1707 धोखे से कैसे बचोगे ?

आज कल लोग रिश्तों में धोखा
खाते है,टूट जाते है । धोखेबाज
ईतना चालाक, जूठ्ठा, होता है,
कि हमे कुछ पता नहि चलता ।
धोखेबाज को पहेचाने के लिए
उस कि कुछ निशानीयाँ है,उसे
जानकर धोखे से बच शकते हो ।
* वो अपने बारे में कुछ नहि
बता एगा, पूछोगे तो टाल देगा ।
जब किसी ओर से पता चलेगा
और आप पूछेगे तो कहेगा मैं
तुम्हे बताना हि भूल गया ।
* आप उस कि परवाह करते रहो
वो आप कि परवाह नहि करता ।
* वो हर बात पे जूठ्ठ बोलता है,
हर वक्त अलग बातें करता है, या
बहाने बनाता है या ढोंग करता है
जिसे उसका भेद न खुल जाए ।
* आप कितना भी अच्छा करो तो
भी आपकि प्रशंसा नहि करता है ।
* तुम्हारे काम के लिए वो हमेशा
बीझी रहेगा लेकिन आप का काम
जान बुजकर जल्दी नहि करेगा ।
* वो आपको हर समय हर्ट करेगा ।
* वो अपना वचन नहि निभाएगा ।
* वो आप को मीठी मीठी बातें
करके प्रभावीत करेगा और आप का
विश्र्वास जीतेगा फिर धोखा देगा ।
तुम किसी के शब्द पे नहि उस कि
गतिविधियाँ देखकर विश्वास करो ।
किसी पे जल्द विश्र्वास न करे, और
विश्र्वासके लायक है तो भी आंख बंध
करके विश्र्वास न करे, सावधान रहे ।
विनोद आनंद 23/08/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1663 अच्छाई

अच्छाई से अच्छा ईन्सान
बनकर मान,आदर सत्कार,
आशीर्वाद कमा शकते हो ।
किसी का अच्छा करना,
बूरा न करना हि अच्छाई है ।
एसी अच्छाई किस काम कि
अच्छाई करने वालों के साथ
लोग बूरा करे उस कि अच्छाई
का फायदा उठा के धोका दे ।
अच्छाई का लोग फायदा न उठाए
उसे के लिए पांच बातें याद रखे ।
* सावधान रहि है कि किसी गलत
ईन्सान के साथ अच्छाई करने के
बाद में पस्ताना न पडे ।
* दूसरों के लिए हमेंशा सेवा में
न रहे जिसे वो जब चाहे आप कि
अच्छाई का फायदा उठा शके ।
* जो तुम्हे पसंद नहि जो तुम नहि
करना चाहते उसे ना कहेना शीखे ।
* आप अच्छाई करे मगर अपना काम
छोड कर, बहुत ज्यादा समय न दे ।
* लोगों कि अच्छाई करो मगर बहुत
ज्यादा परवाह न करो, जिसे तुम्हारी
बिलकूल परवाह नहि ।
* आप किसे पे आधारित न रहो
किसे सहारे न जीओ खुद स्वतंत्र
तरिके से सेवा करके अच्छाई करो ।
अच्छाई करके अच्छा ईन्सान बनना
ईन्सान का फर्ज है, सावधान कोई
आप कि अच्छाई का फायदा न ले ।
विनोद आनंद 13/07/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1662 सावधानियाँ

मूर्ख को उपदेश न देना ।
जो अज्ञानी है और खुद को
ज्ञानी समजता है वो मूर्ख है ।
हर दोस्ती के पीछे कोई
न कोई स्वार्थ होता है ।
जानो और सावधान रहो ।
मीठी वाणी से आप से कोई
भी काम करवा शकता है ।
मीठ मीठी बातों से बचना ।
कमजोरी का प्रदर्शन आपको
ओर कमजोर बनाता है, तुम्हारी
कमजोरी का कोई फायदा लेगा ।
कभी भी अपना सिक्रेट किसी से
मत कहो वरना कोई भी तुम्हे
ब्लेकमेईल करेगा, सँभालना ।
समझदार लोग परिस्थिति’ के
अनुसार बोलते है, उस में हि
आपका कल्याण होता है ।
खुशी में वचन न देना,
गुस्से में जवाब मत देना,
जोस में निर्णय न लेना,
क्यूँ कि उस वक्त मन अशांत
होता है और मुश्केली बढती है ।
जीवन में आगे बढना है तो बहेरे
हो जाव, लोगों कि बातें न सुनो ।
लोग तो कहेगें, लोगों का काम है
कहेना अपनी सुझ बुझ से करो ।
सावधानियाँ से बचना, बचाना ।
विनोद आनंद 10/07/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1617 बदनामी बरबादी और बेईज्जती

बदनामी बरबादी और
बेईज्जती तीनों जिंदगी कि
श्याम है, फिर आबादी का
सूरज कब निकलेगा कह
नहि शकते ।
निराशा तनाव चिंता और
डीप्रेशन का माहोल बनता ।
अगर कोई सहारा या संत
न मिलेतो आत्महत्या का
रास्ता खुल जाता है ।
एसे हालात में ईश्र्वर पर
विश्वास और श्रध्धा और
भक्ति हि सहारा बनती है ।
एसे हालत में स्वयं पर
विश्वास, हिमत, धीरज, मन
पर संयम या शुमचिंतक का
सहारा हि बदनामी बरबादी
और बेईज्जती के दल दल से
निकाल शकता है वरना अंत
आत्महत्या से होता है ।
सावधान, पहेले एसी आदतें,
दुर्णगें, खराब भावनाएँ और
खराब स्वभाव का निर्माण
न करे जो बदनामी बरबादी
और बेईज्जती का रास्ता है ।
अनैतिकता, अप्रमाणिकता का
रास्ता भी बदनामी बरबादी
और बेईज्जती का रास्ता है ।
बस फक्त एसा माहोल बनने से
पहेले रास्ता बददो, जो आबादी,
सुख शांति और समृध्धि कि
ओर जाता हो । कैसा भी
हालत हो जाए, आत्महत्या
का कभी दिल दिमाग में
खयाल भी मत लाना ।
एसे हालात खुद कि भूल और
कर्मो का नतीजा है उसे हमे
हि सुधारना है । तैयार रहो ।
विनोद आनंद 01/06/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1462 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-75

🌹 शंका कुशंका
मन मे शंका कुशंका है
तो मन बनेगा कमजोर ।
अज्ञान से जन्मे शंका-कुशंका ।
ज्ञान या जानकारी से शंका
कुशंका का हो जाए नास ।
मन में शंका कुशंका पालोगे
तो जिंदगी होगी असफल ।
🌻 पहेले खुद…फिर दूसरे
खुद को जो करता नहि प्रेम
कैसे करेगा प्रेम दूसरों को ।
खुदको जो नहि समजा शकता
कैसे समजाएगा दूसरों को ।
जो खुद को नहि सुधारता वो,
कैसे सुधार शकता है दूसरों को ।
खुद जीनेका सही तरिका शीखे
तो फिर दूसरे शीख लेंगे देखकर ।
🌺 सही सोच
गलत सोच को भगाना या
गलत सोचना नहि तो गलत
सोच से मिलेगी मुक्ति ।
सही सोच, बडी सोच से
मिलेगी सही राह, मंझिल ।
सही मंझिल से मिलेगी
सही सफलता जीवनमें ।
🍀सावधान
किस को, कहाँ ‘ना’ कहेना या
‘हा’ कहेना है सोचने कि बात ।
बिना सोचे ‘हा’ या ‘ना’ कहेके
पस्तना पडेगा सावधान ।
विनोद आनंद 17/01/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1388 सावधान

व्यक्ति व्यक्ति में फर्क होता है
उसे पहेचानना है मुश्किल,पहेचान
शको तो एसे व्यक्ति से दूर रहो जिसे
अच्छे बूरे का पता नही उन के साथ
रहेने में खतरा है ।
जो व्यक्ति नसा करता है, पागल है,
लापरवाह है और थका हुआ है उसे
अच्छे बूरे का ख्याल नही रहेता वो
कुछ भी गलत कर देता है सावधान
एसे व्यक्तियोंसे दूर रहेना जरूरी है ।
जो व्यक्ति क्रोधी, लोभी,भयभीत हो
उसे अच्छे बूरे का ख्याल नही रहेता
वो कुछ गलत कर देता है सावधान
एसे व्यक्तियोंसे दूर रहेना जरूरी है ।
जो व्यक्ति भूखा,जल्दबाजी करता हो,
कामी हो उसे अच्छे बूरे का ख्याल
नही रहेता वो कुछ गलत कर देता है,
सावधान उसे दूर रहेना जरूरी है ।
विनोद आनंद 18/11/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1382 अतिथि

-जिस के आने कि को
तिथि निर्धारित नही
होती वो अचानक आ
जाते है वो अतिथि है
भारतीय संस्कृति में
अतिथि देवो भव,
अर्थात अतिथि का
दरजा देवो का है ।
उन का मान सन्मान
से स्वागत करना है ।
नाराज नहि करना है ।
एसे लोगों को अतिथि
मत बनाना मन स्मृति
में कहा है, सावधान ।
पाखंडी, अपना असली
स्वभाव, ईरादे छूपाए,
दुष्ट कर्मो करे, चोरी करे,
मूर्ख बनाकर दूसरो कि
संपति,घर,जमीन हडप
करे,दूसरो को दुःखी करे,
भगवान शास्त्रओ मे श्रध्धा
न रखने और दुश्मन को
अतिथि मत बनाना
सावधान वरना जिंदगी
भर पस्ताना पडेगा ।
विनोद आनंद 13/11/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड