से पहेले काटों को तोड
के फेकना हि पडेगा और सद्
गुणों और अच्छि भावनाओं
कि खेती करनी हि पडेगी तब
सुख शांति और सफलता कि
फसल उगेगी जीवन में, वरना
जिवन में सद् गुणों और अच्छि
भावनाओं का पडेगा अकाल ।
विनोद आनंद 28/07/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड^

1674 गलतियाँ

ईन्सान गलतियाँ करता है
लेकिन सुधरता नहि और
उस से सबक शीखता नहि,
लेकिन गलती दोहराता है ।
ईन्सान गलतियों का पूतला है ।
ईन्सान गलतियाँ बार बार
करके मुश्केलियाँ बढाता है ।
गलतियाँ जाने अनजाने में हो
जाती, जान बुजकर गलतीयाँ
करना मूर्खता कि निशानी है ।
बीना सोच समज से किया
काम अक्सर गलत होता है ।
गलती से बचना है तो सोच
समज कर काम करना चाहिए ।
गलतियाँ सफलता का बैरी है ।
गलतियाँ निष्फताका दोस्त है ।
गलतियाँ से नुकशान होता है ।
सावधान, गलत काम करने से
पहेले सोचो और काम न करो ।
गलतियाँसे रिश्ता तोडो,सुधारसे
रिश्ता जोडो तो होंगे कामयाब ।
गलतियाँ नाकामीयबी का बीज है ।
गलतियों से बचो, निष्फलता बचो ।
विनोद आनंद 24/07/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड