857 Control the waste

Waste of any thing

is loss & useless.

Try to control waste

in every field of life.

Waste of the time

is greatest waste.

Minimize the waste

of time by proper

target & planning.

Waste of the food,

money are great loss.

Minimise waste of food

by cooking required

quality of food daily.

In case excess give to

hungry people & animals.

Do not throw such place,

so that It become waste.

In factory also control of

waste of material, money,

time & man power is must.

Try to reuse the wast or

create something best

out of waste to utilise it.

So be conscious and concentrate while 

working for the best

result & less waste,

which is key of success.          Vinod Anand                          25/07/2017 Friend,Philosopher,Guide  

Nature of a man

​Nature of man means

behaviour or reaction 

comes without any effort

is called nature of the man

and become natural. 

Habit of the man become
Nature of the man. 

Behaviour or reaction 

created by perception 

believes and feelings, 

finally create personality

Human’s original nature
is of peace, purity, love

compassion and joy. 

During the life journey
Human has acquired 

Nature like anger, hate, 

jealousy, violence etc.

Man’s main responsibility 
is to reacquire real nature,  

and live happy peaceful 

and divine life. 

Vinod Anand                     28/09/2016   Friend,Philosopher,Guide

​Six Enemies

​Six Enemies of the Man

are the root of all evils. 

They are responsible

to build hell on earth.

Man should know them. 

Uncontrol Luster Desire,

Anger, Avarice, Fascination

Proud-ego, and jealousy are 

six enemies of the Man. 

If they are control make your 

life happy pleasnt and free 

from worries and tension. 

So be aware and careful

about your six enemies. 

Vinod Anand                         30/08/2016 Friend,Philosopher,Guide               

સમાજ સેવા

સમાજમાં ભૌતિકવાદ વકર્યો છે.
સમાજમાં ઔપચારીકતા પ્રસરી છે.
સમાજમાં ધન દૌલત નું પ્રાધાન્ય છે.
સમાજમાં મોજ શોખ નો માહોલ છે.
સમાજ  સ્વાર્થના સકંજામાં છે.
સમાજમાં દેખાદેખી પૂર જોસમાં છે.

સમાજમાં સંબંધ નામના છે.
સમાજમાં પ્રેમ મૂર્છિત છે.
સમાજમાં સદ્ ભાવન ને,
સદ્ આચરણ નો અભાવ છે.
સમાજમાં દયા ને કરૂણા સુતી છે.

સમાજ માણસથી છે
સમાજ માણસ માટે છે
માણસ સમાજ માટે છે.
સમાજ માણસનુ દર્પણ છે.
જેવો માણસ એવો સમાજ
માણસમાં શુભ પરિવર્તન લાવે
સમાજમાં શુભપરિવર્તન.
સ્વસુધાર ઉત્તમ સમાજ સેવા છે.

વિનોદ આનંદ                      30/05/2016
ફ્રેન્ડ,ફીલોસોફર,ગાઇડ.

मर्द कौन ?

मर्द मजबूत काया और निरोगी हो,
मक्कम और शूरवीर हो, वो मर्द है ।
मर्द मुश्किलों का सामना करता हो,
हींमत और साहस से काम करता हो ।
वो मर्द है ।
मर्द शक्तिशाली हो और
उस का सही उपयोग करता हो,
वो मर्द है ।
मर्द हार से न हार जाए,
जीत ने की कोशीश करता हो,
समस्याओं को हल करता हो ।
वो मर्द है ।
मर्द दर्द से न दुखी हो और न मायुस हो ।
मर्द मर्यादा न छोड़े और मर्दानगी निभाता हो ।
दूसरों पर अत्याचार न करात हो ।
वो मर्द है ।
मर्द कि निशानी चहरे पे तेज और मूछ हो
आवाज़ शेर जैसी,आखों में खुमार हो,
फिर भी आवारा नही फरिस्ता हो,
देखते ही पहेचान जाए, वो मर्द है ।

मर्द हो मर्द बनने की कोशीश करो
मुर्दा बनकर जीना भी क्या जीना है ?

विनोद आनंद                             29/04/2016
फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड

आदमी वो, जो,,,,

आदमी वो, जो आबाद रहे और
बरबादी से बच के रहे ।
आदमी वो, जो आनंद में रहे,
उदास और हताश न रहे ।
आदमी वो, जो अहिंसा को अपनाए
और हींसा से दूर रहे ।
आदमी वो, जो अहंकारी न हो,
निर्मल और कोमल बने ।
आदमी वो, जो  आवेश मे न रहे
और हंमेशा शांत रहे ।

आदमी वो, जो असत्य से  बचे
और सत्य को अपनाए ।
आदमी वो, जो अनुशासीत रहे,
शिस्त भंग न करे ।
आदमी वो,जो किसी को अपमानीत न करे
सभी का मान सन्मान करना शीखे ।
आदमी वो, जो असंयमी न रहे
और सयंमी बनने की कोशीश करे ।
आदमी वो, जो आदर्शो को अपनाए
झूठी शान दिखावा न करे ।
आदमी वो, जो संसार से अनासक्त रहे
संसार की मोह माया से बचे ।
आदमी वो, जो अवगुणों को छोडे
और सद् गुणों को अपनाए ।
आदमी वो, जो आत्मा को समजे
और परमात्मा से जूडे रहे ।

हमे आदमी बन के रहेना है
तो हमने ऐसा करना होगा,
वर्ना हम क्या से क्या,
बन जाएगें पता नही ।
आदमी वो, जो आदमी बना रहे ।

विनोद आनंद                            24/04/2016
फ्रेन्ड, फिलोसोफर, गाईड

दूर से देखा तो

दूर से देखा तो जन्टल मेन,
नज़दीक जा के देखा तो
निकाल बेड मेन ।

वो तो दु:र्गुणो का अड्डा, या
गंदी आदतों का शिकार, और
बुरी भावनाओं का सागर निकाल ।
वो तो मजबूर था ।

वो तो मन का गुलाम,
व्यसनो का कैदी, और
वासनाओं का पूतला निकला ।
वो तो अपाहीत था ।

वो तो लोभ लालच में फसा,
शोक, शंका में डुबा,
और तनाव में फसा ।
वो तो लाचार था ।

उनसे लगता था की वो जी रहा है,
लेकिन वो तो जीते जी मर रहा था ।

उनसे लगता था की वो ईन्सान हैं ,
लेकीन वो तो ईन्सान के भेष में
बहुरुपिया था ।                     
🌹🌻🌼🍀🌹
दूर से देखा तो ईन्सान था
नज़दीक जा के देखा तो
बहुरुपिया था  ।

उनसे बात करके देखा तो,
कौन की बानी बोल ने लगा ।
उनसे व्यवहार करके देखा तो,
जानवर की भाँति पेश आया ।
उनसे व्यापार करके देखा तो,
बेईमान नज़र आया ।
उनसे प्रेम करके देखा तो,
धोखेबाज़ नज़र आया ।
उनसे विश्वास करके देखा तो,
विश्वास घात कीया ।
नसीहत दे के  देखा तो,
आग का गोला बन गया ।
मित्र बन के देखा तो,
दुश्मनी निभाई ।
दूर से देखा तो ईन्सान नज़र आया ।
नज़दीक से कभी जानवर या दुश्मन नज़र आया ।
                                              विनोद आनंद