1784 चाबी

जैसे हर एक ताले कि
चाबी होती है एसे हर
एक समस्या के हल
कि चाबी और हर एक
सफलता कि चाबी होती है ।
मगर चाबी ढूँढनी पडती है ।
हर समस्या और सफलता
कि चाबी मिले तो समझो
कि किस्मत के ताले कि
चाबी मिल गई ।
जो समस्या कि चाबी अपने
हाथ में नहि उसे दूसरी चाबी
से खोलने कि कोशिश न करो,
परिस्थितिका स्वीकार करके
जीने कि आदत बनालो जिसे
दुःख महेशूस नहि होगा सुखो
कि बारिश होगी ।
समस्या से डर गया समझो
दुःखी हो गया ।
कोई समस्या ईन्सान से बडी
नहि, जैसे हर ताले कि चाबी
होती है एसे हर एक समस्या
कि चाबी यानि हल होता है ।
हल ढूँढना के खुश रहेना हि
सहि जीने सहि तरिका है ।
विनोद आनंद 11 /11/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1771 गीफ्ट जिंदगी को दो

कभी आपने अपने आप
को कोई गीफ्ट दिया है ।
जिंदगी ईश्र्वर कि गीफ्ट है ।
हमे जिंदगी को सुख शाति,
आनंद और अच्छे स्वास्थ
कि गीफ्ट देनी पडेगी ।
जिंदगी तुम्हारे कर्मो कि
रीर्टन गीफ्ट है । जिंदगी को
10 आसान गीफ्ट देना है ।
* करसत या चलने कि आदत से
अच्छे आरोग्य कि गीफ्ट ।
* दिन में अच्छे हेल्थी ब्रेकफास्ट,
लंच,और डीनर नियत समय से
अच्छे स्वास्थ कि गीफ्ट ।
* शरीर को दिन भर पानी कि
आवश्यकता है जब प्यास लगे
पानी पी लिजीए आलस न करो ।
पानी बैठ के पीना ।
* काम के बीच 15 मिनिट मन
पसंद गाना या गप्पे लडाओ जिसे
मन खुस और फ्रेश हो जाए ।
* किसी भी बात कि अति न करे
क्यूँकि अति सर्वत्र व्रजेत ।
* सकारात्मक सोच और बातों
का किंमती गीफ्ट दो जिंदगी को ।
* निरधारित समय पे 6 से 7 घंटे
कि निंद लेना, न कम न ज्यादा ।
* ईश्र्वर कि प्रार्थना और पूजा
श्रध्धा और विश्र्वास से करे ।
* ध्यान, प्राणायाम, मेडीटेसन
को भी समय देना ।
नये साल में यह सब 10 गीफ्ट
जिंदगी को दोगे तो तन, मन
स्वस्थ रहेगा, तो सुख, शांति,
और नया जीवन पाओगे ।
विनोद आनंद 26/10/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1752 दुःख के कारण

दुःख कि कोई एक परिभाषा
नहि होती, क्यूँकि जो किसी
के लिए दुःख है, वो दूसरों के
लिए सुख हो शकता है ।
दुःख के कारण कई होते है ।
मन हि दुःख का कारण है ।
अगर मन दुःख को दुःख न
माने तो, वो दुःख नहि लगता ।
मुशीबतें,तकलिफें,परेशानी को
दुःख न समजे वो अपने कर्मो
का फल है या हम खुद है ।
किसी चीज़ के अभाव दुःख
का कारण बनता है ।
किसी का अभिप्राय दुःख
कारण बन शकता है ।
खुद का अभिगम दुःख का
कारण बन शकता है ।
खुद कि आतदें, स्वभाव और
भावनाएँ दुःख का कारण बन
शकता है ।
जीवन में असंतोष दुःख का
कारण बन शकता है ।
ईच्छा पूर्ण न होना दुःख का
कारण बन शकता है ।
सभी एसे कारण है जो दूर
कर शके तो जीवन में दुःख न
रहे बस सुख हि सुख है ।
दुःख के प्रति अभिगम बदलो
दुःख चुनौती और गुरू समजो
तो, दुःख से दुखी नहि होंगे ।
विनोद आनंद 11/10/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1698 गुस्सा का विज्ञान-2

गुस्सा खुद को, दूसरे को
सुधारने के लिए, अन्याय के
खिलाफ, किसी के कल्याण
कि खातिर करना चाहिए ।
यह गुस्से का सकारात्मक
पहेलु है । एक ओर पहेलू
है कि अगर कोई आपका
किसी कारण से अपमान
करे तो उस के बदले में
तुरंत गुस्सा नहि करके वो
गुस्से को जिंदा रखके जिस
वज़ह से अपमान किया है
उस वज़ह को हि दूर कर
के मुह तोड जवाब देना है ।
गुस्से का नकारात्मक ढंग
से बढावा नहि देना है, जो
किसी के लिए अच्छा नहि ।
कोई गुस्सा करे तो आप
खुद पे नियंत्रण करके चुप
रहे और उस के प्रति क्षमा
का भाव प्रगट करे तो उस
का गुस्सा शांत हो जाएगा ।
किसी भी वज़ह से अगर
गुस्सा करना है तो होश
में रह कर गुस्सा करो,
लेकिन उस का रेगुलेटर
आप के पास रखो और
बात बढने से पहेले गुस्से
को शांत करना जरूरी है ।
गुस्से तन और मन पर भी
बहुत बुरा अशर होता है ।
संबंध बिगते है और संबंध
बिगडने से जीवन बिगडता है ।
गुस्सा वो ज्वालामूखी है,जो
सब कुछ जला के राख कर
देता है जिंदा रहते है मगर
जिंदगी छिन लेता है । अगर
आप उस के शिकार है तो
आप शिकारी बन के उस
का शिकार करके जीवन
को सुख शांति से भर दो ।
विनोद आनंद 16/08/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1585 दौलत

ये एसो आराम देने वाली,
लेकिन रातों कि निंद उडाने
वाली, और बगलोंज़,गाडीयाँ
सगवड देने वाली लेकिन दिन
का चैन चुराने वाली, ये दौलत
अगर मिल भी जाए तो क्या है ?
समाज़ में प्रतिष्ठा दिलाने वाली
लेकिन परीवार से सुख छीनने
वाली, और जो चाहे वो सब कुछ
देने वाली, लेकिन अस्वस्थ करने
वाली ये दौलत अगर मिल भी
जाए तो क्या है ?
अमीरों कि नामावली में नाम
लिखने वाली, लेकिन रिश्तेदारों
से दूर करने वाली और महेफिलें
और क्लबो का माहोल देने वाली,
लेकिन परिवार का संग छुडाने
वाली, ये दौलत अगर मिल भी
जाए तो क्या है ?
दौलत कि दौड और नसे ने
अभिमानी और घमंडी बनाने
के बाद,सब कुछ छीन कर,ये
दौलत भी मिल जाए तो क्या है ?
दौलत कि भूख मिटती नहि लेकिन
संस्कार बिगाड ने वाली,शरीर और
संबंध बिगाडने वाली, ये दौलत
अगर मिल भी जाए तो क्या है ?
जरूरत से ज्यादा दौलत है धीमा
और मीठा जह़र, लेकिन जीते जी
मारने वाली ये दौलत अगर मिल
भी जाए तो क्या है ?
विनोद आनंद 02/05/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1567 सुखो का त्रिवेणी संगम

सब से पहेला सुख किस में है ?
वो न हो तो सभी सुख है बेकार ।
पहेला सुख स्वस्थ शरीर में है ।
संकल्प करो स्वस्थ शरीर का ।
प्राथमिकता दो, प्रयास करो ।
सब से बडा सुख कौनसा है ?
वो न हो तो सभी खुस है बेकार ।
सब से बडा सुख है परिवारिक ।
संकल्प करो परिवारिक सुख का ।
कामना, प्रार्थना और प्रयास करो ।
सब से जरूरी सुख कौनसा है ?
सबसे जरूरी सुख भोजन है ।
संकल्प करो,परिश्रम करो पाने का ।
यह तीनों सुख के बाद सब सुख है
वो बीन जरूरी, बाद में समय हो तो
कामना करके करो प्रयास मिले तो
खुश होना,न मिले तो दुःखी न होना ।
बीनजरूरी सुखको प्राथमिकता मत
दो, वरना जरूरी सुख छूट जाएगें ।
शरीर स्वास्थ्य, परिवारिक और
भोजन का सुख है त्रिवेणी संगम ।
जिसे तीनों मिले वो है खुसनसीब ।
विनोद आनंद 14/04/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1511 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-84

🌹 निशाना
जिंदगी का निशाना तुम्ह हो
कभी वो खुशी कि या कभी
गम कि गोलियाँ छोडती है ।
खुशी कि गोलियाँ हसाती,
गम कि गोलियाँ रूलाती है ।
खुशी में तो सभी हसते है ।
गम कि गोलियाँ से बचने के
लिए हसी खुशी का बखतर
पहेनकर जिंदगी को अपना
निशाना बनाकर सफल होना है ।
🌻 हिसाब रखना
आप कि खुबसूरती से, खुबीयों से
और अच्छे व्यवहार से कितनों को
खुश किया है उस का हिसाब न
रखो तो कोई बात नहिं लेकिन
बुरी आदतों और बुरे व्यवहार से
कितनों को दुःखी किया है ईस का
हिसाब जरूर रखना क्यूँ कि वो
दुःख दूसरों को दिया है वो हि दुःख
वापीस आएगा जरूर,रहेना तैयार ।
🍁 निर्णय
दु:ख दर्द देता तो सहन करने
कि शक्ति को भी बढाता है ।
दुःख आवश्यक है अनिवार्य है
वरना सुख कि खुशी का
अहेसास कैसे होगा ।
जिंदगी सुख दुःखों का निवास है ।
सुख कि खुशी को सँभालकर रखो
जो दुःख दर्द में मरहम बन जाए ।
दुःख दर्द को रोक नहि शकते
उसे दुःखी नहि होने का निर्णय
हम ले शकते है, खुश रह शकते है ।
विनोद आनंद 27/02/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड