903  जब जब…… 

जब जब सूरज उदय हो

उजाला हि उजाला फैले

जब जब फूल खिले 

खुशबु हि खुशबु फैले

जब जब आए हसी चहरे पे

खुशियाँ हि खुशियाँ फैले ।

जब जब बारिस हो

ठंडा हि ठंडा फैले ।

जब जब संगीत बजे

मस्ती हि मस्ती फैले ।

जब जब मंद हवा चले

ठंडी लहरे हि लहरे फैले

जब जब समुद्र में उठे मौजे

मौज हि मौज फैले।

जब जब प्रेम बरसे

शूगुन हि शूगुन फैले ।

लेकिन, 

जब जब नफरत बरशे

तबाहि तबाहि फैले ।

जब जब छल कपट बरशे

विनाश हि विनाश फैले ।

जब जब गेर समज जन्म ले

गरबरड हि गरबड फैले।

जब जब द्वेष ईर्षा हो

जलन हि जलन फैले ।

जब जब धोखा हो ।

क्लेश हि क्लेश फैले ।

जब जब  ईन्सान ईन्सान बने

स्वर्ग हि स्वर्ग फैले ।

जब जब  ईन्सान शैतान बने

नर्क  हि नर्क फैले ।

स्वर्ग बनाने का सही, 

सरल और सचोट उपाया है 

ईन्सान या सज्जन बने रहो ।

विनोद आनंद                               01/09/2017       फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

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897 जिंदगी जंग के स्वर्ग

जिंदगी जंग हम सिपाही ।

रहना है जागृत,चौकना और 

तैयार दुश्मनों से जंग खेलने को ।

अंदर दुश्मन, बहार दुश्मन ।

घर में दुश्मन,समाज में दुश्मन 

जहाँ आँख खोल के देखो

दुश्मन ही दुश्मन देखाई देंगे ।

जिंदगी को जंग बना देते है ।

अंदर के दुश्मन है….. 

काम, क्रोध, लोभ, मोह, 

मद और मत्सर-ईर्ष जो देते है

बहार के दुश्मन को जन्म ।

ईसलिए पहेले जंग खेलकर 

उन पर जीत हासील करनी है ।

फिर न होगा कोई बहारी दुश्मन ।

कैसे खेलेंगे जंग अंदर के दुश्मन से ।

जीवन में दुर्गुणो से मुक्ति, 

बूरी आदतों छूटकारा पाकर

सद् गुणी बनकर अपने 

व्यक्तित्व को निखारना है

सवाँरना है और जिंदगी का

जंग पर जीत हांसल करनी है ।

फिर न होगा कोई दुश्मन ।

सभी होंगे दोस्त फिर जिंदगी 

जंग नही है, जिंदगी स्वर्ग है                                     विनोद आनंद                                24/08/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड 

881 मुक्ति

दिल में  जब प्रेम जागता है

आँखों से प्रेम ही बरसता है, 

सृष्टि प्रेम सभर हो जाती है,  

वोही प्रेम आँखों से सब के 

दिल में उतर जाता है और

दिल में सोये प्रेम को जगता है ।

ईसी तरह यह सिलसिला चलेतो 

ईश्र्वर कृपा से सभी के जीवन में 

प्रेम का मौसम छा जाएगा ।

धरती पर स्वर्ग उतर आए ।

स्वर्ग का निर्माता है प्रेम ।

प्रेम करो,प्रेम बरसाओ और

सब को प्रेमसे भीगोदो, 

तो नफरत, द्रेष, क्रोध और

ईर्षा से मिलेगी मुक्ति ।

विनोद आनंद                                13/08/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

869 पढाई पारसमणी

पढो और आगे बढो, 

बढो और विकास करो ।

पढाई बीना नहीं उध्धार

और नहीं विकास ।

पढाई ज्ञान बढाए, 

ज्ञान सद् बुध्धि बढाए ।

सद् बुध्धि संस्कार बढाए

और मन को करे शिक्षित ।

शिक्षित मन सज्जन बनाए ।

सज्जन स्वर्ग बनाए ।

पढाई पूजा सरस्वती देवी की

और सेवा देश की, उध्धार 

आत्मा का,और निर्वाह जीवन का ।

पढाई बनाए पंडीत कहते है

राजा पूजयते देश में, 

पंडीत सर्वत्र पूजयते ।

पढाई पद और पैसा दिलाए 

ईसलिए पढाई सोने का अंडा 

देनेवाली मुरघी ।

पढाई जीवन का आधार, 

जीवन निर्वाह और निर्माण 

का साधन और जीवन साधना ।

पढाई पारसमणी, स्पर्स से

जीवन को बनाए सोना और

सुख शांति का धाम ।

विनोद आनंद                                06/08/2017     फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

853 💐 शेर शायरीयों का गुलदस्ता-37

💞 स्वर्ग भी बसेगा 

माया का पर्दा खुलेगा तो 

ईश्र्वर का दर्शन भी होगा ।

दर्शन भी होगा दिल भी मिलेगा ।

दिल भी मिलेगा तो प्रेम भी बरसेगा ।

प्रेम भी बरसेगा तो दिल भी खिलेगा ।

दिल भी खिलेगा तो खूशबु भी फैलेगी ।

खूशबु भी फैलेगी तो माहोल महेंकेगा ।

माहोल महेंकेगा तो धरती, 

पर स्वर्ग भी बसेगा ।

👪 संबंध को समझो 

प्रेम से संबंध खिलते है, 

नफरत से मुरझाते है ।

सेवा से संबंध बढते है

स्वार्थ से संबंध घटते है ।

प्रशंसा से संबंध कायम रहेते है ।

निंदा से संबंध हंगामी रहते है ।

समर्पण से संबंध मजबूत बनते है

हक छीनने से संबंध मरते है ।

मीठे वचन सही व्यवहार से, 

संबंध शाश्र्वत बनने है ।

कटु वचन, गलत व्यवहार से, 

संबंध टूटते है ।

मिलते जुलते रहनेसे, 

संबंध निखरता है ।

ताल मेल मिलाते  रहोगे, 

तो संबंध सँवरता है ।

संबंध को समजो, 

तो जीवन सँवरेंगा ।

💝 आप निर्देशक हो

मन शुध्ध है तो स्वर्ग,  

मन अशुध्ध है तो नर्क  ।

मन पवित्र है तो स्वर्ग ,  

मन अपवित्र है तो नर्क  ।

मन सकारात्मता है तो स्वर्ग , 

मन नकारात्मता है तो नर्क  ।

मन शांत तो है तो स्वर्ग

मन अशांत है तो नर्क है ।

मन संत हो तो स्वर्ग, 

मन शैतन है तो नर्क ।

मन ही निर्माता है 

स्वर्ग या नर्क का ।

आप निर्देशक है ।

क्या चाहते हो स्वर्ग या नर्क ? 
विनोद आनंद                                20/07/2017

फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

822 साडी में  नारी लगती है लक्ष्मी

साडी में नारी संस्कृति का प्रतिक,  

शादीसुधा नारी का पहेरवेश साडी ।

घुंघटमें नारी है एक आदर्श बहु, 

घर कि बहु साडीमें, बेटी सुरवाल कुरतेमें, 

है अलग पहेचान, है भारतीय संस्कृति

साडी में नारी सौंदर्य कि देवी,  

मर्यादा, शर्म और लज्जाका सन्मान ।

साडीमें नारी भारतीय संस्कृति कि आत्मा. 

संयम, शालीनता, नम्रता, विनय

जैसे सद् गुणो का गुलदस्ता ।

साडीमें नारी प्रवित्रता-पतिव्रता का प्रतिक ।

दिव्यता,सेवा सर्मपर्ण, मातृत्व सहीत

लक्ष्मी जैसा अवतार  है पूजनीय ।

साडीमें नारी सुरक्षित बूरी नज़रों से ।

उपजे मान सन्मान लक्ष्मी के अवतार का ।

कहाँ  है एसी नारि, पुत्रबधु साडी में सज्ज, 

फेशन के बज़ार मे बेच दी है संस्कृति ।

भूल गई है नारी स्त्रीयत्व, गौरव और गरिमा, 

और नही है खयाल समाज कि मर्यादा का ।

नारि को धर्मपत्नि कहा है लेकिन वो अपनी

मर्यादा और जिम्मेदारी भूल गई है और

फेशन परेड में अव्ल आने कि ख्वाईस में 

अपनी संस्कारी भारतीय प्रतिव्रता और

धर्मपत्नि का परिचय-ओळख गँवा रही है ।

साडी में शादीसुधा भारती नारी 

भारतीय संस्कृति कि है शान शौकत ।

धरती पे स्वर्ग ला शकती है भारतीय 

आर्दश लक्ष्मी स्वरूप नारी अगर चाहे ।

विनोद आनंद                                24/06/2017    फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

701 जीना शीखलो

जीना शीखलो,तो जीना आजए ।

जीना आजाए तो,हसना आजाए ।

हसना आजाए तो,खुश रहेना आजाए ।

खुश रहेना आजाए,तो शांत रहेना आजाए ।

शांत रहेना आजाए तो,जीना आजाए ।

जीना शीख लिया तो, सब शीख लिया ।

सब शीख ने बाद भी,जीना न आया 

तो जो भी शीखा, वो सब है बेकार ।

क्यूंकि शीखने का उदेश्य ही ह,जीना आजाए ।

जीना आजाए तो,जीना आसान हो जाए

जीना आसान तो,जीवन सरळ, सहज, हो जाए ।

जीवन सरळ, सहज, हो जाए तो,जीवन 

सफल,सार्थक और महान हो जाए ।

बस जीना शीखलो तो, धरा स्वर्ग बन जाए । 

धरा स्वर्ग बनजाए तो, समज लेना कि 

हमे जीना शीख लिया और जीना आ गया ।

विनोद आनंद                         18/03/2017   फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड