1918 रचनात्मक गुण

रचनात्मकता का गुण
आपको भीतर में लाना है ।
जो काम नहि होते वहाँ
रचनात्मक गुण चाहिए ।
कोई घटना, हालात में
रचनात्मक गुण चाहाए ।
जहाँ सुधार या नवीकरण
जरूरी हो वहाँ रचनात्मक
गुण होना जरूरी होता है ।
कोई भी काम को करने के
कई तरीके है हमे सोचना है
और बहेतरीन को चुनना है ।
रचनात्मक सोच कहेती है कि
हर समस्या को सुलजाने के
दश उपाय है उस में से एक
हमे बेहतरिन ढूँढना है ।
रचनात्मक सोच से मस्तिष्क
को कसरत मिलती है,अच्छा
ब्लड सरक्यूलेशन होता है ।
रचनात्मक सोच कहेती है कि
सब कुछ संभव है ।
सिर्फ सोचने का अभ्यास करने
के बाद रचनात्मक सोचने कि
आदत पड जाती है ।
सकारात्मक और आशावादी
सोच से रचनात्मक सोच को
बढावा मिलता है ।रचनात्मक
सोच से निजी जीवन में और
व्यवसाईक जीवन में भी बहुत
लाफादाई होती है ।
विनोद आनंद 06/03/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1915 … बदल जाए तो….

नजरियाँ बदल जाए तो
नजारे बदल जाए ।
दिशा बदल जाए तो
दशा बदल जाए ।
किस्ती बदल जाए तो
किनारे बदल जाए ।
रास्ते बदल जाए तो
मंझिले बदल जाए ।
सोच बदल जाए तो
जीवन बदल जाए ।
समय बदल जाए तो
रिश्ते बदल जाए ।
देश बदल जाए तो
भाष बदल जाए ।
स्वभाव बदल जाए तो
जीवन बदल जाए ।
बदलाव आवश्य है
वरना वहाँ रहेंगे
जहाँ जैसे थे वैसे हि
रहेंगे न कोई सुधार ।
बदलना प्रकृति का
नियम है हमे भी तो
बदलना है जीवन में
कुछ करके दिखाना है ।
परिवर्तन कुदरत का
नियम है हमे कुदरत
के नियम से बदलना है ।
हर वक्त बदलने कि,
सुधरने कि कोशिश
जीवन को बदल देगी ।
विनोद आनंद 04/03/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1840 दूसरों को सुधारना

सबसे पहेले दूसरोंको सुधार
सहि नहि है, पहेले खुदु को
सुधारना हि सहि बात है ।
खुद को सुधारने से दुसरों
को सुधारने का लाईसन्स
मिलता है ।
दूसरों को सुधारने से पहेले
खुद को पांच प्रश्र्न पूछना है ।
1) क्या आप सहि व्यक्ति हो ?
क्या आप गुरू या वडील,
हो जिस को सुधारना है ?
2) क्या किसी को सुधारने का
आप का मक्सद सहि है ?
उसे मजाक बनाना या उस
को वास्तव में सुधारना है ।
3) क्या आप का उस को
सुधारने का तरिका सहि है ?
4) जिसे सुधारना है,क्या उस
का सुधारने का वक्त सही है ?
5) जिस वक्त आप जिसको
सुधारना है वो क्या सही
जगह है ?
जब यह सभी प्रश्र्नों का जवाब
सहि है तो वास्तव में आप दूसरों
सुधार शकते हो ।
सहि योग्यता,सहि मकस्द,सहि
तरिका,सहि वक्त, जगह हो तो
आप दूसरों को सुधार शकते हो ।

विनोद आनंद 28/12/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1781 बारह समझ

ईश्र्वर कृपा से सत्संग
सत्संग से ज्ञान,ज्ञान से समझ
समझ से सुधार,सुधार से सफलता
सफलता से प्रसिध्धि ।
जीवन में कुछ आवश्यक समझ हो तो
जीवन बने सुंदर,आसन और समृध्ध ।
समझ-1: जैसा व्यवहार आप दूसरों
से चाहते हो,एसा व्यवहार दूसरों से करें ।
समझ-2 : दूसरों में अच्छाई-खुबीयाँ देखना ।
समझ-3 : दूसरों कि गलती को माफ करना
और खुद कि गलती कि माफि मागना ।
समझ-4 : खुद को सुधारना, दूसरों को नहि ।
समझ-5 : कर्म के फल कि और दूसरों से
अपेक्षा मत रखना ।
समझ-6 हर हाल में मुस्कराना और खुस
रहेना शीखना ।
समझ-7 वक्त कि किंमत समझने और वक्त
के साथ चलना, समय का सदोपयोग करना।
समझ-8 जीवन में सकारात्मक सोचो और
आशावादी बनना ।
समझ-9 काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, ईर्षा
जैसे कसाई ओ से बचना ।
समझ-10 प्रेम, दया, करूणा, शांति जैसे
सद् गुणों से दोस्ती करना ।
समझ-11 किसी कि प्रसंशा, आभार करना ।
समझ-12 समझ को जीवन में आत्मसात करना ।
बारह समझ जीवन में आ जाए तो जिंदगी
सुंदर, आसन, सफल और समृध्ध बनेगी ।
विनोद आनंद 08/11/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1698 गुस्सा का विज्ञान-2

गुस्सा खुद को, दूसरे को
सुधारने के लिए, अन्याय के
खिलाफ, किसी के कल्याण
कि खातिर करना चाहिए ।
यह गुस्से का सकारात्मक
पहेलु है । एक ओर पहेलू
है कि अगर कोई आपका
किसी कारण से अपमान
करे तो उस के बदले में
तुरंत गुस्सा नहि करके वो
गुस्से को जिंदा रखके जिस
वज़ह से अपमान किया है
उस वज़ह को हि दूर कर
के मुह तोड जवाब देना है ।
गुस्से का नकारात्मक ढंग
से बढावा नहि देना है, जो
किसी के लिए अच्छा नहि ।
कोई गुस्सा करे तो आप
खुद पे नियंत्रण करके चुप
रहे और उस के प्रति क्षमा
का भाव प्रगट करे तो उस
का गुस्सा शांत हो जाएगा ।
किसी भी वज़ह से अगर
गुस्सा करना है तो होश
में रह कर गुस्सा करो,
लेकिन उस का रेगुलेटर
आप के पास रखो और
बात बढने से पहेले गुस्से
को शांत करना जरूरी है ।
गुस्से तन और मन पर भी
बहुत बुरा अशर होता है ।
संबंध बिगते है और संबंध
बिगडने से जीवन बिगडता है ।
गुस्सा वो ज्वालामूखी है,जो
सब कुछ जला के राख कर
देता है जिंदा रहते है मगर
जिंदगी छिन लेता है । अगर
आप उस के शिकार है तो
आप शिकारी बन के उस
का शिकार करके जीवन
को सुख शांति से भर दो ।
विनोद आनंद 16/08/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1674 गलतियाँ

ईन्सान गलतियाँ करता है
लेकिन सुधरता नहि और
उस से सबक शीखता नहि,
लेकिन गलती दोहराता है ।
ईन्सान गलतियों का पूतला है ।
ईन्सान गलतियाँ बार बार
करके मुश्केलियाँ बढाता है ।
गलतियाँ जाने अनजाने में हो
जाती, जान बुजकर गलतीयाँ
करना मूर्खता कि निशानी है ।
बीना सोच समज से किया
काम अक्सर गलत होता है ।
गलती से बचना है तो सोच
समज कर काम करना चाहिए ।
गलतियाँ सफलता का बैरी है ।
गलतियाँ निष्फताका दोस्त है ।
गलतियाँ से नुकशान होता है ।
सावधान, गलत काम करने से
पहेले सोचो और काम न करो ।
गलतियाँसे रिश्ता तोडो,सुधारसे
रिश्ता जोडो तो होंगे कामयाब ।
गलतियाँ नाकामीयबी का बीज है ।
गलतियों से बचो, निष्फलता बचो ।
विनोद आनंद 24/07/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1504 रोगों का ढेर

मानव का तन, मन और जीवन
रोगों का ढेर है । तन और मन के
रोगों का ईलाज़ डोक्टर करे ।
हम जीवन में कई एसे रोगों को
जाने अनजाने पनहा देते है, उस
का जिक्र करना जरूरी है क्यूँ कि
उसका ईलाज कर शके वरना
जीवन को खोखला कर देंगे ।
* क्या कहेगें लोग-सब से बडा रोग ।
* मन मानी करना ।
* मैं ठीक हूँ सब गलत है ।
* किसी कि बात नहि सूनना
* दूसरों कि भूल निकालना ।
* नकारात्मक विचार करना ।
* मन-ईन्द्रयों कि गुलामी करना ।
* फरियाद करना,कमीयाँ निकालना।
* मैं कहेता हूँ या करता हूँ वो सच है ।
* काम चोरी,काम को कल पर छोडना ।
* खुद कि प्रशंसा करना दूसरों कि नहि ।
* दूसरों को सलाह देना और सुधारना ।
जीवन में यह सभी रोगों न हो तो जीवन
मधुवन और स्वर्ग बन जाए ।
विनोद आनंद 17/02/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड