छोटी बातें-गेरसमज़

​छोटी छोटी छोटी बातें 

और छोटी गेरसमज़, 

बडी समस्या का बीज ।

उस पर बेध्यान होने से

बडी हो जाएगी समस्या, 

फिर उकेल है मुश्केल ।
छोटी छोटी छोटी बातें 

और छोटी गेरसमज़ ।

पर ध्यान मत दो और

तुरंत समाधान करदो

तो उकेल होगा आसान ।
छोटी छोटी छोटी बातें 

और छोटी गेरसमज़ ।

संबंध में दरार करती है ।

छोटी छोटी बातों पर

समज़ोता संबंध सँवारे ।
छोटी छोटी छोटी बातें 

और छोटी गेरसमज़ से

बचो, मान सन्मान,मर्यादा

और सही  व्यवहार करके ।
अगर गलत बात और 

गेरसमज़ हो जाए तो दूर 

करके माफी मागलो ।

संबंध सँवरते रहेगें ।

सुख शांति बनी रहेगी ।
विनोद आनंद                           18/11/2016

फेंन्ड, फिलोसोफर,गाईड

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क्या मज़ा आता है ?

क्या मज़ा आता है किसी को सताने में,
किसी को परेशान करने में ?
वो तो तब पता चलेगा जब
तुम्हारे साथ कोई एसा करे  ।

क्या मज़ा आता है किसी को
ईन्तज़ार कराने में, धोखा देने में ?
वो तो तब पता चलेगा जब
तुम्हारे साथ कोई एसा करे  ।

क्या मज़ा आता है किसी को दु:ख ने में, 
मजबूरी का फायदा उठाने का ?
वो तो तब पता चलेगा जब
तुम्हारे साथ कोई एसा करे ।

कुदरत का नियम है की
जो आप दोगे वोही पाओगे  ।
जैसा आप पाना चाहते है
वैसा ही देना शीखलो  ।
आप की हर मुराद होगी पूर्ण  ।    
विनोद आनंद                          दिं-26-09-15

महेकाते रहो जीवन की बगीयाँ

जिवन की बगीयाँ में
सद् गुणो के फूल खिलाओ,
खुशी और हसी की खुशबु फैलाओ ।

अच्छे कर्मो के बी बोए
और पुरूषार्थ से
फल सफलता के खिलाओ ।

जिवन की बगीयाँ को
प्रेम और प्रसन्नता के
जल से सिचंना ऐसा की
हंमेशा बसंत खिला रहे ।

ईश्वर पे श्रध्धा, विश्वास
और भक्ति की वर्षा से,
जीवन बगीयाँ ओर
महेकेगी और चहेकेगी ।

ईस तरह जीवन की
बगीयाँ महेकाते रहो ।               विनोद आनंद

चिंतन का विषय

दिल चाहता है प्रेम और सत्य,
चित चाहता हैं श्रध्धा और विश्वास,
बुध्धि चाहती है ज्ञान और विवेक,
मन चाहता है पसंद और प्राप्ति,
इन्द्रियाँ चाहती हैं भोग और विलास,
किस को क्या मिले और कैसे ?
वो चिंतन का विषय हैं ।

इन्द्रियाँ चाहे और मन मेहरबान,
तो इन्द्रियाँ बने भोगी और रोगी,
वो नही हैं मकसद जिवन का ।

अगर मन दिल की सुने,
मन बुद्धि को माने,
इन्द्रियों की बातों मे न आए और
दिल,चित,बुध्धि के सहयोग से,
मन इन्द्रियों पर संयम रखे तो,
इन्द्रियाँ बने कर्मयोगी ।

मन बने मेनेजर,
बुध्धि बने सलाहकार,
दिल और चित बने मालिक,
और इन्द्रियाँ बने कामगार तो
जिवन बने सफल और सुंदर।        विनोद आनंद

शेर शायरी का गुलदस्ता

जिंदगी मज़ाक नही है एक मक़सद हैं,
मक़सद को जिंदगी बनालो ।
जिंदगी मातंग नहीं हैं, उत्सव हैं,
हर दिन को उत्सव बनालों ।

जिंदगी एक खेल है, तुम हो खिलाड़ी,
जीओ खेलदिली से,
हार हो या जीत, करो स्वीकार  ।
जीत में  न हो अहंकार, हार में न हो निराश ।
जिंदगी उमीदों के बल पे जी जाती है,
बेउमीदों के बल से नहीं  ।

अभी अभी मेरे दिल में खयाल आया है की,
खयाल जिंदगी है या जिंदगी खयाल ।
अगर खयाल जिंदगी बन जाए तो,
जिंदगी  यादगार बन जाय ।
अगर जिंदगी खयाल बन जाए तो,
जिंदगी बेमिसाल बन जाए ।
                      
धन्यवाद
फूल खिला है डाली पे, 
मुश्करा के करता है  धन्यवाद माली का ।
तुम भी हो एक फूल,  किसी बगीयाँ का,
न भूलना करना धन्यवाद वाली का ।

पिंजरा
रास आ गया है जिन्हें संसार का पींजरा,
उनके जिन में कोई महान उदेश्य नहीं  होता ।
सब कुछ होता है मगर शुकून नहीं होता,
एसे ईन्सान का कोइ ईतिहास नही  होता ।

तन या मन
दर्पण में देख देख के जो सँवारते है तन को,
वो तो खाक में मिल जाएगा एक दिन ।
साँवेरना है तो मन को सँवारों, 
जो देता है साथ जन्मो जन्म,
और तुम्हे जिंदा रखता है,
मरने के बाद भी ।
                                                   विनोद आनंद

कैसे होगा ?

महोंबत की गलीयों मे,
गाते हैं गीत मतलब के,
तो कैसे होगा बसर ।

जीवन की बगीयाँ में,
उगाते है फूल कांटो के,
कैसे महेकेगी बगीयाँ ।

परमात्मा की दुनियामें
भूले है आत्मा को,
तो कैसे होगा कल्याण ।

सर्वत्र सर्वदा परमात्मा को,
ढूंढते हैं मंदीरों मे,  जो हैं दिलों में,
कहाँ से मिलेगा परमात्मा ।

मानव चोले में बन बैठे है भोगी,
कहाँ से छूटेगे जन्म मरण के फेरों से ।
  लीः विनोद आनंद (  2/4/15 )

उनके लिए नहीं ।

सुबह उनके लिए नहीं होती,
जो सोए हैं निराशा की गोद ।

सफळता उनके लिए नहीं होती,
जो निष्फळता से हार जाते हैं ।

उजाला उनके लिए नहीं,
जो ज्ञाने के दिप नहीं जलाते ।

विकास उनके लिए नहीं होता,
जो विनास का रास्ता  नहीं छोड़ते ।

सुधार उनके लिए नहीं,
जो दूसरों को सुधार ने चले हैं ।

सुखी वो नहीं हो शकते,
जो दूसरों को करते हैं दुःखी ।

शांति उन्हें नहीं मिलती,
जो अशांति का दामन नहीं छोड़ते ।

आनंद उन्हें नहीं मिलता,
जो विनोद आनंद की बातें न समझें ।