967 मथंन 

मंथन विचारों का 

समस्या का हल 

और मंथन दधि का 

मखन बनाने की

एक श्रेष्ठ  साधना ।

जैसे पहले दूध का दधि 

बनाकर मथनी से मंथन

करने से बनता है मखन ।

एसे पहले विचारों का चिंतन 

फिर ज्ञान और बुध्धि कि 

मथनी से मंथन करने से

निकलता है श्रेष्ठ निश्कर्ष ।

बीना विचार,चिंतन और मंथन

जीवन में नहि मिलती सफलता ।

मंथन से व्यक्तित्व विकास कैसे  ?

मन को जानो,समझो फिर

पहले मन का मंथन करो तो 

दुर्गणो को जह़र निकलगा,

जैसे  समुद्र मंथन से पहले 

जह़र निकला था । मंथन से

मन शुध्ध पवित्र बनेगा और 

निकलेगा सद् गुण का मखन ।

मंथन हि श्रेष्ठ साधन जीवन में

सुख,शांति और समृध्धि पानेका ।

विनोद आनंद                               14/11/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

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797 अपनी शक्ति को जगाओ

हम बहोत जल्दी 

चिड जाते है 

बातों बातों में 

गुस्से हो जाते है,क्यूँ ? 

क्या हर वक्त एसा

जरूरी होता है ? 

कि हम एसी ही

आदतों के शिकार

हो गए है या हमने 

अपना स्वभाव 

एसा बना लिया है ? 

क्या एसी आदते और

स्वभाव सुख, शांति और

चैन, शुकुन देता है ? 

तो फिर कमजोर बनकर

क्यूँ एसी आदतें-स्वभाव के 

साथ जी रहे है ।

हम एक शक्ति स्वरूप है

अपनी शक्ति को पहेचानो

जगाओ कि अपनी

खराब आदतें-स्वभाव 

बदल शके और सद्

गुणों के मालिक बन शके ।

एक सुख, शांति,चैन और

शुकुन सी जिंदगी जी शके ।

विनोद आनंद                                 02/06/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

 

697 मर्यादा-निती नियम से जीओ

रूठना एसे कि पल में मानजाओ 

वरना मोसम बदल जाएगा ।

प्रेम करना एसे कि नफरत 

डर कर भाग जाए ।

कर्म करो एसे कि कर्म

अकर्म बन जाए ।

ईतना नाराज-उदास न हो कि

सुख शांति और प्रसंन्नता

भाग जाएगी ।

जीवन एस न जीओ कि

तुम्हारा नाम मिट जाए ।

प्रदार्थो को ईतना महत्त्व न दो

कि उस का नसा हो जाए ।

खुसी में न बहेक जाओ कि

संभलना हो जाए मुश्किल ।

दु:ख में इतना न हो परेशान कि

सहन शक्ति हो जाए खत्म ।

किसे से ईतान नफरत और ईर्षा

न करो कि तुम्हार बदन 

ज़हरीला हो जाए ।

रिश्तों से इतना न उलझना

कि रिश्तें कमजोर हो जाए ।

पैसे ईतना कमाओ कि 

जरूरतें सभी हो पूरी ।

स्वास्थ बेचकर पैसा न कमाओ

क्यूकि स्वास्थ है तो जीवन है ।

वाहन ईतना तेज न चलाओ कि

स्वास्थ-सुरक्षा खतरे में पडे ।

कुछ भी करो तो सोच समझकर

मर्यादा में निती नियम से करो

जीवन में सुख शांति और 

प्रसन्नता बनी रहेगी ।

विनोद आनंद                             12/03/2017 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

684 आत्मसात् करो 

हम पहले आत्मा है फिर तन ।

तन आत्मा का गणवेश ।

आत्मा परमात्मा का अंश ।

आत्मा के सात गुणें आत्मसात्

करे तो तन-मन रहे निरोगी ।

निरोगी तन पहेला सुख ।

सद् गुणी मन  दूसरा सुख और

संस्कारी आत्मा तिसरा सुख ।

आत्मा का सात गुणें, करे आत्मसात् 

तो तन, मन को करे प्रभावीत । 

जैसे ज्ञान – नरवस सीस्टम कोकरे प्रभावीत । 

शांति – रस्पीरेशन सीस्टम को करे प्रभावीत ।

सुख – पाचन  सीस्टम  और

प्रेम – सरक्युलेन सीस्टम को करे प्रभावीत ।

पवित्रता – ईन्द्रियों का सीस्टम और

आनंद – होरमन्स सीस्टम को करे प्रभावीत । 

शक्ति – मस्कुलर,स्केलेटन सीस्टम को करे प्रभावीत ।

आत्मा के गुण आत्मसात् कि

कोशीश करो तो सफलता  मिलेगी ।

जीवन में सुख शांति और समृध्धि मिलेगी । 

निरोगी तन, पीस ओफ माईन्ड,  

और शक्तिशाली आत्मा तो जीवन महान ।

विनोद आनंद                           03/03/2017 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

​ढूंढते है हम जो खो गया है

​ढूंढते है हम जो खो गया है

लेकिन क्या खो गया ? 

सुख, चैन, और शांति ।

सब कुछ है मगर 

सुख, चैन और शांति नही है ।

क्यूकि हम उन्हे जहाँ नही है

वहाँ ढूंढते है, बेखर है हम ।

हम चीजों में,धन दौलत में

ढूंढते है सुख, चैन,और शांति ।

शायद मिल भी जाय तो, 

वो नही है  शाश्र्वत ।

तो कहाँ है सुख, चैन, शांति ।

ज्ञानी कहते है कि वो 

मनुष्य के अतःकरण में 

गहरी निंद में सोई है ।

उन्हे जगाना है,लेकिन कैसे ? 

अपनी सोच,नजरिया और

मान्यता बदलनी है । 

हम शरीर के निवासी 

अविनासी,नित्य आत्मा है, 

जो अंश है परमात्मा का ।

हमारे अत:करण में जो है वो

भूल चूके है,उसे बहार ढूंढते है ।

बस सिर्फ याद करना है और

जिवन में सद् विचार और

सद् आचरण करना है, तुम्हे

शाश्र्वत सुख, चैन, और 

शांति अवश्य मिल जाएगी ।

विनोद आनंद                            07/01/2017      फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड 

सुखी कौन ? 

​जो खुस रह शके, वो सुखी

दूसरों को खुस रख शके, 

और सुख दे शके,वो सुखी ।

जो दूसरों के सुख मे खुस रहे, 

जो खुद के सुख को बांटे वो सुखी  ।

जो सब को दोस्त माने, 

दूसरों कि मदद करे और उन कि 

जिंदगी आशान बनाए,वो सुखी ।

जो रोते को हसाए, गीरते को उठाए

सब को प्रेम करे और प्राणी मात्र पे 

दया करे,वो सुखी  ।

जो किसकि निंदा,चुगली और 

किस को नफरत, द्वेष न करे वो सुखी ।

जो तन, मन स्वस्थ,स्वमानी

और आदर्श व्यक्ति हो,वो सुखी ।

जो ईश्र्वर पे श्रध्धा-विश्र्वास करे, 

और हसी खुसी से जीए,वो सुखी ।
विनोद आनंद                              27/12/2016     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

सहन करना

​हम गरमी में छाँव चाहते है

और छाँव ठूंठते है ।

गरमी नही सह शकते

हम ठंडी में धूप चाहते है

और धूप ठूंठते है ।

ठंडी नहीं सह शकते ।

हम दु:ख में सुख चाहते है

और सुख ठूठते है  ।

हम दु:ख नही सह शकते ।

हम दूसरों कि गलतीयाँ

ठूठते है मगर खुद कि 

गलती नही देख शकते ।

हम नफरत में प्रेम चाहते है

और प्रेम ठूठते है  ।

हम नफरत नही सह शकते ।

हम अशांति में शांति चाहते है

और शांति ठूठते है ।

हम अशांति  सह नही शकते ।

हमे हर हाल और परिस्थिति में

सहन करना शीखना है और

परिस्थिति में बदलाव भी लाना है ।

सहन करना शीखने से जिंदगी

आसान बन जाती है  वरना जिंदगी

कठीन बन जाती है । 

विनोद आनंद                        09/12/2016          फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड