967 मथंन 

मंथन विचारों का 

समस्या का हल 

और मंथन दधि का 

मखन बनाने की

एक श्रेष्ठ  साधना ।

जैसे पहले दूध का दधि 

बनाकर मथनी से मंथन

करने से बनता है मखन ।

एसे पहले विचारों का चिंतन 

फिर ज्ञान और बुध्धि कि 

मथनी से मंथन करने से

निकलता है श्रेष्ठ निश्कर्ष ।

बीना विचार,चिंतन और मंथन

जीवन में नहि मिलती सफलता ।

मंथन से व्यक्तित्व विकास कैसे  ?

मन को जानो,समझो फिर

पहले मन का मंथन करो तो 

दुर्गणो को जह़र निकलगा,

जैसे  समुद्र मंथन से पहले 

जह़र निकला था । मंथन से

मन शुध्ध पवित्र बनेगा और 

निकलेगा सद् गुण का मखन ।

मंथन हि श्रेष्ठ साधन जीवन में

सुख,शांति और समृध्धि पानेका ।

विनोद आनंद                               14/11/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

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947 ज्ञान

ज्ञान सबसे महान

सबसे पवित्र और पूजनीय ।

ज्ञान का देवता है सूरज, 

करता है दुनिया में उजाला, 

ज्ञान करता है जीवन में उजाला ।
राजा पूजनीय देश में 

ज्ञानी पूजनीय सर्वत्र ।

ज्ञान उजाला और 

जीवन कि रोशनी 

अज्ञान जीवन का अंधकार ।

ज्ञान बीना जग सुना निरश

ज्ञान ही सब कुछ जीवन में ।

ज्ञान संग भक्ति जूडे तो ज्ञानी 

भक्त ईश्र्वर को अति प्रिय ।

ज्ञान ईश्र्वर, ईश्र्वर ही ज्ञान है ।

ज्ञान कि गंगा बहाते चलो 

भक्ति का यमुना बहाते चलो

जीवन को सफलता,सार्थकता

समृद्धि कि दिशा दिखाते रहो ।

ज्ञानी बनो अज्ञानी नही 

ज्ञान होते हुए भी ज्ञान का

ईस्तमाल न करे वो है मूढ ।

विनोद आनंद                               11/10/2017

फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

901 फूरसद नहिं

लिख ने वाले लिखते है

अपनी अच्छि सोच को दूर 

दूर तक पहोंचाने के लिए ।

एसी उमिद से कि हर

कोई पढे और मन में 

ह्रदय में बसाकर एक 

अच्छि सोच बनाए ।

अच्छि सोच हि जीवन में 

अच्छे कर्मो का बीज है ।

लिखनेवाला अच्छि सोच का

बीज मन कि जमीन में  

बोना चाहता है जिसे 

जिंदगी में सत्कर्मो कि

फसल तैयार हो जिसे

जिंदगी में सफलता और

समृध्धि कि दोलत मिले ।

अच्छि सोच और अच्छे

सुविचार सभी को लगते है 

अच्छे मगर उस कि   

अच्छाई से जिंदगी को

सँवारने नी फूरसद नहि

किसी के पास और खुद में 

परिवर्तन लाने कि ईच्छा नहिं है । 

तो लिखनेवाला करे तो क्या करे  ? 

विनोद आनंद                                 30/08/2017

फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड 

842 कैसे जिंदा रहोगे मरने के बाद

कैसे रहोगे जिंदा मरने के बाद ?

सवाल है क्या हम चाहते है 

मरने के बाद जिंदा रहेना ? 

चाह है तो राह है, मंझ़िल है ।

लक्ष्य है तो मंझ़िल मिलेगी जरुर ।

खूद के साथ,दूसरो के लिए भी जीया तो, 

सब को अपना समजकर जीया तो, 

अच्छा कर्म करके यादगार जिवन जीए तो, 

मन में द्दढता,दिल मे है विश्र्वास तो, 

जिंदा रह शकते है मरने के बाद भी ।

एक आदर्श व्यक्ति बनके जीवन जीए तो, 

सरल,सहज, सात्विक जीवन जीए तो, 

सेवा समर्पण से जीवन जीओ तो, 

मन में द्दढता, दिल मे है विश्र्वास तो, 

जिंदगी का यही उद्देश्य है तो, 

जिंदा रह शकते है मरने के बाद भी ।

विनोद आनंद                                08/07/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

 

809 दृढ़ता

अपने निर्णय पर, 

अपने लक्ष्य पर, 

हिमालय जैसी दृढ़ता 

दिलाएगी सफलता ।

हर समय,हर परिस्थिति में 

दृढ़ता बनी रहे, अपने निर्णय, 

अपने लक्ष्य से न हो चलित

तो होगा लक्ष्य पूर्ण ।

दृढ़ता सफलता जननी है

दृढ़ता मन कि बेटी है

अगर मन पर संयम हो

जीवन में लक्ष्य हो,संकल्प हो

तो मन में दृढ़ता लेती है जन्म 

आत्म विश्र्वास और बढता है ।

हर वक्त सफलता मिलती है ।

जीवन में सुख शांति और

समृध्धि लाती है दृढ़ता ।

सफलता जडी बुट्टि है दृढ़ता ।                              विनोद आनंद                                   16/06/2017        फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

794 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-29

👍याद रखना ।

लूटने चला था, 

लूटकर लोट आया ।

मजाक उडाने चला था, 

खुद मजाक बन गया  ।

शिकार करने गया था

शिकार बन गया ।

सरप्राइज़ देने गया था

सरप्राइज़ हो गया  ।

याद रखना इरादे सही है तो

कामीयाबी मिलती है वरना

नाकामीयाबी मिलती है ।

💗 मन कहाँ टिकता है ? 

चाहते है भूल जाना जिसे, 

वोही आते है याद ।

चाहते है याद करना जिसे, 

भूल क्यूँ नही जाते उसे ? 

जिस पर मन टीका 

वोही याद आएगा ।

नही चाहते उस पर 

मन को मत टिकाना ।

चाहत पे मन टकता है ।

✌ कामीयाबी 

होंसला बनाए रखना

उमीदे जगाए रखना

मंझिल पास आएगी ।

होस बनाए रखना

जोस जगए रखना

सफलता मिलेगी

हिंमत बनाए रखना

आशा जगाए रखना

कामीयाबी आप के

चरणों में  होगी ।                                                 विनोद आनंद                                 30/05/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

790 लक्ष्य तयर करो

बीना पता और कुछ 

कुछ निशानी दे कर हम 

घर ढूँढते है, मगर 

घर नही मिलता ।

घर ढूँढना है तो पता

पहेले ढूँढना होगा ।

बस ईसी तरह हम

जिंदगी में  मंझिल ढूँढते है 

पर नही मिलती क्यूकिं 

लक्ष्य निर्धारीत नही है

हम लक्ष्य हीन जिंदगी के

सफर में  मंझिल ढूँढते है ।

जिंदगी में क्या बनना है

क्या करना है जिंदगी और

कैसे जीना है तयर नही है ।

तो फिर जिंदगी का कोई

हेतु या उद्देश्य नही होता ।

जिंदगी में  सफलता और

सार्थकता के लिए लक्ष्य 

निर्धारीत करना आवश्यक है ।

लक्ष्य हीन जीवन तो जानवर

जीते है । हम तो ईन्सान है ।

जिंदगी को लक्ष्य हीन न जीओ ।

विनोद आनंद                                 28/05/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड