1855 सोच से सृष्टि का निर्माण

सोच से संकल्प बनता है ।
संकल्प से सृष्टि बनती है ,
सोच से सहेद बनता है ।
सोच से कर्म बनते है और
कर्म से किस्मत बनती है
सोच से माहोल बनता है ।
सोच ही सब कुछ है तो
गलत सोच ने कि भूल
करने कि हिंमत क्यू करे ?
हर एक ईन्सान कि बूरी
सोच वातावरण को दूषित
करती है और वो हि दूषित
वातावरण ईन्सान कि
सोच को बूरी कर देती है ।
यही सिलसीला नर्क जैसी
सृष्टि का निर्माण करती है,
जिस के जिम्मेदार हम है ।
हर शख्स अच्छा सोचे तो
माहोल अच्छा बनता है
और सृष्टि स्वर्ग बनेगी ।
अच्छा सोचना समझदारी
है, बूरा सोचना बेवकूफि ।
अच्छी सोच, अच्छे संकल्प,
अच्छे कर्म सिर्फ तुम्हारी हि
किस्मत नहि लिखती, सृष्टि
कि भी किस्मत लिखती है ।
अब सोचो,आप कैसा सोचोगे
अच्छा या बूरा, सहि या गलत ?
विनोद आनंद 11/01/2020
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1841 स्वर्ग-नर्क कहाँ

स्वर्ग-नर्क सिर्फ मरने के बाद
हि नहि, जीतेजी भी स्वर्ग नर्क
का अहेसास होता है ।आप
स्वर्ग में जीते है या नर्क में ?
आप दुःखी-निराश हो तो
आप नर्क में जीते हो ।
आप खुश-आनंदित हो तो
आप स्वर्ग में जीते हो ।
आप नफरत-ईर्षा में जीते हो
तो आप नर्क में जीते हो ।
आप प्रेम-करूणा में जीते हो
तो आप स्वर्ग में जीते हो ।
आप लोभ-लालच में जीते हो
तो आप नर्क में जीते हो ।
आप संतोष में जीते हो तो
आप स्वर्ग में जीते हो ।
आप स्वार्थ के नसे में जीते
हो तोआप नर्क में जीते हो ।
आप निःस्वार्थ जीते हो तो
आप स्वर्ग में जीते हो ।
आप राग द्रेष में जीते हो तो
आप नर्क में जीते हो ।
आप अनासक्त भाव में जीते
हो तो आप स्वर्ग में जीते हो ।
आप झगडे झगडे जीते हो
तो आप नर्क में जीते हो ।
आप शांति-समाधान में जीते
हो तो आप स्वर्ग में जीते हो ।
आप एसो आराम में जीत हो
तो आप नर्क में जीते हो ।
आप कर्मयोगी बनके जीते
हो तो आप स्वर्ग में जीते हो ।
आप दुर्गुणों के साथ जीत हो
तो आप नर्क में जीते हो ।
आप सदगुणों के साथ जीते
हो, तो आप स्वर्ग में जीते हो ।
स्वर्ग यहाँ नर्क यहाँ उस के
सिवा जाना कहा, तुम चाहो
एसा जीवन बना शकता हो ।
स्वर्ग हि यहाँ है,नर्क हि यहाँ है ।
विनोद आनंद 31/12/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1716 असली स्वभाव

मनुष्य का असली स्वभाव
क्या है ? जानना जरूरी है ।
आत्मा का स्वभाव हि मनुष्य
का असली स्वभाव होना है ।
लेकिन वो कुछ ओर होता है ।
आत्मा का स्वभाव है प्रेम, तो
मनुष्य का स्वभाव प्रेम हि है ।
मगर द्वेष, ईर्षा और नफरत में
तबदिल हो गया है ।
आत्मा का स्वभाव है शांति तो,
मनुष्य का स्वभाव हि है शांति ।
मनुष्य गुस्सा करेके अशांत है ।
आत्मा का स्वभाव है पवित्रता
तो मनुष्य का दिल साफ और
मन पवित्र होना चाहिए, मगर
मन मैला दिल भावना हिन है ।
आत्मा का स्वभाव है दयालु,
तो मनुष्य का स्वभाव दयालु है
मगर कठोर और दयाहिन है ।
आत्मा का स्वभाव है आनंद,तो
मनुष्य का स्वभाव भी आनंद है,
मगर मनुष्य, दुःखी, उदास और
निराश रहेता है ।
आत्मा ज्ञानी और शक्तिशाली है
मगर मनुष्य अज्ञानी, कमजोर है
क्यूँकि स्वभाव बदल गया है,
और ज्ञान और शक्ति का सहि
उपयोग नहि करता ।
हमे अपना असली स्वभाव प्राप्त
करके धरती को स्वर्ग बनाना है ।
विनोद आनंद 04/09/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1689 नासमज

नादान, नासमज, मूर्ख, अल्प
बुध्धि वो है, जो समजते नहि ।
समजना नहि चाहते, वो मद
बुध्धि है या तो है अहंकारी ।
नासमज वो है जो अज्ञानी है
या ज्ञान है फिर भी अपनी
जिद्द या मनमानी कि वज़ह से
समजना नहि चाहे ईसलिए
परिवार में मत भेद, गेर समज
होने से रिश्तें कमजोर होते है ।
घरमें क्लेश तकरार का माहोल
बन जाता है और घर नर्क बन
जाता है ईसलीए नासमज रिश्तें
टूटने का जरिया बन जाती है ।
परिवार में एक दूसरों कि बातें,
भावनाए, तकलीफे समजना है ।
अपनी जिद्द और अहंकार को
टोडना होगा नहि तो रिश्तें टूटेगें
रिश्तों के सिवा परिवार कैसा
होगा ? जीवन कैसा होगा ? सोचो
समजदारी रिश्तोंको निखारती है ।
परीवार में एक दूसरों को समजना
सहन करना, प्रेम करना, सहयोग
करना, सेवा करने कि भावना से
परिवार स्वर्ग और घर बनेगा मंदिर ।
नासमज व्यक्ति दुश्मन परिवार का
और समजदार दोस्त परिवार का ।
समजदारी एक दिव्य सदगुण ।
नासमज एक शैतान का दुर्गुण ।
समजने वाले समज गए, जो न समजे
वो अनाडी है या शैतान से कम नहि ।
विनोद आनंद 07/08/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1596 प्रेम सच्चा या झूठा ?-2

सच्चे- झूठे प्रेम कि निशानीयाँ….
* सच्चे प्रेम में एक दूसरे का मान
सन्मान होता है और झूठे प्रेम में
एक दूसरे कि ईज्जत हि नहि करते ।
* सच्चा प्रेम सुरक्षा देता है, बचाव
करता है, झूठा प्रेम दिल दुखाता
और तोड देता है ।
* सच्चा प्रेम समझ से भरा होता है,
झूठा प्रेम मूर्खता से भरा होते है ।
* सच्चे प्रेम में बस विश्र्वास होता है,
झूठे प्रेम में शंकाए उठती रहती है ।
* सच्चा प्रेम वफादार रहेता है और
जूठा प्रेम धोखे से भरा रहेता है ।
* सच्चे प्रेम में उमीद नज़र आती है,
झूठे प्रेम उमीद नहि दिखाई देती ।
* सच्चे में खुद से प्रेम हो जाता है,
झूठे प्रेम में खुद से नफरत होती है ।
* सच्चे में सभी रीश्ते निखर जाते है,
झूठे प्रेम में रिश्ते बीगते जाते है ।
* सच्चा प्रेम हमेंशा बना रहेता है,
झूठा प्रेम लंबा नहि टिकता ।
सच्चे प्यार से स्वर्ग का निर्माण
और झूठे प्रेम से नर्क का निर्माण
होता है । प्रेम आत्मा परमात्मा का
असली स्वाभाव है । प्रेम से जिओ ।
विनोद आनंद 14/05/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1595 प्रेम सच्चा या झूठा ?-1

प्यार सच्चा या झूठा ?
लोग आसानी से कहते है,
कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ ।
सच्चे प्यार कि निशानीयाँ…..
* सच्चा प्रेम समर्पीत रहेता है,
झूठा अपने बारे में सोचता है ।
* सच्चा प्रेम सच्च बोलता है,
झूठा प्रेम झूठ के अंधकार में
रहेता, झूठ हि बोलता रहेता है ।
* सच्चे प्रेम में दया और करूणा
होती है वो आप के साथ गलत
व्यवहार कर हि नहि शकता ।
झूठा प्यार निर्दई होता है उसे
आप कि परवाह हि नहि होती ।
* सच्चा प्रेम सहन कर लेता है
झूठे प्रेम में सहन करने कि
ताकात हि नहि होती, शोर्ट
टेम्पर रहेता है ।
* सच्चा प्रेम हमेंशा झुकने को
तैयार रहेता है, झूठा प्रेम सिर्फ
अहंकार से भरा रहेता है ।
* सच्चा प्यार आप को प्रेम से
भर देता है और झूठा प्रेम आप
को प्रेम से वंछित रखता है ।
* सच्चे प्रेम में सिर्फ आनंद हि
आनंद होता है झूठे प्रेम में
सिर्फ कडवाहट होती है ।
* सच्चा प्रेम खुली किताब है
कुछ छूपाया नहि जाता, झूठे
प्रेम में सब छूपाया जाता है ।
ओर भी है निशानीयाँ पढो
प्रेम झूठा या सच्चा ? -2
विनोद आनंद 12/05/2019 फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1516 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-85

🌻 पसंदगी
स्वर्ग का स्वप्न छोड दे
नर्क का डर छोड दे
बूरे स्वभाव को छोड कर
अच्छे स्वभाव से स्वर्ग
बनाने का स्वप्ना देखे ।
तो नर्क का डर भाग
जाएगा । स्वर्ग यही है
और नर्क भी यही है ।
पसंदगी आप कि है
क्या बनाना है ?
🌺शुकून
जिंदगी में शुकून चाहिए तो
अपनों कि बातों को दिल से
मत लगाओ जो कुछ कहेना है वो
हसके के कहेना आवेश नहीं ।
अपनों को अपना समजना
और विश्वास रखना, न करना
शिकायत, न देना अवसर
शिकायत का तो मिलेगा शुकून ।
🌹 समजदार
कोई भी चिज़ कि किंमत उसे
पूछो जिस के पास वो चिज़
बहुत हि कम है या नहिं है ।
कोई भी चिज़ किंमत उसे
नहि है जिस के पास बहुत है ।
ईन्सान वो हि समजदार है
जो हर एक चिज़ कि सही
किंमत समजे, चिज़े चाहे कम
हो या ज्यादा या चिज़े न हो ।
विनोद आनंद 03/03/2019
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड