1283 कषाई से बचो

जो मनुष्य अपने स्वार्थ, शौख
और दुश्मनी कि खातीर पशु,पक्षी
मनुष्य का कत्ल, शिकार करता
है वो बेरहेम और क्रूर कषाई है ।
उसे न दोस्ती, न दुशमनी अच्छी ।
एसा हि कई कषाई तुम्हारे भीतर
है जो तुम्हे कषाई बना शकते है ।
उसे न रखना, न पालना अच्छा है ।
उसे छूटकारा पाना हि कल्याण है ।
वरना वो जीवन नर्क बना देगा ।
वो कषाई है काम, क्रोध, लोभ मोह,
मद और मत्सर जो तुम्हे ईन्सान से
शैतान या कषाई बनाता है ।
काम विवेक का, क्रोध शांति का
लोभ संतोष का और मद नम्रता का
और मत्सर खुशी कत्ल करता है ।
सभी कषाई सदगुणो का, ईन्सानीत
का कत्ल करता है । उस का तुम खुद
कषाई बनकर कत्ल करदो तो स्वर्ग
का और कल्याण का मार्ग खुलेगा ।
विनोद आनंद 30/08/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

Advertisements

1230 शेर शायरीयों का गुलदस्ता 64

🌷चाँदसा चहेरा
चहेरा खुबसुरत है मगर
होंठो पे हसी नही है ।
मन खुबसुरत नही तो
होंठो पे हसी नही ।
मन कि खुबसुरती होंठो
पे हसी लाएगी, तो चाँदसा
चहेरा बिखेरेगा चांदनी ।
🍀स्वर्ग का निर्माण
अच्छा बदलाव से सफल जीवन ।
सफल जीवन से खुस शांति ।
खुस शांति से सार्थक जीवन,
और धरती स्वर्ग का निर्माण ।
🌺 शुक्रिया
बहोत शुक्रिया बडी महेरबानी
महेरबानीयों का शुक्रिया किजिए
और किसी पे महेरबानी किजिए
तो तुम्हे भी कहेगा कोई शुक्रिया ।
शुक्रिया,धन्यवाद,आभार से जीवन
को सुंदर और सुगंधीत बनाओ
विनोद आनंद 09/07/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1144 सकारात्मक अभिगम कैसे बने ?

सकारात्मक अभिगम बनाना है
तो पहेले नकारात्मक अभिगम को
स्वअभ्यास से दूर करने से
सकारात्म अभिगम बनेगा ।
उस के लिए पहले हमे अपनी
वाणी में सकारात्म शब्दो का
ईस्तमाल करना शीखना है ।
मन में सकारात्म भाव को
जगाकर सोच सकारात्म बनानी है ।
अच्छी पुस्तके और सकारात्मक
व्यक्ति का संग करने से मन को
सकारात्मकता का प्रशिक्षण देना है ।
मन पर बहार के बुरे वातावरण का
असर होता है इसलिए अच्छा स्वच्छ
और संस्कारी वातावरण में रहेना है ।
द्दढ नार्णय, प्रयास और कोशिश से
सकारात्मक अभिगम बना शकते है ।
सकारात्मक अभिगम हि सफलता,
खुशी और शांत जीवन कि चाबी है ।
सकारात्मक अभिगम तनाव,चिंता
और निराशा से बचने का उपाय है ।
सकारात्मकता स्वर्ग कि सीडी और
नकारात्मकता नर्क कि सीडी ।
सकारात्मक अभिगम विकास है ।
नकारात्मक अभिगम विनाश है ।
विनोद आनंद 12/04/2018
फ्रेन्ड,फिलोसोफर,गाईड

1065 अनोखा परिवार

खुसी का परिवार
खुशी कि माँ पवित्रता
और पिता धीरज ।
खुशी का पति विवेक
खुशी कि बेटी हसी
और बेटा आनंद ।
खुशी कि पुत्रवधु
सहनशीलता ।
खुशी का पौत्र देव
और पौत्री देवी ।
खुशी के दोस्त
प्रेम, दया,स्नेह ।
खुशी दादा क्षमा
और दादी नम्रता ।
खुशी के पाडोसी
प्रमाणिकता और
नियमितता ।
खुशी के दुश्मन
काम, क्रोध,लोभ
मोह,मद और ईर्षा ।
खुशी का ठीकाना :
खुशी का घर स्वर्ग
महोल्ला अहिंसा
एरीया शांतिधाम
शहेर परमधाम ।
खुसी का परिवार
सद्गुणो का परिवार
और सुखी परिवार
परिवार के सभ्य हो
सद् गुणी और माहोल हो
अच्छा तो सुखी परिवार ।
सुखी परिवार कि कामना
और प्रयास से धरती पे
स्वर्ग का निर्माण होगा ।
विनोद आनंद 07/02/2018
फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड

1043 शादी के बाद क्या करना है ?

शादी के बाद गृहस्थ जीवन
और परीवार के साथ रहकर
दाम्पत्य जीवन जीना है ।
पति और सभी के लिए सिर्फ
बहु को जानकर, समजकर
व्यवहार करना है ।
बहु को सब को जानकर और
समजकर व्यवहार करना है ।
परिवार में सभी परीचित है,
बहु के लिए सभी अपरीचि है ।
शादी के बाद सब कि जिम्मेदारी
है कि सभी एक दूसरे के स्वभाव
अनुकूल और मर्यदा में रहकर
व्यवहार करना जरूरी समजे ।
मतलब पहेले सब को अपना
कर्तव्य और अपनी मर्यादा को
जानना जरूरी है न किसी पे
हक या धाक जमाना है ।
शादी के बाद पहेले एक दूसरे
का स्वभाव, पसंद और ईच्छा
जानना कर एक दूजे के
साथ ताल मेल बीठाना है ।
जिसे किसी का न हो अपमान,
न कोई हो नाराज और गुस्सा ।
नया महेमान आया है उस का
प्रेम से स्वागत करना है, उसे
सब के साथ एडजेस्ट होने के
लिए थोडा समय देना है ।
सब का एक ही लक्ष्य हो
घर मे सुख शांति बनी रहे ।
फिर घर को मंदिर बनेगा ।
सब को सब्र रखना है और
बरदास्त करना शीखना है तो
घर मंदिर से स्वर्ग बन जाएगा ।
विनोद आनंद 20/01/2018
फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड

1036 क्रोधाग्नि

क्रोधो अग्नि स्वरुप जलावे 

तन,मन,दिल और बिगेडे रिश्तें ।

जो करे क्रोध वो कैसे प्रिय बने ?

जब क्रोध ही स्वभाव बने तो 

कैसे बचगो बिमारीयों से ।

क्रोध नर्क का द्वार घर को

स्वर्ग और कैसे जीवन सुखी  

शांत कैसे बनाओगे सोचो !

क्रोध से मुक्ति पानेको शांत 

रहने करो संकल्प और क्रोध

नही करने का करो प्रयास ।

मन पर नियंत्रण करो क्रोध

आते जागृत रहो, क्रोध नही

करने कि चेष्ठा करो ।

कोशीश करो कामीयाबी

मिलेगी, क्रोध पर जीत मिलेगी ।

क्रोध को अपनोने स्वीकारा है 

ईसलिए आप क्रोधी बनगए हो ।

क्रोधी नही शांत व्यक्ति बनो ।

क्रोधाग्नि शांत जल से बुझाओे ।

विनोद आनंद                             14/01/2018         फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड 

1006 बुरी और अच्छी आदतें 

बुरी आदतें मुश्केलीयों कि जननी

अच्छी आदतें खुशियों कि जननी ।

बुरी आदतें जलद पड जाती है, 

ज्यादा समय लेती है छोड ने को ।

अच्छी आदतें मुश्केली से पडती है,

जल्द मुश्केलीयों को करती है दूर ।

बुरी आदतें बदनाम करती है 

अच्छी आदतें आबाद करती है ।

बुरी आदतें व्यक्तित्व बीगाडे

अच्छी आदतें व्यक्तित्व निखारे ।

बुरी आदत दूर करने छः हप्ता

अच्छी आदत बनाने को तीन

हप्ते का कम समय लगता है ।

बुरी आदतों को पहले दूर करो 

जीवन में अच्छी आदतें बनाओ

फिर न कोई मुश्केली, न कोई

परेशान बल्कि खुशियाँ ही,

शांति ही, और स्वर्ग का मेहोल ।

हम बुरी आदतों के गुलाम है 

बस थोडी समझ, हिंमत और

धीरज से अच्छी आदतों को

बढाओ और जीवन को महान 

और यादगार बनाओ ।

विनोद आनंद                              15/12/2017       फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड