1407 शादीसुधा स्त्री के लक्षणें

शादीसुदा स्त्री को ससुराल को हि
अपना घर-तीर्थ मानना चाहिए है ।
पियर का लगाव कम करना चाहिए ।
पियर वालों कि प्रशंसा न करे और
ससुराल में किसी कि उपेक्ष न करे ।
ससुराल में सबका मान सन्मान करे,
सब कि पसंद, नापसंद जाने और
उन के स्वभाव अनुसार वर्तन करे ।
ससुराल के भेद किसी को भी न कहे ।
पराये, अनजान और बूरे चरित्रवाले
मर्द से बातचीत न करके बचके रहे ।
अपनी पतिसे ज्यादा दिन दूर न रहे ।
किसी पराये घर में अकेले न रहे ।
शादीसुदा स्त्री को स्वादीष्ट भोजन
बना के खिला के मन जीतना है ।
ससुराल वालों को अपनी ओर से
शादीसुदा स्त्री को अपने कार्य में
साथ सहकार देकर उस का भी
दिल जीतना है ।शादीसुधा स्त्री
चाहेतो घर को स्वर्ग बना शती है ।
अगर यह लक्षणें नहि तो नर्क बनेगा ।
विनोद आनंद 28/11/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

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1365 सुखद परिवर्तन

-बदली बदली नज़र आएगी
दुनिया जब बदलेगी द्रष्टि ।
बदलेगी द्रष्टि तो सोच भी
बदलेगी । सोच बदलेगी तो
बदलेगा व्यवहार वाणी कर्म ।
व्यवहार वाणी कर्म बदले
तो फल बदलेगा ।
फल बदले तो सुख शांति
आएगी, कम हो दुःख ।
द्रष्टि बदले तो सब कुछ
बदले और सब कुछ
बदले तो जीवन बदले ।
सब का जीवन बदले
तो बदली बदली नज़र
आए दुनिया ।
नकारात्मक द्रष्टि से
हकारात्मक द्रष्टि बने तो
आए सुखद परिवर्तन ।
सुखद परिवर्तन बने
स्वर्ग कि सीडी ।
विनोद आनंद 04/11/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1283 कषाई से बचो

जो मनुष्य अपने स्वार्थ, शौख
और दुश्मनी कि खातीर पशु,पक्षी
मनुष्य का कत्ल, शिकार करता
है वो बेरहेम और क्रूर कषाई है ।
उसे न दोस्ती, न दुशमनी अच्छी ।
एसा हि कई कषाई तुम्हारे भीतर
है जो तुम्हे कषाई बना शकते है ।
उसे न रखना, न पालना अच्छा है ।
उसे छूटकारा पाना हि कल्याण है ।
वरना वो जीवन नर्क बना देगा ।
वो कषाई है काम, क्रोध, लोभ मोह,
मद और मत्सर जो तुम्हे ईन्सान से
शैतान या कषाई बनाता है ।
काम विवेक का, क्रोध शांति का
लोभ संतोष का और मद नम्रता का
और मत्सर खुशी कत्ल करता है ।
सभी कषाई सदगुणो का, ईन्सानीत
का कत्ल करता है । उस का तुम खुद
कषाई बनकर कत्ल करदो तो स्वर्ग
का और कल्याण का मार्ग खुलेगा ।
विनोद आनंद 30/08/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1230 शेर शायरीयों का गुलदस्ता 64

🌷चाँदसा चहेरा
चहेरा खुबसुरत है मगर
होंठो पे हसी नही है ।
मन खुबसुरत नही तो
होंठो पे हसी नही ।
मन कि खुबसुरती होंठो
पे हसी लाएगी, तो चाँदसा
चहेरा बिखेरेगा चांदनी ।
🍀स्वर्ग का निर्माण
अच्छा बदलाव से सफल जीवन ।
सफल जीवन से खुस शांति ।
खुस शांति से सार्थक जीवन,
और धरती स्वर्ग का निर्माण ।
🌺 शुक्रिया
बहोत शुक्रिया बडी महेरबानी
महेरबानीयों का शुक्रिया किजिए
और किसी पे महेरबानी किजिए
तो तुम्हे भी कहेगा कोई शुक्रिया ।
शुक्रिया,धन्यवाद,आभार से जीवन
को सुंदर और सुगंधीत बनाओ
विनोद आनंद 09/07/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1144 सकारात्मक अभिगम कैसे बने ?

सकारात्मक अभिगम बनाना है
तो पहेले नकारात्मक अभिगम को
स्वअभ्यास से दूर करने से
सकारात्म अभिगम बनेगा ।
उस के लिए पहले हमे अपनी
वाणी में सकारात्म शब्दो का
ईस्तमाल करना शीखना है ।
मन में सकारात्म भाव को
जगाकर सोच सकारात्म बनानी है ।
अच्छी पुस्तके और सकारात्मक
व्यक्ति का संग करने से मन को
सकारात्मकता का प्रशिक्षण देना है ।
मन पर बहार के बुरे वातावरण का
असर होता है इसलिए अच्छा स्वच्छ
और संस्कारी वातावरण में रहेना है ।
द्दढ नार्णय, प्रयास और कोशिश से
सकारात्मक अभिगम बना शकते है ।
सकारात्मक अभिगम हि सफलता,
खुशी और शांत जीवन कि चाबी है ।
सकारात्मक अभिगम तनाव,चिंता
और निराशा से बचने का उपाय है ।
सकारात्मकता स्वर्ग कि सीडी और
नकारात्मकता नर्क कि सीडी ।
सकारात्मक अभिगम विकास है ।
नकारात्मक अभिगम विनाश है ।
विनोद आनंद 12/04/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1065 अनोखा परिवार

खुसी का परिवार
खुशी कि माँ पवित्रता
और पिता धीरज ।
खुशी का पति विवेक
खुशी कि बेटी हसी
और बेटा आनंद ।
खुशी कि पुत्रवधु
सहनशीलता ।
खुशी का पौत्र देव
और पौत्री देवी ।
खुशी के दोस्त
प्रेम, दया,स्नेह ।
खुशी दादा क्षमा
और दादी नम्रता ।
खुशी के पाडोसी
प्रमाणिकता और
नियमितता ।
खुशी के दुश्मन
काम, क्रोध,लोभ
मोह,मद और ईर्षा ।
खुशी का ठीकाना :
खुशी का घर स्वर्ग
महोल्ला अहिंसा
एरीया शांतिधाम
शहेर परमधाम ।
खुसी का परिवार
सद्गुणो का परिवार
और सुखी परिवार
परिवार के सभ्य हो
सद् गुणी और माहोल हो
अच्छा तो सुखी परिवार ।
सुखी परिवार कि कामना
और प्रयास से धरती पे
स्वर्ग का निर्माण होगा ।
विनोद आनंद 07/02/2018
फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड

1043 शादी के बाद क्या करना है ?

शादी के बाद गृहस्थ जीवन
और परीवार के साथ रहकर
दाम्पत्य जीवन जीना है ।
पति और सभी के लिए सिर्फ
बहु को जानकर, समजकर
व्यवहार करना है ।
बहु को सब को जानकर और
समजकर व्यवहार करना है ।
परिवार में सभी परीचित है,
बहु के लिए सभी अपरीचि है ।
शादी के बाद सब कि जिम्मेदारी
है कि सभी एक दूसरे के स्वभाव
अनुकूल और मर्यदा में रहकर
व्यवहार करना जरूरी समजे ।
मतलब पहेले सब को अपना
कर्तव्य और अपनी मर्यादा को
जानना जरूरी है न किसी पे
हक या धाक जमाना है ।
शादी के बाद पहेले एक दूसरे
का स्वभाव, पसंद और ईच्छा
जानना कर एक दूजे के
साथ ताल मेल बीठाना है ।
जिसे किसी का न हो अपमान,
न कोई हो नाराज और गुस्सा ।
नया महेमान आया है उस का
प्रेम से स्वागत करना है, उसे
सब के साथ एडजेस्ट होने के
लिए थोडा समय देना है ।
सब का एक ही लक्ष्य हो
घर मे सुख शांति बनी रहे ।
फिर घर को मंदिर बनेगा ।
सब को सब्र रखना है और
बरदास्त करना शीखना है तो
घर मंदिर से स्वर्ग बन जाएगा ।
विनोद आनंद 20/01/2018
फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड