1234 गलतियाँ

काम करता है वो
गलतियाँ करता है ।
काम चोर गलतियाँ
नही करते क्यूँकि
काम चोरी सब से
बडी गलति और
कमजोरी है ।
गलतियाँ कर्श या
आशीर्वाद ?
गलति सुधारना,
शीखना और फिर एसी
गलतियाँ न करे तो
गलतियाँ बने आशीर्वाद
वरना गलतियाँ बने कर्श ।
यह मुनासीत है कि काम
करते वक्त होस में रहे ।
फूल प्रूफ सिस्टम हो तो
गलतियाँ कम से कम हो ।
गलतियाँ रूकावट न बने
सफलता में ध्यान रखना ।
गलतियाँ से निराश न होना
लेकिन आशावादी बनना
और फिर प्रयास करना तो
निष्फलता से बच शकते हो ।
विनोद आनंद 14/07/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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1208 सबक

सबक तो शीखना चाहीए
खुद या दूसरों के अनुभव से ।
क्यूँकि सबक से सुधार और
सुधार से बहेतर जिंदगी ।
जो गलतियाँ से सबक नही
शीखते वो एक ओर गलती
करके जिंदगी को कठीन
बनाकर परेशान होते है ।
जिंदगी का दूसरा नाम हि
सबक है , और सबक से
शीखने से जिंदगी में सब
कुछ ठीक कर शकते है ।
जिंदगीमें सबक से नही
शीखना है जिंदगी से बेवफाई ।
सबक से शीखने से भिवष्य में
मुश्किलीयाँ या परेशानियाँ
कम कर शकते है और सुख
शांति का जिंदगी जी शकते है ।
जिंदगी पाठशाला है उसमें
सबक शीखना मुनाशीत है ।
सबक से शीखते रहो, आगे बढते
रहो और कामीयाब होते रहो ।
विनोद आनंद 14/06/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1204 समय नही, खुद के लिए

हमारे पास सब के लिए
और सब काम के लिए
समय है मगर खुद के लिए
समय नही है खुद से बात
करने के लिए समय नही है ।
हम सबे साथ समय बीताते है
खुद के साथ बात करने को
एकांत में समय नही बीताते ।
हम बहुत लोगों से मिलते है
कभी खुद से नहीं मिलते ।
हम सब के बारे में जानते है,
खुद के बारे में कम जानते है ।
हमारे पास दूसरों कि खामीयों,
गलतियों को ढूढने का समय है,
खुद कि खामीयों,गलतियों
को ढूढने का समय नही है ।
जब हम खुद के लिए भी एकांत में
खुद को जानने के लिए समय
निकालेगें तो हमे सुधरने का
अवसर मिलेगा और नया
जीवन का श्री गणेश होगा ।
थोडा समय खुद के लिए भी
निकालो तो सुधार, विकास
सफलता के द्वार खुल जाएंगे ।
विनोद आनंद 10/06/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1191 सही सोच सही काम

सही सोच सही काम,
सही काम कठीन काम ।
गलत सोच गलत काम
गलत काम सरल काम,
सही काम सरल नही है ।
गलत काम सरल होता है ।
जैसे एक पिता पुत्र को
गलती के लिए डांटे तो
पुत्र स्वीकार करे और
माफी मागे वो सही काम
और वो काम है जरा कठीन ।
अगर पुत्र गलती न स्वीकरे
और वो भी गुस्सा करे तो यह
सरल काम लेकिन गलत काम ।
जिंदगी में कुछ भी बोले या करे
सोचकर सही है वो बोलेे या करे
सरल और गलत है वो न करे ।
सही काम और सरल काम पर
सही सोच से करे तो जिंदगी में
सफलता मिलती हि रहेगी ।
विनोद आनंद 29/05/2018
फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

1184 एकता

रेशे, रेशे से बनती है मजबूत रस्सी ।
एक एक काठी से बनती है गठरी ।
तीनके तीनके से बनता है खोंसला ।
आसमान से बुंदे बरसती है और
बुंदे बुंदे से सागर बनता है ।
छोटी खुशीयाँ से बनती है बडी खुशी ।
एक एक व्यक्ति से बनता है संगठन ।
रस्सी, गठरी, संगठन कि एकता से
बनती है ताकात और ताकात से
कुछ भी काम कर शकते हो ।
ईसलिए सब के संग मिलजुलकर,
साथ सहकार से रहेने से हर
मुशीबत या परेशानी का हल
आसानीसे निकाल शकते हो ।
जूडे रहने से कोई तोड नही
शकेगा और न परेशान कर
शकेगा और जीवन मे सुख
शांति और सफलता मिलेगी ।
परिवार में,समाज में एकता से
जीवन सफल,सार्थक बनेगा ।
विनोद आनंद 22/05/2018
फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

1144 सकारात्मक अभिगम कैसे बने ?

सकारात्मक अभिगम बनाना है
तो पहेले नकारात्मक अभिगम को
स्वअभ्यास से दूर करने से
सकारात्म अभिगम बनेगा ।
उस के लिए पहले हमे अपनी
वाणी में सकारात्म शब्दो का
ईस्तमाल करना शीखना है ।
मन में सकारात्म भाव को
जगाकर सोच सकारात्म बनानी है ।
अच्छी पुस्तके और सकारात्मक
व्यक्ति का संग करने से मन को
सकारात्मकता का प्रशिक्षण देना है ।
मन पर बहार के बुरे वातावरण का
असर होता है इसलिए अच्छा स्वच्छ
और संस्कारी वातावरण में रहेना है ।
द्दढ नार्णय, प्रयास और कोशिश से
सकारात्मक अभिगम बना शकते है ।
सकारात्मक अभिगम हि सफलता,
खुशी और शांत जीवन कि चाबी है ।
सकारात्मक अभिगम तनाव,चिंता
और निराशा से बचने का उपाय है ।
सकारात्मकता स्वर्ग कि सीडी और
नकारात्मकता नर्क कि सीडी ।
सकारात्मक अभिगम विकास है ।
नकारात्मक अभिगम विनाश है ।
विनोद आनंद 12/04/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1142 निर्णय

निर्णय सोच समज लेना
सही निर्णय सफलता
वरना निःष्फलता ।
निर्णय नसीब का निर्माता ।
निर्णय कब नही लेना ?
लागणी वश हो कर
नहीं लेना क्यूँ कि
लागणी प्रधान निर्णय
सही साबित नही होता ।
जब आप बहुत दुःखी और
जब आप बहुत खुश हो
तब कभी निर्णय न लेना
क्यूँ कि उस समय बुध्धि
काम नही करती ।
जब आप गुस्से में हो तब
निर्णय न लेना क्यूँ कि उस
समय बुध्धि नही चलती ।
खुद को प्रश्र्न करो कि
आप निर्णय किसी के
दबाव से तो नही लेते है ।
निर्णय परिणाम प्रधान
नही करना, फक्त कर्म किये
जा फल ईच्छा न कर ।
क्यूँ कि परिणाम न मिलने
पर हम अपना निर्णय
बदल देते है वो सही नही ।
निर्णय पर विश्वास न हो
तो गलत साबित होता है ।
एसो आराम पे आधारित
निर्णय न ले क्यूँ कि एसो
आराम छूट जाने के डर सही
निर्णय नही ले शकते ।
सही निर्णय के लि गुरू या
वडील या मित्र से सलाह ले ।
जब निर्णय सब के फायदे में
न हो वो निर्णय मत लो क्यूँ कि
वो सब को स्वीकार नही होता ।
यह सब बातों का ध्यान रखे तो
निर्णय सही होगा और निर्माण होगा ।
विनोद आनंद 11/04/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड