1617 बदनामी बरबादी और बेईज्जती

बदनामी बरबादी और
बेईज्जती तीनों जिंदगी कि
श्याम है, फिर आबादी का
सूरज कब निकलेगा कह
नहि शकते ।
निराशा तनाव चिंता और
डीप्रेशन का माहोल बनता ।
अगर कोई सहारा या संत
न मिलेतो आत्महत्या का
रास्ता खुल जाता है ।
एसे हालात में ईश्र्वर पर
विश्वास और श्रध्धा और
भक्ति हि सहारा बनती है ।
एसे हालत में स्वयं पर
विश्वास, हिमत, धीरज, मन
पर संयम या शुमचिंतक का
सहारा हि बदनामी बरबादी
और बेईज्जती के दल दल से
निकाल शकता है वरना अंत
आत्महत्या से होता है ।
सावधान, पहेले एसी आदतें,
दुर्णगें, खराब भावनाएँ और
खराब स्वभाव का निर्माण
न करे जो बदनामी बरबादी
और बेईज्जती का रास्ता है ।
अनैतिकता, अप्रमाणिकता का
रास्ता भी बदनामी बरबादी
और बेईज्जती का रास्ता है ।
बस फक्त एसा माहोल बनने से
पहेले रास्ता बददो, जो आबादी,
सुख शांति और समृध्धि कि
ओर जाता हो । कैसा भी
हालत हो जाए, आत्महत्या
का कभी दिल दिमाग में
खयाल भी मत लाना ।
एसे हालात खुद कि भूल और
कर्मो का नतीजा है उसे हमे
हि सुधारना है । तैयार रहो ।
विनोद आनंद 01/06/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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1596 प्रेम सच्चा या झूठा ?-2

सच्चे- झूठे प्रेम कि निशानीयाँ….
* सच्चे प्रेम में एक दूसरे का मान
सन्मान होता है और झूठे प्रेम में
एक दूसरे कि ईज्जत हि नहि करते ।
* सच्चा प्रेम सुरक्षा देता है, बचाव
करता है, झूठा प्रेम दिल दुखाता
और तोड देता है ।
* सच्चा प्रेम समझ से भरा होता है,
झूठा प्रेम मूर्खता से भरा होते है ।
* सच्चे प्रेम में बस विश्र्वास होता है,
झूठे प्रेम में शंकाए उठती रहती है ।
* सच्चा प्रेम वफादार रहेता है और
जूठा प्रेम धोखे से भरा रहेता है ।
* सच्चे प्रेम में उमीद नज़र आती है,
झूठे प्रेम उमीद नहि दिखाई देती ।
* सच्चे में खुद से प्रेम हो जाता है,
झूठे प्रेम में खुद से नफरत होती है ।
* सच्चे में सभी रीश्ते निखर जाते है,
झूठे प्रेम में रिश्ते बीगते जाते है ।
* सच्चा प्रेम हमेंशा बना रहेता है,
झूठा प्रेम लंबा नहि टिकता ।
सच्चे प्यार से स्वर्ग का निर्माण
और झूठे प्रेम से नर्क का निर्माण
होता है । प्रेम आत्मा परमात्मा का
असली स्वाभाव है । प्रेम से जिओ ।
विनोद आनंद 14/05/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1595 प्रेम सच्चा या झूठा ?-1

प्यार सच्चा या झूठा ?
लोग आसानी से कहते है,
कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ ।
सच्चे प्यार कि निशानीयाँ…..
* सच्चा प्रेम समर्पीत रहेता है,
झूठा अपने बारे में सोचता है ।
* सच्चा प्रेम सच्च बोलता है,
झूठा प्रेम झूठ के अंधकार में
रहेता, झूठ हि बोलता रहेता है ।
* सच्चे प्रेम में दया और करूणा
होती है वो आप के साथ गलत
व्यवहार कर हि नहि शकता ।
झूठा प्यार निर्दई होता है उसे
आप कि परवाह हि नहि होती ।
* सच्चा प्रेम सहन कर लेता है
झूठे प्रेम में सहन करने कि
ताकात हि नहि होती, शोर्ट
टेम्पर रहेता है ।
* सच्चा प्रेम हमेंशा झुकने को
तैयार रहेता है, झूठा प्रेम सिर्फ
अहंकार से भरा रहेता है ।
* सच्चा प्यार आप को प्रेम से
भर देता है और झूठा प्रेम आप
को प्रेम से वंछित रखता है ।
* सच्चे प्रेम में सिर्फ आनंद हि
आनंद होता है झूठे प्रेम में
सिर्फ कडवाहट होती है ।
* सच्चा प्रेम खुली किताब है
कुछ छूपाया नहि जाता, झूठे
प्रेम में सब छूपाया जाता है ।
ओर भी है निशानीयाँ पढो
प्रेम झूठा या सच्चा ? -2
विनोद आनंद 12/05/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1516 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-85

🌻 पसंदगी
स्वर्ग का स्वप्न छोड दे
नर्क का डर छोड दे
बूरे स्वभाव को छोड कर
अच्छे स्वभाव से स्वर्ग
बनाने का स्वप्ना देखे ।
तो नर्क का डर भाग
जाएगा । स्वर्ग यही है
और नर्क भी यही है ।
पसंदगी आप कि है
क्या बनाना है ?
🌺शुकून
जिंदगी में शुकून चाहिए तो
अपनों कि बातों को दिल से
मत लगाओ जो कुछ कहेना है वो
हसके के कहेना आवेश नहीं ।
अपनों को अपना समजना
और विश्वास रखना, न करना
शिकायत, न देना अवसर
शिकायत का तो मिलेगा शुकून ।
🌹 समजदार
कोई भी चिज़ कि किंमत उसे
पूछो जिस के पास वो चिज़
बहुत हि कम है या नहिं है ।
कोई भी चिज़ किंमत उसे
नहि है जिस के पास बहुत है ।
ईन्सान वो हि समजदार है
जो हर एक चिज़ कि सही
किंमत समजे, चिज़े चाहे कम
हो या ज्यादा या चिज़े न हो ।
विनोद आनंद 03/03/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1492 अशांति क्यूँ

एक पल कि शांति स्वर्ग
सुख कि अनुभूति ।
एक पल कि अशांति नर्क
के दु:ख कि अनुभूति ।
हम चाहते हुए भी एक
पल शांत नहि रह शकते ।
जैसे रोग निवारण सही
कारण से होता है एसे
अशांति का निवारण सही
कारणो हो शकता है ।
अशांति के करण कई है
जैसे अपनी अमर्यादित
कमनाए, वासनए,उमीदे
ईच्छाए या महत्व काँक्षाए ।
जैसे कि हमारी गलत,आदतें
भावनाएँ, स्वभाव,मान्यताएँ
और दरेक बाबतो में अति ।
जिसे हमे तकलीफे,मुश्किले
परेशानी और अशांति होती
है उसे दूर या कम करनेसे
शांति का माहोल बनता है ।
दूसरा कारणा हमारी जरूरत
से ज्यादा माहिती, शौख और
फेसन जिसे हम संस्कृति से
विकृति कि ओर जल्द आगे
बढते रहते है ।
हमारे भीतर शांति का बीज,
शांत स्वरूप आत्मा है बस हमे
उस पर फोकस करके शांति
बीज को अंकूरित करना है ।
जो चीज़े अशांति के पौधे
उगाडे है उसे जड से उखाड
के फेक देने है ।
विनोद आनंद 11/02/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1424 आदतें हि सब कुछ है

अच्छी आदतों का सुखद परिणाम ।
सुखद परिणाम से सुंदर जीवन ।
सुंदर जीवन तो स्वस्थ समाज और
स्वस्थ समाज से आबाद देश ।
बूरी आदतों का उलटा परिणाम ।
हरेक व्यक्ति कि अच्छी-बूरी आदतों
पर हि निर्भर है व्यक्ति, समाज और
देश का भविष्य ।
अच्छि आदतों से निर्माण और
प्रगति बूरी आदतों से विनास
और अधोगति यह नग्न सत्य
जितना जल्द समज ले ईतनी
जल्द अच्छे, सुखद और मंगल
परिणाम आयेगें ।
आदतों से हि बनता है स्वभाव
और स्वभाव से हि बनता है
बाणी, व्यवहार और वर्तन ।
आदतों पे ध्यान दे, जैसे कि
बूरी आदतों को दूर करो और
अच्छि आदतों के मालिक बनो ।
अच्छि आदतें हि विकास और
सफलता का बीज है । अगर बूरी
आदतों के बीज बोएगें तो तुम्हि
सोचो क्या होगा परिणाम और
कैसे कटेगी जिंदगी ।
विनोद आनंद 14/12/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1416 गुस्से से छूटकारा कैसा ?

पहेले गुस्सा तुम्हे पकडता है
न छोडा तो, जकड के रखता है ।
फिर कैसे पीछा छूडाए उस पर
ध्यान दो, उपाय सोचो, छोडो ।
गुस्सा अब स्वभाव बन गया है ।
स्वभाव शांत हो जाए तो गुस्सा
वाला स्वभाव बदल शकते है ।
उस के लिए हमारी एक मान्यता है
कि दूसरा मुझे गुस्सा दिलाता है,
उसने मेरा अपमान किया और
गुस्सा करने को मजबूर किया ।
गुस्सा करना के न करना वो तो
हमारी है पसंद, हमे यह मान्यता
बदले कि, अपने गुस्से का सिर्फ
हम हि जिम्मेदार है, क्यू कि वो
हमारी पसंद है वो बदल कर
कुछ सही तरीके से प्रति क्रिया
करे, गुस्से से नहि, सोचो और
प्रयास करो तो गुस्से पर काबू
पा शकते हो ।
गुस्सा कब करना है और कब
नही करना, किस पे करना है
या किस पे नही करना है उस
पर सोच कर बेवजह गुस्सा
करना छोड शकते है ।
थोडी जागृतता,मन-ईन्द्रियो
पर संयम रखना जरूरी है,
प्रयास द्दढता और अभ्यास से
गुस्से से छूटकारा पा शकते हो ।
विनोद आनंद 06/12/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड