1043 शादी के बाद क्या करना है ?

शादी के बाद गृहस्थ जीवन
और परीवार के साथ रहकर
दाम्पत्य जीवन जीना है ।
पति और सभी के लिए सिर्फ
बहु को जानकर, समजकर
व्यवहार करना है ।
बहु को सब को जानकर और
समजकर व्यवहार करना है ।
परिवार में सभी परीचित है,
बहु के लिए सभी अपरीचि है ।
शादी के बाद सब कि जिम्मेदारी
है कि सभी एक दूसरे के स्वभाव
अनुकूल और मर्यदा में रहकर
व्यवहार करना जरूरी समजे ।
मतलब पहेले सब को अपना
कर्तव्य और अपनी मर्यादा को
जानना जरूरी है न किसी पे
हक या धाक जमाना है ।
शादी के बाद पहेले एक दूसरे
का स्वभाव, पसंद और ईच्छा
जानना कर एक दूजे के
साथ ताल मेल बीठाना है ।
जिसे किसी का न हो अपमान,
न कोई हो नाराज और गुस्सा ।
नया महेमान आया है उस का
प्रेम से स्वागत करना है, उसे
सब के साथ एडजेस्ट होने के
लिए थोडा समय देना है ।
सब का एक ही लक्ष्य हो
घर मे सुख शांति बनी रहे ।
फिर घर को मंदिर बनेगा ।
सब को सब्र रखना है और
बरदास्त करना शीखना है तो
घर मंदिर से स्वर्ग बन जाएगा ।
विनोद आनंद 20/01/2018
फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड

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1036 क्रोधाग्नि

क्रोधो अग्नि स्वरुप जलावे 

तन,मन,दिल और बिगेडे रिश्तें ।

जो करे क्रोध वो कैसे प्रिय बने ?

जब क्रोध ही स्वभाव बने तो 

कैसे बचगो बिमारीयों से ।

क्रोध नर्क का द्वार घर को

स्वर्ग और कैसे जीवन सुखी  

शांत कैसे बनाओगे सोचो !

क्रोध से मुक्ति पानेको शांत 

रहने करो संकल्प और क्रोध

नही करने का करो प्रयास ।

मन पर नियंत्रण करो क्रोध

आते जागृत रहो, क्रोध नही

करने कि चेष्ठा करो ।

कोशीश करो कामीयाबी

मिलेगी, क्रोध पर जीत मिलेगी ।

क्रोध को अपनोने स्वीकारा है 

ईसलिए आप क्रोधी बनगए हो ।

क्रोधी नही शांत व्यक्ति बनो ।

क्रोधाग्नि शांत जल से बुझाओे ।

विनोद आनंद                             14/01/2018         फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड 

1006 बुरी और अच्छी आदतें 

बुरी आदतें मुश्केलीयों कि जननी

अच्छी आदतें खुशियों कि जननी ।

बुरी आदतें जलद पड जाती है, 

ज्यादा समय लेती है छोड ने को ।

अच्छी आदतें मुश्केली से पडती है,

जल्द मुश्केलीयों को करती है दूर ।

बुरी आदतें बदनाम करती है 

अच्छी आदतें आबाद करती है ।

बुरी आदतें व्यक्तित्व बीगाडे

अच्छी आदतें व्यक्तित्व निखारे ।

बुरी आदत दूर करने छः हप्ता

अच्छी आदत बनाने को तीन

हप्ते का कम समय लगता है ।

बुरी आदतों को पहले दूर करो 

जीवन में अच्छी आदतें बनाओ

फिर न कोई मुश्केली, न कोई

परेशान बल्कि खुशियाँ ही,

शांति ही, और स्वर्ग का मेहोल ।

हम बुरी आदतों के गुलाम है 

बस थोडी समझ, हिंमत और

धीरज से अच्छी आदतों को

बढाओ और जीवन को महान 

और यादगार बनाओ ।

विनोद आनंद                              15/12/2017       फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

903  जब जब…… 

जब जब सूरज उदय हो

उजाला हि उजाला फैले

जब जब फूल खिले 

खुशबु हि खुशबु फैले

जब जब आए हसी चहरे पे

खुशियाँ हि खुशियाँ फैले ।

जब जब बारिस हो

ठंडा हि ठंडा फैले ।

जब जब संगीत बजे

मस्ती हि मस्ती फैले ।

जब जब मंद हवा चले

ठंडी लहरे हि लहरे फैले

जब जब समुद्र में उठे मौजे

मौज हि मौज फैले।

जब जब प्रेम बरसे

शूगुन हि शूगुन फैले ।

लेकिन, 

जब जब नफरत बरशे

तबाहि तबाहि फैले ।

जब जब छल कपट बरशे

विनाश हि विनाश फैले ।

जब जब गेर समज जन्म ले

गरबरड हि गरबड फैले।

जब जब द्वेष ईर्षा हो

जलन हि जलन फैले ।

जब जब धोखा हो ।

क्लेश हि क्लेश फैले ।

जब जब  ईन्सान ईन्सान बने

स्वर्ग हि स्वर्ग फैले ।

जब जब  ईन्सान शैतान बने

नर्क  हि नर्क फैले ।

स्वर्ग बनाने का सही, 

सरल और सचोट उपाया है 

ईन्सान या सज्जन बने रहो ।

विनोद आनंद                               01/09/2017       फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

897 जिंदगी जंग के स्वर्ग

जिंदगी जंग हम सिपाही ।

रहना है जागृत,चौकना और 

तैयार दुश्मनों से जंग खेलने को ।

अंदर दुश्मन, बहार दुश्मन ।

घर में दुश्मन,समाज में दुश्मन 

जहाँ आँख खोल के देखो

दुश्मन ही दुश्मन देखाई देंगे ।

जिंदगी को जंग बना देते है ।

अंदर के दुश्मन है….. 

काम, क्रोध, लोभ, मोह, 

मद और मत्सर-ईर्ष जो देते है

बहार के दुश्मन को जन्म ।

ईसलिए पहेले जंग खेलकर 

उन पर जीत हासील करनी है ।

फिर न होगा कोई बहारी दुश्मन ।

कैसे खेलेंगे जंग अंदर के दुश्मन से ।

जीवन में दुर्गुणो से मुक्ति, 

बूरी आदतों छूटकारा पाकर

सद् गुणी बनकर अपने 

व्यक्तित्व को निखारना है

सवाँरना है और जिंदगी का

जंग पर जीत हांसल करनी है ।

फिर न होगा कोई दुश्मन ।

सभी होंगे दोस्त फिर जिंदगी 

जंग नही है, जिंदगी स्वर्ग है                                     विनोद आनंद                                24/08/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड 

881 मुक्ति

दिल में  जब प्रेम जागता है

आँखों से प्रेम ही बरसता है, 

सृष्टि प्रेम सभर हो जाती है,  

वोही प्रेम आँखों से सब के 

दिल में उतर जाता है और

दिल में सोये प्रेम को जगता है ।

ईसी तरह यह सिलसिला चलेतो 

ईश्र्वर कृपा से सभी के जीवन में 

प्रेम का मौसम छा जाएगा ।

धरती पर स्वर्ग उतर आए ।

स्वर्ग का निर्माता है प्रेम ।

प्रेम करो,प्रेम बरसाओ और

सब को प्रेमसे भीगोदो, 

तो नफरत, द्रेष, क्रोध और

ईर्षा से मिलेगी मुक्ति ।

विनोद आनंद                                13/08/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

869 पढाई पारसमणी

पढो और आगे बढो, 

बढो और विकास करो ।

पढाई बीना नहीं उध्धार

और नहीं विकास ।

पढाई ज्ञान बढाए, 

ज्ञान सद् बुध्धि बढाए ।

सद् बुध्धि संस्कार बढाए

और मन को करे शिक्षित ।

शिक्षित मन सज्जन बनाए ।

सज्जन स्वर्ग बनाए ।

पढाई पूजा सरस्वती देवी की

और सेवा देश की, उध्धार 

आत्मा का,और निर्वाह जीवन का ।

पढाई बनाए पंडीत कहते है

राजा पूजयते देश में, 

पंडीत सर्वत्र पूजयते ।

पढाई पद और पैसा दिलाए 

ईसलिए पढाई सोने का अंडा 

देनेवाली मुरघी ।

पढाई जीवन का आधार, 

जीवन निर्वाह और निर्माण 

का साधन और जीवन साधना ।

पढाई पारसमणी, स्पर्स से

जीवन को बनाए सोना और

सुख शांति का धाम ।

विनोद आनंद                                06/08/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड