1047 तराझु

बचो पाप से पल पल तो
होगा सूर्योदय पुण्य का ।
फिर होगा पल पल पुण्य ।
पाप कि हस्ति को मीटाना है ।
पुण्य का सामराज्य बनाना है
मगर कैसे बचे पाप से हर पल ?
हर पल जो भी बोले या कर्म करो
उसे पाप-पुण्य के तराझु में तोलो ।
भारी हो पाप का पल्ला तो,लगाओ
ब्रेक, रूक जाओ पाप नही होगा ।
पुण्य का पल्ला भारी तो, आगे बढो
पुण्य का हिसाब बढता जाएगा ।
जीवन मे सूर्योदय होगा पुण्य का ।
पाप पुण्य कि किताब है जिंदगी,
किताब लिखता है उपर वाला ।
लिखाने वाले सिर्फ हम हि तो है ।
ध्यान रहे, याद रहे, सावधान रहे ।
यही तो है सही तरीका पल पल
पापो से बचने का, आजमाईए ।
विनोद आनंद 23/01/2018
फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड

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988 कोशिश

हम परेशान क्यू होते है ?

कभी सोचा है ? सोचोगे तो

परेशान नही होंगे ।

हम मुश्केलियों के डर से

गभराकर परेशान होते है ।

हम मुशकेलियों को हम से

ज्यादा ताकावान मानते है ।

मुश्केलियों में चिंता करके

तनाव में आ जाते है ।

लेकिन उस के हल के

लिए चिंतन नही करते और

परेशान होते रहते है ।

मुश्केलियाँ क्यू आती है ?

उस के बारे में भी सोचो ।

मुश्केलियाँ कम होगी तो

परेशान कम होंगे ।

मुश्केलियाँ, अस्तव्यस्थ

अशिस्त जीवनशैली और

अपने बूरे स्वभाव और

बूरी आदतों से आती है ।

बस मुश्केलियाँ का कारण

मीटा दो तो मुश्केलियाँ कम

हो जाएगी और परेशान

नही होना पडेगा ।

मुश्केलियाँ को मीटाना

को मुशकेल काम नही है ।

कोशीश कामियाबी दिलाएगी ।

विनोद आनंद 30/11/2017 फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

860 द्रष्टि और सृष्टि

जैसी द्रष्टि एसी सृष्टि

जैसी सोच एसी द्रष्टि ।

जब आँखे देखती है 

तब मन सोचता है

सोच द्रष्टि कि जननी है ।

गलत सोच गलत द्रष्टि

गलत द्रष्टि गलत सृष्टि ।

सही सोच सही द्रष्टि

सही द्रष्टि सही सृष्टि ।

सकरात्मक सोच सहि द्रष्टि  

सद् बुध्धि सकरात्मक सोच ।

ज्ञान से बनती है सद् बुध्धि ।

सृष्टि सही या गलत ?  

द्रष्टि करेगा फैसला ।

आँखे सिर्फ देखती है

मन द्रष्टि देता है और

हम आत्मा, आत्मशक्ति 

मन में सही सोच जगए ।
सब सही, अच्छा और 

सुंदर  नज़र आता है ।

विनोद आनंद                                28/07/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

 

838 नज़रिया

अच्छाई में बूराई देखने कि

होती हो बूरी आदत ।

जैसी सोच वैसा नज़रिया 

जैसा नज़रिया बैसी आदत, 

यह है नकारात्म नज़रिया ।

बूराई में अच्छाई देखने कि

होती हो अच्छि आदत ।

जैसी सोच वैसा नज़रिया 

जैसा नज़रिया बैसी आदत, 

यह है सकारात्मक नज़रिया ।

कई लोग हो ते है मख्खी कि तरह 

जिसे गंदकि हि रास आती है

तो कई लोग हो ते मधुमख्खी कि

तरह जिसे दूर्गंध नही फूलो कि 

खुशबू ही रास आती है ।

कई लोग हो ते है कौवे कि तरह 

जिसी वाणी होती है कटु।

तो कई लोग हो ते कोयल कि

तरह जिसी वाणी होती है मीठी।

अच्छि सोच रखना तो अच्छा

बनेगा नज़रिया और आदत,  

जीवन बनेगा का अच्छा ।

बूराई से नही रखना रिश्ता 

तो हर रिश्ता होगा कामीयाब ।

विनोद आनंद                                07/07/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

789 सफल व्यक्ति कि सोच

सफल व्यक्ति कि सोच

कैसी होती है ? कि 

वो सफल होते है ।

सफल व्यक्ति कि सोच

सकारात्मक होती है ।

नकारात्मक नही ।

सफल व्यक्ति कि सोच

सर्जनात्म होती है ।

सफल व्यक्ति कि सोच

सही होती है गलत नही ।

सफल व्यक्ति कि सोच

आशावादी होती है ।

निराशावादी नही ।

सफल व्यक्ति कि सोच

लक्ष्य के अनुकूल होती है ।

सफल व्यक्ति कि सोच 

आयोजन युक्त होती है ।

सफल व्यक्ति कि सोच

सफलता कि होती है, 

निष्फलता कि नही ।

सफल व्यक्ति कि सोच

विकास कि होती है ।

विनाश कि नहीं ।

सफल व्यक्ति कि सोच

स्पष्ट होती है ।

सफल व्यक्ति कि सोच

संयमी-स्थिर होती है ।

एसी सोच,सफलता का बीज है ।

अपनी सोच एसी बनालो तो

आप सफल व्यक्ति होंगे ।

विनोद आनंद                                 26/05/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

742 सही तरीका

कोई भी काम करने का 

सही तरीका होता है ।

सही तरीक से काम 

कम समय में, आराम से

और अचछा होता है ।

हमे फूरसत कहाँ 

सही तरिका ढूंढने का ।

तरीका सही तो सफलता  ।

सही काम करने का तरीके

ही सही जीवन जीने तरीका है।

काम करने का जो भी तरीका हो, 

उसे भी अच्छा तरीका हो शकता है, 

जिसे कम समय मे,आसानी से और

अच्छा काम हो शकता है ।

बुध्धि से जरा सोचो तो

मिलेगा सही तरीका फिर

अपना कर देखो फायदा होगा

मन की सर्जन शक्ति को

जगाओ सही तरीके अपनते 

रहो तो जीवन,होगा सफळ ।

विनोद आनंद                               16/04/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

कभी सोचो,,,, 

​कभी सोचो कही मैं

अपनी जिम्मदारी 

अच्छी तरह निभाता हूँ

या बेजिम्मदार हूँ ।

कभी सोचो कही मैं

अपनों से वफादा हूँ, 

या बेवफाई करता हूँ । 

कभी सोचो कही मैं

अपनों से प्रेम करता हूँ, 

या नफरत करता हूँ । 

कभी सोचो मैं दोस्तो से 

दोस्ती निभाता हूँ, 

या दुश्मनी रखता हूँ । 

कभी सोचो कही मैं

दूसरों के साथ सही

व्यवहार करता हूँ, या 

गलत  व्यवहार करता हूँ ।

कभी सोचो कही मुझे

प्राणी मात्र पर रहेम है

या बेरहेम हो गया  हूँ ।

कभी सोचो कही मैं

घर मे मर्यादा का 

पालन करता हूँ 

या नही करता हूँ ।

कभी सोचो कही मैं

मैं ईमानदार हूँ, या 

बेईमानी करता हूँ । 

आप का जवाब सही है 

तो आप ईन्सान हो

वरना ईन्सानके बेस में

कुछ ओर हो ।

विनोद आनंद                              20/01/2017    फ्रेन्ड, फिलोसोफर,गाईड