1585 दौलत

ये एसो आराम देने वाली,
लेकिन रातों कि निंद उडाने
वाली, और बगलोंज़,गाडीयाँ
सगवड देने वाली लेकिन दिन
का चैन चुराने वाली, ये दौलत
अगर मिल भी जाए तो क्या है ?
समाज़ में प्रतिष्ठा दिलाने वाली
लेकिन परीवार से सुख छीनने
वाली, और जो चाहे वो सब कुछ
देने वाली, लेकिन अस्वस्थ करने
वाली ये दौलत अगर मिल भी
जाए तो क्या है ?
अमीरों कि नामावली में नाम
लिखने वाली, लेकिन रिश्तेदारों
से दूर करने वाली और महेफिलें
और क्लबो का माहोल देने वाली,
लेकिन परिवार का संग छुडाने
वाली, ये दौलत अगर मिल भी
जाए तो क्या है ?
दौलत कि दौड और नसे ने
अभिमानी और घमंडी बनाने
के बाद,सब कुछ छीन कर,ये
दौलत भी मिल जाए तो क्या है ?
दौलत कि भूख मिटती नहि लेकिन
संस्कार बिगाड ने वाली,शरीर और
संबंध बिगाडने वाली, ये दौलत
अगर मिल भी जाए तो क्या है ?
जरूरत से ज्यादा दौलत है धीमा
और मीठा जह़र, लेकिन जीते जी
मारने वाली ये दौलत अगर मिल
भी जाए तो क्या है ?
विनोद आनंद 02/05/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

Advertisements

1567 सुखो का त्रिवेणी संगम

सब से पहेला सुख किस में है ?
वो न हो तो सभी सुख है बेकार ।
पहेला सुख स्वस्थ शरीर में है ।
संकल्प करो स्वस्थ शरीर का ।
प्राथमिकता दो, प्रयास करो ।
सब से बडा सुख कौनसा है ?
वो न हो तो सभी खुस है बेकार ।
सब से बडा सुख है परिवारिक ।
संकल्प करो परिवारिक सुख का ।
कामना, प्रार्थना और प्रयास करो ।
सब से जरूरी सुख कौनसा है ?
सबसे जरूरी सुख भोजन है ।
संकल्प करो,परिश्रम करो पाने का ।
यह तीनों सुख के बाद सब सुख है
वो बीन जरूरी, बाद में समय हो तो
कामना करके करो प्रयास मिले तो
खुश होना,न मिले तो दुःखी न होना ।
बीनजरूरी सुखको प्राथमिकता मत
दो, वरना जरूरी सुख छूट जाएगें ।
शरीर स्वास्थ्य, परिवारिक और
भोजन का सुख है त्रिवेणी संगम ।
जिसे तीनों मिले वो है खुसनसीब ।
विनोद आनंद 14/04/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1511 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-84

🌹 निशाना
जिंदगी का निशाना तुम्ह हो
कभी वो खुशी कि या कभी
गम कि गोलियाँ छोडती है ।
खुशी कि गोलियाँ हसाती,
गम कि गोलियाँ रूलाती है ।
खुशी में तो सभी हसते है ।
गम कि गोलियाँ से बचने के
लिए हसी खुशी का बखतर
पहेनकर जिंदगी को अपना
निशाना बनाकर सफल होना है ।
🌻 हिसाब रखना
आप कि खुबसूरती से, खुबीयों से
और अच्छे व्यवहार से कितनों को
खुश किया है उस का हिसाब न
रखो तो कोई बात नहिं लेकिन
बुरी आदतों और बुरे व्यवहार से
कितनों को दुःखी किया है ईस का
हिसाब जरूर रखना क्यूँ कि वो
दुःख दूसरों को दिया है वो हि दुःख
वापीस आएगा जरूर,रहेना तैयार ।
🍁 निर्णय
दु:ख दर्द देता तो सहन करने
कि शक्ति को भी बढाता है ।
दुःख आवश्यक है अनिवार्य है
वरना सुख कि खुशी का
अहेसास कैसे होगा ।
जिंदगी सुख दुःखों का निवास है ।
सुख कि खुशी को सँभालकर रखो
जो दुःख दर्द में मरहम बन जाए ।
दुःख दर्द को रोक नहि शकते
उसे दुःखी नहि होने का निर्णय
हम ले शकते है, खुश रह शकते है ।
विनोद आनंद 27/02/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1421 ए भी क्या जीना है ?

ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में सुख,चैन,शांति न
हो और मान सन्मान न मिले ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में रिशेंदारों, दोस्तों
का प्यार और साथ न मिले ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में अकेलापन,निराशा
और व्याकुलता हतासा सताए ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में शारीरिक,मानसिक
और संतान सुख न मिले ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
बहुत कुछ हो मगर जिंदगी में
संतोष,भक्ति और आनंद न हो ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में क्लेश, झगडे हो,
और रिश्तों में अपनापन न हो ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में तनाव, परेशानी हो,
निष्फलता और असंतोष हो ।
ए भी क्या जीना है यारो कि
जिंदगी में मरते मरते और उसे
को बोज समजकर जीए ।
विनोद आनंद 10/12/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1362 दुःख का विज्ञान

-दुःख का विज्ञान होता है ।
अगर आप नही जानते तो
दुःख सताता है, दुःखी करता है ।
दु:ख का विज्ञान चिंतन और
समजदारी का विषय है जिसे
दुःख से पर होकर जी शकते है ।
अज्ञानता दुःख कारण बनती है ।
दुःख तो होता है,उस का कारण भी
होता है और निवारण भी होता है ।
हम अनुकूलता को सुख और
प्रतिकूलता को दुःख समजते है ।
हम जो चाहते या ईच्छा करते है
उस के अनुसार नही होता उसे
हम दुःख कहते है और हमारी
दूसरो के प्रति अपेक्षा पूर्ण नही
होती उसे हम दुःख समजते है ।
दुःख कारण मन कि मान्यता है ।
दुःख को सकारात्मक द्दष्टि से देखो
तो सहन करने कि शक्ति आएगी ।
दुःख अपने हि कर्मो का फल है
ईसलिए उसे ईश्र्वर का प्रसाद
समजकर खुसी से सहन करो ।
सुख दुःख जीवन का हिस्सा है,
दुःख में बहोत दुःखी न होना,सुख
में बहेक न जाना मन का समतुल
बनाकर जिंदगी जीना हि सही
तरीका है हर पल खुस रहने का ।
दुःख हमे मजबूत बनाने, शीखाने
और ईश्र्वर कि याद दिलाने आता है ।
दुःख दुश्मन नही गुरु है तुम्हे अच्छे
कर्म करने कि नसिहत देने आता है ।
विनोद आनंद 02/11/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1320 असली खुशी

जो खुशी अंदर से होती है
और शाश्वत होती है वो हि
असली खुशी है ।
वो कैसे प्राप्त हो शकती है ?
कुछ अच्छी आदतों से जैसे
कि खुश रहने कि आदत और
खुशी कि ईच्छा,चेष्ठा करने से ।
जीवन में सकारात्मक सोच से,
स्वीकार भाव से, समजोता,
समाधान से और खुश लोगो का
संग करो तो खुशी प्राप्त होती है,
वो असली खुशी होती है ।
कुछ नई मान्यता द्रष्टिकोण बदल
देने से असली खुशी प्राप्त होती है ।
जैसे कि दुःख मन का कारण है
हमारी ईच्छा और अनुकूल हो
तो मन उसे सुख कहेता है नही
तो उसे दुःख कहेता है ।
कोई भी परिस्थिति हो उसे में
खुश रहने कि आदत से दुःख
का अहेसास कम हो जाएगा ।
दुःख को दुःख नही वो तुम्हारा
गुरु है कुछ शीख लो और खुश
रहने कि आदत डाल दो ।
दुःख अपने कर्मो का फल है
उसे खुशी से सहन करो और
अच्छा काम करके खुश रहेना
शीख लेने से असली खुशी मिलेगी ।
दूसरा द्रष्टिकोण यह है कि,
जो भी होता वो अच्छे और
तुम्हारे विकास के लिए है ।
जब आप के दिल दिमाग में
दुःख-सुख, जीत-हार, मान
अपमानके प्रति समभाव प्रगट
होगा तब आप को असली और
शाश्वत खुशी का अहेसास होगा ।
विनोद आनंद 08/10/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1208 सबक

सबक तो शीखना चाहीए
खुद या दूसरों के अनुभव से ।
क्यूँकि सबक से सुधार और
सुधार से बहेतर जिंदगी ।
जो गलतियाँ से सबक नही
शीखते वो एक ओर गलती
करके जिंदगी को कठीन
बनाकर परेशान होते है ।
जिंदगी का दूसरा नाम हि
सबक है , और सबक से
शीखने से जिंदगी में सब
कुछ ठीक कर शकते है ।
जिंदगीमें सबक से नही
शीखना है जिंदगी से बेवफाई ।
सबक से शीखने से भिवष्य में
मुश्किलीयाँ या परेशानियाँ
कम कर शकते है और सुख
शांति का जिंदगी जी शकते है ।
जिंदगी पाठशाला है उसमें
सबक शीखना मुनाशीत है ।
सबक से शीखते रहो, आगे बढते
रहो और कामीयाब होते रहो ।
विनोद आनंद 14/06/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड