एसी प्रेक्टीस हो जाए

​जरा रूको, सोचो और फिर

कुछ बोलो, या कुछ करो 

या जवाब दो, उस से पहेले 

कुछ भी नही ।

एक एसा पल, जो खुद से, 

मन से बुध्धिमता से 

बात करके, सही निर्णय 

लेने का वक्त है, जो सही 

परिणाम दे । 

जीवन में एसी प्रेक्टीस

अगर रास आ जाए और 

आदत बन जाए तो कुछ 

जल्द बाज़ी में खराब 

परिणाम कि गुंजाईस नही ।

सफलता ही सफलता होगी ।

जीवनमें होगा सुख,शांति का

 आगमन ।

विनोद आनंद                           05/10/2016

फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

  

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