1730 विचार शुध्धि कैसे करे ?

जिंदगी का महत्त्वपूर्ण
हिस्सा है आपके विचार ।
जैसे विचार के बीज एसा
जीवन बनेगा । जैसे जीवन
बनाना एसै विचार करो ।
विचार का शुध्धिकरण करना
आवश्यक, जरूरी है, वरना
अशुध्ध-अपवित्र विचारों से
जीवन का घडतर नहि होगा ।
विचार शुध्धिकरण कैसे करे ?
विचारों का उदभव स्थान मन है,
अच्छी माहिती-ज्ञान से विचार
शुध्धि कर शकते है ।
जीवन में सद् वांचन,सद्श्रवण,
सद् संग से विचारों का शुध्धि
करण हो शकता है ।
हमे मन का चोकिदार बनना
होगा, जिसे अपने मन में शुभ,
मंगळ विचार स्टोर कराना है ।
अशुभ अमंगल बिचारों को
मन में घुसने नहि देना है ।
विचारों का शुध्धि मेडीटेशन,
प्रार्थना, मात पिता, गुरु के
संस्करों से होती है ।
प्रकृति के संग थोडा समय
व्यतित करने से विचारों का
शुध्धिकरण कर शकते है ।
क्यूँ कि वो शुध्ध पवित्र और
निर्मल स्वरूप है जिसे तुम
विचा शुध्धि कर शकते हो ।
मन को बार बार कहो कि
“मैं शुध्ध,पवित्र,प्रेम,ज्ञान
शांत,आनंद स्वरुप आत्मा हूँ ”
जिस से चित शुध्धि और
चिचार शुध्धि हो शकती है ।
विनोद आनंद 18/09/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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1720 सहि तरिका,पहेले सोचना

* सही तरिका
मिलते रहो, मिलाते रहो
खिलते रहो,खिलाते रहो,
हसते रहो, हसाते रहो,
आगे बढो, बढाते रहो
सहि तरिका है जीने का
अपनाते रहो सबको
अपना बनाते रहो ।
* पहेले सोचना
आप कितने भी बडे
क्यूँ न हो, आप कैसे भी
क्यूँ न हो, आप कहि भी
क्यूँ न हो, और कितने भी
बडे सेलिब्रेटी या बीजनेस
मेन क्यूँ न हो, जिस वक्त
आपने जीवन में अनैतिक
और गलत प्रेक्टिस कि
और स्त्री पुरूष कि मर्यदा
का भंग किया तो एक
दिन, आप का सब कुछ
और सुख चैन छीन लेगी,
कुदरत, क्यूँ कि यह कुदरत
को मंजुर नहि और न तुम्हे
माफ करेगी । ईसलिए एसा
करने से पहेले जरा सोचना
और सहि तरिके से जीना ।
अगर नहि सोचा तो कुदरत
तुम्हारे बारे में सोचेगी जरूर ।
विनोद आनंद 07/09/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1684 एसा क्यूँ

जिस का डर होता है
वोहि होता है, एसा क्यूँ ?
डर मनमें बैठ जाता और
फिर उसके बारेमें सोचते
रहता है और जो सोचते है
वो घटीत होने लगता है ।
जिस के बारे में ज्यादा
सोचते है, याद करते है,
एक दिन वो मिल जाते है
एसा क्यूँ ? तुम्हारी सोच
कि तरंगे ईतनी गहेरी और
तीव्र होती है कि वो खींचा
चला आता है ।
जो नहि चाहते थे वो
हि बात हो गई, एसा क्यूँ ?
नहि चाहते,उसको दोहराने
से वो हि बात होती है ।
ईसलिए डर को और जो
नहि चाहते उस के बारे में
ज्यादा न सोचना वरना
वो हि घटीत होगा ।
जैसी सोच,एसे विचार और
जैसे विचार करोगे एसा हि
जीवन में होने लगेगा ।
सोच को नियंत्रीत करो ।
जो चाहिए वो हि सोचो ।
विनोद आनंद 03/08/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1634 ईसलिए

एक गलत कदम का
परिणाम क्या होगा
सोच नहि शकते ।
फिर बाद में पस्ताने से
क्या फायदा ईसलिए
पहेला कदम सोच
समज कर बढाओगे तो
पस्ताना नहि पडेगा ।
एक गलत सोच जब भी
कर्म में परिवर्तित होगी
गलत कर्म हि करेगी,
ईसलिए गलत सोच
को तुरंत डफना दो तो
हि गलत कर्म से बचोगे ।
एक गलत शब्द किसी के
दिल के टूकडे टूकडे करदे
फिर रिश्तें बीखर जाए,
ईसलिए गलत शब्दो बोलने
वाली जुबा को दांतो तले
दबाकर रिश्तों को बचालो ।
एक गलत आदत जिंदगी को
कठीन बना देगी, ईसलिए गलत
आदतो से पीछा छूडाकर हि
जिंदगी आसान बना शकते हो ।
एक गलत निर्णय जिंदगी का
रूख बदल शकती है ईसलिए
सोच समजकर निर्णय लेना ।
एक गलती सज़ा बन कर
परेशान करेगी ईसलिए
गलती कि माफि मागकर,
सुधारकर परेशानी से बचो ।
हर एक गलत सोच, निर्णय
शब्द,आदत,गलती से दूर रह
कर जिंदगी को सँवार लो ।
विनोद आनंद 16/06/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1576 साक्षी

जिंदगी को बहेतर बनाना है
तो सही जीवन जीना जरूरी है ।
सही जीवन जीने का तरीका है
साक्षी भाव से जीना, मतलब है
सतर्क, होश में रह कर जीना ।
सो प्रतिशत जागृत रह के जीना ।
तुम क्या बोलते हो, कैसे चलते हो
क्या करते हो, पूरे होस हवास में
सोच समजकर, सही है वो करो ।
यह है शारीरिक साक्षी भाव ।
कभी भी अनजाने में, बेहोशी में
रोबर्ट कि भाँति कुछ भी न करो ।
दूसरा साक्षी भाव है मानसिक
तोर पे जागृत रहे तन के साथ
मन को भी साक्षी बनाए और
सोचे कि सही है या गलत,
फिर कार्य करना चाहिए ।
कभी मन आदत से बेहोशी में
कुछ गलत काम कर देता है
बाद में पता चलता गलत है ।
तीसरा साक्षी भाव है भावनाए
हर वक्त हमे अपनी भावना पर
नज़र रखनी है कि किस भाव से
काम हो रहा है ।हम आत्मा है ।
हमे आत्मा को अपना साक्षी
बनाकर हमे होश पूर्वक सोच
समज़कर काम करना है ।
सही तरीके से जी कर,जिंदगी
को बहेतर बना शकते है ।
विनोद आनंद 25/04/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1509 विचारों का विज्ञान-2

विचारों का विज्ञान-1 से आगे
ओर विचारों के बारे में जाने ।
* दुनिया एसी नहि है जैसी
दिखती है दुनिया एसी है जैसे
आप है, आप के विचार है ।
दुनिया हमारे विचारों का
आईना है शिकायत मत करो ।
* सब कुछ भरभूर है ,जो भी
कमी है उस में कोई मूळभूत
विचार या गलत मान्यता या
शंका कुशंकाओ का हाथ है ।
कमीयों का ज्रीक मत करो ।
* जबतक आप नहि चाहते
तब तक दूसरों के विचारों
का असर आप पर नहि हो
शकता अगर आप होस है ।
* आप के विचारों जल्द प्रगट
होने के लिए आप के भाव
विचार, वाणी और क्रिया का
एक रूप होना जरूरी है ।
विचारों के विज्ञान से निर्माण
करना है तो होस में रहेना है,
तो हि सकारात्मक विचारों से
भविष्यका निर्माण कर शकेगे ।
विचारों का नियंत्रण हि निर्माण है ।
विनोद आनंद 24/02/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1508 विचारों का विज्ञान-1

विचारों का विज्ञान हि
सकारात्मक विचारों का
निर्माण कर शकता है ।
उसे जानोगें, मानोगें और
समजोगें तो होंगे कामीयाब ।
* विचारों निर्माता है व्यक्ति
के भविष्य का जो मन में
पैदा होते है और दिन में
साठ हजार विचार आते है
चाहे अच्छे हो या बूरे,ज्याद
नकारात्मक विचार होते है ।
सजाग रहे कर बूरे विचारों
का अस्वीकार और अच्छे
का स्वीकार करना है ।
* दुनिया में जो भी निर्माण
हुआ है या होगा वो पहेल
विचारों में निर्माण होता है ।
* जो विचार जोस, होस में
आता है और अगर कोई
विरूध्ध विचार न आए तो
वो विचार हकिकत बनता है ।
* उस विचार पर ध्यान दो जो
जो आपको चाहिए, उस पर
ध्यान न दो जो नहि चाहिए ।
* एसा विचार न करो कि में
बिमार नही पडुगा, विचार
करो कि मैं स्वस्थ रहूँगा ।
ओर भी है कुछ बाकी, सब्र
करो ईन्तज़ार करो, धीरज
के फल होते है मीठे । क्रमशः
विनोद आनंद 24/02/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड