1716 असली स्वभाव

मनुष्य का असली स्वभाव
क्या है ? जानना जरूरी है ।
आत्मा का स्वभाव हि मनुष्य
का असली स्वभाव होना है ।
लेकिन वो कुछ ओर होता है ।
आत्मा का स्वभाव है प्रेम, तो
मनुष्य का स्वभाव प्रेम हि है ।
मगर द्वेष, ईर्षा और नफरत में
तबदिल हो गया है ।
आत्मा का स्वभाव है शांति तो,
मनुष्य का स्वभाव हि है शांति ।
मनुष्य गुस्सा करेके अशांत है ।
आत्मा का स्वभाव है पवित्रता
तो मनुष्य का दिल साफ और
मन पवित्र होना चाहिए, मगर
मन मैला दिल भावना हिन है ।
आत्मा का स्वभाव है दयालु,
तो मनुष्य का स्वभाव दयालु है
मगर कठोर और दयाहिन है ।
आत्मा का स्वभाव है आनंद,तो
मनुष्य का स्वभाव भी आनंद है,
मगर मनुष्य, दुःखी, उदास और
निराश रहेता है ।
आत्मा ज्ञानी और शक्तिशाली है
मगर मनुष्य अज्ञानी, कमजोर है
क्यूँकि स्वभाव बदल गया है,
और ज्ञान और शक्ति का सहि
उपयोग नहि करता ।
हमे अपना असली स्वभाव प्राप्त
करके धरती को स्वर्ग बनाना है ।
विनोद आनंद 04/09/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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1705 ईज्जत कैसे पाओगे

ईज्जत हि ईन्सान कि
वो दौलत है जो जिंदगी में
सुख, शांति, चैन देती है ।
सभी हमारी ईज्जत करे
सबके दिल में हमे बसना
है तो हमे अपना व्यक्तित्व
निखारना है ।
कुछ बातों पे ध्यान देना है ।
* हमे खुद अपना स्वमान
रखना शीखना है । हम अपनी
गलत आदतें, व्यवहार, और
स्वभाव को बदलना होगा,
तो कोई हमारा अपमान नहि
करेगा लेकिन ईज्जत करेंगे ।
* हमे अपने आपको सब के
सामने अच्छी तरह से पेश
आना है । हमे अपने पहेरवेश
बातचीत,अभिनय और अपनी
अभिव्यक्ति को सुधारना है ।
तब सब हमारी ईज्जत करेंगे ।
* हमे बडा सपना देखना है
और उसे पाप्त करना है, तो
सब कि नजरों में हमारी
ईज्जत बढ जाएगी ।
* जिंदगी में हमेंशा ज्ञान
प्राप्त करना है, कुछ नया
शीख कर कुछ नया काम
करते रहेना है, तो सब कि
नजरों में ईज्जत बढ जाएगी ।
* आप सहि तरीके से बातचीत
करने कि कला शीखनी है तब
सब के दिलो पे राज़ करेंगे और
सब हमारी ईज्जत करेंगे ।
ईज्जत नहिं तो कुछ भी नहि
ईज्जत गई तो सब कुछ गया ।
इसलिए जीवन एसा जीओ कि
हमारी ईज्जत बढे कम न हो ।
विनोद आनंद 22/08/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1697 गुस्से का विज्ञान-1

गुस्सा सब को आता है
बहुत कम लोग होंगे जिसे
गुस्से पे काबू होता है ।
गुस्सा स्वभाव बन गया है ।
जिस को सब पर नियंत्रण
रखना है उसे गुस्सा आता है ।
जब कोई उस कि बात नहि
सुनता तब वो गुस्स होता है ।
जब आप कि अपेक्षा पूर्ण नहि
होती तब गुस्सा आता है ।
जो हर बक्त हर बात का मजा
लेना चाहता है और जब नहि
होता तब वो गुस्सा होता है ।
जो हमेंशा परफेक्सन-पूर्णता
कि उमीद करता है और नहि
होता ईसलिए गुस्सा होता है ।
कई वज़ह होती है गुस्से कि
जैसे अपमान, अहम्, अपूर्ण
ईच्छाए और बेवजह ईन्सान
गुस्सा करता है और वो तो
जिवन में करना पडता है
एसा समजता है ।
बात बात पे गुस्सा आना
ताकत नहि कमजोरी है ।
एसे तो अगर आप सच है
तो आप को गुस्सा नहि
होना है और अगर आप
गलत है तो गुस्सा करने
का तुम्हे कोई हक नहि है ।
गुस्सा जैसे जलता हुआ
कोयला तुम्हारे हाथ में
पहेले तुम भी जलोगे और
जिस पर गुस्सा होगे वो
भी जलेगा जिसे किस का
भी कल्याण नहि होते, तो
क्यूँ गुस्सा करना चाहिए ।
ज्यादा जानकारी के लिए
पढीए गुस्सा का विज्ञान-2 क्रमशः
विनोद आनंद 16/08/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1617 बदनामी बरबादी और बेईज्जती

बदनामी बरबादी और
बेईज्जती तीनों जिंदगी कि
श्याम है, फिर आबादी का
सूरज कब निकलेगा कह
नहि शकते ।
निराशा तनाव चिंता और
डीप्रेशन का माहोल बनता ।
अगर कोई सहारा या संत
न मिलेतो आत्महत्या का
रास्ता खुल जाता है ।
एसे हालात में ईश्र्वर पर
विश्वास और श्रध्धा और
भक्ति हि सहारा बनती है ।
एसे हालत में स्वयं पर
विश्वास, हिमत, धीरज, मन
पर संयम या शुमचिंतक का
सहारा हि बदनामी बरबादी
और बेईज्जती के दल दल से
निकाल शकता है वरना अंत
आत्महत्या से होता है ।
सावधान, पहेले एसी आदतें,
दुर्णगें, खराब भावनाएँ और
खराब स्वभाव का निर्माण
न करे जो बदनामी बरबादी
और बेईज्जती का रास्ता है ।
अनैतिकता, अप्रमाणिकता का
रास्ता भी बदनामी बरबादी
और बेईज्जती का रास्ता है ।
बस फक्त एसा माहोल बनने से
पहेले रास्ता बददो, जो आबादी,
सुख शांति और समृध्धि कि
ओर जाता हो । कैसा भी
हालत हो जाए, आत्महत्या
का कभी दिल दिमाग में
खयाल भी मत लाना ।
एसे हालात खुद कि भूल और
कर्मो का नतीजा है उसे हमे
हि सुधारना है । तैयार रहो ।
विनोद आनंद 01/06/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1596 प्रेम सच्चा या झूठा ?-2

सच्चे- झूठे प्रेम कि निशानीयाँ….
* सच्चे प्रेम में एक दूसरे का मान
सन्मान होता है और झूठे प्रेम में
एक दूसरे कि ईज्जत हि नहि करते ।
* सच्चा प्रेम सुरक्षा देता है, बचाव
करता है, झूठा प्रेम दिल दुखाता
और तोड देता है ।
* सच्चा प्रेम समझ से भरा होता है,
झूठा प्रेम मूर्खता से भरा होते है ।
* सच्चे प्रेम में बस विश्र्वास होता है,
झूठे प्रेम में शंकाए उठती रहती है ।
* सच्चा प्रेम वफादार रहेता है और
जूठा प्रेम धोखे से भरा रहेता है ।
* सच्चे प्रेम में उमीद नज़र आती है,
झूठे प्रेम उमीद नहि दिखाई देती ।
* सच्चे में खुद से प्रेम हो जाता है,
झूठे प्रेम में खुद से नफरत होती है ।
* सच्चे में सभी रीश्ते निखर जाते है,
झूठे प्रेम में रिश्ते बीगते जाते है ।
* सच्चा प्रेम हमेंशा बना रहेता है,
झूठा प्रेम लंबा नहि टिकता ।
सच्चे प्यार से स्वर्ग का निर्माण
और झूठे प्रेम से नर्क का निर्माण
होता है । प्रेम आत्मा परमात्मा का
असली स्वाभाव है । प्रेम से जिओ ।
विनोद आनंद 14/05/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1595 प्रेम सच्चा या झूठा ?-1

प्यार सच्चा या झूठा ?
लोग आसानी से कहते है,
कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ ।
सच्चे प्यार कि निशानीयाँ…..
* सच्चा प्रेम समर्पीत रहेता है,
झूठा अपने बारे में सोचता है ।
* सच्चा प्रेम सच्च बोलता है,
झूठा प्रेम झूठ के अंधकार में
रहेता, झूठ हि बोलता रहेता है ।
* सच्चे प्रेम में दया और करूणा
होती है वो आप के साथ गलत
व्यवहार कर हि नहि शकता ।
झूठा प्यार निर्दई होता है उसे
आप कि परवाह हि नहि होती ।
* सच्चा प्रेम सहन कर लेता है
झूठे प्रेम में सहन करने कि
ताकात हि नहि होती, शोर्ट
टेम्पर रहेता है ।
* सच्चा प्रेम हमेंशा झुकने को
तैयार रहेता है, झूठा प्रेम सिर्फ
अहंकार से भरा रहेता है ।
* सच्चा प्यार आप को प्रेम से
भर देता है और झूठा प्रेम आप
को प्रेम से वंछित रखता है ।
* सच्चे प्रेम में सिर्फ आनंद हि
आनंद होता है झूठे प्रेम में
सिर्फ कडवाहट होती है ।
* सच्चा प्रेम खुली किताब है
कुछ छूपाया नहि जाता, झूठे
प्रेम में सब छूपाया जाता है ।
ओर भी है निशानीयाँ पढो
प्रेम झूठा या सच्चा ? -2
विनोद आनंद 12/05/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1516 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-85

🌻 पसंदगी
स्वर्ग का स्वप्न छोड दे
नर्क का डर छोड दे
बूरे स्वभाव को छोड कर
अच्छे स्वभाव से स्वर्ग
बनाने का स्वप्ना देखे ।
तो नर्क का डर भाग
जाएगा । स्वर्ग यही है
और नर्क भी यही है ।
पसंदगी आप कि है
क्या बनाना है ?
🌺शुकून
जिंदगी में शुकून चाहिए तो
अपनों कि बातों को दिल से
मत लगाओ जो कुछ कहेना है वो
हसके के कहेना आवेश नहीं ।
अपनों को अपना समजना
और विश्वास रखना, न करना
शिकायत, न देना अवसर
शिकायत का तो मिलेगा शुकून ।
🌹 समजदार
कोई भी चिज़ कि किंमत उसे
पूछो जिस के पास वो चिज़
बहुत हि कम है या नहिं है ।
कोई भी चिज़ किंमत उसे
नहि है जिस के पास बहुत है ।
ईन्सान वो हि समजदार है
जो हर एक चिज़ कि सही
किंमत समजे, चिज़े चाहे कम
हो या ज्यादा या चिज़े न हो ।
विनोद आनंद 03/03/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड